Sagevaani.com /जालना: जप, तप, आणि आराधना जेव्हा आपण करत असतो, त्यावेळी आपले कर्म बांधिले जातात, त्यासाठी आपला भाव सुध्दा महत्वाचा आहे. भावच नसेल तर आपले कर्म सुध्दा बांधिले जात नाही, म्हणुन प्रत्येकाने कर्म करतांना भाव चांगलाच ठेवा, असा हितोपदेश साध्वी हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, कालपर्यंत आपण बत्तीस अध्यायाचा अर्थ समजावून घेतला आणि आता त्या पुढील भागाचा अर्थ समावून घेणार आहोत. तेहतीसाव्या अध्यायात भगवंंत प्रभूंनी कर्माबद्दलची माहिती सांगितली. जर का आपले कर्म उत्तम राहिले तर जीवन आपले कर्तृत्ववान झाले, फळाला आले असे समजावे. जप, तप, आणि आराधना जेव्हा आपण करत असतो, त्यावेळी आपले कर्म बांधिले जातात, त्यासाठी आपला भाव सुध्दा महत्वा...
Sagevaani.com /जालना: जेव्हा मनुष्याला दु:ख येते, तेव्हा तो घायाळ होतो, विचलित होऊन जातो, परंतू त्याच्या जीवनात जेव्हा आनंद येतो तेव्हा मात्र तो निराशा झटकून कामाला लागतो. परंतू जेव्हा हाच आनंद आत्म्यापासून येतो तेंव्हा तो ना आनंदी होतो ना दु:खी! अशा आनंदासाठीच आपणाला हवाा आहे तो आत्म्ंयापासून मिळालेला आनंद, असा हितोपदेश साध्वी हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, उराध्यायन सुत्र हे जीणवाणी आहे, ती प्रत्येकाने श्रवण केलीच पाहिजे. जेव्हा मनुष्याला दु:ख येते, तेव्हा तो घायाळ होतो, विचलित होऊन जातो, परंतू त्याच्या जीवनात जेव्हा आनंद येतो तेव्हा मात्र तो निराशा झटकून कामाला लागतो. परंतू जेव्हा हाच आनंद आत्म्यापासून येतो तेंव्हा तो ना आनंदी ...
“ नमोथ्थुणं” जाप की आराधना सभी समस्याओं का निराकरण करती है! श्रध्दा एवं लगन से की आराधना प्रभु दर्शन देती है! -महासाध्वी डॉ. राज श्री जी म. सा. आज आकु्र्डी स्थानक भवन में उत्तराध्ययन सुत्र के 33वे अध्याय तक का पठन साध्वी जिना ज्ञा श्री जी द्वारा हुआ! तीन दिवसीय जप आराधना में आज “ नमोथ्थुणं” का सामुहिक जाप चारो दिशाओं तरफ़ मॅंह कर के किया गया ! सभी समस्याओं का निराकरण इस जापके माध्यम से होता है! आज के धर्मसभा मे युवा डॉक्टर न्युरोलॉजिस्ट डॉ. परेश बाबेल का जन्मदिवस आध्यात्मिक रुप से मनाया गया ! अनिता जी प्रविण जी बाबेल परिवार धर्म आराधना तप आराधना नियमित रुप से करते है! श्रावक जी प्रविण जी के स्वास्थ्य की प्रतिकुलता होते हुये भी उभयतेका नियमित रुप से स्थानक भवन आ धर्मआराधना करना प्रेरणादायी है! संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी एवं विश्वस्त शारदाजी चोरडीया ने बाबेल परिवार की सराहना कर उनके नियमित धर...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 1️⃣0️⃣1️⃣ ⏰ *_501)_* विनय साधना का मेरूशिखर हैं.! *_502)_* दुर्गति से घातक दुर्मति है..! *_503)_* दुख मुक्ति, सुख प्राप्ति तो अतिरिक्त मुनाफा है, धर्म का फल तो स्वभाव में स्थिरता हैं.! *_504)_* अपने स्वार्थ में डूबा व्यक्ति किसी का भला नहीं कर सकता.! *_505)_* जिसको नित्य एवं अनित्य का बोध हो गया, उसको परमानंद स्वरूप शीतगृह की प्राप्ति होती है.! *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*
आकुर्डी स्थानक भवन में पॉंच दिवसीय दिपावली विशेष कार्यक्रम का आयोजन! दिपोत्सव आत्म की पवित्रता से मनाना है! आत्म की चेतना जगानी है – डॉ. राज श्री जी ! महासाध्वी डॉ. राज श्री जी म.सा. डॉ. मेघाश्री जी म. सा. साध्वी समिक्षा श्री जी म.सा. एवं साध्वी जिनाज्ञा श्री जी म.सा. के पावन सानिध्य में उत्तराध्ययन सुत्र का वाचन, पठन बड़ी आस्था के साथ जारी है! आज 30 वे आध्याय तक का वाचन हुआ! विविध द्रुष्टांत सह हर अध्याय का अर्थ समझाया जाता है! उत्तराध्ययन सुत्र के साथ आज पॉंच दिवसीय दिपावली के शुभ अवसरपर विशेष कार्यक्रम एवं अनुष्ठान का आयोजन किया गया है! आज सामुहिक रुपसे “लोग्गस्स “का जाप हुआ! अनेक धर्मप्रेमी मान्यवरोंने सुत्र एवं जाप में सहभाग लिया! 31 तारीख को “नमोत्थुण” 1 तारीख़ “नमो जिणाणं जीव भयाणं” 2 तारीख़ उत्तरा ध्ययन का 36 वाँ अध्याय और नुतन वर्ष की महामांगलिक एवं 3 तारीख़ को आचार्य पु. दे...
Sagevaani.com /जालना: अंहकारी आणि घमेंडखोर व्यक्ती आयुष्यात कधीच पुढे जात नाही, त्यासाठी मनुष्याने नेहमीच अहंकार आणि घमेंड बाजूला ठेवली पाहिजे, असा हितोपदेश साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. पुढे बोलतांना साध्वी प. पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, उत्तराध्यायन सुत्र हे उगीच नाही. त्यामुळे आपल्या जीवनाचे निश्चितच कल्याण झाल्याशिवाय राहत नाही. म्हणूनच हे सुत्र सातत्याने आपल्या स्मरणात राहयला हवे. परंतू, दुर्देवाने मनुष्य हे सुत्र विसरत चाललाला आहे,त्यालां आपला नाविलाज असला तरीही व्यक्तींनी या सुत्राचा नेहमीच अभ्यास करावा, नेहमीच त्याचे चिंतन आणि मनन करावे, ज्यामुळे आपले कर्म चांगले उपजेल, आणि आपल्याला सन्मार्ग मिळेल, असे सांगून त्या म्हणाल्या की, जप हा नेहमीच करायला हवा....
एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के शिष्य हितमित भाषी मुनि हितेंद्र ऋषिजी ने उत्तराध्ययन सूत्र के 31वें और 32वें अध्याय का स्वाध्याय करते हुए कहा कि प्रभु महावीर की अंतिम देशना का उत्तराध्ययन सूत्र के माध्यम से हम स्वाध्याय कर रहे हैं। विचार कीजिए पूर्वधर आचार्यों ने वह लेखन करने का पुरुषार्थ नहीं किया होता तो आज प्रभु की वाणी हम तक नहीं पहुंचती। इस वाणी को आज हम सुनकर कान और मन को पवित्र, पावन बना रहे हैं। प्रभु की वाणी जीवन में बदलाव लाने वाली है। उन्होंने कहा उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय कर उसे हमारे जीवन में उतारना है। यह केवल साधु के लिए ही नहीं है श्रावक के लिए भी इसलिए है क्योंकि उनमें साधु बनने की भावना आए। श्रावक वही जो सच्ची श्रद्धा को अपनाए।आज श्रावक श्रावक तो बनता नहीं बल्कि साध...
राजस्थान पत्रिका, एक्सनोरा इंटरनेशनल द्वारा धुंआ मुक्त दीपावली अभियान एक सप्ताह से कई स्कूल, कॉलेज, सार्वजनिक जगह पार्क, धार्मिक पाठशाला आदि जगह पर हजारों विद्यार्थियों को विशेष जानकारी देते हुए सभी विद्यार्थियों को धुंआ मुक्त दीपावली मनाने की प्रतिज्ञा दीl इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉक्टर के मुथू कुमार प्रोग्राम ऑफिसर डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट चेंज गवेनमेंट ऑफ तमिलनाडु ने धुंआ मुक्त दीपावली अभियान की विशेष जानकारी दी। सभी विद्यार्थियों ने पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। आज अभियान का लॉस्ट दिन सुबह टी नगर चारी स्ट्रीट कॉर्पोरेशन पार्क में लोगो को जानकारी देते हुए एक्सनोरा नॉर्थ चेन्नई सचिव फतेहराज जैन ने कहा कि धुआं एवं पटाखों की आवाज से अस्थमा, उम्र वाले लोगों, पक्षियों को हानि होती हैं। इसलिए धुआं मुक्त दिपावली मनाने का निर्णय लिया एवं पौधे वितरण कर पर्यावरण को बसाने की जानकार...
*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. 1️⃣0️⃣0️⃣ 🕉️ 🧘♂️ आत्मा के बिना अन्य बाह्य पदार्थो के स्वरूप की अनुभूति असंभव हैं.! 😊 एक बार आत्म स्वरूप में रुचि लगने के बाद उसका स्वरूप जानकर बाह्य पदार्थो की आत्मा से भिन्नता का बोध हो जाने से अन्य पदार्थ निरर्थक लगते हैं 🪔 आत्मज्ञानी को अन्य पदार्थो का ज्ञान भी आत्मज्ञान को विशद करने के लिए ही होता है लेकिन समस्त ब्रह्मांड का ज्ञान भी निरर्थक है आत्मज्ञान के बिना, ✅ अतः जो आत्मा को जानता है वह समस्त द्रव्यों को जानता है.! *📜छान्दोग्य उपनिषद् 📜*
Sagevaani.com /चेन्नई: अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी और अणुव्रत समिति, चेन्नई के सहयोग से तेरापंथ एजुकेशनल एंड मेडिकल ट्रस्ट ने 29 अक्टूबर 2024 को तेरापंथ जैन विद्यालय में “अणुव्रत डिजिटल डिटॉक्स” कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में सातवीं से नौवीं कक्षा तक के छात्रों को मुनि श्री हेमंतकुमारजी ने संबोधित किया और उन्हें डिजिटल डिटॉक्स के बारे में विस्तार से बताया। मुनिश्री ने छात्रों को स्मार्टफोन, कंप्यूटर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल दुनिया के उपयोग से होने वाले लाभ और हानि के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम सुविधा के लिए बनाया गया था, लेकिन अब यह एक समस्या बन गया है। इसका नकारात्मक प्रभाव छात्रों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर पड़ रहा है। मुनिवर ने छात्रों को ऐसे आसान और प्रभावी तरीके बताए जिनसे वे इस डिजिटल व्यसन से मुक्त होकर अपने जी...
श्रमण संघीय आचार्य देवेन्द्र मुनि का हुआ गुणानुवाद एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के सान्निध्य में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय हुआ। मोक्ष- मार्ग- गति अध्याय की विवेचना करते हुए उन्होंने कहा कि हमने यज्ञ अध्ययन में वास्तविक, आध्यात्मिक और साधु की समाचारी के स्वरूप को समझा। जो- जो साधन है, उनके लिए सुंदर व्यवस्था इस अध्ययन में की गई। इसका हमें पालन करना है। यह साधक का कर्तव्य है और वह उसकी प्रसन्नता का विषय होना चाहिए। अधूरे मन से किया गया काम व्यक्ति को लक्ष्य तक नहीं पहुंचाता है। जो व्यक्ति अनुशासन में नहीं है, लक्ष्य के प्रति जागरूक नहीं है तो समूह में सब उसके दुःख से दुःखी हो जाते हैं। हमारा चरम लक्ष्य मोक्ष है। वास्तव में देखा जाए तो छोटे से लेकर लक्ष्य मोक्ष का ही है। हरेक व्यक्ति मुक्ति चाहता है। जिसको गति करनी है, उसको मोक्...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 9️⃣9️⃣ ⚡ *_491)_* समस्त जीवो के कल्याण में प्रत्यक्ष या परोक्ष श्रीअरिहंत प्रभु का ही प्रभाव हैं.! *_492)_* विरती सुरक्षा कवच हैं.! विरतीवंत को दुआ ही मिलती हैं.! *_493)_* किसी के सुख में निमित्त बनने में बड़ा आनंद है.! *_494)_* जो अपने विकास में ध्यान नहीं रखता, समय उसको साथ नहीं देता.! *_495)_* जीवन का प्राथमिक कर्तव्य: आत्मस्वभाव में मग्नता.! *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*