10,000 किमी पदयात्रा के बाद गोवा पहुँचे पूज्य गुरु भगवंत
जैन संतों की तप–त्याग यात्रा का नया अध्याय—गोवा में उमड़ा श्रद्धा भाव
भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज
राष्ट्र संत श्रमण संघीय उपप्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज, भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी मा सा., कर्मयोगी श्री रुपेश मुनि जी महाराज ने बेंगलुरु के गांधीनगर में यशस्वी चातुर्मास संपन्न कर हुमचा पद्मावती, सोंधा मठ, हम्पी, बदामी आदि तीर्थ स्थलों की धर्मयात्रा पूर्ण की और वहां से पूज्य गुरु भगवंत गोवा प्रस्थान करते हुए प्रथम बार बेटने विलेज पधारे । जहां श्रद्धाभाव से श्रीमती श्रद्धाशील डॉ. नीओमी जी व गोकुल धाम इस्कॉन समिति ने सेवा-सत्कार किया। श्री संघ के महामंत्री अनिल जी के अनुसार गोवा में यह पूज्य गुरु भगवंतों का प्रथम पदार्पण है। इस अवसर पर प्रसिद्ध संत भाऊ जी महाराज के साथ सप्रेम भेंट हुई तथा भाऊजी महाराज ने जैन संतों की तप साधना और जीवनशैली से अपनी प्रेरणा व्यक्त की।
भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी ने बताया कि श्रुताचार्य श्री अमर गुरुदेव के मार्गदर्शन में उत्तर भारत के अनेक प्रांतों में सैकड़ों जनकल्याणकारी संस्थाएँ—जिसमें स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, धर्मस्थान, पुस्तकालय आदि संस्थाएं स्थापित की गईं, जो आज भी समाजसेवा के लिए सतत सक्रिय हैं। आगे पूज्य गुरु भगवंत श्री दत्त पद्मनाभ पीठाधीश्वर पद्मश्री महामंडलेश्वर स्वामी ब्रह्मेषानंद जी महाराज के आश्रम पहुँचे, जहाँ विशेष सम्मान एवं आदर की चादर भेंट की गई।
मुनि रत्न श्री रुपेश मुनि जी ने बताया कि गुरु भगवंतों ने 2015 से अब तक लगभग 10,000 किलोमीटर पदयात्रा के माध्यम से दक्षिण भारत के अनेक क्षेत्रों में धर्म प्रभावना की है और अब उत्तर भारत की दिशा में प्रस्थान कर रहे हैं। ब्रह्मेषानंद जी महाराज ने जैन संतों के तप–त्याग की सराहना करते हुए गोवा में विशेष जैन संस्थान निर्माण का संकल्प भी व्यक्त किया।
इसके बाद पूज्य गुरु भगवंत श्री शांतिनाथ जैन दिगंबर मंदिर में पधारे और वहाँ विशेष सत्संग का आयोजन हुआ। पूज्य गुरु भगवंत आगे विहार करते हुए मडगांव की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। श्री मान् सा प्रकाश सिंह जी ने बताया कि आगामी मकर संक्रांति का महा मंगलपाठ पूज्य गुरु भगवंतों की पावन उपस्थिति में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ, गोवा के तत्वावधान में संपन्न होगा, जो जैन समाज के लिए अतुल्य सौभाग्य का अवसर है। अंत में पूज्य पंकज मुनि जी महाराज ने मंगल पाठ द्वारा सभी को शुभाशीर्वाद प्रदान किया।

