प्रवचन – 16.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) भगवंत महावीर स्वामींनी आपल्या मोक्षमार्गावर चालण्यासाठी 12 भावनांचे चिंतन सांगितले आहे. त्यातील दुसरी भावना आहे “अश्रय भावना”. ‘अश्रय’ म्हणजे आधार. आपण नेहमी कोणाचा तरी, कशाचा तरी आधार घेत जगत असतो – पैसा, मान-सन्मान, पद, सत्ता, नातेसंबंध, शरीर, सौंदर्य… पण विचार करा, हे सारे किती टिकणारे आहे? जैन धर्म सांगतो की, ज्याचा आधार बदलता, नश्वर, क्षणिक आहे, तो खरा आधार नाही. खरा आधार तोच, जो शाश्वत, अविनाशी आहे – आणि तो म्हणजे आत्मा व धर्म. उदाहरण १: समजा एखाद्याने आपले घर वाळूत बांधले, तर पहिल्या पावसात ते कोसळेल. पण जर मजबूत दगडावर पायाभरणी केली, तर कितीही वारा-पाऊस आला तरी घर टिकून राहील. तसेच, जर आपण नश्वर गोष्टींवर आधार ठेवला, तर दुःख येणारच. पण जर आपण धर्मावर, आत्मज्ञानावर आधार ठेवला, तर कोणत्याही परिस्थि...
जालना : माणसाने आपल्या मुळाला कधीच विसरले नाही पाहिेजे. कारण जो मनुष्य आपल्या मुळाला विसरतोे तो जैन आहे, वाटत नाही, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, काल राष्ट्रीय सण होता तर आज श्रीकृष्ण जन्माष्टी म्हणजे धार्मिक सण आहे. हमारे जैन परंपरांमें ये त्योहार मनाया जाता है, असे सांगून ते म्हणाले की, जेल और जंगल से जिनकी सुरुवात हुई है, उनका जीवन कैसा रहा होगा, जेलमध्ये जन्म तर शेवट हा जंगलात झाला. त्यांचं मधलं जीवन कसे असेल? हे तुम्ही आम्ही जाणलं पाहिजे. जिसके जन्म से पहिले ही मृत्यू का व...
चेन्नई सहित अखिल भारतीय स्तर पर जैन धर्म का मौलिक इतिहास की पुस्तकों पर स्वाध्याय प्रश्न मंच प्रतियोगिता चेन्नई सहित अखिल भारतीय स्तर पर इतिहास मार्तण्ड आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हस्तीमलजी म.सा द्वारा रचित जैन धर्म का मौलिक इतिहास की चालीस पुस्तकों पर स्वाध्याय प्रश्न प्रतियोगिता के रुप में स्पर्धाएँ आयोजित की जा रही हैं | जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर. नरेन्द्रजी कांकरिया ने बताया कि आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचंद्रजी म.सा की आज्ञानुवर्तिनी व्याख्यात्री महासतीजी श्री सुमतिप्रभाजी म.सा के इस वर्ष चेन्नई चातुर्मास में मासिक द्वितीय प्रश्न मंच कार्यक्रम जैन इतिहास के प्रसंग रविवार 17 अगस्त 2025 का किलपाक में सामायिक स्वाध्याय भवन में आयोजन होगा,जिसमे चेन्नई महानगर के अनेक क्षेत्रों से श्रावक श्राविकाएं व युवक ग्रुप रुप में भाग लेंगे,जो जैन धर्म के इतिहास प्र...
सितम्बर-2024 में श्रुताचार्य, वाणी भूषण, साहित्य सम्राट पूज्य प्रवर्तक श्री अमरमुनिजी महाराज सा. के संयम अमृत वर्ष का शुभारंभ हुआ। गुरु अमर संयम अमृत वर्ष (2024-25) के उपलक्ष्य में देशभर में अनेक सेवाकार्य तथा आयोजन हुए। जिनमें उपप्रवर्तक पंकजमुनिजी एवं अमरशिष्य डॉ. वरुणमुनिजी की मंगल प्रेरणा जुड़ी रही। इस क्रम में अ. भा. गुरु अमर संयम अमृत वर्ष आयोजन समिति की ओर से श्रुत संवर्धन तथा विशिष्ट सेवाओं की अनुमोदनार्थ गुरु अमर वार्षिक सम्मान श्रृंखला का प्रवर्तन किया गया। प्रथम सम्मान समारोह ज्ञान पंचमी, 6 नवम्बर 2024 को बेंगलुरु में हुआ था। वर्ष 2025 के सम्मानों के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित की जा रही हैं । ये सम्मान निम्नलिखित श्रेणियों में दिए जाएँगे- 1. *गुरु अमर श्रुतसेवा सम्मान* जैन धर्म,दर्शन, आगम और साहित्य के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए। 2 . *गुरु अमर श्रावकरत्न/ श्राविका रत्...
जालना : भगवान महावीरांना खूप काही अपमान सहन करावा लागला. काठ्यांनी मारहाण त्यांना सहन करावी लागली, आपण तर त्यांच्यापुढे काहीच नाहीत, असे वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना सांगितले. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, कोणत्या ना कोणत्या कारणाने सद्गुरुंशी जोडून रहा, यही प्रबोध बनता है। विरत्थुई का आनंद अद्भूत है। दुनियाभर में हर हस्थीयोंओं से मिले होगे। पर इस हस्तीओंसे एकबार मिलो, फीर देखो। ये क्या ऐसी वैसी हस्ती नही है । आज फीर ग्यारावी गाथा का उच्चारण उन्होंनें कीया। ते म्हणाले की, मुख्य दोन ग्रह आहेत. एक चंद्र आणि दुसरा सुर्य ! ...
‘संविधान की धार, मर्यादाओं का हो आधार’ मुख्य विषय पर आधारित हुई प्रतियोगिताएं किलपाॅक, चेन्नई : अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में, चेन्नई अणुव्रत समिति की आयोजना में अणुव्रत क्रिएटिविटी कांटेस्ट 2025 की तमिलनाडु राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन मुनिश्री मोहजीतकुमार जी के सान्निध्य में किलपाॅक भिक्षु निलयम में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्रीजी द्वारा नमस्कार महामंत्र से हुआ। अणुव्रत महिला सदस्याओं ने अणुव्रत गीत से मंगलाचरण किया। अणुव्रत समिति अध्यक्षा एवं एसीसी राष्ट्रीय सहसंयोजिका श्रीमती सुभद्राजी लुणावत ने स्वागत स्वर प्रस्तुत किया। मंत्री एवं एसीसी तमिलनाडू राज्य प्रभारी श्री कुशल बाँठिया ने अणुव्रत क्रिएटिविटी कांटेस्ट 2025 के बारे में जानकारी दी। मुनि श्री मोहजीतकुमार ने बच्चों को प्रेरणा देते हुए कहा कि अणुव्रत बच्चों को सही दिशा की और आगे बढ...
आज शुक्रवार 15 अगस्त 2025 को 79 वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जॉर्जटाउन, चेन्नई में स्थित शाखा 7 के मुख्य प्रबन्धक दिनेश कुमारजी ने झंडारोहण करते हुए शाखा तीन, सात व तेरह के अभिकर्ताओं को बधाई दी | इस अवसर पर शाखा 13 के मुख्य प्रबन्धक मुन्नुस्वामी,शाखा 3 के सह प्रबंधक आनन्दजी व बालाजी चैयरमैन सदस्य मुरली रामसेठीजी, गोविन्दस्वामीजी, भास्करणजी, अनिलकुमारजी जैन, आर नरेन्द्रजी कांकरिया, कुमार पेरुमाल स्वामीजी, वेणुगोपालजजी सहित अनेक अभिकर्ता उपस्थित थे | तीनो शाखाओं की संयुक्त गणतंत्र दिवस सभा में शाखा के मुख्य प्रबधंको व उप प्रबधंको द्वारा गणतन्त्र दिवस प्रतियोगिता के विजेता अभिकर्ताओं का स्वतंत्रता मेडल व शाल द्वारा स्वागत अभिनन्दन किया गया | शाखा प्रबंधक दिनेश कुमारजी व मुन्नुस्वामीजी, उप प्रबधंको आनन्दजी व बालाजी, पेरुमाल स्वामीजी, ए टी गोविन्दस्वामीजी व शा...
आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी, मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित आगम आधारित प्रवचनमाला में गुरुवार को मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि सामायिक नौवां व्रत है, जबकि पौषध ग्यारहवां व्रत है, इसलिए पौषध में सामायिक नहीं पचखी जा सकती है। सामयिक कभी भी की जा सकती है। जबकि पौषध चार प्रहर अथवा अहोरात्र का होता है। पौषध सामायिक के पश्चात शुरू होगा। सामायिक की आलोयना अलग होती है और पौषध की आलोयना अलग होती है। पौषध का त्याग अलग है। पौषध अपने आप में स्वतंत्र है। पौषध बिना उपवास के नहीं किया जा सकता, जबकि रात्रि संवर की साधना खा-पीकर भी की जा सकती है। मुनि रमेश कुमार ने उपस्थित जनमेदिनी को फरमाया – भारत की दो प्राचीन संस्कृतियां रही हैं-वैदिक एवं श्रमण संस्कृति । वेदों में, ईश्वरवाद...
79वाँ स्वतंत्रता दिवस महापुरुषो की आदाकारी साकार कर बड़े धुमधाम से मनाया गया! विशेष आकर्षण विश्वस्तो द्वारा महापुरुषो के वचन! रक्तदान एवं मॉं पद्मावती के 100 से अधिक बहनों के एकासन संप्पन्न! साध्वी स्नेहाश्री जी द्वारा रक्तदान!🩸। आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे गुरुमॉं महाराष्ट्र सौरभ पु. चंद्रकलाश्री जी म.सा., शासन सुर्या स्नेहाश्रीजी म.सा., मधुर गायिका पु. श्रुतप्रज्ञाश्री जी म.सा. आदिठाणा 3 के पावन सानिध्य मे महापुरुषो की अदाकारी, जैन कॉन्फ़्रेंस पंचम झोन युवा शाखा एवं श्री संघ आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के संयुक्त प्रयास से रक्तदान एवं 100 से ज्यादा बहनो द्वारा मॉं पद्मावती के एकासन के प्रत्याख्यान हुये! विशेष आकर्षण रहा साध्वी स्नेहा़श्री जी द्वारा रक्तदान ! समारोह के आयोजन नियोजन में अॅक्टिव ग्रुप एवं युवामंच द्वारा प्रमुख सहभाग! रक्तदान शिबीर का उद्घाटन संघ ...
आत्मा को प्रतिष्ठित या अप्रतिष्ठित कुल में जन्म प्राप्त कराने वाला गोत्र कर्म है। ऊँच और नीच कुल का भेद कर्मकृत है, मनुष्यकृत नहीं है। किसी भी व्यक्ति की नीचता या उच्चता के मापदण्ड का आधार धन-सम्पत्ति या सत्ता नहीं है अपितु गोत्र कर्म ही है। इस कर्म की तुलना कुम्हार से की गई है। जैसे कुम्हार छोटे-बड़े अनेक घड़ों का निर्माण करता है वैसे ही आत्मा को ऊँच-नीच गोत्र में पैदा कराने वाला यह कर्म है। अनीति और अधर्म के कारण जिस कुल ने बदनामी प्राप्त की हो वह नीच कुल है तथा जिस कुल ने सत्य, न्याय, सेवा और त्याग से प्रतिष्ठा प्राप्त ही है वह उच्च कुल है। उच्च कुल में रक्त के संस्कार, खानदानी, सभ्यता – संस्कृति की महत्ता एवं भव्यता के संस्कार मिलते हैं, जबकि नीच कुल में कलह, पापाचरण, बेईमानी और स्वभाव की मलिनता के कुटिल संस्कार विरासत में मिलते हैं। गोत्र कर्म की इस उच्चता और नीचता का आधार निरहं...
सनातन धर्म विद्यालय के प्रांगण में विद्यालय सचिव श्री एस पी बाहेतीजी, विद्यालय प्राचार्या श्रीमती एस लता, मुख्य अतिथि श्री शिव कुमार गोइन्का (अध्यक्ष के जी आई क्लोथिंग ) विद्यालय कोषाध्यक्ष श्री सुनील डागा , विद्यालय इ सी ए समन्वयक श्री गिरी बागडी , श्रीमती संतोष दमानी, अध्यापिकाओं , अभिभावकों और विद्यालय की छात्राओं ने बड़े हर्षोल्लास के साथ 79 वाँ स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी उत्सव मनाया I रंगारंग कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और प्रार्थना के साथ हुआ। मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण किया गया तत्पश्चात कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई I मुख्य अतिथि ने छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए अपने विचार व्यक्त किये। धन्यावाद भाषण और राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ I
प्रवचन – 15.08.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) बंधूंनो-भगिनींनो, आज आपण सर्व भारतवासीयांसाठी अत्यंत पवित्र दिवस – 15 ऑगस्ट – स्वातंत्र्य दिन साजरा करीत आहोत. 1947 मध्ये आपल्याला परकीय सत्तेतून मुक्ती मिळाली. हा दिवस आपल्याला केवळ देशाच्या स्वातंत्र्याचीच आठवण करून देत नाही, तर स्वातंत्र्य या संकल्पनेचा खोल अर्थही सांगतो. जैन धर्म आपल्याला शिकवतो की, दोन प्रकारचे स्वातंत्र्य असतात – बाह्य स्वातंत्र्य आणि अंतःकरणातील स्वातंत्र्य . 1. बाह्य स्वातंत्र्य • परकीय सत्तेच्या जुलूमातून मुक्त होणे, आपल्या इच्छेनुसार देशाचा कारभार चालविण्याचा अधिकार मिळणे, हा बाह्य स्वातंत्र्याचा भाग आहे. • या स्वातंत्र्यासाठी आपल्या स्वातंत्र्यसैनिकांनी बलिदान दिले, त्याग केला, तुरुंगवास सहन केला. • आपल्याला मिळालेल्या या स्वातंत्र्याची किंमत प्रचंड आहे. 2. अंतःकरणातील स्वातंत...