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लोगों को योग-साधना से जोड़ने जैन समाज ने निकाली ध्यान मंगल यात्रा 

 टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन से धूमधाम से निकाली गई यात्रा  Sagevaani.com @रायपुर. उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि जी महाराज साहब चातुर्मास के लिए रायपुर पधारे हैं। नित्य प्रवचन में वे महावीर गाथा के जरिए समाज को सार्थक जीवन जीने की राह दिखा रहे हैं। अर्हम विज्जा शिविर में लोगों को ध्यान और साधना के जरिए पर्सनल, सोशल और प्रोफेशनल लाइफ का मैनेजमेंट भी सीखा रहे हैं। इन शिविर से लोगों को जोड़ने के लिए सोमवार दोपहर 2 बजे टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन से ध्यान मंगल यात्रा निकाली गई। धार्मिक प्रतीक चिन्ह साथ लेकर चल‌ रही समाज की सैकड़ों महिलाएं और पुरुष लोगों से आह्वान कर रहे थे कि जीवन को बेहतर बनाने अर्हम विज्जा के तहत आयोजित शिविर में हिस्सा लें। रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि अर्हम विज्जा का मतलब है परम शक्ति का जागरण। गुरुदेव इन शिविर के जरिए लोगों के भीतर छिपी प्रत...

दु:ख में भी आत्मोन्मुखी रहने वाला होता आत्मार्थी: गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी

★ श्रद्धा रुपी पात्रता की योग्यता बढ़ाने की दी प्रबल प्रेरणा ★ तपस्या, साधना के आधार पर कर्म रुपी कचरों से बने साफ चेन्नई : श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी, चेन्नई में शासनोत्कर्ष वर्षावास में धर्मपरिषद् को संबोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म.सा ने धर्म परिषद् को सम्बोधित करते हुए कहा कि परमात्मा अध्यात्म का संदेश देते है, उसे ग्रहण करने के लिए जरूरी है, 1. पात्र खाली होना चाहिए, 2. साफ होना चाहिए और 3. पात्र में ग्रहण करने की क्षमता भी होनी चाहिए। हमारे भीतर में पात्रता के लिए अन्तर में भरे कषायों से हमारा हृदय मुक्त हो। तपस्या, साधना के आधार पर कर्म रुपी कचरों से साफ करना, भव्य व्यक्ति ही ग्रहण कर जीवन आचरण में ला सकता है। मनुष्य भव साश्वत नहीं है, दुर्लभ है अतः हर समय जागरुकता से पालन करना चाहिए। ह...

आत्मा रूपी मछली कुविकल्प रूपी जालों के द्वारा ही दुर्गति में जाती है: आचार्य उदयप्रभ सूरी

किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने अध्यात्म कल्पद्रुम ग्रंथ के नवें अधिकार चित्त दमन अधिकार की विवेचना करते हुए कहा जीवन के उतार-चढ़ाव, धूप- छांव, संघर्ष- समाधान की केंद्रीय वस्तु चित्त है। लेकिन अपने चित्त के पास दमन करने के लिए विकल्प नहीं है। चित्त, मन और मति तीनों एक अपेक्षा से समान है। मनन करे वह मन, चिंतन करे वह चित्त, मति व मन में लंबा फर्क नहीं है। ज्ञानी कहते हैं आत्मा राजा है और मन गुलाम है, लेकिन अब यह उलटी गंगा बह रही है। हमारी आत्मा मन का गुलाम बनकर रही है, इसलिए मन का दमन करना जरूरी है। उन्होंने कहा आत्मा का स्मरण भूल जाना अज्ञानता है। विवेक के अभाव में हमारी इंद्रियां थोड़े से आनंद के लिए भटक जाती है। हमारी आत्मा मछली, मन मच्छीमार, जाल कुविकल्प और समुद्र संसार के समान है। आत्मा रूपी मछली कुविकल्प...

कर्मबन्ध के मूल तीन साधन है मन, वचन, काया: गुरुदेव जयतिलक मुनिजी म सा 

यस जैन संघ नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी म सा ने बताया कि कर्मबन्ध के मूल तीन साधन है मन, वचन, काया। भगवान कहते है इन साधनो को शस्त्र कहा है। संसार के समस्त पाप इन्ही से होते है। द्रव्य इन्द्रियो से न कर्म बन्ध होता है ना ही कर्मो की निर्जरा। जैसे ही भाव जुड़ जाते हैं इन्द्रियों के साथ वैसे ही कर्म बन्ध हो जाता है । कर्म बांधते समय जीव को पता नही चलता पर जब कर्म उदय में आते है तो जीव को स्मरण होता है कि मैंने मन वचन काया से कैसे -2 कर्म बांधे है। ज्ञानीजन कहते है कि कर्म बन्ध के लिए प्रवृत्ति आवश्यक नहीं है जीव बैठे-2 सोये-2 ही कर्म बन्ध कर लेता है। कर्मबन्ध के लिए पुरुषार्थ की आवश्यकता नही होती पर कर्मों को आत्मा से अलग करने के लिए अत्यधिक पुरुषार्थ की आवश्यकता होती है। कर्मों से कोई बचा नही सकता क्योंकि स्वयं ने कर्म बाँधे है तो स्वयं की आत्मा को ही कर्म से छु...

आत्मा और शरीर के स्वास्थ्य के लिए जीवन में तपस्या जरूरी : साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

उन्होंने बताया कि असली तपस्या वह जो मन और पेट की भूख को सीमित करे Sagevaani.com @चेन्नई। जैन दर्शन में जन्मो-जन्मो के कर्मों की निर्जरा का सबसे आसान और सरल उपाय तपस्या को बताया गया है। 12 प्रकार की तपस्या में सबसे पहला तप अनशन या उपवास है। शरीर के स्वास्थ्य के लिए हर 7 दिन या 15 दिन में हमें एक उपवास अवश्य करना चाहिए। उपवास का अर्थ सिर्फ पेट की भूख को लगाम लगाना ही नहीं है, बल्कि पेट के साथ-साथ मन की भूख को भी सीमित करना उपवास का लक्ष्य होना चाहिए। यह कहना है प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी का जो आज सोमवार को स्थानीय पोषद भवन में एक धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जीवन में तपस्या चलती रहनी चाहिए। धर्मसभा में साध्वी जयश्री जी ने बताया कि भगवान के दर्शन और उनकी वाणी श्रवण से कहीं अधिक लाभ उनके आचरण को अपने जीवन में उतारने से मिलता है। धर्मसभा में सिद्धि तप कर रहीं साध्वी...

जहां आशा है उत्साह है वहीं सफलता है : देवेंद्रसागरसूरि

Sagevaani.com @चेन्नई श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन मूर्तिपूजक जैन संघ में चातुर्मासिक प्रवचन देते हुए पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि मनुष्य को अपना सुखी जीवन जीने के लिए सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। जीवन में रात व दिन की तरह आशा व निराशा के क्षण आते जाते रहते हैं। आशा जहां जीवन में संजीवनी शक्ति का संचार करती है वहीं निराशा मनुष्य को पतन की तरफ ले जाती है। निराश मानव जीवन में उदासीन और विरक्त होने लगता है। उसे अपने चारों तरफ अंधकार नजर आता है। निराशा का संबंध एकतरफा सोच भी है। साथ ही मनुष्य के दृष्टिकोण पर भी आधारित है, मनुष्य जिस तरह की भावनाएं रखता है वैसी ही प्रेरणाएं मिलती हैं। जो लोग स्वयं के लाभ के लिए जीवन भर व्यस्त रहते हैं उन्हें जीवन में निराशा, अवसाद, असंतोष ही परिणाम में मिलता है। यह एक बड़ा सत्य है कि जो लोग जीवन में परमार्थ सेवा एवं जनकल्याण का कार्य करते हैं उनमें आ...

अपने अंदर झांके आपको परमात्मा का स्वरूप दिखेगा: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैं। बंधुओं जैसे कि आप अपने अंदर झांकते हैं वह परमात्मा का स्वरूप दिखता है। माना दुनिया की आंखों में धूल झोंक सकते हैं पर याद रखना लाख कोशिश के बावजूद खुद की आंखों में धुल नहीं झोंक सकते हो। उस परम तत्व को धोखा नहीं दे पाओगे। एक दूसरे को धोखा दे सकते हैं लेकिन स्वयं को कब तक धोका दोगे। हमारे साथ अब तक यही होता आया है हम सोचते हैं बंद कमरे में कोई गलत कार्य करेंगे तो उसे कौन देख पाएगा पर इस सत्य को नहीं भुलना चाहिए हमारे भीतर दो सूक्ष्म तत्व है वह परमात्मा का ही स्वरूप तुम्हारे अस्तित्व में जो आता है। सत्ता है वही तो परमात्मा तत्व का आभा है व्यक्ति को यह सच्च समझ लेना चाहिए कि बाहर जो दिखाई दे रहा है अ चेतन...

खुश रहने के लिए किसी अच्छे दिन का इंतजार न करें, इसी क्षण खुश हो जाएं : देवेंद्रसागरसूरि

नोर्थटाउन जैन संघ में रविवारीय शिविर का आयोजन  श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी पूज्य मुनि श्री महापद्मसागरजी की निश्रा में रविवारीय शिविर का आयोजन हुआ, शा मफतलालजी कपूरचंदजी परिवार ने शिविर का लाभ लिया। शिविर के तहत आचार्य श्री ने जो हुआ अच्छा हुआ विषय के ऊपर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि खुश रहने के लिए कुछ पाने की दरकार नहीं होती। अपने जीवन में खुशियां लाने के लिए दूसरों से तुलना छोड़कर हर परिस्थिति में वर्तमान का आनंद लेना होगा। ज़्यादातर लोग ऐसा सोचते है की पैसा रहेगा, तो खुशी अपने आप आ जाएगी, पर सच यह है कि यह पूरी तरह सही नहीं है। धन- संपदा आने के बाद भी खुशी नहीं आ पाती। अगर पैसे से ही खुशी खरीदी जा सकती तो डिप्रेशन को अमीरों की बीमारी नहीं कहा जाता। दुख की वजह दरअसल, ज्यादातर लोग इसलिए दुखी रहते हैं, क्योंकि उनका...

मोक्ष हमारी मुट्ठी में है: प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा.

 श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया एक छोटा सा नियम लेते हैं तो उसका श्रद्धा के साथ पालन करना चाहिए प्राण जाए मगर प्रण नहीं जाए। नियम गुरु मुख से लेना है उसका सम्यक प्रकार से पालन करना है तो मोक्ष हमारी मुट्ठी में है। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने पानी का सदुपयोग कैसा करें उसको दिव्य औषधी कैसे बनाएं, दिव्य अमृत कैसे बनाएं इसके बारे में सभा में बताया। बच्चों की पाठशाला में संस्कार दिए। चंद्रकांत सकलेचा एवं सुधीर सिंघवी उपस्थित रहे। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने संचालन किया।

संसार में हर वस्तु का अपना एक स्वभाव है: रवीन्द्र मुनि नीरज म.सा.

दिवाकर भवन पर चातुर्मास हेतु विराजीत मेवाड़ गौरव, प्रखरवक्त्ता, प्रवचनकार रवीन्द्र मुनि नीरज म.सा. ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए धर्म की विशेषता बताते हुए कहां की वस्तु सहवो धम्मों वस्तु का स्वभाव वही धर्म है संसार में हर वस्तु का अपना एक स्वभाव है। इस संसार में आदमी ही ऐसा व्यक्ति है जिसके अलग-अलग स्वभाव है वह कभी कड़वास से जीता है, कभी मिठास में जीता है, कभी गर्म तो कभी ठंडा हो जाता है लेकिन परमात्मा ने कहा कि आदमी को अपनी सही स्वभाव में जीना चाहिए उन्होंने धर्म की विशेषता बताते हुए कहा कि व्यक्ति बचपन से लेकर बूढ़ा हो जाता है वह हर चीज से जुड़ता है हर कार्य को करता है लेकिन धर्म में जुड़ने में विलंब कर देता है। अपने बच्चों में धर्म के संस्कार डालते हुए उन्हें केवल सुख में ही नहीं दुख में भी जीना सिखाए यदि बच्चों को दुख में जीना आ जाएगा तो वह जीवन के हर क्षेत्र में अपने कर्तव्य का पालन...

सुभाष रांका रजत प्रीमियर लीग फाइनल्स यंगस्टर्स ने जीता 

राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु द्वारा सुभाष रांका रजत प्रीमियर लीग का फाइनल 30 जुलाई 2023, रविवार को सुबह 8 बजे से चेटपेट स्थित यूनिवर्सिटी यूनियन ग्राउंड्स में आयोजित किया गया। फाइनल मुकाबला यंगस्टर्स क्रिकेट क्लब तथा मेटा के बीच खेला गया। कड़ी स्पर्धा के बाद यंगस्टर्स ने 14 रनों से मेटा को हराकर जीत हासिल की। साथ‌ ही आज फ्रेन्डसिप डे के उपलक्ष्य में रजत के पदाधिकारीयों के बीच प्रेसिडेंट 11 और चेयरमैन 11 के बीच 6 ओवर का मेच खेला गया। जिसमें चेयरमैन 11 ने जीत हासिल की। पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि पुलिस उपायुक्त, आईपीएस ‌श्री समय सिंह मीना तथा विशेष अतिथि कला एवं संगीत में डॉक्टरेट डॉ छवि कालरा पधारें। राधेश्याम मूँधड़ा तथा कांता बीसानी द्वारा प्रार्थना के पश्चात अध्यक्ष मोहनलाल बजाज ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। ओलंपियाड चेयरमैन अशोक कुमार जे मूंदड़ा ने खेल महोत्सव के बारे में जानका...

निखिलजी कांकरिया ने रविवारीय सामूहिक सामायिक में “सेवा से सिद्धि” विषय पर विशेष उदबोधन दिया 

रविवार 30 जुलाई 2023 को श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,तमिलनाडु के तत्वावधान में स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में रविवारीय सामूहिक सामायिक में युवा स्वाध्यायी रत्न श्री निखिलजी कांकरिया द्वारा ” सेवा से सिद्धि ” विषय विशेष उदबोधन हुआ। स्वाध्याय भवन साहूकारपेट चेन्नई में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के तत्वावधान में वीर पौत्र युवा स्वाध्यायी रत्न श्री निखिलजी कांकरिया ने रविवारीय सामूहिक सामायिक में “सेवा से सिद्धि” विषय पर विशेष उदबोधन देते हुए कहा कि चरित्र आत्मा हो या श्रावक जब स्वाध्याय या तप करने की इच्छा हो अवसर हो पर उस समय अगर सेवा का कार्य हो तो सेवा को प्रमुखता दी जानी चाहिए | सेवा के तीन श्रेणियों को बताते हुए कहा कि जघन्य सेवा वो हैं कि मन में भाव रखना कि मैं सेवा करूँगा मेरी भी कोई सेवा करेगा | मध्यम सेवा की श्रेणी में कर्तव्य भाव से क...

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