नोर्थटाउन मूर्तिपूजक जैन संघ में मासक्षमण के तपस्वी का हुआ भव्य पारणा Sagevaani.com @चेन्नई. आचार्य श्री देवेन्द्रसागरसूरिजी मुनि श्री महापद्मसागरजी महाराज साहेब की निश्रा में श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में ममता देवी किरणकुमार जी का मंगलवार को मासोपवास यानी की एक महीने के उपवास का पारणा बड़े ही भावोल्लास पूर्वक संपन्न हुआ, आचार्य श्री का सुबह बाजे गाजे के साथ तपस्वी के निवासस्थान पर सकल श्री संघ के साथ पगलिया हुआ, आचार्य श्री ने तप की महिमा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि तप आध्यात्मिक जीवन की आधार-शिला है। तपस्वियों के जीवन की साधारण घटना भी आम आदमी के लिए आश्चर्य व कौतूहल का विषय बन जाती है। तपस्वी अपने जीवन की दशा स्वयं निर्धारित करते हैं, जबकि सामान्य व्यक्तियों का जीवन पूर्णत: परिस्थितियों के अधीन होता है। तपस्वी तप की ऊर्जा से परिस्थिति की प्रतिकूलता को भ...
3 अगस्त को होगी साध्वी जी के सम्मान में गुणानुवाद सभा, 30 वर्ष के साधना काल में साध्वी जी कर चुकी हैं अनेक कठोर तपस्याएं शिवपुरी। सिद्धि तप करने वाली साध्वी पूनमश्री जी को श्वेताम्बर जैन समाज ने 3 अगस्त को आयोजित समारोह में तपस्वी रत्ना की उपाधि से अलंकृत करेगा। उस दिन साध्वी पूनमश्री जी के सिद्धि तप की पूर्णाहूति होगी। सिद्धि तप करने वाली साध्वी पूनमश्री जी अपने 30 वर्ष के साधना काल में अनेक कठिन तपस्याएं कर चुकी हैं। जिनमें दो-दो वर्षी तप, मासखमण (30 दिन का उपवास), पांच दिन से लेकर आठ दिन, 16 दिन और 19 दिन के उपवास भी अलग-अलग समय पर कर चुकी हैं। 20 स्थानक की ओली (400 दिन के उपवास), 250 से अधिक पच्चखाण सहित अनेक तपस्याएं शामिल हैं। उनकी गुरूणी मैया साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज कहती हैं कि साध्वी पूनमश्री भगवान महावीर की तप आराधना की सच्ची अनुगामी हैं। सिद्धि तप क्या है? इसे सरल भाषा में स...
🛕 *स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई* 🪷 *विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, दीक्षा दाणेश्वरी प.पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय श्री अभिधान राजेंद्र कोष भाग 7*🪔 ~ सबसे महान भावधर्म संस्कृति रक्षा और शासन रक्षा है ~ हमारे जीवन की यात्रा समाप्त हो जाए और हमारे जीवन में मूलभूत परिवर्तन का आगमन ना हो तो जीवन व्यर्थ है। ~ हमें जिस कार्य का मूल्य है और बहुत पसंद है वह कार्य हमें कभी भी दुख, थकान, दर्द दे नहीं सकता। ~ हमें यदि शासन रक्षा करनी ही है तो हमारी आध्यात्मिक परिणति सर्वश्रेष्ठ होनी ही चाहिए। ~ हमारे जीवन में दिन भर में हजारों विचार आते हैं लेकिन उनमें से जो विचार हमें पसंद है उसके अनुरूप हम अनुसरण...
संयम मानव जीवन का श्रंगार है मंगलवार अहिंसा भवन शास्त्री नगर मे साध्वी प्रितीसुधा ने संयम धर्म का धर्मसभा मे महत्व बतातें हुए कहा कि बिना संयम के मनुष्य का जीवन शुन्य है। संयम जीवन को सद्गुणों से शृंगारित करते हुए हमारी आत्मा को शुद्धता प्रदान करता है।बिना संयम मनुष्य का जीवन बिना ब्रेक की गांड़ी के समान है। संयमी व्यक्ति आध्यात्मिक, विवेकशील, ईमानदार और समाज का भला करते है। संयम के अभाव में व्यक्ति में क्रोध, हिंसा और मानसिक अशांति बनी रहती है। इसका प्रभाव उनके जीवन पर भी देखने को मिलता है, जिसके फलस्वरूप असंयमी व्यक्ति उद्दंड और सभी को कष्ट देता है ओर दुखों को भोगता है। उनके विचार सात्विक नहीं रहते है जिस मनुष्य में इन सब गुणों का अभाव होता है वह इन्द्रियों का गुलाम बनकर आत्मा का पतन करवा सकता है। विवेक, धर्म, दया और संयमी व्यक्ति मान अपमान होने पर भी संयम को नही खोता है वही मनुष्य सुखों...
सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद उपदेशक 8 बातों पर उपदेश दे.. शांति, विरति, क्षमा, निर्वाण, पवित्रता, सरलता, कोमलता , लघुता: प्रकाश मुनिजी मासा । *क्षमा*- वात्सल्य पूर्ण ह्रदय वाला अपेक्षा नही रखता है , वात्सल्य से निर्जरा व अहिंसा भाव का पालन होता है यह बात *पुज्य प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मासा* बताते हुए फरमाया कि विचार अशुभ होना नीच गोत्र में जी रहे हो। किसी के प्रति उच्च विचार आये मतलब आप उच्च गौत्र में हो। *वंदना का लाभ* – नीच गोत्र का क्षय करता है उच्च गौत्र का बंध करता है। कमर और गर्दन झुकना चाहिए। श्रम करता है। आप भाव से वंदना कर लो। *27 वंदना* रोज करो। इसमें अनन्त कर्मों की निर्जरा हो जाती है। यह शार्ट कट है मोक्ष होने का। मोझ होना अर्थात कर्मो से मुक्ति । कर्म से मुक्ति यहीं होती है। *बड़ी साधु वंदना* रोज पढ़ना विशिष्ट निर्जरा होगी। उत्राध्यन सूत्र में आता है...
1008 अठ्ठाई होगी एक साथ 31 दिन तक केवल गर्म पानी पीकर उपवास करने वालों का सम्मान 10 से 17 अगस्त के बीच कड़ी परीक्षा से गुजरेंगे तपस्वी Sahevaani.Com @रायपुर. इस चातुर्मास टैगोर नगर में तपस्याओं की झड़ी लगने वाली है। श्री लालगंगा पटवा भवन में विराजमान उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि महाराज साहब की निश्रा में 10 से 17 अगस्त के बीच अट्ठाई की तपस्या होगी। इसमें 1008 तपस्वी शामिल होंगे। रायपुर के इतिहास में ऐसी तपस्या पहली बार होने जा रही है। इधर, मंगलवार को मासखमण की तपस्या पूरी करने वाले तीन तपस्वियों का गुरुदेव के सानिध्य में सकल जैन समाज ने सम्मान किया। रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि विजय संचेती, विनय पटवा और चांदनी जैन ने लगातार 31 दिन की तपस्या की है। एक महीने की यह कठिन तपस्या तीनों ने केवल गर्म पानी पीकर पूरी की है। उनके सम्मान में मंगलवार को प्रवचन के बीच गुणानुवाद सभ...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने संपत्ति का राग कैसा होता है। संपत्ति नहीं हो तो प्रभु का जाप करता है। संपत्ति हो तो पाप करता है। पर संपत्ति यह पुण्य की पड छाया है। यह राग छोड़ने जैसा है। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने बताया कि श्रावक को कैसे बोलना चाहिए। भाषा का ध्यान होना चाहिए। कर्कशकारी कम बोले, आवश्यकता अनुसार बोले, चतुराई युक्त बोले, उदाहरणों के माध्यम से समझाया। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने स्वागत किया। मंत्री हस्तीमल बाफना ने संचालन किया
★ ललित आंचलिया बने अध्यक्ष और स्वरूप चन्द दाँती मंत्री ★ शासनश्री साध्वी शिवमाला एवं साध्वी लावण्यश्री का मिला पावन पाथेय Sagevaani.com @चेन्नई; युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी लावण्यश्रीजी के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट में अणुव्रत समिति की नवगठित टीम का शपथग्रहण समारोह समायोजित हुआ। *मानव में मानवता का विकास हो* अणुव्रत गीत से कार्यक्रम की शुरूआत हुई। नवगठित टीम को आध्यात्मिक बधाई देते हुए पाथेय प्रदान करते हुए साध्वी लावण्यश्री ने कहा कि गणाधिपति गुरुवर तुलसी का मानव में मानवता का विकास हो, वह संयम, सादगीमय जीवन जीये। समाज में शांति का वातावरण हो, उसी के मद्देनजर अणुव्रत आन्दोलन का सुत्रपात किया। किसी भी धर्म सम्प्रदाय का व्यक्ति जो शाकाहारी, नशामुक्त है, नैतिकता में विश्वास रखता है, वह इस से जुड़ सकता है। उस आन्दोलन का यह अमृत महोत्सव, हीरक जयन्ती वर्ष...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया संबंध रखो पर बंधन मत रखो, संतों का सम्मान होना चाहिए ना कि अनादर। कीर्ति ध्वज मुनि के माध्यम से बताया। संत अपनी क्रिया, ज्ञान, तप में रत रहता है फिर भी परिषह आने पर अपनी समाधि भाव में रहते हैं। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने बताया दो अक्षर का लक, ढाई अक्षर का भाग्य, तीन अक्षर का नसीब, साडे तीन अक्षर का किस्मत, यह चारों भी कारगर बनते हैं। तब चार अक्षर का मेहनत शब्द इसके साथ जुड़ जाता है तो बताया आलसी मत बनो। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने स्वागत किया। मंत्री हस्तीमल बाफना ने संचालन किया
Sagevaani.com @चैन्नाई। ज्ञान से पुण्य का उदय होता है और अज्ञान मनुष्य के पाप व भय को जन्म देता है। सोमवार को साहूकार पेठ के जैन भवन मे मरूधर केसरी दरबार मे साध्वी धर्मप्रभा ने प्रवचन में फरमाया कि संसार में ज्ञान से बड़ी कौई भी वस्तु नहीं हैं।ज्ञान और अज्ञान मनुष्य के जीवन में नदी के दो तट कि तरह है। एक का उद्देश्य जीवन-लक्ष्य की खोज है तो दूसरे का आत्मा को ज्ञान से भटकाना है। मनुष्य ज्ञान को धारणकर आत्मा को उज्जवल बनाकर मानव जीवन को बना सफल बना सकता है, जबकि अज्ञान का साथ जीते -जी कितनी ही बार मनुष्य को कलंकित करता है और अस्तित्व को शून्य में मिलाकर अपमान की गर्त में धकेलकर आत्मग्लानि से भर देता है। ज्ञान ही देवत्व का मार्ग है, जो शांति, दया, उपकार, संतोष, प्रेरणा व उत्साह का सृजनकर मनुष्य को सन्मार्ग की ओर ले जाने में सहायक बनाकर आत्मा को परमात्मा मे विलय करवा सकता है। साध्वी स्नेहप्रभा...
Sagevaani.com @शास्त्री नगर भीलवाड़ा। कर्म किसी को भी नहीं छोड़तें है। अहिंसा भवन में प्रखर वक्ता साध्वी प्रितीसुधा ने प्रवचन मे श्रध्दालुओं को धर्मसंदेश प्रदान करतें हुए कहा कि संसार में कर्म बलवान होते है बिना भोगे कौई भी जीव संसार से छुटकारा नही पा सकता है । जब तक उसकेपुण्य प्रबल रहते है,उग्र पाप का फल भी तत्काल नही मिलता। जब पुराने पुण्य खत्म होते ही तब हमारे अशुम पाप कर्मो की बारी आती है। ओर उन अशुभ पाप कर्मो को भोगना ही भोगना पड़ेगा। कर्म ही मनुष्य के भाग्य का निर्माण करते है ओर पतन भी, परमात्मा के वहा पर देर हो सकती है परन्तु अंधेर नहीं है सजा भोगनी ही पड़ेगी, चाहे धनवान हो या गरीब कौई भी भगवान कि नजरों से नहीं बच सकता है। हमारे कर्म, विचार और भावना के अनुसार ही हमें सुख या दुःख की जीवन मे प्राप्ति देतें है। साध्वी संयम सुधा ने कहा कि इंसान के अच्छे बुरे कर्म ही उसके साथ जाएंगे। मनुष्य ...
पुज्य प्रवर्तक की प्रकाश मुनिमी मासा. — जीवन साधना के लिये मिला के भोग के लिये मिला? भव परम्परा से जीव चलता है, आयुष्य पुरा हुआ शरीर को छोड़कर जाना। परमात्मा का उपदेश मुख्यतः मनुष्य के लिये, मनुष्य में बुद्धि ज्यादा होती है। मतलब जुगाड़ – जुगाड में बुद्धि का उपयोग होता है, मनुष्य सुनकर मनन करके जीवन में उतार सकते है। परमात्मा की वाणी मनुष्य के लिये है,। 🔰 10 वे आश्चर्य में एक आता है कि *भगवान महावीर स्वामी की पहली देशना खाली गई*, केवल ज्ञान के बाद उनको बोलना ही है, मोन खुलता है, मनुष्य नहीं थे , देवता और तिर्यंच थे। भगवान पावापुरी पधारे, 11 गणधर 4400 शिष्यों के साथ यज्ञ कर रहे थे। आर्यवृत्त में ,11 पंडितो का नाम चलता था। भगवान रातभर विहार करके यहाँ आये। छदमस्तों के लिये प्रतिबंध है रात्रि को विहार नही करना , *सुनना सबकी करना मनकी,* देखा देखी क्यो ? देखा देखी वृत वाले की करो, साधु...