जालना : भोजन आणि भजन जितके पचेल तितकेच करावे. मग कुणी काहीही सांगू! ज्याने काही फायदा होत नाही, अशी कोणतीही गोष्ट करुच नये, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधना या विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, आपण जेव्हढे आनंदीत राहू तितके चांगले! ज्यापासून आपल्याला केवळ दु:खच मिळणार आहे, ती गोष्ट करायची कशाला? हमारे साधू तो बताते है की, सामायिक केल्याचे फळ मिळते. पण हमे तो ऐसा कोई नजर नही आता। हमारे घर हरदिन झगडे चलते है। तो हमने ऊस बंदे को कह दिया की, अगर ऐसा है तो अपुने सामायिक नही करना चाहीए। छोड दो! हमने तो...
जालना : विचार आणि संस्कारी असलोत तरच प्रभूंजवळ जाऊ शकतो, अन्यथा नाही. असे मन आपले लावा की, प्रभूंना आपल्याजवळ आल्याशिवाय पर्यायच राहणार नाही, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधना या विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, हे अंग असे आहे की, परम् दुर्लभ आहे. माणसांच्या आतमध्ये आत्मीयता पाहिजे, तीच मोठी देणगी आहे. जिसमें आत्मीयता होगी वों धर्म से कभी- भी भागेगें नही! जब ऊसे धर्मभाव वाढीस लागल्याशिवाय राहत नाही. धर्म श्रवण करना भी जरुरी ंहै। जो खुद सुन नही रहा हो। वो धर्म क्या बढेगा। श्रध्दा जरुरी आहे, त्याग ...
जालना : या जिंदगीचा काहीही भरोसा नाही. ये सासे हमे मिली है। ऊसका सद्उपयोग करना चाहिए। असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधना या विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, दीपक को अगर ऑक्सीजन नही मिल पाता तो… लाईट का ऊसी तरह है। इसिलीए कहता हूॅ की सांसे हमे किसीने दिए वाले है। मेरा मकसद जोडना चाहिए। बल्की उनको तोडने का नही। कुणी निंदा केली तरी ते सहन करण्याची आपली तयारी पाहिजे. मै तो हमेशा प्रभूं को हमेशा मांगता हो की। कीसी भी मेरी निंदा करीभी तो वो सहन करने ताकद मुझे दे ना। असेही त्यांनी सांगितले. याप्रसं...
जालना : या व्यर्थ गोष्टी नाहीत. हा आगमचा रस आम्हाला गृहण करण्याची संधी मिळाली आहे, त्याचे सोने करण्याची हीच वेळ आहेे, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधना या विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, हा रस गृहन करण्याची संधी मिळाली त्याचे सोने केल्याशिवाय कुणीही राहू नये. ये आंगण में जब बाबा आये थे । तब वो बिमार थे, रुग्ण थे। पर उन्होने आगम रस गृहण करना नही छोडा। जब वो नही छोड रहे तो अपुने क्या मानकर छोडना। आज आठव्या दिवसापर्यंत आलो आहोत. जब हम चोर नही है। पर चोर कुछ लेकरही जाते है। बाबा तुम्हारे पास तो कुछ ...
जालना : एकवेळ या संसाराला आणि बाहेरच्या दुनिया विसरुन जाणे शक्य आहे. परंतू जब सौ डगरीपर पाणी आता है तो उससे भाप निकलती है। वो पाणी शुध्द असतं. तसंच या पण रसाचं आहे. ऊस घडी हम इंतजार करना चाहिए। असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित श्रृत आराधना या विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, इस मती में संमती आजाए। आपकी करुणा, दया आजाए! जिसप्रकार श्रीकृष्ण छाप रहती है। जैसे बुध्द में गौतमबुध्द की छाप है। उसी प्रकार इस अध्याय में भगवान महावीरांची छाप है। ऊसी प्रकाार हम जब इस संसार को, इस दुनिया को भुल जायेगे तब ऊसका रस आल्याशि...
नवरात्री में 10 दिवसीय अखंड मौन एवं एकांतवास मे विशेष ध्यान साधना पश्चात गुरुमॉं पुज्यनीय चंद्रकलाश्री जी महारासा द्वारा महामांगलीक ! आकुर्डी-निगडी- प्राधिकरण जैन श्रावक संघ के प्रांगण में जप- तप- धर्म आराधना संग पुज्यनीय गुरुमॉं महाराष्ट्र सौरभ चंद्रकला श्री महाराज साहेब शासन सुर्या पुज्यनीय स्नेहाश्रीजी जी एवं दिवाकर दिप्ती पुज्यनीय श्रुतप्रज्ञा श्री जी का स्वर्णिम चातुर्मास गतिमान हो रहा है! नवरात्री में 10 दिवसीय अखंड मौन साधना एवं विशेष ध्यान साधना हेतु एकांतवास में विराजमान हो दिन रात साधना में रत रहते हुये 2/3 घॅंटे का विश्राम कर साधना करनेवाले उपप्रवर्तिनी पुज्या गुरुमॉं चंद्रकला श्री जी महाराज सा की साधनाकी पुर्णाहुती आज विजयदशमी के अवसरपर पुरी हुई! 9.30 बजे प्रथम दर्शन दे महामांगलीक फर्मायी! इस अवसरपर अनेक धर्मअनुरागी अपने परिवार सह उपस्थित थे! राजा श्रीपाल जी की कथा, प्रवचन, पंच...
आकुर्डी स्थानक भवन में आज अपने प्रवचन उदभोदन में साध्वी स्नेहाश्री जी ने बताया अपना सबकुछ त्यागकर साधु साध्वी भगवंत संय्यम पथ को प्रशस्त करने हेतु भगवान महावीर के सिध्दांतो को हर क्षेत्रमे पहॅुंचाने का एवं धर्म जागरण करने का काम पैदल विहार कर सदैव करते है ! ऐसे महान विभुतीयो प्रति निंदा करना , उनका अप प्रचार करना या उनके प्रति निंदा युक्त शब्द सुनना अपराध के समान है! अपने गुरु जिनोने आजीवन त्याग मय जीवन जिना है उनके प्रति अपशब्द निंदा निषेधार्थ है! हर भक्त इन बातोसे अलिप्त रह गुरुभगवंतो प्रति श्रध्दावान बने! आज के धर्मसभा मे सौ. मंगल जी श्रीकांतजी नहार ने बहुआयामी व्यक्तिमत्व रुपसे संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी का गौरव किया! हर सुख दुःख के साथी, हर समारोह मे अनेक समस्याओं के बावजुद भी उपस्थिती, समाज के हर परिवार से मधुर संबंध और हरएक के दुःख मे साथ देना वाला यह व्यक्तीमत्व और अपने संघ के हर पर...
गुरु अमर संयम अमृत महा महोत्सव के पावन अवसर पर श्रमण संघीय उप प्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी म सा के पावन सानिध्य में एवं दक्षिण सूर्य अमर शिष्य डॉक्टर श्री वरुण मुनि जी म सा की सदप्रेरणा से श्री गुजराती वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ तुरकिया भवन के प्रांगण में पांच दिवसीय महा महोत्सव के आध्यात्मिक व जन कल्याणकारी कार्यक्रम प्रारंभ होने जा रहे हैं। इस पावन श्रृंखला में बुधवार को सामायिक व्रत की सामूहिक आराधना की गई । सामायिक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए परम पूज्य युवा मनीषी डॉक्टर श्री वरुण मुनि जी महाराज साहब ने फरमाया कि सामायिक हमारे जीवन में समता भाव को बढ़ाती है और जिस जीवन में समता आ जाती है उस जीवन में शांति प्रेम आनंद का संगीत हरदम गुंजित रहता है। सामायिक वह साधना है जिसके द्वारा हम आत्म अनुभूति, आत्म साक्षात्कार तक पहुंच सकते हैं । पूज्य प्रवर्तक श्रुताचार्य भगवन श्री अमर...
गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मासार्थ विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ. श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने प्रवचन सभा में श्रमण संघीय महामंत्री शेरे मेवाड़, ज्ञान सिन्धु, आशुकवि श्री सौभाग्य मुनि जी महाराज के पांचवीं पुण्य स्मृति दिवस पर उनके बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सारगर्भित प्रकाश डालते हुए कहा कि श्री सौभाग्य मुनि जी म. सा. आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत महान साधक सन्त शिरोमणि थे। व्यक्ति जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है। इस उक्ति को वीर प्रसूता मेवाड़ धरा में जन्मे संत शूरवीरों ने बार – बार चरितार्थ किया है। इस कड़ी में ज्ञान दिवाकर श्रमण संघीय महामंत्री, ज्ञान सिन्धु, आशुकवि, शेरे मेवाड़ परम पूज्य श्री सौभाग्य मुनि जी म. सा. कुमुद ने अपने जीवन में बिन्दु से सिन्धु, शून्य से शिखर तक की यात्रा का अनूठा व अनुकरणीय आदर्श सकल जनमानस में स्थापित किया। समय के साथ प्रतिभा...
गुरु अमर संयम अमृत महोत्सव 5 अक्टूबर से सरदार पटेल भवन, बैंगलोर में आरंभ हो रहा है। यह अमृत महोत्सव गुरु आत्म जन्म जयंती समारोह, गुरु शुक्ल पावन जन्मोत्सव, गुरु पद्म पुण्य रजत जयंती ज्जयंति वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर, बैंगलोर में चातुर्मास हेतु विराजमान दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने बताया कि इस अमृत वर्ष महोत्सव के दौरान महान गुरुओं की शिक्षाओं और जीवन को सफल बनाने वाले उद्देश्यों के अलावा हमें जीवन परीक्षण और उज्ज्वल मार्ग पर चलने का सौभाग्य प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि इस धार्मिक अमृत वर्ष महोत्सव में चित्रकला प्रतियोगिता और अन्य प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएंगी, जिनके माध्यम से बच्चों और हमारे भीतर छिपी हुई प्रतिभा और धार्मिक निष्ठा की परख होगी। उन्होंने कहा कि गुरु अमर संयम अमृत महोत्सव एक धार्मिक वर्षा महोत्सव है,...
जालना : आपल्याला शांती हवी आहे ना, ती कशामुळे मिळेल तर केवळ- केवळ भगवंत परमात्म्यामुळे, त्याशिवाय कुठेही शांती मिळणार नाही, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. पुढे बोलतांना म्हणाले की, शांती तर प्रत्येकालाच हवी आहे, मात्र ती केवळ- केवळ भगवंताजवळ आहे. आपण जर प्रभूजवळ जाणारच नसाल तर कशी मिळेल शांती! आपला नातं हे केवळ जीनवाणीशी आहे. हीच जीनवाणी आपल्यातील गलतफॅमी दूर करु शकते, तेवढे सामर्थ्य तिच्यात आहे. आज जे काही प्राप्त झाले ते केवळ प्रभू भगवंतांमुळेच! वीरथुइर्र्च्या माध्यमातून आज आपण सर्वजण चाळीसाव्या भ...
प्रभु परमात्मा का संदेश आगम के माध्यम “समय गोयम मा पमायए” अर्थात हे गौतम! समय मात्र का भी प्रमाद मत करो क्योंकि जो समय है वो हिं जीवन है और जो जीवन है बो हि समय है। हमें जितना समय मिला हुआ है वहीं हमारा जीवन है। शास्त्रकार के अनुसार जीवन, समय यह सब आत्मा के पर्यायवाची शब्द हैं। समय और आत्मा परस्पर जुडे हुए हैं। समय और जीवन का इतना अटूट संबंध है कि इन दोनों को हम अलग अलग नहीं कर सकते। हमारा अपना अस्तित्व है तो समय है। इसीलिए यह समझने की जरूरत है कि जीवन की सार्थकता का मतलब, जीवन को साधने का अर्थ, जीवन को व्यर्थ जाने न देना है। जीवन की उपयोगिता लेवे, हम प्रमादी न बने, हम समय का सदुपयोग करें क्योंकि समय के सदुपयोग से ही जीवन का सदुपयोग होता है। अर्थात् जो रात्रियाँ और दिन बीत जाते हैं वे लौटकर वापस नहीं आते। इसलिए समय को साधने से जीवन साधा जाता है। समय सार्थक होता है तो जीवन सार्थ...