Author: saadhak

माँ बाप की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।- डॉ वरुणमुनि

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के तत्वावधान में उप प्रवर्तक पंकजमुनि के सानिध्य में डॉ वरुणमुनि ने कहा कि संसार में माँ बाप की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। मां बाप की सेवा ही संसार की सबसे बड़ी सेवा है।हम अपने जीवन मे कितने भी धर्म कर्म करें पर यदि अपने माता पिता का तिरस्कार कर रहे है , उनका मान सम्मान नहीं कर रहे है तो हमारे सारे धर्म कर्म व्यर्थ है। जीवन भर जप तप किया...

देह में ममत्व बुद्धि आर्तध्यान का कारण है

*🌧️विंशत्यधिकम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 3️⃣2️⃣ 🪔 *देह में* *ममत्व बुद्धि* *आर्तध्यान का कारण है.!* ⛓️ आत्मा के साथ संयोग से जुड़ा हुआ देह भी आत्मा से भिन्न है, तो फिर बाकी पदार्थो अपने कैसे हो सकते है.! 🧘‍♂️ देह से आत्मा की भिन्नता को जो जानता है, उसी को समाधि प्राप्त होती है.! *_📗श्री भाव कुलक📗_* 🌷 *तत्त्वचिंतन:* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्...

द्वेष हमारी आत्मा का पतन करता है: साध्वी श्री वीरकांता जी

बड़े ही आनंद एवं उत्साह पूर्वक गुरुणीमैया महा साध्वी श्री वीरकांता जी महाराज आदि ठाणा- 4 का चातुर्मास चल रहा है । आज महासाध्वी जी ने फरमाया- द्वेष हमारी आत्मा का पतन करता है। द्वेष से आत्मा भव-भव भ्रमण करती है। द्वेष का जन्म ईष्या, वैर घृणा, तिरस्कार से होता है । और जैसे- जैसे ये सब बढ़ते जाऐंगे वैसे वैसे द द्वेष बढ़ता जाएगा । वर्तमान में लोग कभी व्यक्ति से, द्वेष करते है, कभी धर्म से, द्वेष करते ...

निर्लेप भाव से रहेंगे तो कर्म बंधन में नही पड़ेंगे

*🏳️‍🌈प्रवचन वैभव🏳️‍🌈* 🌧️ 3️⃣2️⃣ 🪔 156) निर्लेप भाव से रहेंगे तो कर्म बंधन में नही पड़ेंगे.! 157) श्रुतसंकल्प से ही समाधि की प्राप्ति होती हैं.! 158) कथा श्रवणसे कान राजी अनुशरण से आत्मा राजी.! 159) जागृति अभय हैं, प्रमाद ही महाभय हैं.! 160) अपने मूल से जुड़ना ही, शासनप्राप्ति का उद्देश्य है.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीम...

समाज में निंदा का कारण मोह और वासना बनती है, प्रेम नहीं: साध्वी आनन्द प्रभा

आमेट के महावीर भवन मे वीरपत्ता की पावन भूमि पर चातुर्मास हेतु विराजित साध्वी तपाचार्य जयमाला मा. सा. आदि ठाणा-6 के सानिध्य मे साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा कि मेरी भावना’ में एक पंक्ति आती है ‘फैले प्रेम परस्पर जग में, मोह दूर ही रहा करे’ इसका अर्थ ही यह होता है, मोह शरीर और वस्तुओं से ही होता है जिससे दूर रहने को कहा गया है। समाज में निंदा का कारण मोह और वासना बनती है, प्रेम नहीं। अ...

साधना के मार्ग में मोह और वासना बाधक: डॉ वरुणमुनि

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर बैंगलोर के तत्वावधान में उप प्रवर्तक पंकजमुनि के सानिध्य में डॉ वरुणमुनि ने कहा कि आत्मज्ञान तभी हो सकता है जब सभी वासनाओं का त्याग हो। वासनाओं के त्याग के बिना आत्मज्ञान नहीं हो सकता। शास्त्रों में वासना के त्याग को मुक्ति संज्ञा दी गई है। किसी भी वस्तु को तीव्र भाव से ग्रहण करने को वासना कहते है। जब ज्ञान में अभिमान आ जाता है वह वासना बन जाता है। ...

जल बहता है तो शुद्ध होता है

श्री हीराबाग जैन स्थानक सेपिंग्स रोड बेंगलुरू में विराजित साध्वी धैर्याश्री जी म सा ने पाप पुण्य के बारे में बताते हुए कहा कि जल ओषधि है। रोगों को नाश करने वाला है। इसका दुरूपयोग मत करो, इसे अमृत की तरह, गंगा जल की तरह उपयोग करें। यदि जल नहीं है तो न वृक्ष, वनस्पति उत्पन होंगे न अन्न मिलेगा। सागर संग्रह करता है तो पानी खारा रहता है पर जल बहता है तो पवित्र शुद्ध होता है। प्रातः काल जब हम ऊषापान करत...

दर्शन का लाभ लिया

राजाजीनगर संघ के सदस्यों द्वारा सात दिवसीय गुरु दर्शन यात्रा में सूरत में विराजित आचार्य डॉ शिवमुनि, दिल्ली में विराजित उपाध्याय रविंद्रमुनि, उपाध्याय रमेशमुनि, उपाध्याय राजेंद्रमुनि, उत्तर भारतीय प्रवर्तक सुभद्रमुनि, सोजत में विराजित प्रवर्तक सुकनमुनि, भीम में विराजित उप प्रवर्तक विनयमुनि एवं गौतममुनि गुणाकर, रानीया में विराजित सलाहकार दिनेशमुनि, शर्दूलगढ़ में विराजित सुमतिमुनि एवं तप सिद्ध योगिन...

दृढ़ निश्चय किए बिना पापो का नाश नही होता

*🏳️‍🌈प्रवचन वैभव🏳️‍🌈* 🌧️ 3️⃣1️⃣ 🪔 151) दृढ़ निश्चय किए बिना पापो का नाश नही होता.! 152) अज्ञानता से बंधे कर्मो का नाश सम्यक स्वाध्याय से होगा सावद्य क्रियाओं से बंधे कर्मो का नाश आवश्यक क्रिया से होगा.! 153) प्रायश्चित भाव से पापो के मूल शिथिल होते है.! 154) *संसार की* *कथा कभी नहीं रुकेगी,* *सिर्फ केरेक्टर बदलते रहेंगे,* *हमें उसमे रोल न निभाना पड़े,* *उसका पुरुषार्थ करना ही* *छूटने का उपाय है..!...

जीवन का श्रृंगार है: विराजित साध्वी धैर्याश्री जी म सा

श्री हीराबाग जैन स्थानक सेपिंग्स रोड बेंगलुरू में विराजित साध्वी धैर्याश्री जी म सा ने आरुग्ग बोहिलाभमं को अलग अलग तरह से बताया है। बौद्धिक स्तर पर हम अलग अलग कक्षाओं में पढ़ते है, पर हम आध्यात्मिक क्षेत्र में कौनसी कक्षा में हैं हमे देखना है। हम कौन से गुणस्थान में है। गुणस्थान में चढ़ने के लिए समय लगता है, पर गिरने मे समय नही लगता है। सदाचार जीवन का श्रृंगार है। अनाचार धधकता अंगारा है। व्यक्ति क...

जबतक शक्ति हो तबतक अप्रतिबद्ध विहार करते है.

*🌧️विंशत्यधिकम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 2️⃣9️⃣ ⚡ अनुकूल स्थान, समर्पित भक्तवर्ग, वैभवसंपन्न व्यक्ति का राग किए बिना अलीप्त रहते हुए जबतक शक्ति हो तबतक वीर श्रमण अविरत एवं *अप्रतिबद्ध विहार करते है.!* 🛑 विशेष कारण के अभाव में एक स्थान में चातुर्मास के अतिरिक्त समय में एक माह से अधिक समय स्थिरता नही करते.! 🌼 *उनके* *संपर्क में* *आते है उनको* *अध्यात्म स्नान का* *अमूल्य लाभ प्राप्त होता है.!* 💛 अप्र...

राखी भाई और बहन के प्यार को बढ़ाता है।

आज रक्षाबंधन के दिवस पर साध्वी जी ने फरमाया ब्राह्मी – सुन्दरी ने अपने बाहुबली भाई को केवल ज्ञान दिलवाया । ऐसा मधुर रिश्ता जो माता – पिता से तो जुड़ा ही है । साथ – ही साथ एक ही उदर से जन्म लेने वाले भाई – बहन का सम्बन्ध मधुर बनता है। ये राखी भाई और बहन के प्यार को बढ़ाता है। साध्वी जी ने बहुत सुन्दर इतिहास बताया । इस उपलक्ष्य में सामूहिक जाप किया गया । भाई – बहन के जो...

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