समय की बहुमूल्यता को पहचान, धर्म जागरणा में बिताने की दी प्रेरणा Sagevaan.com @चेन्नई: श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी, चेन्नई में शासनोत्कर्ष वर्षावास में गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म.सा ने उत्तराध्यन सूत्र के चौथे अध्याय के विवेचन में धर्म परिषद् को सम्बोधित करते हुए कहा कि सभी को मालूम है कि मुझे जाना है लेकिन कब जाना है किसी को मालूम नहीं है। हम कब विदा हो जायेंगे, कोई मालूम नहीं अतः धर्म करते समय यह ध्यान रखें कि जो काम कल करना है, उसे आज करले और आज को अभी कर ले। संसार के कार्यों में आज के कार्यों को कल पर छोड़ देना चाहिए। अत: धर्म पहले, संसार बाद में। आत्म कार्य के लिए, अध्यात्म के लिए कभी भी प्रमाद नहीं करना चाहिए। जैसे किसी को जीवन के मात्र एक ही गाड़ी चाहे वो किमती हो, मिलती है तो उसका वह सावधानी पूर्वक...
वन बंधु परिषद का भव्य आयोजन कृष्णोत्सव आज संपन्न हुआ। दीप प्रज्वलित कर मुख्य अतिथि श्री एन कुमार सन्मार्ग ग्रुप के चेयरमैन, सम्मानित अतिथि इस्कॉन के श्री रामचरण दास जी एवं एकल के अधिकारियों ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। चेन्नई इकाई के अध्यक्ष प्रवीण टाटिया ने सभी का स्वागत किया , शिवकुमार गोयंका कार्यक्रम के चेयरमैन ने सभी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए स्वागत, धन्यवाद दिया। सचिव गिरी बागडी ने संपूर्ण भारत में एकल के अद्भुत कार्य का परिचय चलचित्र के माध्यम से सभा को और द्वारा प्रकाश ध्वनि दृश्य मंच में प्रस्तुत किया । तमिलनाडु प्रदेश के एकल विद्यालय से संपूर्ण कार्यकर्ता, शिक्षिका, प्रभारी सभी का मंच पर सम्मानित। मुख्य अतिथि एन कुमार ने एवं सम्मानित अतिथि राम चरण दास जी इस अविस्मरणीय कार्य कि अंतर हृदय से सराहना की। स्मृति चिन्ह और माला द्वारा सभी दानदाताओं का अभिवादन किया, जिनके माध्यम...
Sagevaani.com @ चैन्नाई। मनुष्य शरीर को संवारता है, आत्मा को नही । बुधवार साहूकार पेठ के मरूधर केसरी दरबार मे महासाध्वी धर्मप्रभा ने श्रध्दालुओं को धर्म उपदेश देतें हुए कहा कि मानव जीवन बार -बार नही मिलता है। लेकिन मनुष्य खाना-पीना ओर दौलत कमाने को ही जिंदगी का सुख समझकर आत्मा के सुख को भुल गया है। इंसान मेहनत करता है,परन्तु आत्मा के लिये नही करता है। मनुष्य के पास समय कम है। लेकिन मनुष्य कि इच्छाएं ओर लालसाएं कम नही होती है बल्कि बढ़ती ही जाती है, इस संसार मे अब ऐसा कौई प्राणी पैदा नही हुआ जो मरने के बाद भी अपने साथ धन दौलत शोहरत को लेकर गया हो। इंसान दुनिया मे खाली हांथ आया था ओर खाली हांथ ही संसार से जाने वाला है। समय रहते मनुष्य समय को साध लेगा तो आत्मा को संवार सकता है । वरना अंत समय मे उसे पछताना पड़ेगा। क्योंकि मनुष्य भव बार – बार नही मिलने वाला है। आत्मा को सुख तभी मिल सकता है ...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैंl बंधुओं याद रखिए जीवन में मान पाने के लिए नहीं देने के लिए होता हैl इसे औरों को दे कर खुश हुई है जीवन में सम्मान पाने की कोशिश करेंl जो व्यक्ति सम्मान पाने की ख्वाहिश रखता है वही अपमानित होता हैl जिसके भीतर सम्मान पाने की आकांक्षा नहीं है वह कभी अपमानित नहीं हो सकताl आप कितने भी महान क्यों न हो लेकिन छोटे से छोटे व्यक्ति का अभिमान करना सीखिए अगर आप किससे मीटिंग में बैठ कर बैठे हैं और एक अदना सा व्यक्ति किसी संस्था या संगठन का अध्यक्ष या मंत्री है लेकिन वह तो आपका कर्तव्य है आप खड़े होकर उसका सम्मान करेंl ऐसा करके आप जो भी आपके द्वार पर आए उसे सम्मान देl फिर चाहे वह आपका शत्रु ही क्यों ना हो फ्रांस के सम...
टैगोर नगर के श्रीलालगंगा पटवा भवन में प्रवीण ऋषि के प्रवचन Sagevaani.com @रायपुर. हम बुराई छोड़ने का संकल्प लेते हैं। दो, चार, छह दिन उस काम को नहीं करते। फिर दुनियाभर में हांकते हैं कि मैंने बुराई का त्याग कर दिया। लेकिन, कुछ दिन बाद दोबारा उसी गड्ढ़े में गिर जाते हैं। पता है ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए क्योंकि आपने उस बुराई से कुछ समय के लिए संबंध तोड़ा है। समय मिलते ही फिर जुड़ जाएंगे। अगर वास्तव में किसी बुराई का त्याग करना है तो निंदामि की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। यानी अपनी बुराइयों की निंदा करनी पड़ेगी। स्वीकार करना होगा कि वह बुराई कितनी गलत है। टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में बुधवार को उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने ये बातें कही। उन्होंने कहा बताया, एक बार इंद्रभूति गौतम ने महावीर स्वामी से पूछा कि सामायिक समय कोई व्यक्ति अपने सारे गहने निकालकर एक तर...
आयंबिल तप और गुणगान से मनाएंगे आचार्य आनन्द ऋषि की जन्मजयंती अहिंसा भवन के तत्वावधान में Sahevaani.com @भीलवाड़ा सेवा वही व्यक्ति कर सकता है जिससे स्वार्थ की भावना नहीं छुपी होगी । बुधवार को अहिंसा भवन शास्त्री नगर मे साध्वी प्रितीसुधा ने सैकड़ों श्रध्दालुओं को प्रवचन में धर्मसंदेश देतें हुए कहा कि आज मनुष्य भगवान की भक्ति भी करता है तो ईश्वर से कुछ प्राप्त करने केलिए। चाहे भक्ति हो या सेवा निस्वार्थ भावों से करोगे तभी फल मिलेगा। परमात्मा के प्रति निष्काम प्रेम ही सच्ची सेवा भक्ति है। सेवा मे समर्पण नही होगा तो.वह सेवा नही कहलाती है । समर्पित भाव से की जाने वाली सेवा कभी निष्फल नहीं जाती है। सेवा सभी करो मगर आशा किसी से मत रखना क्योंकि सेवा का फल भगवान ही दे सकता है इंसान नही दे पाएगा। साध्वी संयम सुधा ने कहा कि सेवा कामयाबी का मूल मंत्र है जो मानव को सच्चा मानव बना सकती है अगर सेवा निस्वार...
Sagevaani.com @चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन मूर्तिपूजक जैन संघ में धर्म प्रवचन देते हुए आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि दूसरों के बारे में निस्वार्थ भाव से सोचना एक ऐसा गुण है जिसकी हर कोई सराहना करता है। अच्छे शिष्टाचार वे मानदंड हैं जो उस समाज द्वारा निर्धारित और स्वीकार किए जाते हैं जिसमें हम रहते हैं। यदि हम एक सदाचारी मानव कहलाना चाहते हैं तो ये वे सिद्धांत हैं जिनका हमें धार्मिक रूप से पालन करना होगा। दूसरों से विनम्रता से बात करना बुनियादी सिद्धांतों में से एक है जो अकेले ही दूसरों पर अच्छा प्रभाव डाल सकता है।एक बुद्धिमान व्यक्ति अपनी सत्यनिष्ठा के लिए जाना जाता है और उसका एक सम्मानित व्यक्तित्व होता है। वह प्रसिद्ध हैं क्योंकि उन्हें अपने बड़ों का सम्मान करने और उनका ठीक से अभिवादन करने की आदत है। अन्य लोग भी उसे चर्चाओं में शामिल करते हैं क्योंकि वह लोगों के समूह के ...
तपस्वी रत्ना की उपाधि से सम्मानित होंगी साध्वी पूनमश्री, आयोजन में देश के विभिन्न भागों से पधार रहे हैं धर्मावलंबी, सिद्धि तप की अनुमोदना में 61 लोग कर रहे हैं तप शिवपुरी। प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज की सुशिष्या साध्वी पूनमश्री जी के 44 दिन से चल रहे सिद्धि तप का कल 3 अगस्त को समापन होगा। सिद्धि तप की पूर्णाहूति के अवसर पर 3 जुलाई को सुबह नौ बजे से जयदुर्गा टॉकीज के सामने स्थित आराधना भवन में गुणानुवाद सभा होगी जिसमें साध्वी पूनमश्री जी के 30 वर्ष के साधना काल का गुणगान किया जाएगा। गुणानुवाद सभा में भाग लेने के लिए महाराष्ट्र, दिल्ली, इंदौर, उज्जैन और पुणे से अनेक जैन धर्मावलंबी शिवपुरी पधार रहे हैं। गुणानुवाद सभा के बाद साधार्मिक वात्सल्य के लाभार्थी पदमचंद शैलेष कुमार कोचेटा परिवार है। जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ के अध्यक्ष राजेश कोचेटा और तेजमल सांखला, महामंत्री विजय पारख और भू...
*सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद* 🔅🔅🔅🔅🔅 *व्यख्यान सारांश* परमात्मा कहते है कि *उपदेशक निर्वाण* का उपदेश करे निर्वाण अर्थात *मुक्ति का* उपदेश करे यह बात बताते हुए *पूज्य प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनि जी महारासा* ने फरमाया कि मुक्ति यानी कर्मो से मुक्ति, उपदेशक खुद भी कर्म से मुक्त होवे ओर दुसरो को भी मुक्त होने का उपदेश करे। बाह्य ओर आंतरिक पुद्गलों मन, वचन काया से कर्म बंध होता है , कर्म दूध में पानी के समान आत्म प्रदेश में कर्म मीले है, आत्म प्रदेश भारी हो तो 7 ओर18 वर्ष की उम्र में मासकक्षमण तप कर लेते है , प्रत्यक्ष द्रष्टा गजसुकुमाल की आत्म शक्ति प्रबल…. ओर हमारी मोह शक्ति भारी ओर आत्म शक्ति कमजोर । *आत्म शक्ति प्रबल हो तो मोक्ष को प्राप्त कर सकते है* जो ममत्व शील होता है वह भेद विज्ञान को प्राप्त नही कर सकता है । भेद विज्ञान यानी में (आत्मा)अलग शरीर अलग। भेद विज्ञान ...
🏰☔ *साक्षात्कार वर्षावास* ☔🏰 🛕 *स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई* 🪷 *विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, दीक्षा दाणेश्वरी प.पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय श्री अभिधान राजेंद्र कोष भाग 7*🪔 ~ यदि हमारे जीवन में ज्ञान हर पल उपस्थित है तो हमारे जीवन में पापों की रुचि, पाप में आसक्ति करना असंभव है। ~ यदि जीवो की सुरक्षा आत्मबोध के लक्ष्य से होती है तो सर्व जीवो के साथ स्वरक्षा भी श्रेष्ठ होती है। ~ जब हम आध्यात्मिक शक्ति को प्रकृष्ट रूप से बलवान बनाते हैं तो हमारे लिए कुछ भी पाना हो सरल है। ~ जब तक सम्यक दर्शन की प्राप्ति नहीं होती तब तक आत्मा दर्शन या ईश्वर की प्राप्ति दुर्लभ है, कठिन है। ~ अनंत काल के...
यस यस जैन संघ नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्मबन्धुओं जिनवाणी में मोक्ष मार्ग का निरूपण किया है मोक्ष की अभिलाषा प्रत्येक जीव को होती है जिसकी पूर्ति किसी न किसी भव में निर्वाचित रूप से होती है। आज प्रमाद के कारण नवकार मंत्र का स्मरण नहीं करते। व्यर्थ की बातें कितने ही घंटे कर लेते है पर नवकार मंत्र के स्मरण के लिए कहते है कि टाइम नही मिलता। ज्ञानीजन कहते है सच्ची श्रद्धा के बिना नवकार का स्मरण भी सम्भव नही है। धर्म से जुड़ने के लिए कई प्रयास करने पड़ते है। धर्म से जोड़ने के लिए बच्चों को प्रभावना दी जाती है। ये प्रभावना लालच नही है। प्रभावना पाने के लिए यदि कोई सामायिक कर ले तो उसे बहुत लाभ होता है। दूसरे धर्म से जोड़ने के लिए कुछ प्रयत्न नही करने पड़ते पर जैन धर्म से जोड़ने के लिए प्रभावना का प्रलोभन देना पड़ता। बच्चो के पास माता-पिता संसार...
दिवाकर भवन पर चातुर्मास हेतु विराजीत मेवाड़ गौरव, प्रखरवक्त्ता, प्रवचनकार रवीन्द्र मुनि नीरज म.सा. ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि आईना हमेशा सही दिखाता है। किसी पर भी आरोप लगाना मिथ्यात्व कि श्रेणी मे आता है, ओर जब तक मिथ्यात्व का पर्दा आपकी आत्मा पर लगा रहेगा, आत्मा निर्मल नही बनेगी। जबकि हमे जानकारी नही होने पर भी दवाई देख कर लेते है कही साईड इफेक्ट न हो जावे तो हम शब्दो को सोचकर क्यो नही बोलते मनुष्य अपनी हरकतो से बाद मे पहले अपनी बोली से पहचाना जाता है। कभी किसी का अनादर नही करे। दुनिया के सारे कार्य राग द्धेष से करना लेकिन भोजन हमेशा प्रेम से करना क्योकि क्रोध मे किया गया भोजन जहर के समान माना गया है। उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल टुकडिया कार्यवाहक अध्यक्ष ओम प्रकाश श्रीमाल ने बताया की चातुर्मास मे छोटी बडी तपस्या के साथ ही ताल निवासी प्रकाशचंद्र जी पितली...