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प्रशंसा से बचने का प्रयास करें, निन्दा से नहीं: उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

आयंबिल ओली की तप–आराधना आज से चेन्नई. सोमवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि एवं तीर्थेशऋषि महाराज का प्रवच...

पुण्य के बिना मनुष्य को देव दर्शन नहीं: गौतममुनि

चेन्नई. मनुष्य द्वारा किए गए कई भवों में पुण्य के बाद ही उसे एक संत का दर्शन मिलता है। पुण्य के बिना मनुष्य को देव गुरु के दर्शन नहीं होते। साहुकारपेट जैन भवन म...

क्लेश का कारण कटु वचन: साध्वी धर्मलता

चेन्नई. समाज, घर और परिवार में क्लेश का कारण कटु वचन है। कुरुपता को बदला जा सकता है। श्याम वर्ण को कितनी ही क्रीम लगाकर सफेद नहीं किया जा सकता पर कठोर वाणी को अ...

युवा, शक्ति का करे सदुपयोग : आचार्य श्री महाश्रमण

युवामनीषी, युवाओं के सरताज, करूणा निधान, तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी ने युवा शक्ति को विशेष प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि ...

क्षमापना से एक कदम आगे बढ़ें, प्रेम की ओर: उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

चेन्नई. रविवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि एवं तीर्थेशऋषि महाराज का प्रवचन कार्यक्रम हुआ। उपाध्याय प्रवर ने आ...

चिंतामणि रत्न के समान हैं दुर्लभ मनुष्य भव : आचार्य श्री महाश्रमण

माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में  दादा दादी “चित्त समाधि शिविर” के संभागीयों को समाधि प्रदाता आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि आद...

अहिंसा, करुणा, दया से युक्त ही धर्म है: साध्वी धर्मलता

चेन्नई. जो दुर्गति में गिरती हुई आत्मा को बचाए वही धर्म है। जो अहिंसा, करुणा, दया से युक्त है वही धर्म है। आज के युग में हर व्यक्ति सफल और लोकप्रिय होना चाहता ह...

मन की स्थिरता और शांति के ध्यान आवश्यक: साध्वी महाप्रज्ञा

चेन्नई. मन को स्थिर और शांत बनाने के लिए ध्यान की आवश्यकता है। जहां संसार के कार्यों में मन लगता है, उसी मन को प्रभु भक्ति में लगाकर धार्मिक कार्यों में संलग्न ...

सपनों के पीछे परिवार को न भूलें: संयमरत्न विजयजी

चेन्नई. हम सपनों के पीछे परिवार को समय नहीं दे पा रहे हैं। जिंदगी के अंत में वे पल ही मायने रखते हैं जो हमने अपने परिवार या मित्र के साथ गुजारे हैं। राजेन्द्र भ...

चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत रस

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत रस की सरिता बह रही है, जैन दिवाकर दरबार में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि नें धर्म सभा को संबो...

चिंतन दो प्रकार के होते है: साध्वी धर्मलता

चेन्नई. ताम्बरम विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा की व्यक्ति का चिंतन दो प्रकार के होते है। हम अपने बारे में क्या चाहते है वह पहला पक्ष है और दुसरो के बारे क्या चाह...

मुनियों से सीखें महाव्रत और संयम

पुदुचेरी. मुनि सौम्यसागर ने कहा कि कर्म की निर्जरा करने के लिए कभी मत सोचो। हर पल अपने कार्य में ही ध्यान दो। मुनियों से महाव्रत और संयम सीखो। मरण और मरता की तु...

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