सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद विद्वद्वर्या डॉ. श्री ललित प्रभाजी म.सा. पूज्य गुरुदेव श्री सोभग्यमल जी महारासा के लिए फरमाते है कि.. *पुण्य स्वरूप गुरुदेव ! सुज्ञान सिन्धुः ।* *रत्नत्रयस्य परिपालक लोक बन्धुः ।* *ज्योतिर्मयं ललित – शान्त-सुमोद पूर्णम् ।* *सौभाग्य सद्गुरुवरं शिवदं स्मरामि ॥ २ ॥* • पुज्य प्रर्वतक की प्रकाश जी मासा. फरमाते है कि → प्रबल पुण्य का उदय हो, पाप कर्म की रुकावत हो तो हृदय में शुभ भाव जन्म लेते है, वैसी पात्रता होनी चाहिए हृदय भी बर्तन है शुद्ध भाव दुध रूप है, ह्रदय अशुद्ध है तो शुभ भाव टिकने वाले नहीं। पहली बात जन्म लेंगे नहीं। शुभ भाव… जीव को आगे बढ़ाने का अवसर देता है। 1 *अज्जविये – सरलता अर्जवता* – माया का अंधकार दिल से अलग न हो तो सरलता आती नही, मायावी – किसको ठगु, किसको दुःख दु…माया करे तो जीव नरक में जाता ह...
सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद पुज्य श्री दर्शन मुनि जी मासाः→ यह जीव संसार के अन्दर घुमता हे ? मोह के कारण! मोह संसार में जीव को रुलाता है। पदार्थ, परिवारिक, साधुसंत का मोह हम, छोड़ने को तैयार नहीं। मोह से कर्मों का बंधन कर रहे हो। मोह रखते हे पदार्थ के अन्दर परिवार के लिये मोह रखते है। जो मोहित होता हे वह अपना भान भुल जाता है वह नशे में हे ,,,मोह के। *मोहनीय कर्म की 28 प्रकृतिया है*, मिथ्यात्व, सम्यक, मिश्र मोहनीय तीन भेद हे, 25 मिथ्यात्व बताये हे, मिथ्यात्व छोड़ना मुश्किल है। चेलना रानी जिनेश्वर देव को मानने वाली राजा श्रेणिक गौतम बुद्ध को मानने वाले थे। वह डिगी नहीं, डीगने वाले को स्थिर कर दिया। मिथ्यात्व से समयकत्व में स्थिर कर दिया। *पुज्य प्रवर्तक की प्रकाश मुनि जी मासा* → *संशुद्ध स्वात्मरत-धर्म-सुचीर्ण-तत्त्वम् ।* *देहात्मभेद-परिपुष्ट – जितेन्द्रियत् त्वम् ।* ...
संवतसरी पर्व पर प्रतिक्रमण के पश्चात जैन धर्मावलंबियों ने अपने अपराधों के लिए मांगी माफी Sagevaani.com @शिवपुरी। मूर्ति पूजक श्वेताम्बर जैन समाज के खत्तरगज सम्प्रदाय के अनुयायियों का पर्यूषण पर्व क्षमावाणी के साथ सानंद संपन्न हुआ। कल धर्मावलंबियों ने व्रत उपवास रखकर प्रतिक्रमण किया और आज पारणे के पश्चात जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज की उपस्थिति में एक दूसरे से सालभर में हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना की। इस अवसर पर साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि क्षमावाणी पर्व पर शब्दों से नहीं, बल्कि दिल से क्षमा मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गलती करना इंसान का स्वभाव होता है, लेकिन गलती कर क्षमा मांगने वाला महामानव होता है। मूर्तिपूजक जैन समाज के अध्यक्ष तेजमल सांखला और सचिव विजय पारख ने भी सभी प्राणियों से क्षमा याचना की। प्रारंभ में क्षमावाणी पर्व का महत्व बताते हुए ...
पर्यूषण पर्व का आज सातवां दिन, साध्वियों ने कहा कि कर्मों का फल तीर्थंकरों को भी भोगना पड़ता है Sagevaani.Com @शिवपुरी। पर्यूषण पर्व के सातवे दिन प्रसिद्ध साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ, 22वे तीर्थंकर भगवान नैमीनाथ, 23वे तीर्थंकर भगवान पाश्र्वनाथ और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के जीवन चरित्र को चित्रित करते हुए कहा कि कर्मों का फल सभी को भोगना पड़ता है। भगवान महावीर साधना काल में कई बार जेल गए। उन्हें फांसी पर भी लटकाया गया। अनार्य भूमि में विचरण करते समय उन्हें यातनाओं का सामना करना पड़ा। संगम देव ने एक रात में उन्हें 20 उपसर्ग दिए। साध्वी रमणीक कुंवर जी ने बताया कि 30 वर्ष की उम्र में दीक्षित भगवान महावीर को 42 वर्ष की उम्र में केवल्य ज्ञान प्राप्त हुआ और 72 वर्ष की उम्र में उन्हें निर्वाण हुआ। साध्वी जयश्री जी ने सुंदर भजन का गायन किया। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ...
मालव मणि के नाम से विख्यात हैं साध्वी जी, शिवपुरी में भी 85 वर्ष पूर्व कर चुकी हैं धर्म प्रभावना Sagevaani.com @शिवपुरी। शिवपुरी में चातुर्मास कर रहीं प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी म.सा. की दाद गुरुणी मालव मणि साध्वी चांद कुंवर जी म.सा. की 38वीं पुण्यतिथि त्याग, तपस्या और सामयिक के आयोजन के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर 108 एकासना कर जैन श्रावक और श्राविका साध्वी चांदकुंवर जी महाराज को अपनी भावांजलि श्रीचरणों में अर्पित करेंगी। मालव मणि के नाम से विख्यात साध्वी चांदकुंवर जी महाराज शिवपुरी की धरा को भी अपने चरणरज से पवित्र कर चुकी हैं। आज से 85 वर्ष पूर्व संवत 1995 में उनका शिवपुरी में आगमन हुआ था जहां उन्होंने जिन धर्म की प्रभावना के साथ-साथ कोचेटा परिवार साध्वी मनोहर कुंवर जी महाराज को दीक्षा भी दिलवाई थी। कमला भवन में आयोजित धर्मसभा में साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने अपनी दाद गुरुणी स...
कांकरिया गेस्ट हाउस, किलपाक में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के तत्वावधान में भगवान महावीर जैन विद्यापीठ के प्राचार्य श्री प्रकाशचंदजी जैन, जयपुर द्वारा व्याख्यान माला में क्षमा की महत्ता बताते हुए कहा कि क्षमा वीरस्य भुषणम अर्थात क्षमा वीरों का आभूषण हैं | कवि श्री रामधारी सिंह दिनकर की कविता का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षमा शोभती उस भुजंग को जो गरल हैं | अपने शब्दों,क्रिया,विचार,चारित्र और आदत इन पांचो पर हमेशा हमारी नजर व ध्यान रहना चाहिए | क्रोधी व्यक्ति को महा चांडाल कहा गया हैं | क्रोध के समय मौन धारण कर लेना सर्वश्रेष्ठ उपाय हैं | क्रोध के माहौल से बचने के लिए छोटे-छोटे नुस्खे हैं कि आप उस स्थान से कुछ समय के लिए हट जाए,जहां क्रोध का माहोल हैं,क्रोधी व्यक्ति उकसाए तो उस समय मुंह मे पानी भर ले,तुरन्त प्रत्युत्तर ना दे,प्रतिक्रिया ना करें | लोभी जाने अमर मारी काया,थोड़ा से ...
कांकरिया गेस्ट हाउस, किलपाक में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,तमिलनाडु के तत्वावधान में भगवान महावीर जैन विद्यापीठ के प्राचार्य श्री प्रकाशचंदजी जैन, जयपुर द्वारा व्याख्यान माला में संयम की महत्ता बताते हुए कहा कि आत्मशुद्धि का सर्वश्रेष्ठ उपाय संयम हैं | प्रभु के उपदेश दो रुप में हैं विध्यात्मक व निषेधात्मक | धर्म में जीव का मन लगना, प्रवर्ति करना अर्थात अपने जीव को धर्म से जोड़ों और निषेधात्मक में पापों से निवृति अर्थात पाप से नाता तोड़ो | पृकृति भी अगर कुछ पल के लिएसंयम तोड़ दे, मर्यादा छोड़ दे तो विनाशकारी परिणाम हो जाते हैंl जैसे कच्छ-भुज में कुछ सेकंड मात्र के लिए आये भूकंप का परिणाम, सागर अगर अपनी सीमा लांघ दे तो चेन्नई में आई सुनामी की लहर से हुआ नुकसान और हवा अगर तूफान का रुप ले लेती हैं तो प्रलय हो जाती हैं | उत्तराध्ययन सूत्र के बत्तीसवें अध्ययन में पांच इन्द्रियों के दुरुपयोग के ...
पर्युषण पर्व के अंतर्गत कांकरिया गेस्ट हाउस, किलपाक में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,तमिलनाडु के तत्वावधान में स्वाध्यायी बन्धुवर भगवान महावीर जैन विद्यापीठ के प्राचार्य श्री प्रकाशचंदजी जैन जयपुर द्वारा व्याख्यान माला में स्वाध्याय की महत्ता बताते हुए कहा कि अष्ठ पाहुड ग्रंथ में जिन वयण ओसहणँ अर्थात जिनवाणी के वचन राम बाण ओषधि के समान हैं,अमृत सम हैं | दुःखो को क्षय करने की कला जिनवाणी में हैं | तीन प्रकार से प्रकाश प्रज्वलित होता हैं | माचिस की तीली से जिसका प्रकाश अल्प समय तक रहता हैं | दीपक का प्रकाश,जब तक दीपक में तेल रहता हैं और तीसरा रत्न मणि का प्रकाश जो हमेशा रहता हैं | इसी तरह क्षायिक सम्यक्त्व का प्रकाश हमेशा रहता हैं,स्वाध्याय भी एक ऐसा ही दीपक हैं | उतराध्यन सूत्र के छब्बीसवें अध्ययन में साधक की दिनचर्या में दिन के प्रथम प्रहर में स्वाध्याय द्वितीय प्रहर में ध्यान तृतीय प्र...
पर्युषण पर्व के अंतर्गत कांकरिया गेस्ट हाउस, किलपाक में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,तमिलनाडु के तत्वावधान में स्वाध्यायी बन्धुवर भगवान महावीर जैन विद्यापीठ के प्राचार्य श्री प्रकाशचंदजी जैन जयपुर द्वारा व्याख्यान माला में स्वाध्याय की महत्ता बताते हुए कहा कि अष्ठ पाहुड ग्रंथ में जिन वयण ओसहणँ अर्थात जिनवाणी के वचन राम बाण ओषधि के समान हैं,अमृत सम हैं | दुःखो को क्षय करने की कला जिनवाणी में हैं | तीन प्रकार से प्रकाश प्रज्वलित होता हैं | माचिस की तीली से जिसका प्रकाश अल्प समय तक रहता हैं | दीपक का प्रकाश,जब तक दीपक में तेल रहता हैं और तीसरा रत्न मणि का प्रकाश जो हमेशा रहता हैं | इसी तरह क्षायिक सम्यक्त्व का प्रकाश हमेशा रहता हैं,स्वाध्याय भी एक ऐसा ही दीपक हैं | उतराध्यन सूत्र के छब्बीसवें अध्ययन में साधक की दिनचर्या में दिन के प्रथम प्रहर में स्वाध्याय द्वितीय प्रहर में ध्यान तृतीय प्र...
जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी ने माता पिता के प्रति कृतज्ञ रहने की दी प्रेरणा आचार्य पट्टावली का किया विशद् विवेचन Sagevaani.com @Chennai श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में पर्यूषण महापर्व के सातवें दिन धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि जीवन को उन्नत बनाने के लिए जरूरी है दिशा परिवर्तन। चाहे तीर्थंकर हो या सामान्य व्यक्ति जब जीवन में दिशा परिवर्तन कर लेता है तो वह सिद्धत्व को प्राप्त कर सकता है और उसके लिए निमित्त है- प्रेम। सभी जीवों को अपने समान समझना। जीवों से प्रेम होगा तभी अहिंसा, दया का पालन किया जा सकता है। हमें भी परमात्मा बनना है तो प्रेम की दिशा को बदलना होगा। हमने अभी तक प्रेम पुदगलों, पदार्थों, व्यक्तियों से किया है। जबकि हमें प्रेम करना है स्...
गच्छाधिपति ने भगवान महावीर के पुण्यकाल, परिषह काल और परोपकार काल का किया चित्रण Sagevaani.com @चेन्नई ; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में पर्यूषण महापर्व के छठे दिन धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के साथ संस्कारों का बीजारोपण भी जरूर हो। जैसे मन्दिर, पौषधशाला, उपासरा, स्थानक भवन जरूरी हैं। उससे भी जरुरी है संस्कारों को देने वाले विद्यालय, गुरुकुल। उन विद्यालयों में व्यवहारिक शिक्षा के साथ संस्कार युक्त धार्मिक शिक्षा भी बच्चों को मिलती रहे, जीवन जीने की कला सीख सके। ◆ बड़ों के प्रति रहे विनम्र गुरुवर ने प्रेरणा देते हुए कहा कि हमारे जैनत्व के संस्कारों को सुरक्षित रखने के अपने खानपान की शुद्धि बनाये रखना जरूरी है। बच्चों के साथ स्...
तेयुप द्वारा जिंदगी सवारें अनुष्ठान से आयोजित Sagevaani.com @चेन्नई ; युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी लावण्यश्रीजी के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में “दांपत्य जीवन को संवारे अनुष्ठान से” कार्यक्रम का शानदार रोचक आयोजन हुआ। साध्वी लावण्यश्री ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि शब्द में बहुत बड़ी ताकत होती है। जैन धर्म में अनेकानेक मंत्र है। महामंत्र की कोटि में नमस्कार महामंत्र का श्रद्धा से जप किया जाता है। ग्रह, नक्षत्र, जीवन शैली सब अनुकूल हो जाते हैं। मंत्र की शक्ति अचिंत्य होती है। अनुष्ठान हमें सशक्त बनाते हैं, वह हमें कठिन समस्याओं से निपटने में मदद करते हैं और अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होते हैं। आपने आध्यात्मिक अनुष्ठान के माध्यम से जयाचार्य के समय की अनेक घटनाओं का उल्लेख करते हुए मंत्र की उपयोगिता पर आपने मंगल...