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भक्ति मे शक्ति होगी तभी परमात्मा को हम अपना बना सकते है: महासती प्रितीसुधा

Sagevaani.com @भीलवाड़ा। भक्ति मे शक्ति होगी तभी परमात्मा को हम अपना बना सकते है बुधवार अहिंसा भवन शास्त्री नगर में महासती प्रितीसुधा श्रध्दांलूओ को धर्मसभा में सम्बोधित करतें हुए कहा कि परमात्मा किसी व्यक्ति विशेष से बंधे हुये नहीं होते है, जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से भक्ति करता है, भगवान उसी के हो जातें हैं। भगवान को धन दौलत से नही खरीदा जा सकता है। भगवान भक्त के भावो से वशीभूत होकर स्वयं बंध जाते है। भक्ति में हमारी शक्ति होगी तभी हम परमात्मा को अपना बना पाएंगे। अहिंसा भवन के मुख्य मार्ग दर्शक अशोक पोखरना ने जानकारी देते हुए बताया कि इसदौरान साध्वी संयम सुधा ने महासती प्रितीसुधा से बारह उपवास की तपस्या के प्रत्याख्यान लिए। इसदौरान धर्मसभा में चैन्नई जैन समाज के प्रतिष्ठ समाजसेवी सुरेश चन्द कोठारी श्री संघ अहिंसा भवन के शांतिलाल कांकरिया, नंदलाल डागलिया, संदीप छाजेड़, महिला मंडल की अध्यक्ष...

बेमन से कोई काम मत करो: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि उत्साह भाव से करें हर कार्य आप एक मंत्र लीजिए आप जो कुछ भी करते हैं जैसा भी करते हैं उससे प्यार से करना सीखेl जो भी व्यवसाय करते हैं विद्या अध्ययन करते हो अन्य कुछ भी काम करते हो उससे प्यार करना सीखोl बेमन से कोई काम मत करो बोझिल मन से किया गया था पांव की बेड़ियां बन जाता हैl जबकि उत्साह भाव से किया गया काम व्यक्ति के लिए मुक्ति का प्रथम द्वारा हो जाता हैl कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता हर काम अच्छा होता हैl कभी किसी काम को करने में या ना सोचा और यह काम बाद अगर तुम गरीब हो और धन नहीं लगा सकते तो बड़ा व्यापार के बारे में मत सोचो तुम फल की दुकान लगा कर बैठ जाओl बड़े प्यार से उसे धंधे क...

मन के मीटर को हीटर मत बनाओ: आगमश्रीजी म.सा.

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली अध्यक्ष: विजयराज चुत्तर, मंत्री: हस्तीमल बाफना -:कम्मनहल्ली में प्रवचन:-           श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने मन के मीटर के बारे में बताया। मन के मीटर को हीटर मत बनाओ, मगर फिल्टर बनाओ। अगर मन गरम र्हो तो कार्य बिगाड़ देगा,लेकिन शुद्ध मन कार्य को सुधार देगा। तंदुलमच्छ प्रसन्नचंद राजर्शी के माध्यम से बताया। आधुनिक काल में सभी मीटर आ गए पर मन को मापने का कौन सा मीटर आया है, या किसी ने बनाया है- तो हमें अपने मन को फिल्टर करना है। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने एफ यानी फिल्टर योर वर्ड्स अपने शब्दों को छाने। पानी को छानो कपड़े से और वाणी को छानो विवेक से। ठांंणागजी के चौथे में भी चार तरह के गलने बताए हैं। पहला मन को शुद्ध रखना। दूसरा- वचन विचार पूर्वक बोलना। तीसरा काया से जीव दया को पालना। चौ...

मन-वचन-काया की मशीन को आराम देना जरुरी है : प्रवीण ऋषि

1 अक्टूबर से शुरू होगा नवकार तीर्थ कलश अनुष्ठान Sagevaani.com @रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि लेश्या का विज्ञान प्रभु महावीर ने प्रदान किया है, लेकिन अज्ञानता वश हम कृष्ण लेश्या, नील लेश्या और कपोत लेश्या के चक्कर में उलझते रहते हैं। अगर इसका ज्ञान हमें मिल जाये तो जीवन में तेजो लेश्या, पद्म लेश्या और शुक्ल लेश्या की वर्षा शुरू हो जायेगी। उपाध्याय प्रवर बुधवार को टैगोर नगर स्थित लालगंगा पटवा भवन में आयोजित प्रवचन माला में लेश्या का वर्णन कर रहे थे। 15 दिवसीय इस विशेष प्रवचन माला में उपाध्याय प्रवर लेश्या और इसके हमारे जीवन में प्रभाव व इससे बचने के उपाय बता रहे हैं। आज की प्रवचन माला में उन्होंने नील लेश्या के विषय में आगे बताया। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी। उपाध्याय प्रवर ने कहा कि प्रभु महावीर ने नील लेश्या से बचने के लिए संत जीवन में कई छो...

कोशिश मे हीं छुपा है कामयाबी: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि कोशिश मे हीं छुपा है कामयाबी का जीवन प्राप्त करना ही जीवन की उपलब्धि नहीं है वरना जीवन में निरंतर मूल्यवान सफलताओं को अर्जित करना जीवन की उपलब्धि हैl कोई व्यक्ति अपने जीवन में चाहे कितनी बार असफल क्यों ना हुआ हो हर न इस। सुबह हुआ करने से कोई संदेश देती है परयतनमें एक बार करो असफल होना जीवन की कोई बड़ी सफलता नहीं है और असफलता सफलता का ही एक पड़ा है सफलता तो मंजिल हैl हर किसी एक सफलता तक पहुंचाने के लिए पहले व्यक्ति को 100 असफलताओं का सामना करना पड़ता हैl सफलता उतनी मधुर होती है जितनी हमने मुसीबत का सामना करके उसे पाया हैl जीवन के जिस क्षेत्र में भी हम अपनी शक्ति का उपयोग करेंगे आपकी स्थि...

साध्बी नूतन प्रभा श्रीजी ने बताया हिन्दु धर्म के 18 पुराणों और जैन धर्म के 32 आगमों का साथ

बताया पाप क्या है और पुण्य क्या है, समझाया शुद्ध भावों से अनासक्त भाव से करें कर्म Sagevaani.com @शिवपुरी। संसार के सभी धर्म हमें अच्छे कार्य करने की प्रेरणा देते है। कोई भी धर्म पाप करने और किसी को सताने का संदेश नहीं देता है। हिन्दु धर्म के 32 पुराणों का सार जब मर्हिषि व्यास से पूछा गया तो उन्होंने बताया था कि परोपकार करना पुण्य है और दूसरों को सताना पाप है। हिन्दु धर्म के 32 पुराणों का सार है एक तो अनासक्त भाव से कर्म करें और मन में सभी के प्रति शुद्ध भावना रखें, भाव बिगड गया तो भव बिगड जाता है। उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्बी नूतन प्रभा श्रीजी ने कमला भवन में आयोजित एक विशाल धर्म सभा में व्यक्त किए। धर्म सभा में साध्बी बन्दना श्रीजी ने अपना उदवोधन देते हुए बताया कि संकट के समय हमें धैर्य रखना चाहिए और कभी घुटने नहीं टेकना चाहिए। आज की धर्म सभा में साध्बी रमणीक कुंवर जी ठाणां 5 सतियों के...

ज्ञानियों ने प्रेम के चार रूप कहे हैं: धैर्याश्रीजी म.सा.

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली अध्यक्ष, विजयराज चुत्तर, मंत्री, हस्तीमल बाफना  -:कम्मनहल्ली में प्रवचन:- श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने बताया अंग्रेजी वर्णमाला का पांचवा अक्षर E प्रेरणा देता है, एक्सटेंड योर लव अपने प्यार को फैलाओ। आपको रस किसमें पैसा बढ़ाने में या प्यार बढ़ाने में? ज्ञानियों ने प्रेम के चार रूप कहे हैं पहले गुरु शिष्य के प्रेम में आध्यात्मिक विशुद्धता पाई जाती है, दूसरा माता पुत्र के प्रेम में स्नेहात्मक उज्जवलता पाई जाती है, तीसरा भाई बहन के प्रेम में भावों की पवित्रता पाई जाती है, चौथा पति-पत्नी के प्रेम में मन की मादकता पाई जाती है। इसको अच्छी तरह से समझाया। परम पूज्य आगम श्रीजी महाराज साहब ने संयम के बारे में बताया। संसार और संयम की विशेषता को बताया। इंद्रियों का संयम, मन वचन काया का संयम। जब व्यक्ति संसार के असा...

सुख देन पर सुख मिलता है,और दुःख देने पर दुःख: महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com @ चैन्नई। मनुष्य जैसा करता वैसा प्राप्त करता है,और भोगता है। मंगलवार को जैन भवन साहूकारपेट मे महासती धर्मप्रभा ने आयोजित धर्मसभा में श्रोताओं को धर्म उपदेश प्रदान करतें हुए कहा कि संसार का प्रत्येक जीव आत्मा सुख चाहती है,पर उन्हे सुख मिलता नहीं है। क्योंकि सुख-दुख हमारे कर्मों पर आधारित होते हैं। पूर्व भव मे किये गयें कर्मो के कारण हमारे जीवन सुख-दुःख आते है। उन्ही पाप कर्मो की वजह हमे दुःख भोगने पड़तें है। इस संसार में दुःख सुमेरू पर्वत के समान और सुख राई के दाने के बराबर है। दुःख भोगने वाला इंसान आगे चलकर सुखी हो सकता है,लेकिन दुःख देने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं हो सकता है। इस बात को अगर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में लागू कर लेता तो वो कभी दुःखी नहीं होगा और न ही वो किसी के दुखों का कारण बनेगा। जो व्यक्ति दुसरों तकलीफ में देखकर बहुत खुश होता है परन्तु वक्त इसका हिसाब जरूर कर...

जैन वे होते हैं, जो पल-पल डगर-डगर पर जयणा का पालन करे: आचार्य उदयप्रभ सूरी

किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरीजी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने प्रवचन में आचारांग सूत्र की विवेचना की शुरुआत करते हुए कहा कि कोई भी जीव मेरे बर्ताव, व्यवहार से दुखी न हो, ऐसा करना अहिंसा है। जैन वे होते हैं, जो पल-पल डगर- डगर पर जयणा का पालन करे। समकिती आत्मा अपने स्टेटस की चिंता नहीं करता, वह अपने स्टेज की चिंता करता है। वह सुखों की कमी को नहीं देखता लेकिन वह इस बात का ध्यान रखता है कि सुकृत की कमी नहीं हो। उन्होंने कहा दान ऐसा होना चाहिए जिसमें दान देने वाला व्यक्ति दुःखी न हो, दान लेने वाला भी दुःखी न हो और दिया जाने वाला पदार्थ भी दुःखी न हो। दान लेने और देने वाले के बीच वैमनस्य नहीं होना चाहिए। दान देना मनाही नहीं है लेकिन दी जाने वाली वस्तु का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। देश, काल, भाव, परिस्थिति देखकर दान देना ...

सबसे भयंकर है ईर्ष्या की आग, आदमी जलता ही रहता है : प्रवीण ऋषि

माता-पिता को सुधारने के लिए 30 सितंबर से शुरू हो रहा है अर्हम पेरैंटिंग शिविर Sagevaani.com @रायपुर। जीवन को बदल कर रख देने वाली प्रभु महावीर की देशना ‘लेश्या’ को समझने के लिए,उसे जीने के लिए लालगंगा पटवा भवन में उपास्थि श्रोतागणों को संबोधित करते हुए उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि एक दीपक है जिसका रंग नहीं है, और एक ज्योत है, उसका भी रंग नहीं है। इनके चारों ओर अलग अलग आरंग के कांच लगे हैं। बाहर जो उजाला आएगा वह उस कांच के रंग का आएगा। और अंदर जो रौशनी जाएगा कांच के रंग की जायेगी। ये कांच का रंग है, इसे लेश्या कहते हैं। और जो कांच है वह कषाय और योग से बना है। अनंतानुबंधी कषाय का कांच काला रहता है, जो भी न तो रौशनी अंदर आती है, और न ही अंदर की रौशनी बाहर जाती है। काला रंग ही फैलता है। काला कांच है तो ज्ञान कितना बाहर आएगा? चरित्र कितना बाहर आएगा? ख़ुशी कितनी बाहर आएगी? बाहर ...

जगतगुरू हीरसूरि विजयजी ज्ञानयोग, तपोयोग, ब्रह्मचर्य योग और प्रबल प्रभावना के धनी थे: आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीजी

किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने प्रवचन में हीरसूरि विजयजी महाराज की पुण्यतिथि पर उनका स्मरण करते हुए कहा कि वे ज्ञानयोग, तपोयोग, ब्रह्मचर्य योग, प्रबल प्रभावना के धनी थे। उन्होंने जीवनकाल में अद्भुत साधनाएं की। उनका जन्म विक्रम संवत् 1583 में हुआ, 1593 में उन्होंने दीक्षा और 1610 में आचार्य पदवी ग्रहण की। अकबर बादशाह उनके आचार-संहिता यानी महाव्रत का पालन, विचार संहिता यानी मैत्री भावना और प्रचार संहिता यानी माया के बिना का व्यवहार से बहुत प्रभावित था और उसने विक्रम संवत् 1640 में उनको जगतगुरू की पदवी प्रदान की, वह भी ऐसे समय में जब कुछ धर्म आत्मा और परभव को नहीं मानते थे। आचार्यश्री ने कहा जिनशासन कहता आया है कि धर्म आत्मा और परभव से जुड़ा हुआ है। तीर्थंकर परमात्मा ने अनंतज्ञान से...

लेश्या बदलने के लिए अपनी वाणी पर संयम रखें : प्रवीण ऋषि

Sagevaani.com @रायपुर। लेश्या बदलने से भाग्य बदल जाता है। टैगोर नगर स्थित लालगंगा पटवा भवन में जारी प्रवचन माला में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि लेश्या को कैसे बदलें, इसका विज्ञान समझायेंगे। तीर्थेश मुनि से प्रवचन से पहले अपने गीतों से बताया कि क्रूर परिणाम से हिंसा करके सुखी रहने वाला दुखी ही रहता है। यह कृष्ण लेश्या का असर है। अर्हम विज्या का लक्ष्य है कि सबकी शुभ लेश्या हो जाए। इस प्रवचन श्रंखला की सहायता से प्रवीण ऋषि कृष्ण लेश्या को बदलने की विधि समझायेंगे। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि कृष्ण लेश्या का योग सूत्र है कि कषाय ऊर्जा देता है और योग उसकी प्रणाली है। कषाय कभी जागृत अवस्था में रहता है, तो कभी निष्क्रिय रहता है। लेकिन योग हमेशा सक्रिय रहता है। योग मन-वचन-काया से ऊर्जा लेता है। अगर आप...

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