Blog

हैप्पी रहने से रिलेशनशिप बनता मजबूत: डॉ प्रियदर्शना जैन

 ★ शासनश्री साध्वी शिवमाला ने दुराव, छुपाव मुक्त जीवन जीने की दी प्रेरणा  ★ तेरापंथ ट्रस्ट बोर्ड, महिला मण्डल के तत्वावधान में आयोजित हुआ दाम्पत्य शिविर कार्यशाला Sagevaani.com @चेन्नई ; युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या शासनश्री साध्वी शिवमालाजी के सान्निध्य में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ ट्रस्ट एवं तेरापंथ महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में तेरापंथ भवन, ट्रिप्लीकेन में दांपत्य शिविर कार्यशाला का आयोजन किया गया। ◆ दाम्पत्य जीवन में सहयोग, सहकार, सामजस्य जरूरी   शिविरार्थीं दम्पती के साथ जनमेदनी को सम्बोधित करते हुए शासनश्री साध्वी शिवमाला ने कहा कि एक ने कही और दूसरे ने मानी, तो समझों दोनों ज्ञानी। दाम्पत्य जीवन में सहयोग, सहकार, सामजस्य जरूरी है। नारी परिवार, समाज, राष्ट्रीय उत्थान में बड़ी जिम्मेवारी निभाती है। नारी शक्ति, भक्ति, अनुरक्ति की पूजारी है। जीवन रुपी फुलवारी, गुलश...

पैसठिया छंद एवं यंत्र से होती पितृदोष की शांति: मुनि सुधाकर

★ शिमोगा में हुआ भव्य पैसठिया अनुष्ठान Sagevaani.com @शिवमोंगा; आचार्य श्री महाश्रमणजी के शिष्य मुनि श्री सुधाकरजी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ सभा, शिवमोगा द्वारा भव्य पैसठिया छंद एवं यंत्र का अनुष्ठान किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने श्रद्धा भाव के साथ सहभागिता दर्ज कराई। मुनिश्री ने पूर्ण विधि के साथ पैसठिया छंद एवं यंत्र की आराधना कराई। मुनिश्री सुधाकरजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा पैसठिया छंद आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। यह समस्याओं का अचूक समाधायक है। इस यंत्र की विधि सहित साधना करने से पितृ दोष एवं सभी प्रकार के ग्रह दोष की शांति हो सकती है। यह छंद एवं यंत्र परिवार में खुशहाली लाता है, संबंधों को मधुर बनाता है एवं धर्म ध्यान का भी विकास करता है। मुनि नरेशकुमारजी ने गीत का संगान किया। मंगलाचरण तेरापंथ महिला मंडल, स्वागत भाषण तेरापंथ सभा के अध्यक्ष चंदनमल भटेवरा, आभार सभ...

करुणा के भण्डार होते है तीर्थंकर भगवान : जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी 

नेमीनाथ भगवान के दीक्षा कल्याणक पर उनके जीवन से ले प्रेरणा    Sagevaani.com @चेन्नई ; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में द्वितीय श्रावण शुक्ला छठ के मंगल प्रभात में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि आज नेमीनाथ भगवान का दीक्षा कल्याणक दिवस है। महातपस्वी शरणसागरजी महाराजजी की पुण्यतिथि भी है। लोहावट के चातुर्मास में आषाढ़ शुक्ल चौवदस से तपस्या प्रारम्भ की और 52वें दिन की तपस्या में आपका स्वर्गवास हुआ। बड़ी उम्र लगभग 50 वर्ष की उम्र के बाद दीक्षा ली। कठोर साधुचर्या का वे पालन करते। वे किसी तरह का दोष नहीं लगाते। अपना काम स्वयं करते। ऐसे श्रवण को हम वन्दना करते हैं।   ◆ मुमुक्षुओं के नेमीनाथ की आराधना से दीक्षा मुहुर्त मिलता शीघ्र भगवान अरिष्ट...

संथारा साधक मदनलाल गोठी की प्रथम पुण्यतिथी 24 अगस्त को

मेडिकल कैम्प एवं अन्नदानं का आयोजन Sagevaani.com @Chennai: संथारा साधना का महायात्री 12 व्रतधारी श्रावक श्री मदनलाल गोठी के प्रथम पुण्य स्मरण दिवस प्रसंग पर जरूरतमंदों के लिए निःशुल्क आँखों व दाँतों की जाँच हेतु मेडिकल कैम्प का आयोजन टी.नगर राधाकृष्ण स्ट्रीट स्थित अलमेलुमँगा कल्याण मण्डप में गुरुवार दिनाँक 24 अगस्त को सेवरे 9.30 बजे से 2 बजे तक महावीर इंटरनेशनल चेन्नई मेट्रो एवं चोपड़ा डेंटल केअर नुंगमबक्कम के संयोजन में आयोजित किया जा रहा है। मेडिकल कैम्प में पंजीकृत सभी लोगों के नेत्र एवं दाँतों की निःशुल्क जाँच के साथ शुगर एवं उच्च रक्तचाप की जाँच भी की जायेगी। इस कैम्प में डॉ. अग्रवाल नेत्र अस्पताल एवं चोपड़ा डेण्टल केअर के निर्देशक डॉ पंकज जैन एवं सहयोगी चिकित्सक अपनी निःशुल्क सेवाएं प्रदान करेंगे। यह कैम्प गौतमचन्द डॉ उत्तमचन्द अनिल दीपक विशाल गोठी परिवार टी.नगर के सहयोग से प्रायोजित क...

जितना मन में पाप, दोष, गलतियां, कर्मबंद ज्यादा उतनी आत्मा में असमाधि ज्यादा रहेगी: डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.

   Sagevaani.com @ राजेन्द्र भवन चेन्नई  🪷 *विश्व पूजनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, संघ एकता शिल्पी श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश    🪔 *विषय अभिधान राजेंद्र कोष भाग 7* ~ जीवन में सर्वश्रेष्ठ सुख या दुख की पलों में ही स्मृति रहती है और स्मृति कई सालों तक रहने का मूल कारण हमारा जोड़ाण (involvement) है। ~ जिस दिन आत्मानुभूति की पले प्रकट होगी फिर कर्म हमें कभी भी दुखी नहीं ही कर सकता और ना ही भव भ्रमण भटका सकता है। ~जितना मन में पाप, दोष, गलतियां, कर्मबंद ज्यादा उतनी आत्मा में असमाधि ज्यादा रहेगी। ~ प्रभु के भक्त को प्रभु के मार्ग पर चलते चलते पवित्रता और परिणति की अनुभूति से प्रभु का मिलन होता ही है जिसे सम्यक् दर्शन कहते हैं। ~ प्रभु के श्...

हमारी स्वर्णिम संस्कृति श्रेष्ठ संस्कारों पर ही अवलंबित है : देवेंद्रसागरसूरि

श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में धर्म प्रवचन देते हुए पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि अहंकार स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ मानने के कारण उत्पन्न हुआ एक व्यवहार है। यह एक ऐसा मनोविकार है जिसमें मनुष्य को न तो अपनी त्रुटियां दिखाई देती हैं और न ही दूसरों की अच्छी बातें। शांति का शत्रु है अहंकार। जब अहंकार बलवान हो जाता है तब वह मनुष्य की चेतना को अंधेरे की परत की तरह घेरने लगता है। जिस प्रकार नींबू की एक बूंद हजारों लीटर दूध को बर्बाद कर देती है उसी प्रकार मनुष्य का अहंकार अच्छे से अच्छे संबंधों को भी बर्बाद कर देता है। हमारे मनीषियों ने अहंकार को मनुष्य के जीवन में उन्नति की सबसे बड़ी बाधा माना है। अहंकारी मनुष्य परिवार और समाज को अधोगति की ओर ले जाता है। इसके विपरीत संस्कार मनुष्य को पुनीत बनाने की प्रक्रिया है। श्रेष्ठ संस्कार हमें मन, वचन, कर्म से पवित्रता की ओर ले जाते ह...

साध्वी रमणीक कुंवर जी ने दीक्षा की अनुमति लेने के लिए किया था विवाह : साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

साध्वी रमणीक कुंवर जी के 81वे जन्मदिवस पर आयोजित हुई गुणानुवाद सभा Sagevaani.com @चेन्नई। 62 वर्ष से जैन साध्वी के रूप में संयम का पालन कर रहीं साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज के 81वे जन्मदिवस पर आयोजित गुणानुवाद सभा में उनकी सुशिष्या साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने उनके व्यक्तित्व की सहजता, सरलता, आत्मीयता और वात्सल्यता जैसी खूबियों के साथ-साथ उनकी आध्यात्मिक विशेषताओं को भी बखूबी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गुरूणी हो तो साध्वी रमणीक कुंवर जी जैसी जिन्होंने एक माँ के रूप में, एक गुरू के रूप में और एक संरक्षक के रूप में हमारी देखभाल की है। जहां पीठ थपथपाने का मौका आया वहां उन्होंने शाबाशी भी दी और जहां आवश्यकता हुई वहां वह कड़े प्रहार करने से भी नहीं चूकीं। आज उनके सानिध्य में रह रहीं साध्वियां जो कुछ भी हैं वह उन्हीं के आशीर्वाद की बदौलत हैं। गुणानुवाद सभा में स्थानकवासी जैन समाज के अध्यक्ष र...

अतिजात वह पुत्र होता है जो अपने नाम से जाना जाता है: 

सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद ठाणागं में चार प्रकार के पुत्र का वर्णन आता है *अतिजात, अनुजात, अवजात, कुलंगात* *अतिजात*-वह पुत्र होता है जो अपने नाम से जाना जाता है। *अनुजात* – जिसे पिता के नाम से जाना जाता है। *अवजात*- मामा के नाम से जाना जाता है *कुलंगात*- जो ससुर के नाम से जाना जाता है । पुरुषार्थ करके व्यक्तित्व पैदा किया श्री नरेन्द्र मोदी जी ने। पुरुषार्थ का प्रभाव, जो प्रबल पुरुषार्थी होते है ऐसे व्यक्तित्व पैदा करते है उनके पीछे चलते है वे अतिजात पुत्र होते हैं *चरमशरीरी, महापुरुष* वे अपने नाम से जाने जाते हो जिसको अपने नाम से प्रसिद्धि पाना है वह हमारे पास आ जाओ । हमारी सस्कारी पद्धति है पिता का नाम सरनेम गांव का नाम बोला जाता है। *123 वाँ जन्म दिन है* आचार्य श्री आनन्द ऋषि जी महारासा का । माँ ने धर्म संस्कार दिये। जो माता बच्चे धर्म से जोड़ हे वह माता माता ह...

81वे जन्मदिवस पर विशेष

साध्वी रमणीक कुंवर जी! गुरु छाया का प्रतिरूप प्रसिद्ध जैन संत मालव केसरी पूज्य श्री सौभाग्यमल जी म.सा. के मुखारबिंद से दीक्षा लेने वाली और शांति की प्रतिमूर्ति पूज्य शांति कुंवर जी म.सा. की सुशिष्या साध्वी रमणीक कुंवर जी का व्यक्तित्व जिन शासन की अनमोल धरोहर है। उनके गुणों का जितना बखान किया जाए उतना कम है। सरलता, सहजता, वात्सल्यता और निरहंकारिता की वह प्रतिमूर्ति हैं। उनके चेहरे पर हर समय बाल सुलभ मुस्कान रहती है हर क्षण वह आशीर्वाद देती हुईं नजर आती हैं। उनके दर्शन और वंदन करने वाले श्रद्धालुओं से जब वह कहती हैं दया पालो पुण्यवानो तो रोम-रोम पुलकित हो उठता है। अनुशासित और संस्कारित जीवन जीने की वह प्रेरणा देती हैं और भारतीय संस्कृति को विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति बताकर उसका आचरण करने की नसीहत वह अपने अनुयायियों को देती हैं। गुरु भक्ति की वह अनुपम मिसाल हैं। अपनी गुरुणी पूज्य शांति कुंव...

सामना करने वालों के कदमों में जहां होता है : देवेंद्रसागरसूरि

हौसलें अगर बुलंद हों तो मंजिलें आसान हो जाती हैं। कुछ कर गुजरने का जज्बा अगर हममें हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता।उपरोक्त बातें आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में धर्म प्रवचन देते हुए कही, उन्होंने आगे कहा कि हमारी ज़िंदगी का हर पल इम्तिहानों से भरा होता है। कदम-कदम पर मुश्किलों का सामना होता है और मुश्किलों से भाग जाना तो आसान होता है, साथ ही सामना करने वालों के कदमों में जहां होता है। किसी ने खूब कहा है तारों में अकेला चांद जगमगाता है, मुश्किलों में अकेला इंसान डगमगाता है, हमें कांटों से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि कांटों में ही गुलाब मुस्कुराता है। हममें से बहुत से लोग जब नए सपने, नई सोच, रखने की कोशिश करते हैं तो बहुत से सवाल हमारे दिमाग में आते हैं। क्या, क्यों, नहीं होगा, लोग क्या कहेंगे आदि-आदि। इन सभी सवालों के जवाब भी ह...

माया की कषाय वाले माया में जीते है: महासती ललित प्रभाजी

*सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद* *प्रखर पुण्य संयुक्तम्, महाव्रती जितेन्द्रियम् । प्रियवक्ता स्वभावेन, श्री सौभाग्य गुरुवे नमः ॥१॥* पुज्य महासती ललित प्रभाजी गुरुदेव पूज्य सोभग्यमल महारासा के लिए कहते है कि वे स्वभाव से प्रिय वक्ता थे । ऊपर से मधुर ओर अंदर से भी मधुर पुज्य की प्रकाश मुनि जी मासा फरमाते है कि.. थानांग सूत्र में चार तरह के घड़े का वर्णन आता है  *मधु का घड़ा मधुका ढक्कन, मधु का घड़ा जहर का ढक्कन ,*जहर का घड़ा मधु का ढक्कन* ,*जहर का घड़ा जहर का ढक्कन*, 1 एक घड़ा अन्दर से शहद अंदर भी मीठा, ऊपर से भी मीठा 2 एक घड़ा अंदर मीठा बाहर से जहर वाला 3 एक घड़ा ऊपर से मीठा अंदर से जहर जैसा 4 एक घड़ा ऊपर व अंदर दोनों में जहर जैसा। *मुखं पदं वाणी मधुरा* जो मुख से प्रसन्न वाणी में मधुर वह धूर्त होते है , जो छल कपट वाले ठग होते है ठगते है, माया की कषाय वाले माया में जीते है । मोह : मू...

छोटा सा निमित्त पाकर कल्याण मार्ग पर अग्रसर हो: आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीजी

किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्यश्री केशरसूरिश्वरजी के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरिश्वरजी म. सा. ने वैराग्य गुण अधिकार के तहत कहा कि शक्ति बिना तप नहीं होता, सत्व के बिना वैराग्य नहीं आ सकता। वैराग्य का फल तब मिलता है जब उसके भाव बनते हैं। उन्होंने कहा धर्म करवाया नहीं, किया जाता है। ज्ञानी कहते हैं जागृति के काल में धर्म नहीं किया तो मृत्यु के काल में धर्म समझ में नहीं आएगा। दुर्जन अपने प्रवाह में दूसरों को भी खींच लेते हैं। जीवन का अंतिम सार यह है कि जिसके लिए पल-पल पापों का सेवन किया, अंतिम समय में इनमें से कुछ भी हमारे साथ आने वाला नहीं है। ऐसा ज्ञान आता है तो अपनी ओर से छोटा सा निमित्त पाकर भी कल्याण मार्ग पर अग्रसर हो सकते हैं। ऐसा करने वाले स्वयंबुद्ध कहलाते है।हमने हमारे कर्मबंध कब, कितने किए, यह तो पता नहीं। ज्ञानी कहते हैं ...

Skip to toolbar