चेहरे की मुस्कराहट से सामने वाला कितना भी क्रोधी नम्र हो जाता है। वर्तमान मे बच्चे तो है मगर उनका बचपन गायब है। वर्तमान मे अपने तो बहुत है मगर अपनापन गायब है। आज कल मुस्कराहट भी नकली हो गई है।हमे ना सिर्फ चेहरेपर मुस्कराहट नही अंतर मे भी प्रेम भाव रखने चाहिए तभी जीवन का माहोल भी खुशीओ से भरा भरा रहेगा। मानव भगवान को मंदिर और किताबो मे ढूंढता है मगर भगवान तो स्वयं के हृदय मे विराजमान है।इसलिए जीवन मे सर्व प्रथम स्वयं को जानना होगा तभी जीवन मे सुखी हो सकते है। हम जीवन मे मुस्कराहट के साथ व्यवहार करेंगे तो सभी कार्य अच्छी तरह से पूर्ण होंगे। प पू महिमा श्री जी ने अपने उदबोधन मे कहा की धन कमाना संसार परिवार चलाने के लिए आवश्यक है। मगर अपने जीवन का उत्थान करने के लिए धर्म आवश्यक है। धन तो अपनी पुण्य वाणी से आता है और कर्मो के का,ण चला भी जाता है । कहते है ...
माधावरम्, चेन्नई 16.07.2022 ; आचार्य श्री महाश्रमणजी के शिष्य मुनि श्री सुधाकरजी ने जैन तेरापंथ नगर, माधावरम में नमोत्थुणं की प्रेरणा देते हुए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हूए कहा नमोत्थुणं का पाठ शाश्वत है। स्वर्ग लोक के चौसठ इन्द्र व असंख्य देवी-देवताओं का परिचित पाठ है। नमोत्थुणं के पाठ से साधक के पाप कर्म का भी पुण्य कर्म में संक्रमण हो जाता है। शास्त्रों में ऐसे अनेकों उदाहरण मिलते हैं। सिद्धों व अरिहंतो की स्तुति व स्तवन से आधि, व्याधि और उपाधि से मुक्ति मिलती है। नमोत्थुणं का पाठ रोग-शोक का नाश करता है। इससे अद्भुत शक्ति व शांति की तरंगें पैदा होती है, जो वातावरण को भी आनंदमय, मंगलमय बना देती है। मुनि श्री ने आगे कहा नमोत्थुणं को प्रणिपात व शुक्रत्व के नाम से भी जाना जाता है। मुनिश्री ने विवेचना करते हुए आगे कहा विनम्रता व समर्पण, धर्म का पहला मंत्र है। हमें अहम की नहीं अर्हम् की स...
यह संसार पाप की दुनिया है, पाप क इसस संसार से हमें आगम ही बचा सकते है। हम आगम का पाठ नहीं कर सकते है तो कम से कम इसका श्रवण कर हम हमारी आत्मा को परमात्मा बना सकत है और आगम के बताए गये मार्ग पर चल कर हम आत्मा का कल्याण कर कर्मों की निर्जरा कर सकते है। उक्त उद्गार श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ग्रेटर हैदराबाद, के तत्वावधान में काचीगुड़ा स्थित श्री पूनमचंद गांधी जैन स्थानक भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपप्रवर्तिनी महासती श्री मंगलप्रभा जी म.सा ने व्यक्त किये। संघ के संघपति स्वरूपचंद कोठारी ने आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए महासती ने जीवन में आगम की महत्ता को दर्शाते हुए कहा कि आगम को दर्पण की उपमा दी गयी जो हमे हमारी आत्मा से साक्षात्कार कराते है। आगम हमारी आत्मा में व्याप्त कषायों के कचरे को साफ कर आत्मा का कल्याण करते हैं। महासती ने फरमाया की हम आत्मा की त...
श्रीरामपूर दि. 16 (वार्ताहर) महापुरुषांच्या कथा ऐकण्याची संधी सर्वानाच मिळत नाही. महापुरुषांच्या कथा ऐकल्यावर प्रत्येकाच्या व्यथा दूर होतील. या कथा जीवनाला नवीन देतात. असे प्रतिपादन प्रखर व्याख्यात्या प.पु.विश्वदर्शनाजी म .सा यांनी जैन स्थानकमध्ये प्रवचनातून केले. महापुरुषांची महती सांगताना पू . विश्वदर्शनाजी म्हणाल्या कि,महापुरुषांचे नाव जिभेवर येणे हे पुण्य आहे. टी .व्ही वर दाखविल्या जाणाऱ्या मालिकांच्या कथातून पश्चाताप होतो. महापुरुषांच्या कथा या मार्गदर्शक ठरतात . त्या जीवन जगण्याची प्रेरणा देतात. धर्मकथा कधीही रटाळ वाटत नाही. त्यांच्या चिंतनाने ,मननाने मनाची मरगळ दूर होते. उद्यानामध्ये फुलांचे सौंदर्य आपण पाहतो. त्याच्या मुळीचा विचार करीत नाही. या मुळात जे कष्ट घेतलेले असतात .त्यामुळेच फुल उगवते म्हणून वरवरचे सौंदर्य ,रुतो, पाहण्यापेक्षा आतील मूळ पाहावे .” उपर शेरवानी ,नीचे परेश...
अभातेयुप के एमबीबीड़ी अभियान का चेन्नई 15.07.2022 ; भारतवर्ष के 75वें अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् द्वारा आयोजित मेघा ब्लड़ डोनेशन ड्राइव के बेनर का तमिलनाडु राज्य के राज्यपाल, माननीय श्री आर एन रवि द्वारा किया गया। राज्यपाल महोदय आर एन रवि ने मानव सेवा के इस महनीय कार्यक्रम की सराहना करते हुए, सफलता की बधाई सम्प्रेषित की। एमबीबीड़ी तमिलनाडु राज्य प्रभारी मुकेश नवलखा ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि अभातेयुप सामाजिक, धार्मिक अनुष्ठान के साथ मानवीय सेवा के महनीय कार्य करती आ रही है। तेयुप, चेन्नई अध्यक्ष ने राज्यपाल महोदय को बताया कि अभातेयुप द्वारा 17 सितम्बर 2022 को भारत के साथ अपनी स्थानीय शाखा परिषदों के साथ पुरे विश्व में एक ही दिन, एक ही समय में ब्लड़ डोनेशन का यह महाअभियान समायोजित किया जायेगा। तेयुप चेन्नई भी पुरे तमिलनाडु में तेयुप की शाखाओं के ...
माधावरम्, चेन्नई 15.07.2022 ; मुनि सुधाकर के सान्निध्य में जय समवसरण, जैन तेरापंथ नगर, माधावरम्, चेन्नई में *विघ्न हरण ढाल* पर विशेष प्रवचन माला का शुभारम्भ हुआ। मुनि श्री ने श्रद्धालु जनमेदनी को सम्बोधित करते हुए कहा कि ध्यान और जपयोग के बिना हमारी साधना अधूरी है। धार्मिक व्यक्ति को प्रतिदिन ध्यान और जपयोग का अभ्यास करना चाहिए। भगवान महावीर की वाणी में जप का आध्यात्मिक यज्ञ के रूप में प्रतिपादन किया गया है। ध्यान से पूर्व संचित क्लेष दूर होता है तथा चित्त शुद्ध होता है। जपयोग से शक्तिशाली कवच का निर्माण होता है। जिससे किसी प्रकार के अनिष्ट का जीवन में प्रवेश नहीं होता है। परिवार की शान्ति के लिए सामूहिक मंत्र साधना का भी बहुत महत्व है। वीतराग मन्त्रों का अनुष्ठान, धार्मिक साधना का प्रमुख अंग है। उन्होंने कहा कि जीवन में प्राण शक्ति का बहुत महत्व है। हमारा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्व...
16 जुलाई खवासपुरा सुख देने पर सुख दुख देने पर दुख भोगना पड़ेगा शनिवार को संत शिरोमणी प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने चातुर्मास मे आयोजित धर्म सभा मे विचार व्यक्त करतें हुयें कहां दुखः देकर परमात्मा से सुख की उम्मीद नही करे! जैसा करोगे वैसा ही जीवन मे फल पाओगे मानव राग देवेष और माया के चक्कर मे अपना ही विनाश कर रहा है परमात्मा की वाणी का जीवन मे समावेश होने पर ही जीवन मे सुख की प्राप्ति हो पाएगी ! महेश मुनि नानेश मुनि ने भजन के माध्यम से भाव रखे ! हितेश मुनि ने सुपाक विपाक सूत्र का वाचन करते हुये कहां कि भगवान का नाम जीवन मे नही लिया तो प्राणी अपनी आत्मा का उध्दार नही कर पायेगा! धर्मसभा का संचालन करते हुये एम अशोक कोठारी ने बताया कि जैतारण के मरूधर केसरी पावन धाम के अध्यक्ष हुक्मीचन्द झामड़ राष्ट्रीय जैन कॉन्फ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष नेमीचन्द चौपड़ा,अनिल चत्तर,पाली संघ के महामंत्री पदमचन्द ललवाणी,उद...
पूज्य महासती उपप्रवर्तिनी पूज्य श्री दिव्य ज्योतिश्रीजी म.सा.आदि ठाणा -6 के सानिध्य में के श्री महावीर भवन नागदा जंक्शन मे ज्ञान वर्धक प्रवचन की श्रृंखला निरंतर चल रही है जप, तप, एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रति योगिताओं का भी आयोजन शुरू हो गया है छोटे महासती पूज्य श्री काव्याश्रीजी म.सा.ने मधुर प्रवचन में फरमाया की जिस तरह से हम रोज कपड़े बदलते हैं उसी तरह हमारी आत्मा भी हर जन्म में नया शरीर धारण करती हैं हमारा मानव जन्म सूर्य की भांति है +बचपन बाल सूर्य के समान, युवावस्था दोप. तेज सूर्य के समान, और वृद्धावस्था सांध्य के ढलते सूर्य के समान होता है इसी प्रकार पूज्य महासती श्री दिव्यज्योति जी म.सा. ने फरमाया कि जब जीवन मे पाप कर्म का क्षय होता है तभी आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है और ये”धर्म” के बैगर असंभव है धर्म कल्पवृक्ष के समान होता है संसार के सारे सुख एवं सार भूत तत्व”...
जय जिनेंद्र, कोडम्बाक्कम वडपलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में आज 16 जुलाई शनिवार कोो सुधाकंवर जी म सा ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए 32 आगमों और जैन दर्शन में उत्तराध्यन सूत्र का महत्व बताते हुए कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र अध्यात्म की गीता है। जब शरीर गंदा हो जाता है तो पानी में डुबकी लगाने से शरीर साफ हो जाता है! वैसे ही भीतर के मैल को हटाने के लिए जिनवाणी रुपी गंगा की डुबकी लगानी चाहिए! उत्तराध्ययन सूत्र एवं विपाक सूत्र उस वसीयत के समान हैं जो परमात्मा ने अपने अंतिम समय में अपनी संतानों को दिया। सुयशाश्रीजी म सा के मुखारविंद से:- आज का विषय:- इस संसार में सबसे महत्वपूर्ण और बेशकीमती चीज अगर कोई है तो वह है हमारा जीवन । हमारी उपलब्धियां, हमारी संपत्ति, हमारा ऐश्वर्य तब तक ही मायने रखता है जब तक की हमारा अस्तित्व है। यह सारी चीजें हमसे हैं, हम इन चीजों से नहीं है। परमात्मा की अनंत कृपा से हमे...
15 जुलाई खवासपुरा विनय ही धर्म संत शिरोमणी प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने श्री मरूधर केसरी रूप सुकन दरबार मे श्रध्दांलूओ को सम्बोधित करतें हुये कहाँ कि जीवन को संवारने के अनेकों मार्ग है ! उनमे से विनय ऐसा गुण जो मानव मे आ जाये तो जीवन को बदलने मे देर नही लगती ! वह धर्म के द्वारा ही आ सकता है ! मानव के जीवन मे विनय और नम्रता आना जरूरी है वो धर्म के द्वारा ही जीवन मे आएगी ! विनय धर्म भी है और जीवन का आधार भी ! इसदौरान नानेश मुनि और हितेश मुनि ने भजन और सुविपाक सूत्र का वाचन करते हुये कहां कि जीवन मे सुख पाना है तो राग द्वेष माया को त्याग ने पर जीवन मे सुख पाया जा सकता है! श्री संघ के अध्यक्ष प्रसन्नचन्द कोठारी महामंत्री जे विजयराज कोठारी ने बताया कि धर्म सभा मे पीपाड़,ब्यावर,जौधपुर पाली,अजमेर,सुरत आदि अनेको क्षैत्रो से पधारे अतिथियों का संघ के सदस्यों द्वारा धर्म सभा मे सुकनमुनि, महेश मुनि,हरी...
श्रीरामपूर दि. 15 (रमेश कोठारी) वडिलधार्यांची छाया असणे हि भाग्याची बाब आहे. वडीलधारी माणसे ही दीपस्तंभासारखी आहेत.थोरांचे आशीर्वाद वाया जात नाही. वडीलधारी माणसे घरात असलीच पाहिजेत .म्हणूनच म्हणतात कि “बुजूर्गोकी छाया बडी चीज है” ! असे प्रतिपादन प्रखर व्याख्यात्या साध्वी पू .श्री. विश्वदर्शनाजी म .सा यांनी केले. दादा गुरुदेव स्व. पू .श्री तिलोकऋषीजी यांचे पुण्यस्मृती दिनानिमित्त त्यांना वंदन करून त्यांनी सांगितले कि. इमारतीचा पाय बडी चीज है ! तिजोरीकी माया बंदी चीज है !तसेच बुजूर्गोकी छाया बंदी चीज है !प्रत्येकाने वडीलधाऱ्यांच्या आदर सन्मानाने मन ठेवा. त्यांना अपमानित करू नका. त्यांचे मार्गदर्शन घ्या .पूर्वीचे रीतिरिवाज ,चाली परंपरा बंद झाल्याने आज दुर्घटना वाढल्या आहेत . दादा गुरुदेव यांचे कार्याबद्दल सविस्तर माहिती प पू . विश्वदर्शनाजी म .सा यांनी प्रवचनातून दिली. त्यां...
कोडमबाक्कम वडपलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में आज ता: 15 जुलाई शुक्रवार, सुयशा श्रीजी मसा के मुखारविंद से: हमें एक करोड़ की लॉटरी लगी है तो हम खुशी से फूले नहीं समायेंगे, अपने दोस्त नाते रिश्तेदारों को बताएंगे और कार, बंगला रिनोवेशन, पढ़ाई लिखाई के बारे में सोचेंगे हमें नींद भी नहीं आएगी! यह प्रकृति का नियम है कि अगर अधिक खुशी हो या अधिक दुख तो नींद नहीं आती! दूसरे दिन अगर वही न्यूज़पेपर में यह आ जाए कि कल के नंबर में थोड़ा सा करेक्शन है, और आखिरी नंबर दो नहीं चार है, हमारी सारी खुशियां फैल हो जाएगी और हम अत्यंत दुखी हो जाएंगे! हमारी स्थिति कल जैसे ही थी लेकिन एक समाचार ने हमें बहुत सारी खुशियां दें दी और एक समाचार ने हमें बहुत दुखी कर दिया! हमारे पास 1 दिन मोबाइल नहीं है तो भी हम परेशान हो जाते हैं! दृष्टांत:- एक सम्राट ने वृद्ध सन्यासी से (पुरोहित या intellectual) पूछा कि हमारे जीव...