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किसी को धर्म से विमुख करना सबसे बड़ा पाप है: महासती श्री प्रियदर्शना जी

किसी को धर्म से विमुख करना सबसे बड़ा पाप है: महासती श्री प्रियदर्शना जी

किसी को धर्म से विमुख करना सबसे बड़ा पाप है। जो सहन करता है उसे तपस्या का लाभ मिलता है। तप यानि मन को नियंत्रण करना तप से सभी व्यसन समाप्त होकर आत्मा निर्मल हो जाती है। तप से कई रोग खत्म हो जाते हैं। जहां प्रसन्नाता वहां ईर्ष्या नहीं होती। दोषों की तरफ दृष्टि जाएगी तो आपके पास दोष आएंगे, गुणों की तरफ दृष्टि जाएगी तो आपको गुणों की प्राप्ति होगी। ऐसा काम करो की रोग ना हो। करो तपस्या मिटे समस्या, इस जन्म की ही नहीं अगले जन्म की भी है दवा। भोगों के रोग के लिए रामबाण औषधि तपस्या है।

उक्त उद्भबोधन श्री दिवाकर भवन स्थानक में चातुर्मास के लिए विराजित जिनशाशन चंद्रिका मालव गौरव महासती श्री प्रियदर्शना जी ने पर्वाधीराज पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन धर्म सभा को आशीर्वचन देते हुए कहीं। आज सभी धर्म को पीछे धकेल रहे हैं। उसके कारण ही मात्र काया (शरीर) को महत्व दे रहे हैं। जो साथ आने वाला नहीं, जबकि आत्मा अजर अमर है। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र ही वास्तविक सुख। विघ्न, वेदना, संकट आने पर सभी प्रभु को याद करते हैं। कबीरदासजी ने कहा दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करें न कोय, जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होय। पूर्व और वर्तमान में जो भी पाप किए कर्म सत्ता आनि-पाई का हिसाब लेगी।ईर्ष्या रोग ना आए ऐसा कार्य करें। गुणों को देखकर प्रसन्नाता होती है।

तत्व चिंतिका महासती श्री कल्पदर्शना जी ने फरमाया की पहले जमाई लेने के लिए आते थे तो ससुराल में गाली गीत होता था और मिठाई बांटते थे और आज के समय में कोई गाली दे तो विवाद हो जाता है। राग के कारण गलत कार्य करने पर भी अच्छा लगता है। मासक्षमण करने वालों ने रसेइंद्रियों पर नियंत्रण किया है।तपस्या करना लोहे के चने के समान है। शरीर को तपाना पड़ता है। देह को कष्ट देना पड़ता है। समता भाव से तप करना चाहिए तपस्वी कसाय नहीं करते, क्षमा भाव रखते हैं। भाव भी निर्मलता के बने रहते हैं। साधु बनने के बाद भाव निर्मल रखना होता है, यह एक कठिन कार्य है। साधु बनना सरल, साधना करना कठिन। आप ने कहा कि तप वाले जीव क्रोध का त्याग कर संकल्प लेकर कार्य करे, क्षमा भाव रखें।

उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल दुकड़िया एवं कार्यवाहक अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि श्रीमति मधुजी सोनी ने 16 उपवास, मनीष जी मनसुखानी एवं श्रीमति साधना जी कोचट्टा ने 6 उपवास के प्रत्याख्यान लिये। लगभग 101 सामूहिक तेले तप के प्रत्याख्यान हुए। 28 अगस्त रविवार को जन्म वाचन होगा जिसमें बालिका मंडल द्वारा सुंदर नाटिका का मंचन किया जावेगा। प्रभावना का लाभ श्रीमती चांदबाईजी हस्तीमलजी कोचट्टा परिवार द्वारा लिया गया।धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया आभार उपाध्यक्ष विनोद ओस्तवाल ने माना ।

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