*🏳️🌈प्रवचन वैभव🏳️🌈* 1️⃣3️⃣ 🪔 61) धर्म का फल जानकर धर्म करते हो,तो फिर पाप का फल जानकर पाप क्यों नहीं छोड़ देते.? 62) पाप छूटना ही धर्म की सफलता है.! 63) जो आपका है वो आपसे दूर नही जाएगा, पदार्थ तो आते जाते रहते है, अर्थात उन पर आपका अधिकार नही हैं.! 64) देह के स्वरूप का सम्यक चिंतन करोगे तो अवश्य ही दुखमुक्ति मिलेगी.! 65) रसपूर्वक पाप प्रवृत्ति करने से तीव्रकर्मो का बंध होता है.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन कृपापात्र* श्रुत संस्करणप्रेमी,शिष्यरत्न मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
*आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या* *साध्वी श्री डॉ गवेषणा श्री जी, साध्वी श्री मेरु प्रभाजी, साध्वी श्री मयंक प्रभाजी एवं साध्वी श्री दक्ष प्रभाजी* के सान्निध्य में *विशेष कार्यशाला* *अगस्त 02 शुक्रवार* 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼 *पहला तीर्थ,पहला मंदिर* 🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑 *साध्वी श्री जी द्वारा प्रभावी प्रवचन* आप अपने परिवार व बंधु मित्रों सहित पधारकर इस प्रभावी प्रवचन का श्रवण करें। दिनांक: *2 अगस्त 2024* प्रातः *9:30 से 10.45 बजे* स्थल :*तीर्थंकर समवसरण* *जैन तेरापंथ नगर* *माधावरम।* नोट : *समय का विशेष ध्यान रखें , अपना मोबाइल बंद रखें।* = ◆ निवेदक ◆ = *श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ माधावरम् ट्रस्ट, चेन्नई*
!! श्री महावीराय नम: !! 🙏🏻जय शिव -जय सुभद्र- जय कैलाश- जय कुसुम- जय ओम- जय शक्ति🙏🏻 *🦶🏻रानी बाग़ चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश🦶🏻* *अहोभाग्य हमारा, शुभ कर्मों का संचय, क्षेत्र की असीम पुण्यवाणी से* 🙏शासन प्रभाविका उपप्रवर्तनी महासाध्वी श्री कैलाशवती जी म० की पौत्र शिष्याएं एवं श्रमणी गौरव महासाध्वी श्री शक्ति प्रभा जी म० की सुशिष्याएं .. *😷शासन जयोति महासाध्वी श्री शुभा जी म०* *😷प्रज्ञा श्रमणी महासाध्वी डा. श्री शिवा जी म०* *😷सेवा भावी महासाध्वी श्री आराधिका जी म०* ठाणे-3 का वर्ष 2024 मंगलमय *चातुर्मास हेतु मांगलिक प्रवेश* *बुधवार 17 जुलाई प्रातः 6.30 बजे के लगभग* प्रधान श्री विरेन्द्र जैन जी के निवास wz 427 गली न०1, श्री नगर से महेन्द्रा पार्क जैन स्थानक के लिए होगा। *सभी सदस्यों से सविनय निवेदन सपरिवार चातुर्मासिक मांगलिक प्रवेश में अवश्यमेव उपस्थित हो श्री संघ व महासाध्व...
शांत मूर्ति, सेवा शिरोमणि जैन संत आलोक मुनि…अमन मुनि ने कहा कि जिस घर के लोगों में आपसी प्रेम मजबूत होता है, वह घर स्वर्ग के समान होता है। उन्होंने कहा कि लकीरों का खेल भी बड़ा अजीब खेल है। यह लकीरें यदि हथेलियों पर खिंच जाएं तो किस्मत बन जाती। जमीन पर खिंच जाएं तो सरहद बन जाती हैं। शरीर पर खिंच जाएं तो खून निकाल देती हैं और रिश्तों में खिंच जाएं तो दीवार बन जाती है। ये प्रवचन – जैन संत ने लुधियाना के जनता नगर में स्थित एस.एस. जैन सभागार में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे। इस अवसर पर प्रवचन प्रभाकर, परहितप्रेरक, युवा कर्मठ संत अमन मुनि ने कहा कि ईंट पत्थर से मकान बनवा लेना बहुत आसान है, पर प्रेम और व्यवहार से घर बसाना बहुत मुश्किल। मौके पर एसएस जैन सभा जनता नगर के चेयरमैन कुलभूषण जैन प्रधान सुनील जैन, कोषाध्यक्ष प्रमोद जैन, हरदीप जैन, राज कुमार, बिमल जैन, रमा जैन, रचना ...
आमेट के जैन स्थानक मे चातुर्मास गुरु माता तपाचार्य जयमाला जी मा. सा. आदि ठाणा 6 के सानिध्य मे विराजित साध्वी चन्दन बाला ने कहा की सबसेपहला पुण्य है, अन्न पुण्य। अन्न के आधार पर ही प्राण टिके रहते है। अत्र ही जीवन का अवलंबन है। अन्न से ही जीवन का निर्माण भी होता है। आहार से ही शरीर बनता है, इन्द्रियों का निर्माण होता है। अच्छे आहार से संस्कार भी अच्छे ही बनते हैं। जबकि, कुत्सित आहार से संस्कार बुरे ही बनते हैं तथा आचरण भी बुरा ही होता है। भूख को नियंत्रण कर पाना सामान्य गृहस्थ के लिए बहुत ही कठिन काम है। पुण्य उपार्जन के लिए जिनके पास साधनों का आभाव है या आवश्यकता से भी कम साधन है, की भी बिना कहे ही सहायता करनी चाहिए। केवल अपने ही सम्प्रदाय के अनुयायियों का नहीं, मानव-मात्र तथा प्राणी-मात्र की सेवा का ध्यान रखना चाहिए। दया, करुणा अनुकंपा से प्रेरित होकर भोजन देना अन्न पुण्य है। अन्न की गरिम...
आमेट के जैन स्थानक में जैन साध्वी आनंद प्रभा ने कहा। की सुख-दुख का निर्धारण् स्वंय के कर्म होते हैं। कर्मानुसार ही फल प्राप्त होता है। पाप का प्रतिफल स्वंय को भुगतना पड़ता है। इसमेें कोई सहभागिता नहीं कर सकता है। सुख मे आपके साथ रहने वालों की भीड़ होती है, लेकिन दुख के दौरान आप अकेले हो जाते हैं। कहने का अर्थ यह है कि सुख में सभी साथ देते हैं, लेकिन दुख में कोई मदद नहीं करता है। समझदार व्यक्ति एक बार ठोकर लगने पर ही संभल जाता है। अपनी गलती का पुनरावर्तन ना करने के लिए संकल्पित बन जाता है। मूर्खां में ऐसा नहीं होता है। वह अपनी गलती से सबक ना लेने के कारण कई बार ठोकर खाते हुए खेद प्राप्त करता है। इंसान से भूल होना स्वाभाविक है। भूल को स्वीकार करना ही सच्ची साधना है। पाप कभी नहीं छिपता है। इसे छिपाने के अनगिनत प्रयास भी असफल हो जाते हैं। पाप छिपा हुआ नहीं रह सकता। व्यक्ति को पाप से घृणा करनी ...
*🏳️🌈प्रवचन वैभव🏳️🌈* 1️⃣1️⃣ 🪔 51) *जो स्वयं की* *चिंता करता है,* उसको ही परचिंता का परोपकार का अधिकार हैं.! 52) कर्मक्षय का पुरुषार्थ ही प्रभु की सर्वोत्तम भक्ति है क्योंकि *जीव कर्मबंधन में रहे,* *वो प्रभु को प्रिय नही है, तो* प्रभु का प्रिय करना ही भक्ति है.! 53) संसार से *अपनेपन की* आसक्ति तोड़ना ही साधना की सफलता हैं.! 54) कर्म जीव के साथ संयोग संबंध से जुड़कर ही दुखी करता है.. कर्म अलग रहकर न दुखी कर सकता है, न जीव दुखी होता सकता है, *संयोग ही दुख का कारण है.!* 55) यथा संभव अनुकरण का भाव हो वही सच्ची अनुमोदना है.. *अच्छा दिखाने सिर्फ* *वाह वाह करना तो* *खुशामत है.!* 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन कृपापात्र* श्रुत संस्करणप्रेमी,शिष्यरत्न मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
*🏳️🌈प्रवचन वैभव🏳️🌈* 9️⃣ 🪔 41) परार्थ व्यसनी बनो पुदगल व्यसनी मत बनो.! 42) *प्रभु प्रिय* *तभी लगेंगे जब,* *पर पदार्थ अप्रिय लगेंगे.!* आत्मप्रियता ही प्रभु प्रियता हैं.! 43) *गुणों का पक्ष होगा तो ही* पुण्यानुबंधी पुण्य एवं सर्व रिद्धि सिद्धि समृद्धि मिल सकती है.! 44) जो स्वयं की चिंता करता है उसको ही परचिंता का *परोपकार का अधिकार हैं.!* 45) करूणता ये है की शत प्रतिशत समय *”जो छूटनेवाला है* *उसके पीछे ही लगा रहे है”,* उसका 1% भी यदि जो साथ आएगा उसके लिए दिया तो पछताना नही पड़ेगा..! *_(श्री राजप्रश्नीय सूत्र प्रवचन )_* 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *समत्व शिरोमणि* *सूरि जयन्तसेन कृपापात्र* श्रुत संस्करणप्रेमी मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैन संघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर 🌷
श्री हीराबाग जैन स्थानक सेपिंग्स रोड में विराजित महासतीजी श्री आगमश्रीजी म.सा ने प्रवचन में बताया कि आत्माेपासना एक सुंदर उपक्रम है जिसमें साधक अपनी आत्मकथा खुली पुस्तक की तरह पढ़ लेता हैं। कहां कहां और कैसे कैसे दोषों का सेवन हुआ है उसकी जांच परख प्रतिक्रमण में हो जाता है। व्रत प्रत्याख्यान स्वीकार करने पर ही प्रतिक्रमण होता है। साध्वी धैर्याश्रीजी ने बताया कि धर्म का भूषण वैराग्य हे वैभव नही, संसार, शरीर, परिवार संबंधी सुख सुविधा का मिलना पुण्योदय हे। साथ ही दस उपवास के प्रत्याख्यान श्रीमती आराधना गादिया, प्रीति सखलेचा, ऋषभ बोथरा के हुवे।
*🏳️🌈प्रवचन वैभव🏳️🌈* 8️⃣ 💛 36) *आस्तिकता* *समकित का मूल हैं..* *आस्तिकता अर्थात* *आत्म स्वरूप की आस्था.!* 37) पूर्व के अनुसंधान के लिए सद् चारित्रो का उल्लेख है.! 38) *धर्म कथाएं* *कथनी करणी का* *अंतर मिटाने के लिए होती है.!* 39) हमारा संसार हमारे सुख दुख आदि सब विकृतियां पर की तरफ हमारे जुकाव का ही परिणाम हैं.! *इसमें अन्य कोई कारण नही हैं.!* 40) मन का संसार नही छूटा तो बाह्य त्याग का क्या अर्थ.? *_(श्री राजप्रश्नीय सूत्र प्रवचन )_* 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *साहित्य मनीषी कृपापात्र* सद् साहित्य सर्जक मुनिश्री वैभवरत्नविजयजी म.सा. *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैन संघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
*🌧️विंशत्यधिकम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 7️⃣ ⚡ गुरु में.. गुरु आज्ञा में, सेवा में,भक्ति में, विकल्प करते है *उनके लिए मोक्ष दुर्लभ है.!* ⚡ जो गुरु की विराधना अविनय आशातना करके रिद्धि सिद्धि की चाहना रखते है *उनके लिए रिद्धि सिद्धि* *मृत्युदंड प्राप्त अपराधी को* मिले अलंकारों के जैसी है.! *📖श्री गुरुबहुमान कुलक📖* 💫 *तत्त्व चिंतन:* *समयज्ञ गीतार्थ गुरुदेव* *सूरि जयन्तसेन कृपापात्र शिष्य* श्री वैभवरत्नविजयजी महाराजा 🌅🧘♂️🌅 *श्रुतार्थ वर्षावास 2024* श्री मुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैन संघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर
एएमकेएम में डाॅ. नरेन्द्र भंडारी का संबोधन एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित युवाचार्यश्री महेंद्र ऋषिजी के सान्निध्य में शनिवार को हुई धर्मसभा में चंद्रयान मिशन के सहयोगी वैज्ञानिक डॉ. नरेन्द्र भंडारी का आगमन हुआ। उन्होंने जैन धर्म के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि कई कारण हैं कि हम साधु- संतों के सामने नतमस्तक होते हैं। इनमें संयम, जप-तप, मार्गदर्शन आदि है। एक विशेष कारण यह है कि जो ज्ञान महावीर स्वामी ने दिया, उसे पहले गणधरों, फिर आचार्यों ने हम तक पहुंचाया। डॉ. भंडारी ने कहा कि जैन धर्म का इतिहास विलक्षण रहा है। यह पूरे विश्व में फैला हुआ था। अध्ययन से पता चला कि साऊथ अमरीका, अफ्रीका के उत्तर क्षेत्र में भरत चक्रवती का साम्राज्य रहा है। उन देशों में जैन धर्म का अस्तित्व था। कुछ समय पहले ग्रीस में जैन दर्शन के अवशेष मिले। लेकिन धीरे-धीरे यह गौरवमयी इतिह...