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जीवन में कभी भी अभिमान नहीं करें: विनयमुनि

चेन्नई. जीवन में कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए। किसी भी चीज के लिए अगर अभिमान किया तो उसे टूटने में समय नहीं लगता है। साहुकारपेट जैन भवन में उपप्रवर्तक विनयमुनि...

क्षमापना जो पराये को भी बना दे अपना: संयमरत्न विजय

चेन्नई. साहुकार पेठ स्थित राजेन्द्र भवन में आचार्य जयन्तसेनसूरि के शिष्य मुनि संयमरत्न विजय ने कहा कि अष्टकर्म के क्षय होते ही अष्टगुण प्राप्त होते हैं। ज्ञानाव...

तेरापंथ धर्मसंघ में रचा गया एक नया कीर्तिमान

बालयोगी मुनिश्री प्रिंसकुमारजी ने किया सबसे छोटी उम्र में मासखमण तप आज रात्रि 8 बजे से उनके तप की अनुमोदना में होगा संगीत संध्या का आयोजन परम पूज्य आचार्य श्री ...

श्वास का महत्व ही विश्वास: साध्वी धर्मलता

चेन्नई. मनुष्य की श्रद्धा श्रीपाल और मैना सुंदरी की तरह होनी चाहिए। अरिहंत आराधना द्वारा कषायों का ज्वर उतरता है। इससे विषयों की वासना शांत होती है और कर्मरूपी ...

अशोक वृक्ष मनुष्य को शोकमुक्त रहने की प्रेरणा देता है: संयमरत्न विजय

चेन्नई. राजेन्द्र भवन में विराजित संयमरत्न विजय ने मंगलवार को सिद्धचक्र नवपद ओली आराधना के प्रथम दिन अरिहंत परमात्मा के 12 गुणों का आध्यात्मिक वर्णन किया। उन्हो...

नवपद की आराधना से जीवन सफल होता है: विनयमुनि

चेन्नई. नवपद की आराधना करने से जीवन सफल होता है। जीवन को सफल बनाना है तो मीठे वचनों का प्रयोग करें। नवपद की महिमा से जीवन सफल हो जाता है। साहुकारपेट जैन भवन में...

साधु और गुरु इस देश की आध्यात्मिक अभिभावक: आचार्य पुष्पदंत

चेन्नई. साधु और गुरु इस देश की आध्यात्मिक अभिभावक है। साधक भक्त या शिष्य कभी बड़ा नहीं होता। हमेशा बालक ही रहता है। इसलिए भगवान की वाणी को जिनवाणी मां कहा गया ह...

कुछ न मिलने के कारण अपने मन की शांति न गंवाएं : उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

जरूरत पडऩे पर पराये नही, अपने ही काम आते हैं कल उत्तराध्ययन का भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा चेन्नई. मंगलवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उ...

अध्यात्म की साधना में दो आयाम: महाश्रमण

माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में ठाणं सूत्र के छठे स्थान के पन्द्रहवें सूत्र का विवेचन करते हुए धर्मसभा में आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि ...

चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत रस की सरिता: वीरेन्द्र मुनि

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत रस की सरिता बह रही है, जैन दिवाकर दरबार में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि नें आज वीर स्तुति की...

मूल्यवान शब्दों का हो व्यापार : आचार्य श्री महाश्रमण

समयानुकूल, अर्थात्मक, हितकारी भाषा बोलने की दी पावन प्रेरणा शब्द हमारे ज्ञान का बड़ा माध्यम बनते हैं| कोई वक्ता बोलता है, तो हम सुनते है, शब्द कान में पड़ते हैं...

भक्ति में लीन रहने से सारे उपसर्ग लुप्त हो जाते है: मुनि सौम्यसागर

पुदुचेरी. मुनि सौम्यसागर ने कहा कि जीवन में अनेक विपदाएं आती है जिसके निवारण के लिए हम लगातार कोशिश करते रहते है। आचार्य मातुंग की तरह भक्ति में लीन रहने हेतु स...

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