समझा-समझा एक है, अनसमझा सब एक । समझा सोई जानिए, जाके हृदय विवेक ।। जिस हृदय में विवेक का. विचार का दीपक जलता है, वह हृदय देव-मन्दिर-तुल्य है। जिस हृदय में विवेक-विचार का दीपक नहीं है, वह अन्धकार-मय हृदय श्मशान के समान है। जब तक हृदय में विवेक तथा विचार की ज्योति नहीं जलती, तब तक कोई कितना ही उपदेश दे, समझाये बुझाये सब भैंस के सामने बीन बजाने के समान है, अन्धे के सामने कत्थक नृत्य दिखाने के वरावर है और बहरे के समक्ष शास्त्रीय संगीत गाने के तुल्य है। विचार शून्य मनुष्य कभी भी भले-बुरे का, हित-अहित का निर्णय नहीं कर सकता। इसलिए कहा है- आँख का अन्धा संसार में सुखी हो सकता है, किन्तु विचार का अन्धा मुखी नहीं हो सकता। विचार, और विवेक जीवन-महल की नीव है। सुरम्य प्रासाद, आलीशान भवन और आकाश से बातें करने वाले महल आख़िर किस पर टिके होते है ? नीव पर। यदि महल की नीव नही है या नींव कमजोर है तो प्रथम तो...
चेन्नई, — जैन डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) द्वारा E-होटल, चेन्नई में एक भव्य स्थापना समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई। इस गरिमामयी अवसर पर 90 से अधिक डॉक्टर्स ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कार्यक्रम को सफल बनाया। जैन डॉक्टर्स एसोसिएशन एक ऐसा मंच है जो चेन्नई में कार्यरत 200 से अधिक विभिन्न विशेषज्ञताओं के जैन डॉक्टर्स को एकजुट करता है। इस संस्था का उद्देश्य न केवल चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है, बल्कि समाज सेवा, हेल्थकेयर अवेयरनेस, परस्पर सहयोग, और युवा डॉक्टर्स को मार्गदर्शन प्रदान करना भी है। यह संस्था एक परिवार की भावना के साथ कार्य करती है — “एकता में शक्ति है” के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए। नव-गठित मुख्य कार्यकारिणी में शामिल हैं: • डॉ. नितेश जैन – अध्यक्ष • डॉ. जसवंत खातोड़ – उपाध्यक्ष • डॉ. जीनेन्दर गोती – सचिव • डॉ. विजय कुमार सोहनल...
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री डाॅ ज्ञानेन्द्र कुमार जी एवं मुनिश्री रमेश कुमार जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में आज तेरापंथ धर्मस्थल में तपोत्सव का आयोजन हुआ। जिसमें एक साथ छह तपस्वियों का तेरापंथी सभा द्वारा तपोभिनन्दन किया गया। राजेन्द्र जी कोठारी (खुश्कीबाग बिहार) 31 दिन की , श्रीमती मंजुला सेठिया ( गंगाशहर राजस्थान) धर्मचक्र तप , दस वर्षीय सुश्री पूर्वी भादानी 9 दिन की , मास्टर श्रेयांस भादानी 8 दिन की ( भाई – बहन ) , नो वर्षीय सुश्री हरविका महनोत 8 दिन की तपस्या, सुश्री दीक्षा छल्लाणी 8 दिन की तपस्या पर तपोत्सव का आयोजन हुआ। मुनि डाॅ ज्ञानेन्द्र कुमार जी ने कहा – गुवाहाटी में छोटे छोटे बालक बालिकाओं की तपस्या की लहर पूरे देश में फैल रही है। बच्चों देखकर बच्चों के मन में तपस्या करने की प्रतिस्प्रदा सी चल रही है। बच्चों को देखकर बडे भी तपस...
तपस्वी भाई-बहन का तपोभिनंदन आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य एवं तेरापंथी सभा के तत्वावधान में बुधवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में मास्टर देव महनोत एवं सुश्री मानसी महनोत ( भाई – बहन – सुपुत्र-सुपुत्री : प्रदीप कुमार-पूजा देवी) के क्रमश: नौ (9) एवं अठाई (8) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तेरापंथी सभा, गुवाहाटी की ओर से साहित्य एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर तपस्वी भाई-बहन के तप की अनुमोदना की गई। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने तपस्वी भाई-बहनों की अनुमोदना करते हुए कहा कि आज दो छोटे-छोटे बच्चों ने 9 एवं 8 की तपस्या करके अपनी आत्मा को पुष्ट किया है। तपस्वी व्यक्ति अपने परिवार, समाज एवं संघ का गौरव बढ़ाता है। तपस्वी भा...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म .सा. ने धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति के लिए अपने जीवन में सद्गुरु का सत्संग , समागम कल्याणकारी हितकारी, मंगलकारी और हमारे असंतुलित जीवन को सही दिशा बोध प्रदान करने वाला होता है। सद्गुरु का समागम मिलना बड़ा कठिन है। उन्होंने कहा कि गुरु हमें जीवन जीने की सही कला सीखाते है। मुनि श्री ने राष्ट्रसंत अनन्त उपकारी उत्तर भारतीय प्रर्वतक परम पूज्य दादा गुरुदेव भण्डारी श्री पदम चन्द्र जी महाराज साहब,परम पूज्य श्री मोतीलाल जी महाराज साहब के उन पर एवं जिनशासन पर किये असीम उपकारों को याद करते हुए कहा कि महापुरुषों का जीवन हम सबके लिए एक प्रकाश स्तंभ के समान जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाला और प्रेरणादायी होता है। गुरु हमारे जीवन निर्माता है। बिना गुरु के जी...
जालना : जम्बू स्वामी सारखा शिष्य असावा, सुधर्मा स्वामी म्हणजेच भगवान महावीरांचे रुप आहे. जम्बू स्वामी आणि सुधर्मा स्वामी नसते तर आम्हाला आगम मिळालेच नसते. गुरुंमध्ये असलेले आपल्याला हवे असेल तर तशी तपश्चर्या असायला हवी. प्रभू महावीरांचा दृष्टीकोन कसा होता? असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, घर, दुकानाची आठवण आली नाही तरच आपण बोर होणार नाहीत, असे सांगून ते म्हणाले की, कुंभकर्ण हा वारल्यानंतरची गोष्ट आहे. त्याच्या पत्नीचे नाव होते, निद्रादेवी! नोटा मोजतांना कुणीही झोपत नाही. मात्र...
जालना : अनुभव करायला या तर…. अनुभव कराल! येथे जे येतात ते अनुभव करायला तर येतात. आत्मसात करणे म्हणजे काय? आम्ही सुधर्मा स्वामीची अनुभूूती तर करु शकत नाहीत. अनुभूती प्राप्त केव्हा करणार, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, महात्म्यांची अनुभूती केव्हा होईल, तर जेव्हा ते रिकामे होईल, तेव्हा! सर्वदर्शी व्हायलाही आचारण सुध्दा तसे हवे. आपल्याला सामायिक मध्ये खुप काही गंदगी भरलेली आहे, म्हणून तर आपल्याला त्यात आनंद मिळत नाही. आपल्या आतमध्ये असलेली गंदगी तर करा, असे सांगून ते म्हणाल...
संघ अंतर्गत कार्यरत ॲक्टिव्ह महिला ग्रुप द्वारा भावना आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण जैन श्रावक संघ के प्रांगण मे चातुरमासार्थ विराजीत महाराष्ट्र सौरभ, उप्रवर्तिनी पुज्यनीय चंद्रकला श्री जी महाराज साहेब, वाणीकी जादुगर श्री स्नेहाश्री जी महाराज साहेब, मधुरकंठी श्री श्रुतप्रज्ञाश्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा 3 के पावन निश्रामे आज गणधर तप आराधक 27 तपस्वीयोंका सन्मान चातुर्मास समितीके स्वागत अध्यक्ष श्रीमान मोतीलालजी एवं शारदाबाई चोरडीया, देवेंन्द्रजी एवं नंदाजी लुंकड़, संघाध्यक्ष सुभाषजी एवं कांताजी ललवाणी, तथा जैन कॉन्फ़्रेंस दिल्ली के भवन निर्माण के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्राध्यापक अशोकजी पगारिया के करकमलोद्वारा संप्पन्न हुये! एक्टिव ग्रुप के महिला समुह द्वारा पल्लवी नहार, सोनल सोनी, सारिका ओस्तवाल, मनिषा जैन द्वारा आयोजित भावा के कार्यक्रम में भारत के विविध राज्यों के संस्क्रुति का दर्शन स्तवन उद बो...
रंजना भण्डारी व सुनीता छाजेड़ ने किया 9 के तप का प्रत्याख्यान तप के द्वारा हुआ तपस्वियों का अभिनंदन विजयनगर, बंगलौर : युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री संयमलताजी ठाणा 4 के सान्निध्य में तेरापंथ भवन, विजयनगर में चातुर्मासिक श्रावण मास में ‘समीकत की यात्रा’ विषय पर प्रवचन माला चल रही है। उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी संयमलता ने कहा कि हर भव्य प्राणी के लिए सिद्धत्व हेतु समकित प्रथम सीढ़ी हैं। समकित को प्राप्त होने के बाद सुरक्षित रखना और भी जरूरी है। विशेष पाथेय प्रदान करते हुए साध्वीश्री ने कहा कि इंसान दूसरों से स्नेह व मैत्री रखे, यह श्रेष्ठ व उत्तम है। पर अपने भाई के साथ प्रेम व सौहार्द का व्यवहार अवश्य करे, यह अतिउत्तम हैं। श्रावण विशेषत: तप के मौसम का माह होता हैं। विजयनगर में भी श्रावक समाज में तप का उत्सव सा माहौल बना हुआ हैं। आज दो बह...
आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी मुनि रमेश कुमार जी, मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित आगम आधारित प्रवचनमाला में मंगलवार को मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि लोगस्स में तीर्थंकरों की स्तुति है। तीर्थंकरों की सेवा में हजारों देवता अहर्निश लगे रहते हैं, सेवा करने के लिए लालायित रहते हैं, फिर भी हम सांसारिक देवों की पूजा-अर्चना में लगे रहते हैं। यह कुछ ऐसा लगता है जैसे कोई हाथी की सवारी कर लेने के बाद गधे की सवारी करना चाहते हैं। हम श्रमणोपासक हैं अत: हम वीतराग के पथ पर आगे बढ़ें तथा मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करें अर्थात वीतरागी बनें, यह काम्य है। मुनि रमेश कुमार ने कहा कि हमारा जीवन अध्रुव है, अशाश्वत है। हमारे जीवन में उतार-चढ़ाव, व विपरीत परिस्थितियां आती रहती हैं। तथा कुछ ऐसे भी क्षण आते हैं। ऐसी स...
प्रवचन – 29.07.2025 – प पू श्री मुकेश मुनीजी म सा – (बिबवेवाडी जैन स्थानक) परिवर्तन हे जीवनाचे अनिवार्य वैशिष्ट्य आहे. जशी भाकरी न फिरवल्यास ती करपते, त्याचप्रमाणे आपल्या जीवनातील परिस्थिती सुधारण्यासाठीही योग्य वेळी बदल आवश्यक असतो. या परिवर्तनाचा हेतू असतो आत्मोन्नतीचा मार्ग स्वीकारणे. भगवान महावीर स्वामींनी मोक्ष प्राप्तीसाठी चार मूलभूत मार्ग सांगितले – सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन, सम्यक चारित्र्य आणि सम्यक तप. हेच चार मार्ग आपल्याला परमगतीकडे घेऊन जातात. त्याच्या विरुद्ध दिशा दाखवणारे चार अधोगामी मार्ग आहेत – क्रोध, मान, माया आणि लोभ. जो मनुष्य या अधोगतीच्या चार दोषांवर विजय मिळवून त्यांच्या जागी सम्यकत्व स्वीकारतो, तोच खरा पुरुषार्थी ठरतो. तोच आत्मा परमात्म्याच्या दिशेने प्रवास करू शकतो. या चार दोषांमध्ये सर्वप्रथम दोष आहे क्रोध. क्रोध मनुष्याला आंधळं करतो, विवेकहीन बनवतो. तो...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म .सा. ने धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रद्धा परम दुर्लभ है। धर्म पर जिस साधक की श्रद्धा मजबूत हो जाती है वह अपने जीवन का कल्याण करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अपने कदम आगे बढ़ा लेता है। मुनि श्री ने प्रवचन सभा में बहुत ही मार्मिक वैराग्यपूर्ण प्रेरक श्री तेतली पुत्र के कथानक पर सारगर्भित प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म की सम्यक आराधना ही जीव को शाश्वत सुख प्रदान करने वाली है। संसार के सब सुख क्षणिक और काल्पनिक स्वप्नवत है। आंख खुलते ही सब खत्म हो जाता है। सद्गुरु हमें जगाने आते हैं और मोक्ष का मार्ग बतलाने आते हैं। जो जागत है वो पावत है और जो सोवत है वो खोवत है। अर्थात् जो संसार की मोह निद्रा से जाग जाता है वो अपने जीवन का उत्थान कर लेता है और जो संसार के क्षणिक ...