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राष्ट्र धर्म की रक्षा करें: साध्वी सिद्धिसुधा

चेन्नई. साहुकारपेट स्थित जैन भवन में विराजित साध्वी सिद्धिसुधा ने कहा  जीवन में आगे निकलने के लिए संकल्प बहुत जरूरी है। बिना संकल्प और नियम के आगे जाने वालों को कुछ भी हासिल नहीं होता। नियम के साथ आगे निकलने वाले कभी मार्ग से भटकते नहीं। अगर संकल्प होगा तो मनुष्य पाप  से बच सकता है। साध्वी समिति ने कहा परमात्मा ने दस प्रकार के धर्म बताएं है जिनमें राष्ट्र धर्म भी आता है। हर देश की अलग अलग धर्म और संस्कृति होती है। जिस देश मे भी रहें वहां के धर्म और संस्कृति का पालन जरूर करें। भारत देश की संस्कृति सबसे महान है। हमारे देश की हर चीज विशेष है। जब हर देश भोग की ओर आगे बढ़ रहा था तो भारत योग के लिए आगे बढ़ा। मनुष्य को अपने राष्ट्र धर्म की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। परमात्मा कहते हैं अगर मनुष्य अपने धर्म की रक्षा करेगा तो धर्म भी उसकी रक्षा करेगा। अगर कोई अपने रिश्तेदार के घर जाता है तो...

भगवान शिव का रुद्राभिषेक कल

चेन्नई. श्रावण माह में भगवान शिव की भक्ति का बहुत महत्व है यही कारण है इस माह में शिव मंदिरोंं में भक्तों की लाइन लगी रहती है। इसी क्रम में अमृतवाणी सत्संग मंडल की ओर से 4 अगस्त को श्री एसएमके फोमरा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी केलंबाक्कम के प्रांगण में फोमरा परिवार के सहयोग से शिव रुद्राभिषेक का आयोजन होगा। इस मौके पर सुंदरलाल व शिवकुमार फोमरा परिवार द्वारा रुद्राभिषेक किया जाएगा। इसके साथ ही मंडल के सदस्य अमृतवाणी पाठ व भजनों से भगवान शिव को रिझाएंगे। कमल भैया, कमल चांडक, राजेन्द्र भट्टड़, हरिगोपाल-अशोक जोशी, दिल्ली के द्वारकादास भैया, किशोर बागड़ी, परमानंद भाटिया, अमिता जालान, संजय गुप्ता व विनोद दाहिमा भी हिस्सा लेंगे। सत्संग का संचालन चम्पालाल पुरोहित करेंगे।

बुरे कर्मों से दूर रहें: साध्वी साक्षीज्योति

चेन्नई. न्यू वाशरमैनपेट स्थित जैन स्थानक में विराजित साध्वी साक्षीज्योति ने कहा यदि कोई व्यक्ति इस छोटे से मानव जीवन को सार्थक करते हुए सफलता की सीढ़ी चढऩा चाहता है तो उसे बुरे कर्मों से दूर रहना होगा। यदि कोई मानव अपने जीवन का दुरुपयोग करता है तो वह लंबे समय के लिए मनुष्य गति से छूटकर निकृष्ट गतियों में पहुंच जाता है। मिट्टी, पानी, अग्नि, हवा, पेड़ आदि के रूप में जाकर वह असंख्य काल तक के लिए जन्म-मरण करता रहता है। ज्ञानियों ने बताया कि संसार बड़ा विचित्र है, इसके चक्र को समझना आसान नहीं है। साध्वी ने कहा कि मानव जीवन एक ओस की बूंद के समान है, जरा सा झटका लगते ही जैसे बूंद नष्ट हो जाती है वैसे ही हमारा जीवन भी बड़ा नाजुक है। महापुरुष करुणा भाव से ओतप्रोत होकर जनहित के लिए उपदेश देते हैं। संजय दुगड़ ने बताया कि अन्नानगर से श्रद्धालुओं का संघ ने साध्वीवृंद के दर्शन किए। आचार्य आनंदऋषि की जन्...

कम अपेक्षा रखने से जीवन आनंदमय: साध्वी साक्षी ज्योति

चेन्नई. न्यू वाशरमैनपेट स्थित जैन स्थानक में साध्वी साक्षी ज्योति ने कहा दूसरों से अपेक्षा कम रखें। अपेक्षा एक बीमारी है जिससे हर कोई ग्रसित है। पिता अपने बेटे से अपेक्षा रखता है कि बेटा मेरी सेवा करेगा। कोई भी काम करेगा तो मुझसे पूछेगा। यह अपेक्षा जब तक पूरी होती रहती है तब तक तो ठीक है लेकिन जैसे ही अपेक्षाएं पूरी नहीं होती आदमी परेशान होने लगता है। मन के अंदर व्यथा पैदा होती है। इसलिए अपेक्षाएं कम रखें। एक-दूसरे से जितनी कम अपेक्षाएं रखेंगे, उतना ही आनंद रहेगा। उन्होंने कहा पक्षी अपने बच्चे को उडऩा सिखाते हैं, दाना चुगना सिखाते हैं। इसके बाद कोई अपेक्षा नहीं रखते।

गुरु ही करते हैं विघ्नों का नाश: आचार्य तीर्थ भद्रसूरीश्वर

चेन्नई. आचार्य तीर्थ भद्रसूरीश्वर ने कहा सम्यक दर्शन से ही साधना की शुरुआत होती है । यह जिनवाणी के प्रति श्रद्धा भाव और मोक्ष का द्वार है। गुरु की कृपा जो मानते हैं वे ही वास्तव में ज्ञानी होते हैं। किलपॉक के रंगनाथन एवेन्यू स्थित एससी शाह भवन में उन्होंने कहा सम्यक दर्शन के तीन लिंग यानी चिन्ह होते हैं। शुश्रुषा, धर्मराग और गुरुदेव का वैयावच्च। तत्वों को पहचानने की तीव्र अभिलाषा सुश्रुषा है। गुरु हमारे लिए सबसे निकट के उपकारी हैं। पहले गुरु का वैयावच्च और साथ में देव का वैयावच्च, यह सम्यक दर्शन के प्रतीक हैं । उन्होंने गुरु और अध्यापक में अन्तर कर बताया कि अध्यापक बाहरी जगत का ज्ञान देते हैं और वे आपको बाहरी जगत का अध्ययन कराएंगे, अन्तर जगत का ज्ञान देंगे और अन्तर जगत में ले जाएंगे। पूरा विश्व बाहरी जगत की ओर जा रहा है लेकिन अन्तर जगत में जाने से ही इस भव से तर सकते हैं। यह केवल पुण्योदय ...

साहुकारपेट तेरापंथ भवन में मुनि श्री ज्ञानेन्द्र कुमार ने सहवर्ती मुनिवृन्द के साथ किया चातुर्मास प्रवेश

साहुकारपेट तेरापंथ भवन में मुनि श्री ज्ञानेन्द्र कुमार ने सहवर्ती मुनिवृन्द के साथ किया चातुर्मास प्रवेशसाहुकारपेट तेरापंथ भवन में मुनि श्री ज्ञानेन्द्र कुमार ने सहवर्ती मुनिवृन्द के साथ किया चातुर्मास प्रवेश चेन्नई. मुनि ज्ञानेन्द्रकुमार नेे सहवर्ती मुनिवृन्द विनीत कुमार, विमलेश कुमार के साथ इस वर्ष के चातुर्मास के लिए साहुकारपेट स्थित तेरापंथ भवन में मंगल प्रवेश किया। ओसवाल गार्डन से प्रस्थान कर मुनिवृंद भव्य जुलूस के साथ वॉलटैक्स रोड होते हुए मनगप्पन स्ट्रीट स्थित तेरापंथ भवन में जय नारों के साथ पहुंचे। स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए मुनि ज्ञानेन्द्र कुमार ने कहा कि चातुर्मास में आध्यामिक अर्हता का विकास हो। भाई-बहन ज्ञान व दर्शन के क्षेत्र में आगे बढ़ें। अपेक्षा है कि निर्धारित समय के अनुसार आप कार्यशाला में सहयोगी बनें। मुनि रमेश कुमार ने कहा धर्म शुद्ध चैतन्य में निवास करता है। चा...

साध्वीवंृद के सान्निध्य में हुआ वर्षीतप का पारणा

चेन्नई. आदिनाथ जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में जारी वर्षीतप उत्सव के तहत सोमवार को गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरीश्वर के 47वें दीक्षा दिवस के उपलक्ष्य में सामूहिक वर्षीतप का पारणा हुआ। चूलै में कंदप्पा स्ट्रीट स्थित आदिनाथ सेवा केन्द्र में साध्वी मंजुलाश्री एवं अन्य साध्वीवृंद के सान्निध्य में आयोजित समारोह के दौरान केयूप ग्रुप के अध्यक्ष सुरेश लूनिया, महामंत्री संजय वैद, उपाध्यक्ष संतोष बरडिया, अशोक बैद भी मौजूद थे। इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष मनोज जैन ने गच्छाधिपति के जीवन पर विशेष प्रकाश डाला। समारोह के दौरान साध्वीवृंद ने सामूहिक वर्षीतप की अनुमोदना करते हुए तप की महिमा पर प्रकाश डाला। इस मौके पर ट्रस्ट की ओर से सहयोगियों का सम्मान किया गया।

जानें जीवन के मर्म को आज से  टी-नगर में: कपिलमुनि 

चेन्नई. यहां माम्बलम जैन स्थानक में विराजित कपिलमुनि के जानें जीवन के मर्म को विषय पर आधारित प्रवचन शृंखला का आयोजन एस. एस. जैन संघ माम्बलम के तत्वावधान में शुक्रवार से किया जाएगा। संघ के उपाध्यक्ष डॉ उत्तमचंद गोठी ने बताया कि बर्किट रोड स्थित जैन स्थानक में मुनि के प्रवास के दौरान गुरुवार से सुबह 9.15 बजे से 10.30 बजे तक प्रवचन, दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक ज्ञान चर्चा व रात्रि 8.30 बजे से 9.30 बजे तक युवा प्रकोष्ठ के लिए जिज्ञासा समाधान विषय पर चर्चा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

माता-पिता के उपकारों को नहीं भूलें: उपप्रवर्तक विनयमुनि

चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन से विहार करते हुए उपप्रवर्तक विनयमुनि और गौतममुनि शनिवार को माली समाज भवन पेरुमाल कोइल गार्डन पहुंचे। यहां श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए गौतममुनि ने कहा संतों के सानिध्य में आकर सेवा और धर्म के कार्य करने वालों को संत अच्छे से पहचानते हैं। धर्म के कार्यों में खुद को जोडऩे वालों की भावनाओं से उनके संस्कारों के बारे में पता चलता है। उन्होंने आचार्य जयमल की दीक्षा दिवस के अवसर पर कहा कि आचार्य जयमल ने अपने जीवन में लोगों को बहुत कुछ दिया है। ऐसे महापुरुष की दीक्षा दिवस पर भक्तों को भी उनके बताए मार्गों का अनुसरण करने का संकल्प लेना चाहिए। अपने गुरु की दीक्षा के दिन अगर कुछ अलग करने का संकल्प लेते हैं तो पुण्य के बराबर होता है। परिवार के बुजुर्गों के प्रति जो सही होता है वही जीवन में आगे निकलता है। अपने माता-पिता के उपकारों को कभी भी भूलना नहीं चाहिए। जीवन मे...

अहंकार का पेट भरना असंभव: पुष्पदंत सागर

चेन्नई. आवश्यकता की पूर्ति करना आसान है पर अहंकार का पेट भरना असंभव है। घर तक पैदल जाया जा सकता है। अहंकार कहता है पैदल क्यों गाड़ी से जाओ। पैदल जाओगे तो लोग क्या कहेंगे। यह आपकी और आस-पड़ोस वाले की सोच है। दूध में पानी मिलाया जाता है, नींबू का रस नहीं। कमजोर अवस्था में ब्लड चढ़ाया जाता है, जहर नहीं। यदि ब्लड की जगह लाल पानी चढ़ा दिया जाए तो मरीज मर जाएगा। मेत्तूर मिलै में विराजित पुष्पदंत सागर ने कहा कि चरण वही है पर आचरण बदल गया है। ज्ञान वही है, ग्रंथ वही है लेकिन स्वार्थ में, अहम में, संप्रदायवाद में अर्थ बदल गया है। आचार्य ने कहा कि एक चरण वो है जो नाच रहे हैं, यश और धर्म की खातिर। एक चरण वो है जो कोठों की ओर भाग रहे हैं, हिंसा के लिए भाग रहे हैं। मदिरालय की ओर जा रहे हैं। मंदिर, मस्जिद, शिवालय की ओर जा रहे हैं। कुछ प्राणी सेवा की ओर जा रहे हैं। आप चरण किसे कहते हैं? मात्र पांव ही चरण...

नियम पालन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान

चेन्नई. अपने संस्कारों को जीवंत रखने व उसके प्रति श्रधा विकसित करने के लिए ताम्बरम स्थित जैन विद्यालय में धर्म शिक्षा दी जाती है। इसी प्रक्रम के तहत जैन विद्यालय में आनंद जैन वाटिका के नाम से बच्चों को जैन धर्म की शिक्षा दी जाती है। पर्यूषण पर्व पर नियमों का पालन करने वाले बच्चों को हर साल सम्मानित भी किया जाता है। इस वर्ष साध्वी धर्मलता, साध्वी सुप्रतिभा और साध्वी अपूर्वा  की उपस्थिति में शाला की वरिष्ठ प्रधानाचार्या मेकला ने बच्चों को पुरस्कृत किया। साध्वी ने सभी को जीवन में मिलने वाले महत्वपूर्ण सिद्धांतों का मूल्य बताया। स्कूल प्रबंधन, ताम्बरम जैन समाज के सदस्य इस अवसर पर उपस्थित थे।

आत्मा का प्रिय मित्र है वैराग: मुनि संयमरत्न विजय

चेन्नई. राजेन्द्र भवन में विराजित मुनि संयमरत्न विजय व भुवनरत्न विजय ने कहा कि जिस तरह गाँवों में शहरवासियों को आकड़े के फूलों में भंवरों को, मारवाड़ की धरा पर हाथियों को, दावानल से जले हुए वन में हिरणों को, चंद्र की किरणों में चक्रवाक (चकवे) को तथा अग्नि में जलचर प्राणी को आनंद नहीं मिलता, वैसे ही वैराग्यवंत आत्माओं को किसी भी भोग में आनंद नहीं मिलता। वे विषय भोगों से सदैव दूर रहती हैं। योग के उद्योग में जुड़े हुए समतावंत मानवों को यदि महिलाएं अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकती, भाईयों का बंधन  भी अपनी ओर नहीं खींच सकता, मणियों के हार के प्रति मोह भी नहीं रहता, तो इन सबके पीछे समता व वैराग्य  ही सबसे बड़ा कारण है। जो वैराग्य संसार रूपी कमल को नष्ट करने में चंद्रमा के समान है, कपट रूपी दीपक की कांति को दूर करने में सर्प के समान है, कामदेव के अहंकार को नष्ट करने में महादेव समान है, उत्तम बुद्धि र...

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