👉 कल दिनाँक 12/09/2023 मंगलवार पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का पहला दिवस (दूसरी मान्यता अनुसार) हैं। साथ ही मेरे पूज्य पिताश्री उत्कृष्ट संथारा साधक 12 व्रतधारी श्रमणोपासक स्व. श्री मदनलालसा गोठी की प्रथम पुण्यतिथि भी (दिनाँक अनुसार 24 अगस्त एवं तिथि अनुसार भादवा वद 13/पर्युषण पर्व प्रथम दिवस)। पिताश्री ने एक गृहस्थ के रूप में साधुमय जीवन जीया जो हम सभी के लिए प्रेरणादायक है जिसका शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। जीवन की अंतिम सांस तक दर्शनार्थ आने वालों को वो 14 नियम 3 मनोरथ नवकारसी आदि छोटे छोटे व्रत नियम पच्चक्खान करवाते रहे। उनकी पूण्य स्मृति में कल मदन उत्तम ज्ञान ज्योति पुस्तक (जिसमे उनकी सभी प्रार्थनाओं के साथ उन्हीं की प्रेरणा स्वरूप दैनिक चौदह नियम चार्ट तीन मनोरथ श्रावक के 12 व्रत का सुन्दर संकलन किया गया हैं) का विमोचन टी.नगर स्थानक में पूज्य श्री वीरेंद्रमुनीजी म.सा. के सा...
यस यस जैन संघ नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्मबधुओ :- भगवान ने निर्देश दिया यदि दान के साथ विवेक जुड़ जाता है तो वह दान भव सागर से तारने वाला बन जाता है नहीं तो वही दान नरक गति और तिर्यंच गति का कारण भी बन जाता है। दान के साथ जब विवेक जुड़ता है तभी दान धर्म की श्रेणी में आता है। विवेक रहित दान पाप से युक्त हो जाता है। विवेक सहित दान करने वाले और लेने वाले दोनों के कर्म की निर्जरा होती है भगवान ने सुपात्र को दान देने का निर्देश दिया है न कि कुपात्र को ! जिसकी सुपात्र पर श्रद्धा, आस्था होगी वही सुपात्र को दान देने की इच्छा रखता है दान देने से कर्म निर्जरा नही होती अपितु भावना भाने से कर्म निर्जरा होती है। आज जैन कुल में जन्म के लेने के बावजूद लोगों का विवेक शून्य होते जा रहे है। भगवान ने सभी की आत्मा को एक समान बताया है किसी भी जीव की हिसां करना महापाप ह...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने कहा पर्युषण का उत्तम पर्व मंगलवार को शुरू हो रहा है। पर्युषण पर्व प्रेरणा देने का स्रोत है। आप पहले दिन से ही पर्युषण की साधना में जुड़ जाओ। पर्युषण पर्व सर्व जीवों के प्रति मैत्री के भाव का पर्व है। पर्युषण पर्व संकल्पों का पर्व है। उन्होंने कहा संकल्प में इतनी शक्ति होती है कि वह अंतराय को तोड़ देता है। पर्युषण पर्व के इस अवसर पर ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ की नीति अपनानी चाहिए। पर्युषण पर्व में साधना करते हुए साधर्मिक की भक्ति करने के शुभ विचार लाना है। उन्होंने कहा श्रावक-श्राविका के कर्तव्यों में ग्यारह वार्षिक, पांच संवत्सरिक और पूरे जीवन के सात कर्तव्य बताए गए हैं। आचार्यश्री ने कहा जिस तरह त्रिवेणी संगम का एक स्थान पर मिलना मुश्किल है, उसी तरह संयम जीवन की सामग...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने पर्व पर्युषण की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि जैन धर्म की त्याग प्रधान संस्कृति में पर्युषण पर्व का अपना अपूर्व एवं विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है। पर्युषण महापर्व मात्र जैनों का पर्व नहीं है, यह एक सार्वभौम पर्व है। पूरे विश्व के लिए यह एक उत्तम और उत्कृष्ट पर्व है, क्योंकि इसमें आत्मा की उपासना की जाती है। संपूर्ण संसार में यही एक ऐसा उत्सव या पर्व है जिसमें आत्मरत होकर व्यक्ति आत्मार्थी बनता है व अलौकिक, आध्यात्मिक आनंद के शिखर पर आरोहण करता हुआ मोक्षगामी होने का सद्प्रयास करता है। यह एकमात्र आत्मशुद्धि का प्रेरक पर्व है इसीलिए यह पर्व ही नहीं, महापर्व है। जैन लोगों का सर्वमान्य विशिष्टतम पर्व है। पर्युषण पर्व- जप, तप, साधना, आराधना, उपासना, अनुप्रेक्षा आदि अनेक प्रकार के अनुष्ठानों का अवसर है। प...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे की कल गुरुणी मैया का जन्मदिवस मनाया जा रहा हैl उसके उपल्क्ष मे भगवान अरिष्ट नेमि का जाप रखा व लकि ड्रोन भी निकाला जाएंगे वह मेहमानों का आवागमन चालू हैl वीणा के तार सीखते हैं बातें जीवन का आनंद लिया जा सके वीणा के तारों को साधा जा सके इसके लिए चार बातें निवेदन करूंगी यह चार बातें साधना मार्ग के प्रिंसिपल हैंl यह चार बातें चार दिशाओं की तरह हैl यह जीवन के सिद्धांत बन जाने चाहिए क्योंकि इन चार बातों को मैंने दिया हैl उसका परिणाम दिखाएं ज्ञानियों के अनुभव को समझा हैl यह चार बातें किसी मंदिर के चारभुजा ना था भगवान के प्रतीक है और प्रिंसिपल ऑफ संबोधित पाठ इंजीनियर अर्थात संस्था आवेl यअर्नेस अर्थ...
यस यस जैन संघ नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि दान धर्म का निरूपण जिनेश्वर भगवान ने किया है ‘दान’ यानि जो दिया जाये पर इसमें ये परिभाषित नहीं किया कि क्या देना, कब देना, कैसे देना । ये जानना जरूरी है कि आप मन, वचन, काया से जो भी देते हो तो दान की श्रेणी में आता है। यदि आप अपशब्द बोलते हो, धक्का देते हो तो वो भी दान है। कर्म सिद्धान्त भी यही कहता है कि आप जैसा दोगे वैसा पाओगे। ज्ञानीजन कहते है कि जैसा बीज आप बोओगे वैसा फल पाओगे। चिन्तन मनन कर दान के स्वरूप को अच्छी तरह समझ कर ज्ञानियों ने जन-2 को बोध दिया। कूड़ा दान, पीक दान, रक्तदान कन्या दान आदि कई दान के प्रकार है। परन्तु सामान्य व्यक्ति, क्या देना ये नहीं जानता और बिना जाने दान दे कर अपने भव बिगाड़ देता है। ज्ञान से युक्त दान ही स्व परलाभ कारी है। गलत द्वव्य दान देने से जीव को...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली अध्यक्ष: विजयराज चुत्तर, मंत्री: हस्तीमल बाफना l -:कम्मनहल्ली में प्रवचन:- श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने तप के बारे मे बताया हमारी देही एक करोड़पति कन्या के समान सदा हमें सताती है। जब हमारे घर में करोड़पति की कन्या आ जाती है तो वह हमेशा अपना रोब जमाना चाहती है। यह कन्या हमारी देह है वह तो माँगती नहीं पर हम ही उसका लाड कोड पुराते हैं। अब पर्व पर्युषण आए हैं तो हमें इसी देही से तप जप आदि करके अपने जीवन को सफल बनाना है। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने जाप के बारे में बताया नवकार मंत्र का एक पद भी सही मायने से पढ़ लिया जाए तो सात सागरोपम जितना पाप घटता है। एक पद का उच्चारण करते हैं तो पच्चास सागर जितना पाप नष्ट हो जाता है। अगर पूरा उच्चारण करें तो पाँच सौ सागरोपम जितना पाप नष्ट हो जात...
गुरु गणेश – मिश्री पावन स्मृति धाम के प्रांगण में विराजमान आगम मर्मज्ञ प. पू. श्री कांति मुनि जी म. सा., श्रमण संघीय उप प्रवर्तक प. पू. श्री पंकज मुनि जी म. सा., मनोहर व्याख्यानी दक्षिण सूर्य डॉ. श्री वरुण मुनि जी म. सा. आदि ठाणा-5 के पावन सान्निध्य में गुरु जयमल- आत्म- शुक्ल- शिव- अमर – महेन्द्र जन्म जयंती समारोह का 1 अक्तूबर, रविवार को भव्य आयोजन किया जा रहा है l उपरोक्त जानकारी देते हुए मधुर वक्ता श्री रूपेश मुनि जी म. सा. ने फरमाया – प. पू. आचार्य श्री जयमल जी म. सा., आचार्य सम्राट प. पू. श्री आत्मा राम जी म. सा., पंजाब प्रवर्तक प. पू. श्री शुक्ल चन्द्र जी म. सा., वर्तमान आचार्य सम्राट प. पू. श्री शिव मुनि जी म. सा., उत्तर भारतीय प्रवर्तक प. पू. गुरुदेव श्री अमर मुनि जी म. सा. एवं वर्तमान युवाचार्य प. पू. श्री महेंद्र ऋषि जी म. सा. ऐसे 6 महापुरुषों की पावन जन्म जयंती ...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वोताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति अत्यंत सरल है। इसकी समस्त क्रियाएं बड़ी सरलता के साथ होती हैं। सूर्य का उदय होना, तारों का टिमटिमाना और नदियों का निरंतर बहना आदि कुदरती क्रियाएं होती रहती हैं। वृक्ष फलते-फूलते हैं, रात के बाद दिन आता है, पर्वत-चट्टानें स्थिर हैं। वस्तुत: प्रकृति जटिलताओं का उद्गम-स्स्तोत्र नहीं है, उन्हें वह निर्मित भी नहीं करती। प्रकृति की क्रियाएं क्यों हो रही हैं या फिर क्या होना चाहिए, जैसे प्रश्नों से जटिलताएं आती हैं। प्रकृति में सब कुछ स्वयं ही होता है। प्रकृति की तरह जो चीज सरल रहती है, वही सत्य है। ऊपर से यह बात सहज जान पड़ती है, पर यह उतनी सरल नहीं है। यही जीवन के साथ भी है। सरल रहने तक मानव जीवन सम्यक अर्थों में वास्तविक जीवन बना र...
Sagevaani.com @चैन्नई। मानव भव संसार में दुर्लभ भव है। शनिवार साहूकार पेठ जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने आयोजित धर्मसभा मे श्रध्दांलूओ को सम्बोधित करते हुए कहा कि संसार मे मनुष्य ही एक ऐसा प्राणीं है जिसमें ईश्वर तक पहुंचने की शक्ति है। दुनिया के सभी जीव मनुष्य शरीर को प्राप्त करना चाहते हैं। लेकिन जिन्हें दुर्लभ मनुष्य शरीर मिला है वे इसकी महत्ता को नहीं जान पाते हैं। और अपने जीवन को यूहीं व्यर्थ में व्यतीत कर देते हैं। इंसान अपनी खोयी हुई दौलत को वापस कड़ी मेहनत करके प्राप्त कर सकता है।लेकिन इस सुरदुर्लभ मनुष्य भव को नहीं प्राप्त कर सकता है। जिंदगी मे परिस्तिथिया अपने कर्मो के आधार पर बदलती रहती है कभी जीवन में सुख है तो कभी दुःख है। सुख और दुःख हमें कोई दुसरा नहीं देता है। जैसा हम करते है वैसा ही हमे प्राप्त होता है।यह संसार रणभूमि के चक्रव्यूह की तरह है वो मनुष्य ही इस चक्रव्यूह को तो...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे की कल गुरुणी मैया का जन्मदिवस मनाया जा रहा है इसउसके उपल्क्ष मे भगवान अरिष्ट। नेमि का जाप रखा व लकि ड्रोन भी निकाला जाएंगे वह मेहमानों का आवागमन चालू हैl वीणा के तार सीखते हैं बातें जीवन का आनंद लिया जा सकेl वीणा के तारों को साधा जा सके इसके लिए चार बातें निवेदन करूंगीl यह चार बातें साधना मार्ग के प्रिंसिपल हैंl यह चार बातें चार दिशाओं की तरह हैl यह जीवन के सिद्धांत बन जाने चाहिए क्योंकि इन चार बातों को मैंने दिया हैl उसका परिणाम दिखाएं ज्ञानियों के अनुभव को समझा है यह चार बातें किसी मंदिर के चार भुजा ना था भगवान के प्रतीक है और प्रिंसिपल ऑफ संबोधित पाठ इंजीनियर अर्थात संस्था आवेयअर्नेस अर...
पूज्य प्रर्वतक श्री प्रकाश मुनि जी मासा. → *सोभाग्य – नाम सुखधाम, सुबोधिदाता दुष्कृत्यवारक जगत्प्रय-ताप-त्राता निर्ग्रन्थरत्न- परमं करुणा-निधानम्, सोभाग्य सदगुरुवरं शिवद स्मरामि ।।1।। डॉ ललित प्रभा जी गुरुदेव श्री सोभग्यमल महारासा के लिये कहते है कि ..आप दुष्कृत्यों के मारक थे, आप दुष्कृत्यों का निवारण करते हे, निवारण वहीं कर सकता है जो वह कृत्य नहीं करता। साधक पहले वह जीवन में करता है फिर उपदेश देते है। जो बात बोलने योग्य, नहीं है वह तीनो प्रकार की करणी से नहीं करता है। आचारांग सूत्र :- *निविदं नंदि* संसार के अमोद प्रमोद कार्य का छेदन करना। जो कार्य कर्म बंधन के कारण है उनसे घृणा करना है । अभ्यन्तर परिग्रह 6 है *जुगुप्सा*- (घृणा ) किसी भी पापी से घृणा नहीं करना.. पाप से घृणा करना है। ज्ञानियों की दृष्टि कारण पर जाती है,सामान्य की दृष्टि कार्य पर जाती है। कारण हे तो कार्य होगा, !!कार...