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प्रतिकूलता हो फिर भी  प्रतिकूलता न लगे यही समत्व स्थिरता का प्रभाव हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *शासननिष्ठ सद्गुरु* *सूरि जयन्त सेन कृपाप्राप्त,* श्रुत साधक क्षमाश्रमण, मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 1️⃣0️⃣8️⃣ 💠 *_536)_* प्रतिकूलता हो फिर भी प्रतिकूलता न लगे यही समत्व स्थिरता का प्रभाव हैं.! *_537)_* *कर्तृत्व सबसे बड़ा भ्रम है* *जो आस्तिक्य को* *खत्म कर देता है…!* *_538)_* कर्तृत्व का त्याग सबसे बड़ा धर्म है.! *_539)_* *नेता बनना आसान है* *ज्ञाता बनाना मुश्किल है.!* *_540)_* जो आज्ञा के आधीन है जगत उसके आधीन है.!   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*  

गणेशीलालजी महाराज ने तप, साधना के प्रभाव से अनेकों को धर्म से जोड़ा – युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एमकेएम में गणेशीलालजी महाराज की 145वीं जन्म जयंती मनाई गई   वर्धमान स्थानकवासी जैन महासंघ तमिलनाडु के तत्वावधान एवं श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी के सान्निध्य में गुरुवार को कर्नाटक गजकेसरी गणेशीलालजी महाराज की 145वीं जन्म जयंती एकाशन व दया दिवस के रूप में मनाई गई। इस मौके पर युवाचार्य प्रवर ने कहा कि महापुरुष अपने आप में, अपनी साधना और सामर्थ्य से प्रत्येक भव्य जीवों का आलंबन बनते हैं। आज कर्नाटक गजकेसरी, घोर तपस्वी के जन्म दिवस का अवसर है। एक ऐसा बालक जो बिलाड़ा के ललवानी परिवार में जन्मा, जिसे जन्म के पश्चात ही संसार के उन थपेड़ों का सामना करना पड़ा जिन्हें आप भी महसूस करते हैं। जो उपेक्षा का दुःख होता है, उसे उसने झेला। उन्होंने कहा आप जहां हो, वहां कितनी निष्ठा से जुड़े हो, वह मायने रखता है। वे हमेशा कार्य के प्रति निष्ठावान थे। विवाह का प्रस्ताव भी आया। जो-जो चीज जीवन में ...

गुरुंची कृपा सतत असायला हवी-साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

जालना : आपण जालनावासिय धन्य आहेत, आपल्यावर सतत गुरु गणेशलालजी म. सा. यांची कृपादृष्टी राहिलेली आहे, राहत आहे, ज्यांच्यावर गुरुंची कृपा असते, त्यांच्या कोणतेही संकट येत नाही, असा हितोपदेश साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. तपोधाममध्ये गुरु गणेशलालजी म. सा. यांची जयंती मोठ्या उत्साहात साजरी करण्यात आली. यावेळी पुढे बोलतांना साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. म्हणाल्या की, आपण जेथे चातुर्मास करायला जातो, तेथे- तेथे गेल्याबरोबर आणि जातावेळेस आजारी पडत असतो, परंतू त्यास जालना हे अपवाद ठरले आहे. आमच्या साध्वीही आश्चर्य चकीत झाल्या आहेत, ही कशाची कमाल आहे तर गुरु गणेशलालजी महाराज यांची! आपण जालनावासिय धन्य आहेत, आपल्यावर सतत गुरु गणेशलालजी म. सा. यांची कृपादृष्टी राहिलेली आहे, राहत आहे, ज...

“वीर प्रभु की आराधना”

“वीर प्रभु की आराधना”. श्रीमद् उत्तराध्ययन सुत्र के संपुर्ण36 अध्याय की (पारायण) आराधना आकुर्डी-निगडी-प्राधिकरण संघ अंकित श्रुत आराधना जिनेश्वरी ग्रुप द्वारा साध्वी जिनाज्ञा श्री जी के नवकारमंत्र एवं मंगलपाठ से वाचन शुरु हुआ! इस मंगलमय अवसरपर श्री संघ के अध्यक्ष सुभाषजी ललनाणी उपस्थित थे!इस वाचन मे अनेक बहनोने अपना सहभाग लिया ! अर्हम विज्जा प्रणेता ,उपाध्याय प्रवर पु. प्रविणऋषिजी म.सा. के आशिर्वाद से संजयजी राहुलजी मंजुजी संचेती के प्रांगण मे परमात्मा की अंतिम वाणी ज्यो हस्तिपाल राजा के सभा मे परमात्मा द्वारा प्रतिबोधित की गयी थीl उन अनुठी गाथाओं का वाचन प्रारंभ हुआ! आज ज्ञान/ऋषि/लाभ/शुध्द पंचमी के शुभ अवसरपर अपने उद् बोधन मे आत्म कल्याण के लिए आगम के ज्ञान प्रकाश वाणी का हमें रसपान करना है! ज्ञान द्वारा अपना मार्ग प्रकाशित करना है! सम्यक ज्ञान नही तो व्यवहारी ज्ञान नही आता! धर्मसभा मे उपस...

ज्ञान धन से बढ़कर कोई धन नहीं – युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में ज्ञान पंचमी पर हुई सरस्वती आराधना ज्ञान सोई हुई आत्मशक्ति को जगाता है। ज्ञान धन से बढ़कर कोई धन नहीं है। ज्ञान ही हमें सिद्ध गति में पहुंचाता है। ये विचार एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने व्यक्त किए। वे बुधवार को ज्ञान पंचमी के अवसर पर हुई सरस्वती आराधना के मौके पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। सरस्वती आराधना में बड़ी संख्या में साधकों ने भाग लिया। उन्होंने कहा ज्ञान का प्रकाश और अज्ञान व मोह का त्याग हमारे एकांत सुख को देने वाले हैं। ज्ञान पंचमी जैन परम्परा में विशेष रूप से ज्ञान आराधना के लिए नियत तिथि है। इसके कई महत्वपूर्ण कारण है। जैन आगमों में ज्ञान के पांच भेद कहे गए। भव्य आत्मा वही होती है जिसका लक्ष्य पंचम ज्ञान को प्राप्त करना है। यह प्रत्येक भव्य आत्मा का लक्ष्य होता है और उसी लक्ष्य के लिए यह आराधना की ज...

चारित्रमोह के कारण यह अव्रत आस्रव होता है

क्रमांक – 40 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 आश्रव* *यहां आश्रव के बीस भेदों का विवेचन किया जा रहा है :* *✨2. अव्रत आस्रव* *👉 अप्रत्याख्यानमविरतिः। चारित्रमोह के कारण यह अव्रत आस्रव होता है। चारित्र मोह जब तक सक्रिय रहता है तब तक अंश रूप में या पूर्ण रुप में पापकारी प्रवृत्ति के त्याग की भावना नहीं रहती। अर्थात् मिथ्यात्व आदि पापकारी प्रवृत्तियों का त्याग ने कर पाना ही अव्रत है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि पांच आस्रव सेवन का अत्याग ही अव्रत आश्रव है। अव्रत आस्रव देशव्रत और सर्वव्रत दोनों का बाधक है।* *अत्याग भाव और पौद्गलिक सुखों के प्रति अव्यक्त लालसा अव्रत आस्रव है। जीव की आशा-वांछा अव्रत है और यह चारित्र मोहनीय कर्म का औदयिक भाव है...

तर आपल्या आत्म्याचं कल्याण कसं होईल-प.पू.गुरुछायाजी म.सा.

Sagevaani.com /जालना: आपल्या आत्म्याचं कल्याण करायचं असेल तर प्रभूंची आराधना ही प्रत्येकाने केलीच पाहिजे,त्याशिवाय आपल्याला आत्म्याचं कल्यण करता येणार नाही,असा हितोपदेश साध्वी प.पू.गुरुछायाजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. व अन्य काही साध्वींची याप्रसंगी उपस्थिती होती. आजही संघामध्ये साध्वी प. पू. अर्हतज्योतीजी म. सा. यांनी विविध प्रकारचा जाप केला. प्रवचनाच्या प्रारंभीच साध्वी सौम्यज्योतिजी म. सा. यांनी आपल्या सुंदर आवाजात ढुंगे कहॉ ऽऽऽ हे गीत गायिले. याच गितावर आधारीत साध्वी प.पू.गुरुछायाजी म.सा. पुढे बोलतांना म्हणाल्या की, ुपरमेश्वराला आपण खर्‍याअर्थाने ओळखलेच नाही. तो आपल्या जवळ असूनही आपण त्याला इकडे – तिकडे पाहात आहो...

मंगल वीरता, शौर्य और साहस का प्रतीक है – युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में आठ वार की प्रवचन माला गतिमान एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने आठ वार पर प्रवचन देते हुए कहा कि सप्ताह का अर्थ है सात दिन। वार का संदर्भ प्रहर से है। प्रत्येक वार का अपना महत्व है और उसके साथ जुड़े हुए नाम का भी महत्व है। अनुभव से ऐसी धारणाएं आती है। वह महापुरुषों के अनुभव से आती है। मंगलवार की चर्चा करें तो इसमें मंगल है। काॅस्मो के अनुसार मंगल ग्रह माना जाता है। पृथ्वी की परिधि में इसका अस्तित्व माना जाता है। मंगल ग्रह की सबसे बड़ी खासियत है कि यह वीरता, शौर्य और साहस का द्योतक है। वह जुझारू होता है। मंगलमयी प्रेरणा देने वाला है। हिम्मत देने वाला है। मंगल की अशुभ स्थिति से व्यक्ति का ग़ुस्सा, अहंकार बढ़ जाता है। उन्होंने कहा सिद्ध भगवंतों का रंग लाल है और लाल रंग मंगल से जुड़ा है। उसका संदेश है कि आज हमारे भीतर साहस है...

प्रत्येक वस्तु में  अनेक धर्म निहीत हैं

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   1️⃣0️⃣6️⃣ 🌅 प्रत्येक वस्तु में अनेक धर्म निहीत हैं.. समस्त धर्मो के बोध से पदार्थ का पूर्णबोध होता हैं, पूर्णबोध को प्रमाण कहते है.! ⚡ नय अर्थात वस्तु के एक अंश को जानना अन्य अंश का निषेध न करना.! 🤔 नय हमें वक्ता के आशय एवं संदर्भ को समझने की रीति सिखाता है.! 🪔 *प्रमाण नय के* *ज्ञान के अभाव में* *सिद्धांत के रहस्यों को* *समझना संभव नही है..!* ⚡ जहां प्रमाण नय के ज्ञान का अभाव हो वही पर कदाग्रह होता हैं.! *📚श्री स्यादवाद मंजरी📚*  

अहिंसा साईकल रॅली

अहिंसा साईकल रॅली के आयोजको ने लिए महासाध्वी डॉ. राज श्री म.सा. आदि ठाणा के मंगल आशिर्वाद! भगवान महावीर स्वामीजी का संदेश “ जिओ और जीने दो” जन जन तक पहुँचाने एवं अर्हम विज्जा प्रणेता उपाध्याय प्रवर पु. प्रविण ऋषिजी म. सा. के दर्शन, कर्नाटक गज केशरी, खद्दरधारी गुरुदेव पु. गणेशमलजी म.सा. के समाधि स्थल के दर्शनार्थ तीन दिवसीय चिंचवड़ से जालना(325 कि.मी.) की अहिंसा सायकल रॅली का आयोजन महावीर अॅडव्हेन्चर ग्रुप के राजेश एवं राजश्री ताथेड द्वारा किया गया है! यह रॅली एकासना तप के साथ राह में विराजीत साधु-संतो के दर्शन लेते आगे बढेंगी! आकुर्डी स्थानक भवन मे आयोजक राजेश एवं राजश्री ताथेड ने चातुर्मासार्थ विराजीत महासाध्वी डॉ. राज श्री जी, डॉ. मेघाश्री जी, साध्वी समिक्षा श्री जी, साध्वी जिनाज्ञा श्री जी के रॅली पुर्व मंगल आशिर्वाद पाकर मांगलीक ग्रहण की! इस वक्त रॅली आयोजको को श्री संघ के विश्वस्तो द्...

एक समय में बंधे  कर्मो की निर्जरा हेतु

*विंशत्यधिकं शतम्* *📚💎📚श्रुतप्रसादम्* 🪔 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   1️⃣0️⃣5️⃣ 🌅 एक समय में बंधे कर्मो की निर्जरा हेतु *अपार ऊर्जा की* *आवश्यकता रहती है..* 🧘‍♂️ अंतर्मुहूर्त मात्र की क्षपक श्रेणीमें अनंत भवों के संचित कर्म भस्मीभूत हो जाते हैं.! ❌ विषय भोग में लिप्त व्यक्ति कभी भी भव वन को पार नहीं कर सकते क्योंकि 🔥 उनकी समस्त ऊर्जा तो भोगविलास में ही लगी है, आत्म उत्थान के पुरुषार्थ हेतु उनके पास, न समय रहता, है न सत्त्व.. 💯 तीनो योग का आत्मध्यान में एकाग्र होना तभी संभव है जब साधक विषयों से अलिप्त रहता है.! ✅ अतः जो विषयों से अलिप्त, निरपेक्ष एवं निवृत्त रहता है वही भव वन को पार कर सकता है..! *📚श्रीज्ञाताधर्म कथा*

बोलो मगर प्यार से-साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: एक ट्रक चालला होता, त्याच्या पाठीमागे लिहीले होते, बुरी नजरवाले तेरा मुंह काला, तर दुसर्‍या ट्रकच्या पाठीमागे लिहिले होते, बोलो मगर प्यार से…. प्यार बोले तो कलह होने का कामही नही! परंतू आज काल आम्ही कलह करण्यात फार गुरफटून गेलो आहोत. भांडण होण्याला काही तरी ठोस कारण हवे, परंतू भांडण होण्यालाही कारण लागत नाही, असा हितोपदेश साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी पुढे बोलतांना साध्वी प. प. सत्यसाधनाजी म. सा. म्हणाल्या की, कलह म्हणजे भांडण! भांडणं होण्याला काहीही कारण लागत नाही, ते कशावरुनही लागू शकते. एक ट्रक चालला होता, त्याच्या पाठीमागे लिहीले होते, बुरी नजरवाले तेरा मुंह काला, तर दुसर्‍या ट्रकच्या पाठीमागे लिहिले होते, बोलो मगर प्यार से…. प्य...

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