श्री मुकेश नवलखा बने तेरापंथ युवक परिषद्, चेन्नई के अध्यक्ष तेयुप चेन्नई एक गौरवशाली संस्था हैं और आज उनके वार्षिक अधिवेशन में श्री मुकेश नवलखा का अध्यक्षीय पद पर मनोनयन हुआ है। अब इनका दायित्व है कि वे सम्पूर्ण युवा शक्ति को साथ लेकर अपनी सम्यक् कार्ययोजना बनाते हुए संघ और संघपति की सेवा के साथ तेयुप को गौरवमय ऊँचाईयां प्रदान करने में योगभूत बने उपरोक्त विचार साध्वी अणिमाश्री ने तेयुप चेन्नई के वार्षिक अधिवेशन में युवा साथियों के साथ अध्यक्ष के मनोनयन के बाद दर्शन करने पर कहें। इससे पूर्व तेरापंथ युवक परिषद्, चेन्नई का 54वाँ वार्षिक अधिवेशन वर्ष (2020-2021) आचार्य महाश्रमण जैन तेरापंथ पब्लिक स्कूल, माधावरम् में अध्यक्ष श्री रमेश डागा की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। साध्वीवृंद् के नमस्कार महामंत्र एवं मंगलपाठ के बाद कार्यवाही प्रारम्भ हुई। मंगलाचरण “विजय गीत” का संगान श्री नवी...
तेरापंथ महिला मण्डल द्वारा अन्नपूर्णा कार्यशाला का हुआ आयोजन साध्वी अणिमाश्रीजी का मिला पावन सन्देश अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशानुसार एवं आचार्य महाश्रमणजी की प्रबृद्ध शिष्या साध्वी श्री अणिमाश्रीजी की पावन प्रेरणा से तेरापंथ महिला मंडल चेन्नई द्वारा अन्नपूर्णा कार्यशाला का वर्चुअल जूम ऐप और फेसबुक पेज पर लाइव आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारम्भ प्रचार-प्रसार मंत्री श्रीमती संगीता आच्छा के नमस्कार महामंत्र के मंगल स्मरण के साथ हुआ। मंगलाचरण गीत आओ बहनों, जागों बहनों, .. युग धारा में प्राण भरें का संगान सहमंत्री श्रीमती कंचन भण्डारी एवं श्रीमती रीमा सिंघवी ने किया। महिला मण्डल अध्यक्षा श्रीमती शान्ति दुधोड़िया ने कार्यशाला के सम्भागीयों का स्वागत करते हुए कहा कि महिला मण्डल केन्द्र द्वारा निर्देशित हर कार्य को करने की कोशिश करती हैं। चेन्नई महिला मण्डल संघ और संघपति की से...
(no subject) सुंदेशा मुथा जैन भवन कोंडितोप में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेनसुरीश्वरजी म.सा ने कहा कि:- किसी भी वस्तु को तैयार करने के लिए , उसकी विधि का यथायोग्य पालन करना जरुरी हैं । यदि विधि का पालन न करे, तो निर्णित वस्तु के बदले अन्य वस्तु बन जाती हैं । पेट भरने के लिए बनाई जाने वाली रसोई भी उसकी विधि के पालन पूर्वक ही की जाती हैं । उसी प्रकार ही धर्म की आराधना भी यथायोग्य विधि के पालन पूर्वक होनी चाहिए। काया से विधि का पालन और मन से शुभ संकल्प के द्वारा हम धर्म की सच्ची आराधना कर सकते हैं । देव -गुरू और धर्म से संपर्क जोडने के लिए भूतकाल में हुए आचार्य श्री देवेन्द्रसुरीश्वरजी महाराजा ने तीन भाष्य सूत्र की रचना की हैं । देव तत्त्व की आराधना के लिए चैत्यवंदन भाष्य , गुरू तत्त्व की आराधना के लिए गुरूवंदन भाष्य एवं व्रत -नियम-पच्चक्खाण स्वीकर करने पच्चक्खाण भाष्य का ज्ञान आवश्यक हैं ।श...
पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का आगमन होगा !कोरोना महामारी की वजह से भीड़ वाले आयोजन तो नहीं हो पाएंगे पर हमें हर बार की तरह पर्युषण अहिंसात्मक रूप से ही मनाना है ! पर्युषण मे क्या करना है और क्या नहीं करना है उसकी थोड़ी जानकारी निचे दी गई है ताकि हिंसा ना हो और हम पाप से बचे ! जरूर पड़े और घर मे सबको बतावे ! 1 पर्युषण के दिन विशेष पुण्य को देने वाले है थोड़ा धर्म करने से बहोत अनेक गुना लाभ मिलता है उसी तरह पाप भी थोड़ा सा होने पर भी उसका फल कई गुना होकर मिलता है ! इसलिए पुण्य ज्यादा करें और पाप कमसे कम करें ! व्यापार आदी बंद रखे ! 2 पर्युषण मे जाले उतारने, लीपने ‘ पोतने , रंग रोगन, और साफ सफाई का काम ना करें ! अनाज और बिस्तर आदी धुप मे ना रखे ! झूठे बर्तन रात को ना रखे ! झूठे बर्तन मे 48 मिनिट बाद अनंत जीव पैदा होते है जिनकी हिंसा होती है ! जिस कार्य मे हमें लगे की एक भी जीव की हिंसा हो उसी...
वर्तमान परिवेश के अंदर यदि हमको किसी भी चीज का ज्ञान करना है और गहराई से उस ज्ञान के भीतर उतरने का प्रयास करना है तो हमको वार्तालाप का दौर प्रारंभ करना पड़ेगा। जब हम वार्तालाप करेंगे तब हमारे जीवन मे नए-नए ज्ञान के उन्मेश अपने आप ही पैदा होने प्रारंभ होंगे। जिस चीज का हमको विशेष ज्ञान करना है उस ज्ञान के विशेषज्ञ व्यक्ति के पास के हम जाएंगे और अपनी जिज्ञासाओं को प्रस्तुत करेंगे।जिज्ञासा सुनकर वह अपना चिंतन हमको प्रदान करना प्रारंभ करेंगे और जब उनके चिंतन धारा को हम सुनेंगे अनुभव करेंगे। अपने विचारों के साथ आत्मसात करेंगे तो हमको उस ज्ञान को समग्र रूप से जीवन में अवतरित करने का अवसर प्राप्त हो जाएगा। यदि हमने वार्तालाप का दौर बंद कर दिया तब हमारा ज्ञान हमारे भीतर के एक नई कुंठा पैदा करने वाला बन जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के अंदर उच्च आदर्श वाले व्यक्तियों के साथ हमेशा संप...
शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण ने आचार्य तुलसी चेतना केंद्र के महाश्रमण समवशरण से अपने प्रवचन मे फरमाया गया है कि जो अविनीत होता है उसे विपत्ति और जो विनीत होता है उसे संपत्ति मिलती है। यह बातें जिसे ज्ञात होती है वह व्यक्ति शिक्षा प्राप्त कर सकता है। साधु हो चाहे गृहस्थ हो अविनीत व्यक्ति किसी का प्रिय नहीं बन सकता है। विनीत और अविनीत के जीवन निर्माण की स्थिति भी अलग अलग होती है। आचार्य प्रवर ने एक कथानक के माध्यम से बताया कि एक ही समान शिक्षा प्राप्त करने वाले शिष्यों के स्वभाव से उनकी शिक्षा अलग-अलग रूपों में परिलक्षित होती है। जिस शिष्य में विनयशीलता और धैर्य प्रगाढ़ हो वह जीवन में सफल होने के साथ सुफल भी होता है। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के द्वितीय दिन जीवन विज्ञान के बारे में फरमाते हुए कहा कि पुस्तक ज्ञान प्राप्त करने के साथ विद्यार्थियों को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक ...
किलपॉक में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्य तीर्थभद्र सूरीश्सवर ने कहा परमात्मा अचिंत्य शक्ति है। यह वह शक्ति है जिसके बारे में हम कल्पना भी नहीं कर सकते। परमात्मा सिद्धशिला में विराजित है लेकिन वे अपना कार्य हर क्षैत्र में कर रहे हैं चाहे कोई भी काल या आरा हो। जिस तरह एक मां अपने बेटे की स्वच्छता व पवित्रता का ध्यान रखती है उसी प्रकार वे तीनों लोक के जीवों को स्वच्छ व पवित्र बनाने का कार्य कर रहे हैं। संसार में मनुष्य विषय और कषायों का सेवन कर अपनी आत्मा को मलिन बना रहा है। परमात्मा यह देख नहीं सकते कि कोई जीव आत्मा को मलिन बनाए। इसलिए वे नाम, आकृति, रूप यहां छोड़कर गए हैं। परमात्मा के नाम में शक्ति है। उनके स्मरण व दर्शन मात्र से पापों का क्षय होता है, पर हमें उनके प्रति श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा का कार्य परमार्थ करना, जीवों को तारना है। उन्होंने कहा निमित्त कारण के दो प्रकार है पुष्ट निम...