पर्युषण पर्व के दूसरे दिन उपाध्याय प्रवर ने बताया ‘कैसे बोलें’ Sagevaani.com @रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने बुधवार को कहा कि आपके वचन आपका भाग्य तय करते हैं। आपकी भाषा से पता चलता है कि आप किस कुल के हैं, आपका चरित्र क्या है। आपकी भाषा आपको वंदनीय भी बना सकता है, और निंदनीय भी। उन्होंने कहा कि जुबान तो हमें जन्म से मिलती है, लेकिन भाषा हमें सीखनी पड़ती है। आपके शब्द किसी को जीवनदान दे सकते हैं, तो किसी की जान भी ले सकते हैं। शब्द से रिश्ते बनते भी हैं और बिगड़ते भी हैं। हमें बोलना तो आता है, पर कब, कहां और कैसे बोलना है, ये परमात्मा हमें सिखाते हैं। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी। ललित पटवा ने बताया कि आज पर्युषण महापर्व का दूसरा दिन है। टैगोर नगर स्थित लालगंगा पटवा भवन में प्रतिदिन की भांति आज भी प्रातः 6 बजे से प्रार्थना (भक्तामर स्...
श्वेताम्बर जैन समाज के पर्यूषण पर्व की धूम, उत्साह के साथ हो रही है धर्म आराधना Sagevaani.com @शिवपुरी। जीव दया, सुपात्र दान, साधार्मिक भक्ति और संसार के सभी प्राणियों से अपने ज्ञात-अज्ञात अपराधों के लिए क्षमा याचना कर आप अपने पर्यूषण पर्व को सार्थक बन सकते हैं। पर्यूषण पर्व के दौरान विभाव से स्वभाव में आने का प्रयास करें और अपने मन की मलीनता, कटुता और वैमनस्यता को धोकर एक नये जीवन की शुरुआत करें। उक्त उद्गार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने आराधना भवन में पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन आयोजित एक विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए। साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यूषण पर्व का संदेश साफ है खुद भी जिये और दूसरों को भी जीने दें। भगवान महावीर का संदेश भी यही है जियो और जीने दो। जैन साध्वियों के प्रवचन के बीच-बीच में साध्वी जयश्री जी के सामयिक और प्रासंगिक भजनों ने प्रवच...
स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई विश्व ज्ञानी प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न दीक्षा दाणेश्वरी, राष्ट्रसंत श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय : प्रवर्तना हमारी की निवर्तना कर्मों की*🪔 ~ स्वयं की चेतना का मूल्यांकन और निरीक्षण करना वह है पर्युषणा महापर्व। ~ जो हमारे मन में रहे दूषण, दोषों, पापों का नाश करें वह है पर्यूषण। ~ ज्ञानी भगवंतो ने साधना, परम त्याग किया इसीलिए महा ज्ञानी बने। ~ यह मानव भाव छोटा है लेकिन बलवान है, क्षणिक है लेकिन परम मूल्यवान है। ~ पर्यूषणापर्व सिर्फ कथा सुनने के लिए नहीं है किंतु मोरल तैयार करने के लिए ही है। ~ धर्म जब आत्मा में प्रकट होता है तब साधक को विराट अस्तित्व में स्थान मिलता ही है। ~ ज्ञानी भगवंत कहते हैं क...
Sagevaani.com @किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने अष्टान्हिका प्रवचन के पहले दिन पर्व का मतलब समझाते हुए कहा कि सारे संघ का मिलन, सारी साधनाओं का केंद्र पर्व कहलाता है। पर्युषण तप, त्याग, शील, जीवराशि के प्रति मैत्री भावना आदि गुणों का विकास करने का महापर्व है। यह एक पर्व का रूप है, त्यौहार नहीं। त्यौहार के अंदर सामग्री की प्रधानता होती है, पर्व के अंदर तप, त्याग, साधना आदि का समावेश होता है। पर्व विवेक का दीपक जलाता है। त्यौहार भोगवाद प्रधान है तो पर्व त्यागप्रधान होता है। पर्व में पवित्रता का शोध चलता है। जैन शासन में कई पर्व होते हैं। पर्युषण पर्व सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन, सम्यक् चारित्र और सम्यक् तप का पर्व है। इस पर्व का आयोजन आदिनाथ भगवान के काल से होता चला आ रहा है। इसकी विशेष चमक महावीर स्वामी के काल ...
नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने फरमाया कि दान को धर्म कहा गया है। भगवान ने जिस दान की प्ररूपणा की है वह दान आत्मा पर लगे आठ कर्मो से मुक्ति दिलाने वाला है संसार भ्रमण मिटाने वाला है। धर्म ‘मंगल’ करता है तारणहार होता है। संयम की आराधना जीव कर पायें नही कर पाये पर विवेकपूर्ण दान देने में कोई कठिनाई नहीं होती। जीव दान की भावना भाते भाते दान देते -2 कैवल्य को प्राप्त कर सकता है। दान देने से तीव्र अशुभ कर्म भी शुभ में परिवर्तित हो जाते हैं। इसलिए दान को समझ इसका व्यवस्थित ढंग से पालन करे। निर्दोष, एषणीय, कल्पनीय दान की भावना भाना चाहिए। अशुभ कर्मो का क्षय करने में धर्म ही एक मात्र सहायक होता है। क्योंकि जन्मदाता भी उस समय साथ नहीं देते। सात जन्मों तक साथ देने वाले जीवनसाथी भी उस समय मुँह फेर लेते है पुण्योदय के समय साथ देने वाले भी मिल जाते है और आगे का...
सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद पर्व पर्युषण की आराधना करना यह भाव देव, गुरु, धर्म के प्रति श्रद्धा से जोड़ता हैl आपमे श्रद्धा का भाव है यह बात पूज्य गुरुदेव प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनि जी महारासा ने बताते हुए कहा कि जीवन कीमती है यह समझ गया वह बुद्धिमानl जो समझकर जीवन में उतार लें वह श्रद्धावान हैl तमसो मा जोतिरगमय अंधकार से प्रकाश की ओर जाओl समय्यक ज्ञान की ओर जाओ, हमारे जीवन मे कोई लक्ष्य नही, क्यों जीना? जीवन का लक्ष्य क्या? धन कमाना, पद, प्रतिष्ठा पाना लक्ष्य नहीl जो यह माने वह अंधकार में हैl अज्ञान दशा जो धन के लिए लड़ रहे होl जानते सभी है कि साथ लेकर जाने वाले नही। स्वाधीन धन है चाहो तो उपयोग करो ,उपभोग करो नही तो जोड़कर मर जाओ । श्रद्धावन लभते ज्ञानम श्रद्धा से ज्ञान मिलता है , जो ज्ञान श्रद्धा से सुनते है वह आत्मा तक पहुचता है। गुरु से बिना पाठ लिए शास्त्र का पाठ नही कर...
Sagevaani.com @सवदत्ती; आचार्य श्री महाश्रमणजी की अनुज्ञा से पधारे उपासक दय श्री स्वरूप चन्द दाँती- चेन्नई एवं श्री शोभागमलजी सांड- कडलूर के निर्देशन में तेरापंथ सभा भवन, सवदत्ती में पर्युषण पर्वाराधना का प्रारम्भ हुआ। नमस्कार महामंत्र से कार्यक्रम की शुरूआत हुई। उपासक श्री स्वरूप चन्द दाँती ने कहा कि तीन तरह के व्यक्ति होते है- स्वदर्शी, परदर्शी और सर्वदर्शी। जो व्यक्ति स्वयं की आत्मा में अवस्थित होता, गुणग्राही होता है, आत्म साधना में लीन प्रत्येक प्राणी चेतना के उर्धारोहण का हीत चिन्तन करता है। वह साधक कहलाता है, स्वदर्शी कहलाता है। परदर्शी व्यक्ति दूसरों के दोषों को ही देखता है और विराधक बनता है। सर्वदर्शी- केवली होते है जो सभी को देखते है। पर्युषण पर्व हमें प्रेरणा देता है कि हम भी साधक बन स्वदर्शी से सर्वदर्शी बनने की दिशा में गतिशील बने। उपासक श्री शोभागमलजी सांड ने कहा कि यह पर्व...
तप त्याग और धर्म आराधना के साथ सैकड़ों श्रध्दांलूओ ने अनेक वस्तुओं के प्रत्याख्यान लिए Sagevaani.com @चैन्नई। सभी पर्वो का राजा पर्वाधिराज पयूर्षण महापर्व। मंगलवार साहूकार पेठ श्री एस. एस.जैन भवन के मरूधर केसरी दरबार में महासती धर्मप्रभा ने अष्टदिवसीय पर्यूषण पर्व के प्रथम दिवस पयूर्षण पर्व मे धर्म आराधना करने वालें सैकड़ों श्रध्दांलूओ को धर्म उपदेश देते हुए कहा कि आत्मा पर कर्म रूपी मैल एवं अपने आपसी रंजिशो मत भेदों और राग द्वेष को भूलाने के साथ मन मे पड़ी उन गांठो को खोले का पर्व है, यह पर्यूषण महापर्व। पर्युषण आत्म जागरण का संदेश देता है।और हमारी सोई हुई आत्मा को जगाने साथ आत्मा द्वारा आत्मा को पहचानने की शक्ति प्रदान करता है। पयूर्षण जैनियों का पर्व नही सम्पूर्ण मानव जाति पर्व है जिसमे आत्मा की उपासना करके कर्मो कि निर्जरा की जाती है। पयूर्षण मे जो मनुष्य श्रध्दां भाव और मैत्री के साथ मन ...
Sagevaani.com @भीलवाड़ा। सभी पर्वा का राजा है पर्वाधिराज पयूर्षण महापर्व ।मंगलवार अहिंसा भवन शास्त्रीनगर पयूर्षण महापर्व के प्रथम दिवस महासती प्रितीसुधा ने पयूर्षण पर्व मे तप त्याग और धर्म आराधना करने वाले सैकड़ों श्रध्दांलूओ को धर्म उपदेश प्रदान करते हुए कहा कि पर्युषण आत्म जागरण का संदेश देता है और हमारी सोई हुई आत्मा को जाग्रत करके आत्मा पर कर्म रूपी मैल को हटाता है। विश्व अनेक त्योहार और पर्व मनाएं जाते है लेकिन आत्मा की शुध्दी का एक इकलौता पर्व है पर्वाधिराज पयूर्षण पर्व जिससे कर्मो की निर्जरा करके काया को निर्मल और आत्मा को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग प्राप्त करके मनुष्य अपने मानव भव सफल बना सकता है और इस आत्मा को मोक्ष गति दिलवा सकता है जब तक हमारे सम्पूर्ण कर्म क्षय नही हो जाते है तब तक हमारी यह आत्मा शुध्द और पवित्र नही बन सकती है।साध्वी संयम सुधा ने अतंगडदशा सूत्र का वांचना करतें हुए कह...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में बिराजमान आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरीश्वरजी ने पर्युषण पर्व की महत्ता के ऊपर प्रकाश डालते हुए कहा की भारत पर्वों और त्योहारों का देश है। उनमें न केवल भौतिक आकर्षण से पर्व है बल्कि आत्म साधना और त्याग से जुड़े पर्व भी हैं। एक ऐसा ही अनूठा पर्व है पर्युषण महापर्व। यह मात्र जैनों का पर्व नहीं है, यह एक सार्वभौम पर्व है, मानव मात्र का पर्व है। पूरे विश्व के लिए यह एक उत्तम और उत्कृष्ट पर्व है, क्योंकि इसमें आत्मा की उपासना की जाती है। आचार्य श्री ने आगे कहा की संपूर्ण संसार में यही एक ऐसा उत्सव या पर्व है जिसमें आत्मरत होकर व्यक्ति आत्मार्थी बनता है व अलौकिक, आध्यात्मिक आनंद के शिखर पर आरोहण करता हुआ मोक्षगामी होने का सद्प्रयास करता है। पर्युषण पर्व अंतरआत्मा की आराधना का पर्व है, आत्मशोधन का पर्व है, निद्रा त्यागने का पर्व है। स...
सूर्य की पहली किरण के साथ अष्टदिवसीय महामंत्र नवकार के जाप के साथ श्रमण संघीय स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के पर्युषण पर्व प्रारंभ हुए। चार्तुमास हेतु विराजित दिवाकर भवन पर मेवाड़ गौरव प्रखर वक्ता पूज्य गुरुदेव रविंद्र मुनि जी महाराज साहब के मुखारविंद से अंतगढ़ दशांग सूत्र का वाचन प्रातः 8:30 बजे प्रारंभ हुआ। सैकड़ो की संख्या में समाजजन ने जिनवाणी श्रवण करने का लाभ लिया शास्त्र वाचन के पश्चात प्रवचन के माध्यम से गुरुदेव ने फरमाया कि धर्म स्थान पर आने के लिए हमें धार्मिक उपकरणों को साथ में लाना चाहिए ना की कीमती चीजों को। हमें वस्तुओं से हटकर हमें धर्म के प्रति आस्था प्रभु की आराधना में मन लगाना चाहिएl अधिक से अधिक हमें नियम एवं व्रत को धारण करना चाहिए व्यसनों को त्याग करते हुए जिनशासन के मार्ग पर चलकर तप त्याग ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिएl पर्युषण पर्व मे हम जितना हो सके उतना पाप व्यसनो से द...
स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई *विश्व हितकांक्षी प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न विश्व संत, परम पूज्य प्रभुमय श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय :मेरे गुरु जयंत बने भगवंत*🪔 ~मनव की प्रथम गुरु माता, विद्यागुरु शिक्षक और आत्म के विकास के लिये सद्गुरु होना ही चाईए। ~जब तक हमारे भीतर मे अहंकार का नाश नही होता है तब तक शासन का प्रेम, गच्छ का प्रेम, आत्मा का प्रेम प्रकट होना असंभव है। ~ परम पूज्य राष्ट्रसंत, जयंतसेंन सुरीश्वरजी महाराज की अपूर्व शासन सेवा, गच्छ के प्रति समर्पण भाव और दीर्घ दृष्टि का मूल कारण परम पूज्य यतींद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब भी थे। ~ परम पूज्य उग्र विहारी जयंतसेन सुरीश्वरजी महाराज ने 55 दिन में 1800 किलोमीटर का उग्र विहार कर...