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जीवन धन्य बनालो-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: प्रवचनाच्या प्रारंभीच जीवन धन्य बनालो, हे गीत गाऊन त्यांनी आपल्या प्रवचनास प्रारंभ केला. त्या म्हणाल्या की, मानवाने जन्माला आल्यानंतर आपले जीवन कशाने धन्य बनेल, हे शोधले पाहिजे, परंतू दुर्देवाने तो हे शोधू शकत नाही, अशाने कसे त्याचे जीवन धन्य बनेल, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, कालपयर्ंत आपण सव्हीसव्या सुत्राचा अर्थ जाणून आजपासून सत्तावीस आणि त्यापुढील अध्यायाचा अर्थ समजावून घेणार आहोत. तर प्रभूंनी सत्तावीसाव्या अध्यायात काय सांगितले आहे की, संघ सांगेल तसे आम्हास वागावे लागते, त्याप्रमाणे बोलावे लागते. परंतू अठ्ठावीसाच्या अध्यायानुसार आपल्याला मोक्षाला जावे वाटते. तथापि, त्य...

दिपावली पर्व एवं भ महावीर निवाणोत्सव के उपलक्ष में 237 वां अनाज खाद्य सामग्री एवं वस्त्र वितरण का कार्यक्रम दिनांक 26 को

वर्धमान साधार्मिक सेवा एवं जीव दया समिति की ओर से दिपावली पर्व एवं भ महावीर निवाणोत्सव के उपलक्ष में 237 वां अनाज खाद्य सामग्री एवं वस्त्र वितरण का कार्यक्रम दिनांक 26//10// 2024 को ए एम के एम श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन महासंघ जैन संघ श्री युवाचार्य चातुर्मास स्थल के प्रांगण में प्रज्ञा महर्षि युवाचार्य पू श्री महेन्द्र ॠषि जी म सा आदि ठाणा, आनंद श्रमणी रत्ना पू श्री कंचन कंवर जी म सा आदि ठाणा के पावन सानिध्य मेंl प्रति माह की भांति की इस माह भी 150 परिवारों को अनाज खाद्य सामग्री व वस्त्र आदि (21 आईटम) वितरण का आयोजन मुख्य अतिथि राजस्थान श्री रिखब चंद जी बोहरा वङप्पलनी, समाज सेवी हुक्मी चंद जी तलेङा, कर्मठ कार्यकर्ता पृथ्वी राज जी बागरेचा, एक्यूप्रेशर स्पेस्लिस्ट डाॅ पारस मल जी तोलावत (नेशनल अवार्ड प्राप्त) संस्था संरक्षक सदस्य सज्जन राज जी मेहता, सागर मल जी लोढा, सज्जन राज जी कोठारी, विज...

करुणा इंटरनेशनल के अध्यक्ष श्री शांतिलाल जैन एवं महामंत्री सज्जन राज सुराणा बने

 दिनांक 26 अक्टूबर 2024 को नुगमबाक्कम् स्थित पॉम ग्रोव होटल में करुणा अंतरराष्ट्रीय का वर्ष 2024-26 के पदाधिकारियों का पदारोहण समारोह सोरेत्साह सम्पन्न हुआ । जिसमें करुणा इंटरनेशनल के पदाधिकारियों, संरक्षकों, गणमान्य महानुभावों, उत्साही कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अरुणकुमार जैन थे जो इंटलेक्ट डिजाइन अरेना कम्पनी के संस्थापक एवं मालिक है। डॉ. भद्रेशकुमार जैन के करुणा गीत से सभा प्रारंभ हुई। संस्थान के चेयरमैन श्री कैलाशमल दूगड़ ने करुणा क्लब की जानकारी प्रदान करते हुए नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री शांतिलाल जैन का परिचय प्रदान किया। महामंत्री श्री सज्जनराज सुराणा ने आगंतुक महानुभावों का स्वागत-अभिनंदन करते हुए अपने उद्गार, करुणा विषयक मुक्तक तथा अनुभव जनसमूह के समक्ष प्रस्तुत किये। उपाध्यक्ष श्री सुरेशकुमार कांकरिया ने कहा कि प्राचीनकाल में भारत का प्रत्येक नागरिक मानद...

माणव उत्तराध्ययन बोल-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: हे माणव तू जन्माला आला आहेस तर श्रीमद् उत्तराध्ययन बोल! तुम्ही- आम्ही खरोखरच धन्यवान आहोत, पुण्यवान आहोत की, जी प्रभूंची अंतीम वाणी ऐकण्याचं भाग्य तुम्हा- आम्हाला लाभले आहे, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, हे माणव तू जन्माला आला आहेस तर एकवेळ तरी प्रभूंची वाणी ऐक, चिंतन कर, मनन कर! त्याच खर्‍या अर्थाने सौख्य सामावलेले आहे. तुम्ही- आम्ही खरोखरच धन्य आहोत, जी प्रभूंची अंतीम वाणी ऐकण्याचं भाग्य तुम्हा- आम्हाला लाभले आहे. ज्ञानाची डुबकी यात लावली जाते. जी आपल्याला कुठेही मिळणार नाही. तो क्षण आपल्यासाठी भाग्यासाठी भाग्याचाच आहे. आपली आत्मा खरे तर या जीणवाणीसाठी तरसली पाहिजे. कारण य...

संसार में वही फंसेगा जो आसक्ति में फंसा हुआ है- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

 एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र के 25 व 26वें अध्यायों का हुआ स्वाध्याय एएमकेएम में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने उत्तराध्ययन सूत्र के 25वें यज्ञीय अध्याय की विवेचना करते हुए कहा कि भगवान महावीर ने चारों आघाती कर्म नष्ट किए और सिद्ध बुद्ध हो गए। यदि हमें भी कर्मों की निर्जरा करनी है तो पाप से बचना पड़ेगा। इस अध्याय में एक सुंदर प्रसंग है। वाराणसी नगरी में दो सगे भाई जयघोष व विजयघोष रहते थे। वहां बहुत विशाल पैमाने में ब्राह्मण वर्ग रहता था। वे दोनों भाई स्नान के लिए नदी पर गए। वहां एक पंछी को देखा, जिसके मुंह में सांप था। यह देखकर वे सोचने लगे कैसा है यह संसार। उन्होंने वहां संसार की नश्वरता देखी। उन्होंने कहा ब्राह्मण हमारे यहां ज्ञान, उपासना करने वाला वर्ग है। जयघोष ने चिंतन करते हुए मुनि दीक्षा ग्रहण की। विजयघोष भी वेदों का ज्ञाता था। मुनि जयघोष विजयघोष के य...

स्वाध्याय का सिंचन नकारात्मक तत्वों को दूर करता है- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र के 23वें और 24वें अध्याय का हुआ स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने रविवार को उत्तराध्ययन सूत्र की 23वें अध्ययन केशी गौतमीय की विवेचना करते हुए कहा कि हमने पिछले अध्यायों में देखा कि उत्तराध्ययन सूत्र में अनेकों संवाद दिए गए। हर जगह ऐसी चर्चाएं आती है, जिनके माध्यम से हम गूढ़ रहस्यों को समझ सकें। ऐसा ही एक मधुर संवाद केशीकुमार श्रमण, जो पार्श्वनाथ परंपरा के थे, ने गौतमस्वामी के साथ किया। दोनों प्रचंड विद्वान और विशिष्ट ज्ञानी थे। इस अध्याय में श्रावस्ती नगरी के तिनुक उद्यान में दोनों में जो चर्चा हुई, उसका रोचक वर्णन है। वह एक अद्भुत दृश्य, प्रसंग होगा। जिन लोगों ने स्वयं प्रत्यक्ष अनुभव किया, वे वास्तव में धन्य थे। यह हमारा पुण्य है कि उस संवाद को सुनकर भावों से वहां पहुंचने का सौभाग्य मिला। श्...

“समाज-भुषण” “ समाज- रत्न” श्रीमान विजयकांत जी कोठारी का “ सहस्र- चंद्र दर्शन” संप्पन्न

“समाज-भुषण” “ समाज- रत्न” श्रीमान विजयकांत जी कोठारी का “ सहस्र- चंद्र दर्शन” संप्पन्न! गुरु भगवंतो का पाया आशिर्वाद! पुनाः महाराष्ट्र गौरव, खान्देश भुषण पु. गौतम मुनीजी म. सा. के पावन सानिध्य मे विजयकांतजी को आज विविध सामाजिक, राजनितीक संस्थाओं द्वारा नवाजा गया! इस मंगलमय पावन अवसरपर विजयकांतजी का गुण गौरव करते समय उनके अविरत, अविश्रांत परिश्रम की, लगन, कार्यक्षमता, सकारत्मकता, संकल्प पुर्ति, निद्रा छोड काममे स्वयंको झोक देना. आलस्य से दुर आदि गुण विशेषो का वर्णन कर गुरु सुमति-विशाल-आशिष गुरुपरिवार द्वारा साधुवाद प्रदान किया और सदैव कार्यरत रहनेकी प्रेरणा दी! महावीर प्रतिष्ठान के प्रांगण मे हुये इस शानदार समारोह मे पुनाके सकल जैन समाज, जितो, महावीर स्कुल, विविध संघ एवं संस्थाओं के पदाधिकारीयो द्वारा विजयकांत जी के सन्मानीत किया गया! इस शुभ अवसर पर प्रसिध्द उद्योजक भामाशा प्रकाशजी धारिवाल,...

उत्तराध्ययन सुत्र समुद्रासारखं असलं तरीही-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: श्रीमद् उत्तराध्ययन सुत्र हे समुद्रासारखं असलं तरीही प्रभूंनी आमच्यासाठी त्यात लहान- लहान सुत्राचा समावेश केला आहे. जो की आपल्यासाठी आहे. समुद्राचं पाणी आपण पूर्णपणे पीऊ शकत नाहीत, परंतू घड्यात असलेलं पाणी ग्लासाने थोडे- थोडे पीऊ शकतो, अगदीत्याच प्रमाणे उत्तराध्यन सुत्राचेही आहे, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, ज्याप्रमाणे आपण समुद्र, तलाव आणि नदीचं पाणी एकसाथ पीऊ शकत नाही. परंतू तेच पाणी घड्यात भरल्यानंतर आपण त्यासोबतच एक तांब्या आणि एक ग्लास ठेवतो. ज्यामुळं आपल्याला थोडे- थोडे करुन ते पाणी गृहण करणे सोपे जाते. अगदी याचप्रमाणे उत्तराध्यन सुत्राचंही आहे. उत्तराध्यन सुत्र समुद्...

बड़े दोषों का कारण है छोटे दोष

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 9️⃣8️⃣ 🔊 *_486)_* बड़े दोषों का कारण है छोटे दोष.! *_487)_* ज्ञानी दुःख के कारणों के प्रति घृणा द्वेष या क्रोध नही रखते.! *_488)_* कदाग्रह सुकुन छीन लेता है.! *_489)_* पाप क्रिया से अधिक घातक है पाप की रुचि.! *_490)_* जो चीज व्यर्थ है,नश्वर है उसकी प्राप्ति के लिए दुख भुगतना तो मूर्खता हैं.!   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*

जब तक भोगों की अधीनता नहीं छोड़ते, अनाथता सबके लिए है- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने उत्तराध्ययन सूत्र के 20वें महानिर्ग्रंथीय अध्याय की विवेचना करते हुए कहा कि यह एक तरह से सभी के मानसिक, आत्मिक स्वास्थ्य को निरंतर करने वाला एक रसायन है। यह रसायन आप अलग-अलग भावों में ले सकते हैं। जन्म की बीमारी, उपाधि- व्याधि मिटाना चाहते हैं तो उसके लिए यह रसायन है। इसमें महानिर्ग्रन्थ की चर्या एवं मौलिक सिद्धांतों का वर्णन हुआ है। इस अध्याय का प्रारंभ अनाथी मुनि और श्रेणिक महाराजा की वार्तालाप से होता है। मुनि अनाथी का नाम मूल ग्रंथ में कहीं नहीं है। उसमें उनके भाव दिल को इससे जोड़ने वाले हैं। इस अध्याय में हम पारंपरिक रूप से जिस पंच परमेष्ठि की आराधना करते हैं उनका संक्षिप्त परिचय है। राजा श्रेणिक महारानी के साथ उद्यान भ्रमण को आए हुए हैं। उनकी दृष्टि म...

संसारापेक्षाही दिक्षा घेण्यात आनंद-प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: संसार हा क्षणभंगुर आहे, त्यात सर्वत्र दु:खच दु:ख आहे. असे असतांनाही मनुष्य त्यालाच का चिकटून बसला आहे, हे कळत नाही. दिक्षा घेणे हे कधीही चांगले आहे. यात दु:ख नसून सुखाची अनुभूती आल्याशिवाय राहत नाही, म्हणून दिक्षा ही केव्हाही चांगलीच आहे, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. तत्पूर्वी सभा मंडपात जप करण्यात आला. त्यानंतर प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.मार्गदर्शन केले. त्ंंया म्हणाल्या की, ही आत्मा असून तिला त्रास देऊ नका, तीला त्रास दिल्याने आपले भले थोडेच होणार आहेे.संसार हा क्षणभंगुर आहे, त्यात सर्वत्र दु:खच दु:ख आहे. असे असतांनाही मनुष्य त्यालाच का चिकटून बसला आहे, हे कळत नाही. दिक्षा घेणे हे कधीही चांगले आहे. यात दु:ख नसून सुखाची अनुभूती आल्याश...

श्री हरिभद्राचार्यजी ने भावपूजा को सफल बनाने 33 कर्तव्यों का विधान किया है

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   9️⃣7️⃣ 📜 श्री हरिभद्राचार्यजी ने भावपूजा को सफल बनाने 33 कर्तव्यों का विधान किया है.. ⚡ माता पिता विद्यागुरु, धर्मगुरु आदि गुरुजनों के प्रति विनय बहुमान भाव रखना.! ⚡ हेय के त्याग में उपादेय का आचरण के यथाशक्ति प्रवृत्ति अवश्य करें.! ⚡ कुछ बोलने से पहले कार्य करने से पहले दीर्घदृष्टि से परिणाम का विचार करके ही प्रवृत्ति करनी.! ⚡ मृत्यु को सदैव दृष्टि में रखें अमरत्व लेके जन्मे है ऐसे भ्रम में कदापि न रहें जीवन की क्षणिकता एवं नश्वरता को सदैव ध्यान में रखें जिससे दुष्कृत्य पर रोक लगेगी.! *📚श्री ललितविस्तरा वृत्ति📚*  

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