आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी, मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित आगम आधारित प्रवचनमाला में गुरुवार को मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि सामायिक नौवां व्रत है, जबकि पौषध ग्यारहवां व्रत है, इसलिए पौषध में सामायिक नहीं पचखी जा सकती है। सामयिक कभी भी की जा सकती है।
जबकि पौषध चार प्रहर अथवा अहोरात्र का होता है। पौषध सामायिक के पश्चात शुरू होगा। सामायिक की आलोयना अलग होती है और पौषध की आलोयना अलग होती है। पौषध का त्याग अलग है। पौषध अपने आप में स्वतंत्र है। पौषध बिना उपवास के नहीं किया जा सकता, जबकि रात्रि संवर की साधना खा-पीकर भी की जा सकती है।
मुनि रमेश कुमार ने उपस्थित जनमेदिनी को फरमाया – भारत की दो प्राचीन संस्कृतियां रही हैं-वैदिक एवं श्रमण संस्कृति । वेदों में, ईश्वरवादी धारणाओं में जिनका विश्वास है वे वैदिक तथा आत्मा को ही कर्ता-धर्ता मानने वाले आत्मवादी श्रमण संस्कृति के संवाहक होते हैं। लेकिन दोनों में भिन्नता है। मुनिश्री ने नमि राजर्षि की कथा का विस्तार से वर्णन किया। साथ ही कहा कि वैदिक परम्परा में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वाणप्रस्थ तथा संन्यास – इन चारों आश्रमों की व्यवस्था है।
वैदों में गृहस्थ आश्रम को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है क्योंकि गृहस्थाश्रम चारों आश्रमों को आश्रय देता है। जबकि श्रमण संस्कृति की मान्यता है की कोई अज्ञानी गृहस्थ मास-मास की तपस्या करता है और पारने में कुश की नोक पर टिके उतना सा आहार करे तो भी वह सु-आख्यात धर्म यानि चारित्र धर्म की सोलहवी कला को भी प्राप्त नहीं होता । इसलिए श्रमण संस्कृति में त्याग और तप को श्रेष्ठ माना गया है।
मुनि पद्म कुमार जी ने तेरापंथ इतिहास के प्रेरक प्रसंग सुनाये।
*नागपास महाअनुष्ठान शुक्रवार को*
मुनि डाॅ ज्ञानेन्द कुमार जी एवं मुनि रमेश कुमार जी के पावन सान्निध्य में *”नागपास महाअनुष्ठान”* कल दिनांक 15 अगस्त शुक्रवार को प्रात: 09.00बजे आपके शहर गुवाहाटी में पहली बार तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित हो रहा है। इस अनुष्ठान की साधना से कालसर्प दोष , ग्रहों शांति , कुंडली में अशुभ दोष निवारक किया जा सकता है
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में आयोजित नागपाश यंत्र सिद्धि अनुष्ठान का जैन, जैनेत्तर और मारवाडी समाज में बहुत ही उत्साह देखने को मिल रहा है।
इस आशय की जानकारी सभा के प्रचार-प्रसार संयोजक संजय चौरडिय़ा ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में दी।
*संप्रसारक*
*श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गुवाहाटी असम*



