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आवश्यकता होती है संपत्ति, शक्ति, संस्कृति और संस्कार: संत श्री गौरव मुनि

दुर्ग / पर्यूषण पर्व आज सातवां दिन था जब से पर्यूषण पर्व प्रारंभ हुआ है तब से लगातार त्याग तपस्या करने वालों का तांता लगा हुआ है। जय आनंद मधुकर रतन भवन बांदा तालाब दुर्ग में संत रतन मुनी एवं विवेक मुनि के सानिध्य में चातुर्मास गतिमान है। धर्म सभा को संबोधित करते हुए संत श्री गौरव मुनि ने कहा जीवन में चार बातों की हमेशा आवश्यकता होती है संपत्ति, शक्ति, संस्कृति और संस्कार। मानव जीवन में इन सभी की सार्थकता है आज का प्रवचन संस्कार विषय पर केंद्रित था संस्कार चार प्रकार के बताए जाते हैं गर्भ संस्कार पूर्वक संस्कार माता-पिता का संस्कार, वातावरण या संगत से प्राप्त संस्कार। मनुष्य जिस प्रकार के वातावरण में रहता है उसमें वैसे संस्कार पनपते जाते हैं। साधु संतों एवं गुरु भगवंतो के सानिध्य में रहने वाले ज्यादा संस्कारवान होते हैं। अपेक्षाकृत दूसरे लोगों के साथ रहने वालों केअच्छे संस्कारों से चरित्र क...

जन्माष्टमी के अवसर पर फैंसी ड्रेस कार्यक्रम

दुर्ग कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में छोटे छोटे बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। फैंसी ड्रेस के कार्यक्रम के दौरान छोटे-छोटे बच्चों ने कृष्ण राधा के रूप में सजधज कर एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। संत गौरव मुनि के मार्गदर्शन में कृष्णा अष्टमी के आयोजन से दौरान छोटे-छोटे त्याग संकल्प मटका हांडी में रखा गया था जिसे कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह को एक-एक पर्ची निकालने को कहा गया। जिस पर्ची में जो संकल्प दिलाया गया था उस संकल्प का उस व्यक्ति को पालन करना था। उपस्थित जनसमूह जो पर्ची जिसकी निकली उसने उस संकल्प को पूरा करने का आश्वासन दिया। श्री कृष्ण एवं राधा के संदर्भ में अनेक विषयों पर संत गौरव मुनि ने प्रेरक मार्गदर्शन दिया।

अपनी शक्ति का सृजनात्मक कार्यों में करे उपयोग : साध्वी अणिमाश्री

कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला एवं अणुव्रत समिति के शपथग्रहण समारोह का हुआ आयोजन    साध्वी अणिमाश्री जी के सान्निध्य में अणुव्रत समिति के तत्वावधान में तेरापंथ सभा भवन, साहुकारपेट में कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यशाला एवं शपथग्रहण समारोह का आयोजन किया गया।   साध्वीश्री ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि जो व्यक्ति संगठन, संस्था से जुड़कर समाज की सेवा करता है, संस्था को चिरंजीवी बनाता है, वह कार्यकर्ता कहलाता है। संगठन व्यक्ति की योग्यता में निखार का माध्यम बनता है, उससे उसकी प्रतिभा बढ़ती है, उसकी मूल्यवत्ता बढ़ती है।  जो कार्यकर्ता अपने समय, श्रम का नियोजन कर, परिवार की परिस्थितियों, रिश्तो की मजबूती को साथ निभा, अपने दायित्व बोध को पहचान कर, समाज और मंच पर आकर सेवा देता है, वह वर्तमान के क्षण का उपयोग कर वर्धमान बन जाता है।  साध्वीश्री ने कार्यकर्ताओं के विभिन्न गुणों का उल्लेख करते हुए कहा कि...

युवा शक्ति तेरापंथ धर्मसंघ की रीढ़ : साध्वी अणिमाश्री

श्री मुकेश नवलखा बने तेरापंथ युवक परिषद्, चेन्नई के अध्यक्ष तेयुप चेन्नई एक गौरवशाली संस्था हैं और आज उनके वार्षिक अधिवेशन में श्री मुकेश नवलखा का अध्यक्षीय पद पर मनोनयन हुआ है। अब इनका दायित्व है कि वे सम्पूर्ण युवा शक्ति को साथ लेकर अपनी सम्यक् कार्ययोजना बनाते हुए संघ और संघपति की सेवा के साथ तेयुप को गौरवमय ऊँचाईयां प्रदान करने में योगभूत बने उपरोक्त विचार साध्वी अणिमाश्री ने तेयुप चेन्नई के वार्षिक अधिवेशन में युवा साथियों के साथ अध्यक्ष के मनोनयन के बाद दर्शन करने पर कहें।   इससे पूर्व तेरापंथ युवक परिषद्, चेन्नई का 54वाँ वार्षिक अधिवेशन वर्ष (2020-2021) आचार्य महाश्रमण जैन तेरापंथ पब्लिक स्कूल, माधावरम् में अध्यक्ष श्री रमेश डागा की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।   साध्वीवृंद् के नमस्कार महामंत्र एवं मंगलपाठ के बाद कार्यवाही प्रारम्भ हुई। मंगलाचरण “विजय गीत” का संगान श्री नवी...

माँ बीज है और अन्नपूर्णा पौधा – श्रीमती वीणा बैद

तेरापंथ महिला मण्डल द्वारा अन्नपूर्णा कार्यशाला का हुआ आयोजन साध्वी अणिमाश्रीजी का मिला पावन सन्देश अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशानुसार एवं आचार्य महाश्रमणजी की प्रबृद्ध शिष्या साध्वी श्री अणिमाश्रीजी की पावन प्रेरणा से तेरापंथ महिला मंडल चेन्नई द्वारा अन्नपूर्णा कार्यशाला का वर्चुअल जूम ऐप और फेसबुक पेज पर लाइव आयोजन किया गया।   कार्यशाला का शुभारम्भ प्रचार-प्रसार मंत्री श्रीमती संगीता आच्छा के नमस्कार महामंत्र के मंगल स्मरण के साथ हुआ। मंगलाचरण गीत आओ बहनों, जागों बहनों, .. युग धारा में प्राण भरें का संगान सहमंत्री श्रीमती कंचन भण्डारी एवं श्रीमती रीमा सिंघवी ने किया। महिला मण्डल अध्यक्षा श्रीमती शान्ति दुधोड़िया ने कार्यशाला के सम्भागीयों का स्वागत करते हुए कहा कि महिला मण्डल केन्द्र द्वारा निर्देशित हर कार्य को करने की कोशिश करती हैं।  चेन्नई महिला मण्डल संघ और संघपति की से...

“धर्म की आराधना में विधि पालन जरुरी हैं “

(no subject) सुंदेशा मुथा जैन भवन कोंडितोप में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेनसुरीश्वरजी म.सा ने कहा कि:- किसी भी वस्तु को तैयार करने के लिए , उसकी विधि का यथायोग्य पालन करना जरुरी हैं । यदि विधि का पालन न करे, तो निर्णित वस्तु के बदले अन्य वस्तु बन जाती हैं । पेट भरने के लिए बनाई जाने वाली रसोई भी उसकी विधि के पालन पूर्वक ही की जाती हैं । उसी प्रकार ही धर्म की आराधना भी यथायोग्य विधि के पालन पूर्वक होनी चाहिए। काया से विधि का पालन और मन से शुभ संकल्प के द्वारा हम धर्म की सच्ची आराधना कर सकते हैं । देव -गुरू और धर्म से संपर्क जोडने के लिए भूतकाल में हुए आचार्य श्री देवेन्द्रसुरीश्वरजी महाराजा ने तीन भाष्य सूत्र की रचना की हैं । देव तत्त्व की आराधना के लिए चैत्यवंदन भाष्य , गुरू तत्त्व की आराधना के लिए गुरूवंदन भाष्य एवं व्रत -नियम-पच्चक्खाण स्वीकर करने पच्चक्खाण भाष्य का ज्ञान आवश्यक हैं ।श...

15 अगस्त से जैन धर्म का सबसे बढ़ा पर्व

पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का आगमन होगा !कोरोना महामारी की वजह से भीड़ वाले आयोजन तो नहीं हो पाएंगे पर हमें हर बार की तरह पर्युषण अहिंसात्मक रूप से ही मनाना है ! पर्युषण मे क्या करना है और क्या नहीं करना है उसकी थोड़ी जानकारी निचे दी गई है ताकि हिंसा ना हो और हम पाप से बचे ! जरूर पड़े और घर मे सबको बतावे ! 1 पर्युषण के दिन विशेष पुण्य को देने वाले है थोड़ा धर्म करने से बहोत अनेक गुना लाभ मिलता है उसी तरह पाप भी थोड़ा सा होने पर भी उसका फल कई गुना होकर मिलता है ! इसलिए पुण्य ज्यादा करें और पाप कमसे कम करें ! व्यापार आदी बंद रखे ! 2 पर्युषण मे जाले उतारने, लीपने ‘ पोतने , रंग रोगन, और साफ सफाई का काम ना करें ! अनाज और बिस्तर आदी धुप मे ना रखे ! झूठे बर्तन रात को ना रखे ! झूठे बर्तन मे 48 मिनिट बाद अनंत जीव पैदा होते है जिनकी हिंसा होती है ! जिस कार्य मे हमें लगे की एक भी जीव की हिंसा हो उसी...

ज्ञान वृद्धि का अनुपम मार्ग है वार्तालाप: मुनि श्री भूपेंद्र कुमार

वर्तमान परिवेश के अंदर यदि हमको किसी भी चीज का ज्ञान करना है और गहराई से उस ज्ञान के भीतर उतरने का प्रयास करना है तो हमको वार्तालाप का दौर प्रारंभ करना पड़ेगा। जब हम वार्तालाप करेंगे तब हमारे जीवन मे नए-नए ज्ञान के उन्मेश अपने आप ही पैदा होने प्रारंभ होंगे। जिस चीज का हमको विशेष ज्ञान करना है उस ज्ञान के विशेषज्ञ व्यक्ति के पास के हम जाएंगे और अपनी जिज्ञासाओं को प्रस्तुत करेंगे।जिज्ञासा सुनकर वह अपना चिंतन हमको प्रदान करना प्रारंभ करेंगे और जब उनके चिंतन धारा को हम सुनेंगे अनुभव करेंगे। अपने विचारों के साथ आत्मसात करेंगे तो हमको उस ज्ञान को समग्र रूप से जीवन में अवतरित करने का अवसर प्राप्त हो जाएगा। यदि हमने वार्तालाप का दौर बंद कर दिया तब हमारा ज्ञान हमारे भीतर के एक नई कुंठा पैदा करने वाला बन जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के अंदर उच्च आदर्श वाले व्यक्तियों के साथ हमेशा संप...

शिक्षा और विनयशीलता के समन्वय से होता है सर्वांगीण विकास : आचार्य महाश्रमण

शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण ने आचार्य तुलसी चेतना केंद्र के महाश्रमण समवशरण से अपने प्रवचन मे फरमाया गया है कि जो अविनीत होता है उसे विपत्ति  और जो विनीत होता है उसे संपत्ति मिलती है। यह बातें जिसे ज्ञात होती है वह व्यक्ति शिक्षा प्राप्त कर सकता है। साधु हो चाहे गृहस्थ हो अविनीत व्यक्ति किसी का प्रिय नहीं बन सकता है। विनीत और अविनीत के जीवन निर्माण की स्थिति भी अलग अलग होती है। आचार्य प्रवर ने एक कथानक के माध्यम से बताया कि एक ही समान शिक्षा प्राप्त करने वाले  शिष्यों के स्वभाव से उनकी शिक्षा अलग-अलग रूपों में परिलक्षित होती है। जिस शिष्य में  विनयशीलता और धैर्य प्रगाढ़ हो वह जीवन में सफल होने के साथ सुफल भी होता है। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के द्वितीय दिन  जीवन विज्ञान के बारे में फरमाते हुए कहा कि पुस्तक ज्ञान प्राप्त करने के साथ  विद्यार्थियों को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक ...

परमात्मा अचिंत्य शक्ति: आचार्य तीर्थभद्र सूरीश्सवर

किलपॉक में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्य तीर्थभद्र सूरीश्सवर ने कहा परमात्मा अचिंत्य शक्ति है। यह वह शक्ति है जिसके बारे में हम कल्पना भी नहीं कर सकते। परमात्मा सिद्धशिला में विराजित है लेकिन वे अपना कार्य हर क्षैत्र में कर रहे हैं चाहे कोई भी काल या आरा हो। जिस तरह एक मां अपने बेटे की स्वच्छता व पवित्रता का ध्यान रखती है उसी प्रकार वे तीनों लोक के जीवों को स्वच्छ व पवित्र बनाने का कार्य कर रहे हैं। संसार में मनुष्य विषय और कषायों का सेवन कर अपनी आत्मा को मलिन बना रहा है। परमात्मा यह देख नहीं सकते कि कोई जीव आत्मा को मलिन बनाए। इसलिए वे नाम, आकृति, रूप यहां छोड़कर गए हैं। परमात्मा के नाम में शक्ति है। उनके स्मरण व दर्शन मात्र से पापों का क्षय होता है, पर हमें उनके प्रति श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा का कार्य परमार्थ करना, जीवों को तारना है। उन्होंने कहा निमित्त कारण के दो प्रकार है पुष्ट निम...

धर्म ही हमारे जीवन का प्राण है: आचार्य तीर्थ भद्रसूरिश्वर

किलपाक में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्य तीर्थ भद्रसूरिश्वर ने कहा धर्म ही हमारे जीवन का प्राण है। कोई भी कार्य की सिद्धि दो कारण के बिना नहीं होगी- उपादान कारण यानी मुख्य कारण और निमित्त कारण। मोक्ष की प्राप्ति में उपादान कारण हमारी आत्मा है और मोक्ष का निमित्त कारण परमात्मा है। आत्मा का स्वरूप परमात्मा स्वरूप में रुपान्तर होने का कारण परमात्मा है। यदि आत्मा को परमात्मा का योग नहीं मिलेगा तो मोक्ष नहीं मिलेगा। कोई कहे मेरे पुरुषार्थ से मोक्ष प्राप्त कर लूंगा यह मिथ्यात्व है। उन्होंने कहा संसार में कोई भी कार्य निष्पादन के पांच कारण होते है काल, स्वभाव, नियति, कर्म और पुरुषार्थ। परमात्मस्वरुप को देखकर ही मोक्ष की प्राप्ति की इच्छा होती है। निमित्त को ही मुख्य कारण बनाओ। आत्मा उपादान है लेकिन परमात्मा के आलम्बन के बिना परमात्मस्वरुप प्रकट नहीं हो सकता। उन्होंने कहा मन में राग द्वेष होने के क...

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