Sagevaani.com /बेंगलुरु। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, श्री राजाजी नगर के तत्वावधान में 6 नवंबर, ज्ञान पंचमी को विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वालों का सम्मान समारोह उपप्रवर्तक पंकजमुनि और अमर-शिष्य डॉ. वरुणमुनि के सानिध्य में होगा। संघ अध्यक्ष प्रकाश चाणोदिया ने बताया कि समारोह में उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भगवान महावीर चिकित्सालय, बेंगलुरु को गुरु अमर स्वास्थ्य सेवा सम्मान से नवाजा जाएगा। व्यक्तिगत श्रेणी में महेन्द्र जैन (नरेला मंडी, दिल्ली) को भक्त शिरोमणि, रामनिवास जैन (रोहिणी, दिल्ली) को श्रावकरत्न, गिरधारीलाल जैन (लुधियाना) को मानवसेवा, डॉ. दिलीप धींग (चेन्नई) को श्रुतसेवा, विनोद जैन (दिल्ली) और सुरेखा प्रकाशचंद कटारिया को साहित्य सेवा, किशनलाल खाबिया (चेन्नई) और डॉ. अजयकुमार जैन बीके (मैसूर) को जीवदया, प्रकाशचंद रातड़िया मूथा (केजीएफ) को सामायिक स्वाध्याय, ...
एएमकेएम में आठ वार की प्रवचन माला की हुई शुरूआत एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने सोमवार को आठ वार की प्रवचन माला में सोमवार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमें शीतलता पसंद है क्योंकि वह सुकून देती है। हमारी ललाट को चन्द्र की उपमा दी गई है। मुख को चन्द्र के आकार जैसा बताया गया है। आज का वार सोमवार, सोम यानी चन्द्र, शशि। चन्द्र शीतलता प्रदान करने वाला है। उन्होंने कहा जब तक शरीर स्वस्थ है, आत्मा के हित में जो कार्य करना है, कर लो। चांद की शीतलता के संदर्भ में यह कहा जाता है कि आज ठंडा रहो। जब दिन, वार या कार्य की शुरुआत हो तो वह ठंडे दिमाग से शुरू करो। ठंडा व गर्म जब एक दूसरे के साथ टकराता है तो गर्म लोहा टूट जाता है। सोम, चंद्र मन का स्वामी है, मन का कारक है। जिसका चंद्र मजबूत हो, उसका मनोबल मजबूत होता है। जिसका चंद्र कमजोर हो,...
एएमकेएम में भाईदूज पर्व पर दिया संदेश एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने भाईदूज के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाईदूज का भारतीय संस्कृति में बड़ा महत्व है। इस पर्व का सबसे बड़ा महत्व है कि यह दिन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के लिए मनाया जाता है। भाईदूज आर्य संस्कृति में वैदिक रुप से दीपावली के नववर्ष के पश्चात आती है। इस दिन बीज के चंद्रमा की कोर दिखाई देती है। उसी कोर के साकार को सिद्धशिला माना गया है। पारंपरिक धारणा यह है कि भव्य आत्मा बीज के दिन दर्शन कर यह धारणा करता है कि महाविदेह क्षेत्र में विचरण कर रहे सीमंधर स्वामी को नमन हो। उन्होंने कहा हमारा भारतीय समाज चंद्र वर्ष के साथ जुड़ा है। आज की दूज जैन परम्परा में बीज का महत्व भगवान महावीर के निर्वाण से जुड़ा है। नंदीवर्धन और महावीर में अद्भुत प्रेम था। भगवान महावीर क...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 1️⃣0️⃣4️⃣ 🌸 *_516)_* कषायों की अनुमोदना नहीं होती.! *_517)_* क्रोध का शुद्ध पर्याय ही क्षमा हैं, क्षमा की विकृति क्रोध है.! *_518)_* भवयात्रा पर पूर्णविराम लगाना ही धर्मकरणी का उद्देश्य हैं.! *_519)_* स्व आत्म के अतिरिक्त कोई समर्थ नहीं हमारा हित करने में.! *_520)_* तप करना श्रेष्ठ तप करने की शक्ति नही है तो कमसेकम तप करनेवाले की निंदा अन्तराय मत करो.! *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*
Sagevaani.com /जालना: आपल्याला प्रत्येकाला भगवंतांनी दोन डोळे, दोन हात दिले आहेत, तसेच भाऊबीजेचे आहे. भाऊ बीजेला अनन्य साधारण महत्व आहे. भाऊ आणि बहिणींचं नातं हे नेहमीसाठीच अतूट असते, तसंच नातं अांपणही ठेवायला हवं, असा हितोपदेश साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी पुढे बोलतांना साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. म्हणाल्या की, प्रत्येकाला भगवंतांनी दोन डोळे, दोन हात दिले आहेत, तसेच भाऊबीजेचे आहे. भाऊ बीजेला अनन्य साधारण महत्व आहे. भाऊ आणि बहिणींचं नातं हे नेहमीसाठीच अतूट असते, तसंच नातं अांपणही ठेवायला हवं. पोर्णिमेचा चंद्र जस- जसा मोठा असतो, तसंच हे नातं असतं, प्रत्येक पर्व वर्षातून एकवेळ येतं पण भाऊ- बहिणींच्या नात्याचा सण हा वर्षातून दोनदा येतो. श्रावण आला की, प्रत्येक स्त्र...
दिनांक : 2 नवम्बर 2024 शनिवार श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु ने उत्तराध्य्यन सूत्र सप्ताह मनाया | भगवान महावीर की अन्तिम देशना उतराध्ययन सूत्र के मूल वांचन व विवेचन वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्र कांकरिया ने किया | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के तत्वावधान मे स्वाध्याय भवन,साहूकारपेट चेन्नई मे मनाये गए उत्तराध्य्यन सूत्र सप्ताह मे अनेक श्रदालु श्रावक-श्राविकाओं द्वारा सामायिक परिवेश मे दैनिक रुप से वीर स्तुति के रुप मे पुछिसुणं की स्तुति की गयी | अनुभवी स्वाध्यायी बन्धुवर वीरभ्राता व वीरपुत्र वीरेन्द्रजी कांकरिया ने उतराध्ययन सूत्र के मूल संग अर्थ का अति सुन्दर विवेचन किया | श्रावक संघ, तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने दैनिक रुप से उतराध्ययन सूत्र के प्रथम अध्ययन विनय से छत्तीसवें अध्ययन जीवाजीवाभिगम मे से रोचक प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम प्रस्तुत किया,श्रद्धालुओ...
*☀️प्रवचन वैभव☀️* *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 1️⃣0️⃣3️⃣ 🪔 *_511)_* आज्ञा ही परम मंगल है.! *_512)_* अपने गुण वैभव को जानने मानने से उस पर श्रद्धा करने से गुण वैभव प्रगट होता है.! *_513)_* विचारों से व्यवहार का निर्माण होता हैं.! *_514)_* मान सम्मान, लोक संज्ञा को पुष्ट करने में समय बरबाद करना अधःपतन का मार्ग है.! *_515)_* वासना में लिप्त व्यक्ति कभी निर्लेप नही बन सकता.! *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*
एएमकेएम में गौतम रास और उत्तराध्ययन सूत्र का हुआ स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के सान्निध्य में शनिवार प्रातः गौतम रास और उत्तराध्ययन सूत्र के 36वें अध्ययन जीव-अजीव विभक्ति का स्वाध्याय हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। युवाचार्यश्री ने इस अवसर पर कहा कि नाम के अनुरूप इस अध्ययन में जीव और अजीव को अलग-अलग कर पूर्ण रूप से निरुपित किया गया है। जीव- अजीव, ये दो तत्व उन्हीं के संयोग- वियोग का परिणाम है। जीव- अजीव का अनादि संबंध है। लेकिन तप-संयम आदि साधना के द्वारा इस संबंध को अलग किया जा सकता है। तब जीव शुद्ध रूप, अपना निज स्वरूप प्राप्त कर लेता है और पुद्गल से संपूर्ण रुप से विमुक्त होकर सिद्ध बन जाता है। उन्होंने कहा जब तक जीव के साथ अजीव का संबंध रहता है, तब तक शरीर, इंद्रियों, मन आदि की रचना होती है। ज...
Sagevaani.com /जालना: भगवान महावीरांचा निर्वाण कल्याणक दिन जालना येथील श्री वर्धमान जैन श्रावक संघाच्यावतीने उत्साहात आणि त्यांना यावेळी भावपूर्ण श्रध्दांजली अर्पण करण्यात आली. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनादरम्यान जप करण्यात आला. हा जप यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा; साध्वी अर्हतज्योतीजी म. सा; साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा; साध्वी हितसाधनाजी म. सा; प.पू.गुरुछायाजी म.सा; साध्वी सौम्यज्योतिजी म. सा. यांनी केला. तर साध्वी सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी प्रभू भगवान महावीरांचे गुणगाण गाऊन मार्गदर्शन केले. याप्रसंगी सभा मंडपात अनेक श्रावक- श्राविकांसह संघाच्या पदाधिकार्याची मोठी उपस्थिती होती. शेवटी श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघाचे महामंत्री डॉ. धरमचंद गादिया यांनी कार्यक्रमाचे सुत्र संचालन करुन सर्वांचे आ...
समर्पित भाव से धर्म आराधक बन जीवन सार्थक बनाना है और सम्यकत्व को प्राप्त करना है- डॉ. राज श्री जी म.सा. आज आकुर्डी स्थानक भवन में डॉ. मेघाश्री जी, साध्वी समिक्षाश्री जी एवं साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने उत्तराध्ययन सुत्र के 36 वे अध्याय का पठन किया और करवाया ! प्रतिपदा के पावन अवसरपर साध्वी मंडल ने सभी उपस्थित धर्मप्रेमियोंको नुतन वर्ष की शुभकामना दे सभोके धर्मआराधना, स्वास्थ्य की मंगलकामना की ! भगवान महावीर स्वामीजी के महानिर्वाण महोत्सव निमित्त पॉंच धर्म अनुरागीयोने तेले तप की आराधना की! जवाहरजी मुथा, मोतीलालजी चोरडीया( मौन सह), शारदा जी चोरडीया, तुषारजी मुथा, मोतीलालजी बोरा ने तेला तपआराधना की! नुतन वर्ष निमित्त पॉंच मंगलपाठ साध्वी मंडल ने सुनाए! श्री संघ के औरसे संघाध्यक्ष सुभाष जी ललवाणी ने उपस्थित महानुभावोंका स्वागत कर विश्वस्त मंडल के औरसे नुतन वर्ष की साध्वी मंडल एवं संघ समाज को शुभक...
गुरु के आज्ञा में रहना ही धर्म है! समयमात्र का हमे प्रमाद नहीं करना चाहिएँ! – डॉ. राज श्री जी म.सा. आकुर्डी स्थानक भवनमें आज उत्तराध्ययन सूत्रक् 35 वे अध्याय तक का पठन साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने किया!अपने उद् बोधन मे उन्होंने बताया समय का मुल्य हमें जानना है! चार संज्ञाये विस्तार से समझाई! मूल्यांकण, मूल्यवान, मुल्याहिन, मुल्याधिन! जब सम्यकत्व की प्राप्ति होगी मनुष्य जीवन सार्थक होगा! अपने उद् बोधन मे डॉ. राज श्री जी ने कहा आज भगवान महावीर स्वामी जी का महानिर्वाण दिवस है! आज परम प्रकाश का पर्व है! साधना की प्रकाशिकी पर पहुँच कर भ. महावीर मोक्ष को गये ! भ. महावीर एवं गौतम स्वामी के गुरुशिष्य नातेपर प्रकाश डाल अपार स्नेह , प्रशस्त मोहपर का जिक्र किया! गुरु की आज्ञा रहना ही धर्म है बताया! “ णमो जिणाणं जिय भयाणं “ का सामुदायिक जाप हुआ! समाज के धर्म अनुरागी बड़ी संख्यामे उपस्थित थे! “ आनं...
एएमकेएम में उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के शिष्य मुनि हितेंद्र ऋषिजी ने शुक्रवार को उत्तराध्ययन सूत्र की विवेचना करते हुए बताया कि प्रभु महावीर ने अपने प्रधान शिष्य गौतम अणगार से कहा कि तुम देव शर्मा को प्रतिबोध देकर आओ। उन्होंने कहा गौतमस्वामी का विनय कैसा था। जहां विनय नहीं, वहां सब कुछ जीरो है। आपमें बाकी सब कुछ है, विनय नहीं है तो सब कुछ जीरो है। जिसके अंदर विनय है, वही कर्मों की निर्जरा कर सकता है। गौतमस्वामी चार ज्ञान के धनी थे। वे जानते थे, प्रभु मुझे क्यों भेज रहे हैं। लेकिन प्रभु ने कहा और वे तुरंत उठकर गए। गौतमस्वामी ने देव शर्मा को प्रतिबोधित किया कि उसे संयम ले लेना चाहिए लेकिन देव शर्मा समझने को तैयार नहीं। अंत में गौतमस्वामी वहां से निकले। गौतमस्वामी के पीछे देव शर्मा चल रहा था। उसका म...