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मधुर वाणी में समाए हैं संसार के सारे सुख: साध्वी कुमुदलता

चेन्नई. अयनावरम स्थित दादावाड़ी में साध्वी कुमुदलता ने कहा कि व्यक्ति को मधुर, सरल और विनम्र भाषा का उपयोग करना चाहिए। मधुर भाषा यानी व्यक्ति-व्यक्ति के बीच बनाया जाने वाला सुंदर और मधुर सेतु। शांत विनम्र भाषा यानी जीवन के समस्त सकारात्मक भावों का जीवन जीने का आधार। मधुर वाणी में संसार के सारे सुख समाए हैं। उन्होंने कहा, यदि व्यक्ति अपनी जिंदगी में बोलने की कला सीख ले तो 78 प्रतिशत समस्याएं अपने आप समाप्त हो जाएगी। इंसान की जिंदगी में लोकप्रियता पाने, रिश्तों को बनाने, समाज के नवनिर्माण का अगर कोई आधार है तो वह इंसान की जुबान ही है। जब तक इंसान को बोलने की कला नहीं आएगी तब तक दुनिया में स्थापित नहीं हो सकता है। शरीर विज्ञान की व्यवस्था ऐसी है कि जीभ पर यदि चोट लगती है तो कुछ देर में या कुछ दिन में ठीक हो जाती है लेकिन वही जीभ से किसी को चोट लग जाए तो वर्षों उसके जख्म नहीं भरते। हमें जीवन क...

अपने आत्मस्वरूप को जानने के लिए विनय की आराधना करें : उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

  चेन्नई. श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि एवं तीर्थेशऋषि महाराज शुक्रवार ने उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन करते हुए बताया कि सुधर्मास्वामी भगवान के साथ अपने पलों को याद करते हुए कहते हैं कि परमात्मा को जानना हो तो उनके ज्ञान, दर्शन, शील के साथ धीरज को भी जानना आवश्यक है। परमात्मा कहते हैं कि अपने आत्मस्वरूप को पहचानने के लिए विनय की आराधना कर लो, बिना विनय के स्वाध्याय और तप से अहंकार और क्रोध आते हैं। विनयशील के लिए सभी श्राप वरदान बन जाते हैं। परमात्मा अपनी अनुत्तरदेशना में सबसे पहले विनय का वरदान बरसाते हैं। तप, स्वाध्याय, ध्यान सहज है लेकिन विनय बहुत मुश्किल है। अविनयशील व्यक्ति के ध्यान, ज्ञान और तप से विनाश होता है। परमात्मा ने कहा है कि विनय नम्रता, जीवनशैली और समर्पण की कला व अहोभाव है, यह चापलूसी नहीं। विनयशील स्वयं की भगवत्ता को जाग्रत ...

जीण माता के वार्षिकोत्सव में भक्तिमय हुआ माहौल

जीण सखी मंडल की ओर से छठा वार्षिकोत्सव हाल ही में एसआरके अग्रवाल सभा भवन में जोर-शोर के साथ मनाया गया। वार्षिकोत्सव के आयोजक बसेसर लाल ने बताया कि इस आयोजन से यह एकबार फिर साबित कर दिया कि हम अपने काम में कितने भी व्यस्त क्यों न हों भगवान के संत-कीर्तण का मौका मिले सभी एक न एक बार जयकारा लगाने जरूर आ जाते हैं। भजन गायक रामावतार अग्रवाल और नीरज अग्रवाल ने जीण माता का मंगलपाठ किया है। भाजन कार्यक्रम ने लोगों को भावविभोर कर दिया। माता के जयकारें में पूरा हॉल झूम रहा था। इस मौके पर बसेसरलाल गोकुलका और उनकी पत्नी संतोष गोकुलका ने मा जीण की ज्योती प्रचंड की। दोनों ने मिलकर भजन गायक रामावतार अग्रवाल और नीरज अग्रवाल का सम्मान किया। जीण मंदिर ट्रस्ट बेंगलुरु के अध्यक्ष अनूप अग्रवाल अपनी टीम सहीत इस मौके पर मौजूद थे। इनलोगों का सम्मान महेश अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, संतोष गोकुलका, साक्षी अग्रवाल, मधु च...

साध्वी धर्मलता के सानिध्य में अनुठा धार्मिक मैच

चेन्नई. ताम्बरम विराजित साध्वी धर्मलता के सानिध्य में एक अनुठे प्रकार का क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया। इस मैच में 13—13 महिलाओं की टीम बनाई गई। ब्रहृमाजी टीम की कप्तान शिमलाजी गुगलिया और सुंदरीजी टीम की कप्तान शिमलाजी मरलेचा थी। इस मैच में बॉल के बजाय प्रशन पूछे जाते थे। इसके लिए 25 पर्चियां तैयार की गई जिसमें 125 प्रश्न थे। चार सेकेंड के अंदर पर्चियों के प्रश्नों का उत्तर देने पर छह रन, पांच सेकेंड के अंदर उत्तर देने पर चार रन, वहीं छह सेकेंड में दो रन देने का प्रावधान था। सात बीतने पर भी यदि खिलाड़ी उत्तर नहीं देता है तो वह पास कहकर आउट होने से बच सकता है। पास न बोलने पर खिलाड़ी को क्लीन बोल्ड माना जाता है। मैच में सुंदरी टीम ने दो विकेट खोकर 714 रन बनाए। वहीं ब्रहृमी टीम ने चार विकेट खोकर 659 रन बनाए। सुंदरी टीम को विजेता घोषित किया गया। ज्योति हुमरवाल 572 रन बनाकर मैन आॅफ द मैच रही। प...

तेरापंथ युवक परिषद् चेन्नई श्रेष्ठ परिषद् से हुई सम्मानित

माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में आचार्य श्री महाश्रमण के पावन सान्निध्य में, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के 52वे वार्षिक यूथ कनेक्ट अधिवेशन में अभातेयुप के त्रिआयाम “सेवा, संस्कार, संगठन” के श्रेत्र में विशिष्ट कार्य करने पर मूल्यांकन कर अभातेयुप द्वारा तेरापंथ युवक परिषद् चेन्नई को *श्रेष्ठ परिषद्* के रूप में सम्मानित किया गया| परमाराध्य आचार्य प्रवर ने मंगल पाथेय प्रदान किया| मुनि श्री दिनेशकुमारजी एवं अभातेयुप के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि श्री योगेशकुमारजी ने कहा कि तेयुप के सदस्य अपने सामाजिक दायित्व के साथ परम पूज्य आचार्य प्रवर के चेन्नई चातुर्मास से पूर्व रास्ते की सेवा से लगा कर वे प्रति दिन चारित्रात्माओं की सेवा उपासना में संलग्न हैं| यहां के सदस्यों में संघ भक्ति कूट कूट कर भरी हुई हैं| तपस्या, सामायिक आदि आध्यात्मिक विकास में भी उनके गतिशील...

तप त्याग पूर्वक संपन्न हुआ पर्यूषण

चेन्नई. श्री शांति वल्लभ टीवीएच लुम्बिनी जैन संघ के तत्वावधान एवं मुनि तीर्थसिद्ध विजय एवं तीर्थअर्हम विजय के सान्निध्य में पर्यूषण महापर्व सम्पन्न हुआ। इसके बाद तपस्वियों का सामूहिक पारणा हुआ। इस दौरान आशीष एवं माधवी विनेश बोकडिय़ा समेत बड़ी संख्या में तपस्यार्थी मौजूद थे। इससे पहले साधना, ध्यान, धर्म, तप जप हुआ। पर्यूषण पर्व की महिमा अहिंसा, त्याग तथा क्षमायाचना पर आधारित है। यह सभी को अपने जीवन के कर्तव्यों से अवगत कराता है। इन दिनों में ज्ञान की गंगा चारों दिशाओं में बहती है। प्रतिदिन जिनालय दर्शन, पूजा, व्याख्यान, शाम को प्रतिक्रमण एवं बाद में भक्ति से लोग ओत प्रोत हो जाते हैं। इस मौके पर कल्पेश बोकडिय़ा, जिमी तथा मिलन बोकडिय़ा समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

12 व्रतों में पहला अणुव्रत अहिंसा है: वीरेन्द्र मुनि

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि ने जैन दिवाकर दरबार में धर्म सभा को संबोधित करते हुवे कहा कि सुबाहु कुमार सुख भोगो में व राजकिय जवाबदारी का निर्वहन करते हुवे भी भगवान महावीर स्वामी के सेवा में अपने परिवार के साथ उपस्थित हुवे प्रभु ने अपनी मधुर अमृत से भी ज्यादा मीठी वाणी में अणगार धर्म और आगार धर्म की व्याख्या कि। श्रावक के 12 व्रतों में पहला अणुव्रत अहिंसा है जीवों की रक्षा करना क्योंकि अहिंसा ही परम धर्म है। आत्मा को उज्जवल पवित्र बनाने वाला अहिंसा धर्म है परंतु आज हम देखते हैं हिंसा का जोर है। हम अहिंसा के देवता प्रभु महावीर के पुजारी सेवक (श्रावक) हैं हमारे घरों में कई चीजें हिंसा कारी आ रही है और हम उसे यूज कर रहे हैं। शैंपू नकपोलिश लिपस्टिक कई प्रकार की चॉकलेट बिस्किट श्रृंगार प्रसाधन की सामग्रियों का उपयोग कर रहे हैं...

गुरुदेव रूपमुनि के आदर्श जीवन में उतारें : विनयमुनि और गौतममुनि

चेन्नई. साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक विनयमुनि और गौतममुनि के सानिध्य में गुरुदेव रूपचंद की श्रद्धांजलि सभा हुई। इस मौके पर गौतममुनि ने कहा गुरुदेव ने जीवनभर परोपकार के कार्य कि। उनकी प्रेरणा से ही अनेक गौशालाएं, अस्पताल और जीव दया केंद्र स्थापित किए गए। उन्होंने भगवान महावीर के अहिंसा का संदेश घर घर तक पहुंचाया। लोगों को उनके आदर्शों के अनुसरण का संकल्प लेना चाहिए। सागरमुनि ने भी उनका गुणगान किया। सभा में संघ के कोषाध्यक्ष गौतमचंद दुगड़ एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। मंत्री मंगलचंद खारीवाल ने संचालन किया।

अहंकार, मद से होता नीच गोत्र का बन्धन : आचार्य महाश्रमण

*निरहंकारिता, विनय पूर्ण जीवन जीने की दी प्रबल प्रेरणा *दक्षिणांचल कन्या कार्यशाला का द्वितीय दिवस माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में ठाणं सुत्र के दूसरे अध्याय का विवेचन करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि गोत्र कर्म के दो प्रकार है – उच्च गोत्र और नीच गोत्र| जैन धर्म के कर्मवाद के वर्गित आठ कर्मों में सातवां कर्म है गोत्र कर्म| उच्च गोत्र कर्म का बंधन किन कारणों से होता है ? वैसे तो कर्म बंधन का कर्ता और भोगता जीव स्वयं ही है, जैसा कर्म बांधता हैं, वैसा ही फल भोगना हैं| ऐसा नहीं है कि किया तो बुरा कर्म और फल मिलेगा अच्छा, जैसा किया उसी के अनुसार फल मिलेगा| कर्म सत्य होता है| अहंकार करने से नीच गोत्र का बंधन होता है| *मद के आठ प्रकार-जाति, कुल, ज्ञान, रूप, ऐश्वर्य, लाभ, धन, तपस्या इनका मद यानी अहंकार करने से नीच गोत्र का बंधन होता है| आचार्य श्री महाश्रमण ने आ...

असली आजादी अपनाए : आचार्य श्री महाश्रमण

*ठाणं सुत्र का विवेचन करते हुए आचार्य श्री ने कहा “मनुष्य ही मोक्ष पद का अधिकारी”* *अहिंसा यात्रा वाहिनी एवं युवा वाहिनी बस का लोकार्पण* माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए जैनाचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि आज 15 अगस्त का दिन है| भारत के लिए एक गौरव का दिन होता है| यह स्वतंत्रता की प्राप्ति का प्रसंग है|गुरुदेव तुलसी ने हमें एक महनीय संदेश दिया था असली आजादी अपनाओ! यह आजादी मिलना भी देश के लिए बड़ी उपलब्धि हैं| पर हम असली आजादी की ओर अग्रसर बनें और असली आजादी मिले| आचार्य श्री ने कहा कि इस आजादी का भी महत्व है देश के लिए| भारत गुणात्मकता की दृष्टि से आगे बढ़े और नैतिक मूल्यों का प्रतिष्ठापन हो| भले राजनीति के क्षेत्र में काम करने वाले लोग हो, भले समाज में रहने वाले, काम करने वाले लोग हो, किसी भी क्षेत्र म...

गुस्सा प्रेम को तोड़ने वाला : आचार्य श्री महाश्रमण

त्रिदिवसीय उपासक सेमिनार का हुआ समापन दो और मुमुक्षु बहनों की होगी चेन्नई में दीक्षा सोमवार से प्रारम्भ होगा त्रिदिवसीय जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा का अधिवेशन माधावरम् स्थित जैन तेरापंथ नगर के महाश्रमण समवसरण में ठाणं सुत्र के दूसरे अध्याय का विवेचन करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण ने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि क्रोध दो प्रकार का होता है – आत्म-प्रतिष्ठित और पर-प्रतिष्ठित| कभी कभी दूसरा निमित नहीं बनता है, खुद के निमित से ही गुस्सा आ जाता है, दूसरे न गाली दे, न बुरी बात कहे, फिर भी स्वयं से गुस्सा हो जाता है, जैसे जीभ दांतों के बीच आ गई गुस्सा आ गया, यह आत्म-प्रतिष्ठित क्रोध हैं, गुस्सा हैं| दूसरे ने हमें गाली दी या हमारा कहना नहीं माना, तो उस पर गुस्सा आ जाता है, यह पर-प्रतिष्ठित क्रोध हैं| दोनों ही प्रकार के क्रोध से बचने का प्रयास करें| आचार्य श्री ने आगे कहा कि आदमी की दुर्...

चातुर्मासिक प्रवचन: विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि ने धर्म सभा को संबोधित करते हुवे कहा कि सुबाहु कुमार ने गुरुकुल में विनय नम्रता के साथ ज्ञान सीखने की पिपासा ( इच्छा ) से थोड़े ही समय मे पढ़ाई पूर्ण करली 72 कलाओ में व राजनिति में साम दाम दंड भेद निति में निपुण हो गये गुरुकुल में रहते हुवे गुरु का व सभी का अपने व्यवहारों से दिल जीत लिया था पढ़ाई पूर्ण होने पर परीक्षाएं ली जाती परीक्षा लेने का अर्थ होता है जो पढ़ाई की है वह सिर्फ तोता रटंत तो नहीं है जो भी ज्ञान सीखे उसे अपने ह्रदय में उतारना चाहिये अर्थात आचरण में लाना चाहिये

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