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प्रसन्नता से बढ़ती रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति: साध्वी डॉ गवेषणाश्री

 ढ़ाई अक्षर के शब्द- विषय पर रविवार को विशेष प्रस्तुति Sagevaani.com /चेन्नई: आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या डॉ. साध्वी गवेषणाश्री के सान्निध्य में ‘बी हैप्पी, नॉर्मल बीपी’ कार्यशाला का आयोजन जैन तेरापंथ नगर, माधावरम् में हुआ। डॉ साध्वी गवेषणाश्रीजी ने कहा कि हम अपने कपड़े बदलतें है, हमारा एड्रेस बदलतें रहते है, लेकिन हम हमारे चेहरे को स्माईल नहीं रख पाते हैं, बदलतें रहते हैं। हमें अपने जीवन की प्रसन्नता को नहीं भूलना चाहिए। जीवन को यदि बीमारी रहित रहना है तो खुश रहे। यह सुखी जीवन का बहुत बड़ा मंत्र है। यह एक ऐसा प्राकृतिक टानिक है, जिसके द्वारा विजातीय तत्वों का निष्कासन किया जा सकता है। शरीर के दर्द, गठिया, वात रोग, एलर्जी, बीपी, शुगर जैसे रोगों से राहत देने में सहायक तत्व है। रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति को बढ़ाने का बहुत बड़ा साधन है। जरूरत है किसी से बात करे तो मुस्कुराकर करे...

भाव से ही मोक्ष भाव से ही संसार

*🪷 सदभाव संबोध 🪷* *🦚 श्रुतार्थ वर्षावास 🦚*   भाव से ही मोक्ष भाव से ही संसार है..! *सदभाव मोक्ष का एवं* *दुर्भाव संसार का कारण हैं.!* 💫 सदभाव से भव का विराम होता है, *भव के अंत से* *स्वभाव की प्राप्ति होती हैं.!* ✅ अभी तक हमारे भव भ्रमण का अंत नहीं हुआ है तो मानना पड़ेगा की हम सदभाव से पतित है.! 🪞 *दृष्टि को* *बाह्य भावो से* *निवृत करके अंतर में* *स्थिर करेंगे तो हमे अपना* *स्तर स्वतः पता चल जाएगा.!* 🧘‍♂️ *सोलह* *भावना के चिंतन से* *दुर्भाव का अंत होता है और* *सदभाव का विकास होता है.!* 🪔 श्री वीतराग देव प्रणित मार्गानुसारी अनुष्ठानों के आचरण से, उन अनुष्ठानों की अनुमोदना से, मार्गस्थ आराधको के गुणानुराग से, शासन के अनुशासन में रहने से, शासन सेवामें योगदान से, अन्य को शासनरागी बनाने से अंतर में रहा दुर्भाव दूर होता है.! *दुर्भाव का अंत ही मोक्ष का प्रारंभ है.!* *📙स्रोत: मधुकर मनन📘* 🌷 आ...

भावों की पवित्रता से अशुभ कर्मों का नाश होता है:- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में धर्मसभा का आयोजन एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने गुरुवार को प्रवचन में कहा कि कर्म पोद्गलिक है। वह अपनी चेतना के साथ जुड़े हुए होते है। कर्म को कई प्रकार की शक्तियां मिल जाती है। जो कर्म सत्ता में है और उदय में नहीं आए हैं, उनका प्रभाव उनके उदय के साथ अनुभव होता है। जो कर्म उदय में आ गया, वह मोक्ष के अंतिम पड़ाव तक चलता है। जो कर्म हमारी आत्मा के पास आ गए हैं, उनका बंध हो जाता है। कर्मबंध के साथ कई चीजें भी जुड़ जाती है। उन्होंने कहा कि पुण्य का भी अपवर्तन होता है और पाप का भी। भगवान कहते हैं भावों की पवित्रता, अच्छी सोच रखोगे तो अशुभ कर्म घट सकते हैं। अशुभ कर्म आपकी पुण्यराशि को कम कर देते हैं। उन्होंने कहा कि अशुभ में शुभ और शुभ में अशुभ कर्म का संक्रमण हो सकता है। अशुभ निमित्त को टालें तो हम पुण्य के अपवर्तन से बच स...

 धन की तीन ही गति हैं: साध्वी चन्दन बाला

जैन साध्वी चन्दन बाला ने सुख विपाक सूत्र के मध्याम से आमेट के जन सभा को फरमाया दान का महत्व दानं भोगो नाश:, तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य। यो न ददाति न भुत्ते, तस्य तृतीया गतिर्भवति।।’ दान, भोग और नाश, धन की ये तीन ही गति हैं। जो न दान देता है और न उपभोग ही करता है उसके धन का ‘नाश’ हो जाना यही तीसरी गति होती है। तात्पर्य यही है जो अपने धन को पात्र दान आदि सत्कार्यों में लगा देते हैं वे तो अपने धन को इस लोक में भी बहुत काल तक स्थायी रहने वाला बना लेते हैं और परलोक में नवनिधि आदि के रूप में अनेक गुणा प्राप्त कर लेते हैं। इसके अतिरिक्त जो बड़े श्रम से धन कमाकर अपने गार्हस्थ जीवन के भोगों में ही लगा देते हैं वे तत्काल में तो कुछ उसका उपयोग कर ही लेते हैं भविष्य में उसका फल भले ही कटुक ही क्यों न हो किन्तु जो न देते हैं न खाते हैं उनके धन को चोर या डाकू लूट लेते हैं या दामाद के लोग छीन लेते हैं य...

कारगिल विजय दिवस पर पोधारोपण कार्यक्रम

राजस्थान पत्रिका और एक्ष्नोरा इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वाधान में चलाए जा रहे हरित प्रदेश अभियान के तहत आज शुक्रवार को पर्यावरण प्रेमी व मिसाइल मैन DR.APJ अब्दुल कलाम के 9th रिमेम्बर डे एवं कारगिल विजय दिवस पर पोधारोपण कार्यक्रम टी नगर स्तिथ श्री आरकेएम शारदा विद्यालय मै आयोजित किया गया । स्कूल की प्रधान अध्यापिका के रमा एवं अन्य अध्यापिकाओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। मुख्य अतिथि DR पी ज्योथिमानी फॉर्मर जज मद्रास हाई कोर्ट फॉर्मर जज नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, साउथर्न जोन चेन्नई ने DR.APJ अब्दुल कलाम की जीवनी के बारे मैं कई रहस्यो के बारे मैं विद्यार्थियों को जानकारी दी। DR ज्योथिमानि ने कहा की 3 साल पहले हरित प्रदेश अभियान के प्रोग्राम मैं भाग लिया था तब से लेकर आज तक राजस्थान पत्रिका और एक्ष्नोरा इंटरनेशनल ने मिलकर हजारों पैड लगाकर हरित क्रांति का काम किया। उसकी तहेदिल से प्रशंसा करते हुए क...

आत्मा का असली स्वभाव भगवंता है: साध्वी विनीत रूप प्रज्ञा

आमेट के जैन स्थानक मे जैन साध्वी विनीत रूप प्रज्ञा ने कहा जैन धर्म के अनुसार हर आत्मा का असली स्वभाव भगवंता है और हर आत्मा में अनंत दर्शन, अनंत शक्ति, अनंत ज्ञान और अनंत सुख है। आत्मा और कर्म पुद्गल के बंधन के कारण यह गुण प्रकट नहीं हो पाते। सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र के माध्यम से आत्मा के इस राज्य को प्राप्त किया जा सकता है। साध्वी चन्दन बाला ने कहा जैन दर्शन में भगवान न कर्ता और न ही भोक्ता माने जाते हैं। जैन दर्शन मे सृष्टिकर्ता को कोई स्थान नहीं दिया गया है। जैन धर्म में अनेक शासन देवी-देवता हैं पर उनकी आराधना को कोई विशेष महत्व नहीं दिया जाता। जैन धर्म में तीर्थंकरों जिन्हें जिनदेव, जिनेन्द्र या वीतराग भगवान कहा जाता है इनकी आराधना का ही विशेष महत्व है। साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा जैन धर्म क्या है? ‘जैन धर्म’ का अर्थ है – ‘जिन द्वारा प्रवर्तित धर्म...

श्री इंदरचंद डूंगरवाल बने अध्यक्ष और श्री देवीलाल हिरण मंत्री

 नवगठित तेरापंथ सभा, उत्तर चेन्नई का हुआ शपथग्रहण Sagevaani.com /चेन्नई: मुनिश्री हिमांशुकुमारजी ठाणा 2 के सान्निध्य में नवगठित उत्तर चेन्नई सभा (टंडियारपेट) का शपथ ग्रहण समारोह तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में आयोजित हुआ। नवगठित सभा के पदाधिकारियों, टीम को पाथेय प्रदान करते हुए मुनि हिमांशुकुमार ने कहा कि शपथग्रहण दायित्व बोध का प्रकार है। पदाधिकारी अपने दायित्वों के प्रति जागरूकता के साथ आगे बढ़ने पर समाज का भी विकास होगा। आज नवगठित टीम ने शपथग्रहण की। वे सदैव संघसेवा, समाज सेवा के साथ अपना आध्यात्मिक विकास भी करते रहे। इससे पूर्व नमस्कार महामंत्र से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। श्री गौतमचन्द सेठिया ने मंच संचालन करते हुए नवमनोनित पदाधिकारियों का परिचय प्रस्तुत किया। विचारों की अभिव्यक्ति के साथ जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के उत्तर तमिलनाडु प्रभारी श्री विमल चिप्पड़ ने नवगठित टीम को ...

स्वाध्याय भवन चेन्नई मे जम्बुकुमार चरित्र का पूर्ण वांचन

श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के तत्वावधान मे आचार्य हस्ती द्वारा विरचित जम्बुकुमार चरित्र -कथा काव्य का मूल,विवेचन सहित पूर्ण वांचन वरिष्ठ स्वाध्यायी वीरेन्द्र कांकरिया ने किया | स्वाध्यायी बन्धुवर ने जम्बुकुमार जीवन चरित्र के अंतर्गत पूर्व भवों का वर्णन,भगवान महावीर के पांचवे गणधर आर्य सुधर्मा स्वामी के राजगृही मे आगमन व धर्मोपदेश, जम्बुकुमार के परम वैराग्य का वैभव, दोनों के मध्य विस्तृत संवाद, माता-पिता के संग संवाद, आठ कन्याओं के संग परिणय बंधन व प्रथम रात्रि मे ही आठो कन्याओं के संग संवाद व प्रतिबोध, राजकुमार विधाधर प्रभव को दिए प्रतिबोध का सुन्दर वर्णन किया | जम्बुकुमार व आठो कन्याओं के संग माता-पिता व प्रभव संग 499 साथी कुल 527 एक साथ आर्य सुधर्मा स्वामी के पास दीक्षित हुए | श्रावक संघ तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया ने बताया कि जम्बुस्वामी 16 वय की आयु मे ...

सुंदरकांड एवं एकल सूर एकल ताल का आयोजन

पिछले दिनों फ्रेंड्स ऑफ ट्राइबल सोसाइटी के तत्वावधान में एकल के ही विभिन्न प्रदेशों के कार्यकर्ता एकजुट होकर चेन्नई में दो दिवसीय कार्यक्रम संगीत में सुंदरकांड एवं एकल सूर एकल ताल का आयोजन किया । पहला कार्यक्रम कोला सरस्वती में पेश की और दूसरा कार्यक्रम वैष्णव कॉलेज के प्रांगण में हुआ कार्य कार्यक्रम की शुरुआत अध्यक्ष श्री प्रवीण टाटिया द्वारा स्वागत भाषण दिया । मंत्री गिरी बागड़ी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। एकल के 14 कार्यकर्ता कलाकार अपने हरि रथ में पिछले एक महीने से भ्रमण में निकले हुए है एकल सुर एकल ताल में डांस की भी प्रस्तुति दी गई । विभिन्न कस्टम एवं मेकअप से सब का मन मोह लिया। विशेष सहयोग विमला दमानी, शिव प्रकाश जी बाहेती, कृष्णकुमार माहेश्वरी, बाल सुब्रमण्यम जी का रहा इस कार्यक्रम में धार्मिक देशभक्ति विभिन्न प्रांतो की नृत्य के रूप में झलक दिखलाई गई।

उत्तम श्रेणी के श्रावक होते उपासक : मुनि हिमांशुकुमार

 उपासक स्व साधना के साथ दूसरों की साधना में बनते योगभूत   उपासक प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ आयोजन Sagevaani.com /चेन्नई: आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री हिमांशुकुमारजी के सान्निध्य में उपासक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन मंगलवार 23.07.24 को श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, चेन्नई के तत्वावधान में तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट में हुआ।  उपस्थित उपासक परिवार के साथ धर्मपरिषद् को सम्बोध प्रदान करते हुए मुनिश्री ने कहा कि सामान्य, मध्यम और उत्तम इन तीन श्रेणियों के श्रावकों में उपासक उत्तम श्रेणी के श्रावकों की कोटि में आते हैं। उपासक स्वयं पहले साधना, आराधना करके दूसरों की साधना में योगभूत बनते हैं। वे धर्मसंघ की उपासना, प्रभावना को प्रवर्धनमान करते हैं।  मुनिप्रवर ने उपासकों को छह वी के सिद्धांत दिये- 1. विनय भाव, 2. वैराग्य भाव (विरक्ति, अनासक्ति से गुण सम्पन्न), 3. व्यवहार कौशल, 4...

जीवन के लिए भोजन आवश्यक है: साध्वी श्री आनंद प्रभा

Sagevaani.com /Chennai: श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ आमेट के महावीर भवन मे चातुर्मास कर रही साध्वी श्री जयमाला जी मा. सा. के सहयोगी साध्वी विदुषी, साध्वी श्री आनंद प्रभा, आशा ने भक्तगणों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन के लिए भोजन आवश्यक है, बिना भोजन किया मनुष्य का दुर्बल जीवन टिक नहीं सकता । सांसारिक हो चाहे अन्य जीव हो, उसे भोजन करना ही पड़ता है परंतु भोजन करने की एक सीमा है । जीवन के लिए भोजन है, ना कि भोजन के लिए जीवन । आज का मानव नियम मर्यादा के बिना भोजन पर मरता है, खाने-पीने के संबंध मे चातुर्मास के सावन भादो के महीने मे नियमों को भुल गया है संत जगाने आए है । साध्वी चंदन बालाजी मा. सा. ने फरमाया कि मनुष्य जीवन का जन्म का सुंदर अवसर मिला है इस पल को सत्संग मे प्रभु भक्ति मे निकलना चाहिए । समस्त धर्म में भी रात्रि भोजन त्याग होना चाहिए, रात्रि भोजन मे जीवो की हिंसा होती है!...

गुरु नहीं तो जीवन शुरु नहीं: मुनि हिमांशुकुमार

Sagevaani.com /चेन्नई: तेरापंथ स्थापना दिवस के अवसर पर तेरापंथ जैन विद्यालय में आयोजित प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए मुनि हिंमांशुकुमार ने कहा कि आज 265वां तेरापंथ स्थापना दिवस और भारत का गौरवशाली पर्व गुरु पूर्णिमा है, दोनों एक दूसरे से जुड़े हैं। जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरु नहीं। हमें गुरु भिक्षु ने भगवान महावीर वाणी को जन भोग्य और सरल रूप में समझाया और उनका वही मार्गदर्शन आगे चल कर तेरापंथ की स्थापना का निमित्त बना।  आचार्य भिक्षु की क्रांत दृष्टि के परिणाम स्वरूप स्थापित तेरापंथ के सिद्धांतों और मान्यताओ को स्पष्ट करते हुए मुनिश्री ने आगे कहा कि कहा कि संसार और साधना का मार्ग एक नहीं, अलग है। आत्मशुद्धि का मार्ग और व्यवहार का, समाजिकता का मार्ग एक नहीं, अलग-अलग है।  तेरापंथ के तत्त्वदर्शन को भिक्षु विचार दर्शन के माध्यम से समझने की प्रेरणा देते हुए मुनिश्री कहा कि मंगल मा...

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