Sagevaani.com @चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ के तत्वावधान में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि सत्य का मार्ग मोक्ष की ओर ले जाता है। सत्य कड़वा अवश्य होता है, सत्य बोलने वालों को कष्ट भोगने पड़ते हैं लेकिन एक दिन वह व्यक्ति अन्य व्यक्तियों को पीछे छोड़कर काफी आगे निकल जाता है। सत्य का मार्ग जीवन जीने का आधार है। उन्होंने कहा कि जब जीवन की एक सांस का भरोसा नहीं है तब भी मनुष्य छल, कपट कर लोगों के दिलों को दुखाकर हवेली बनवा रहे हैं। भौतिक सुख प्राप्त करने के लिए सत्य सुख शान्ति का मर्म भी नहीं समझ रहे, जीवन के अंत का भी अहसास नहीं कर रहे हो, सच्चा सुख तो केवल परमात्मा की शरण है। जिस प्रकार इस नश्वर शरीर में रोग लग जाने के उपरांत चिकित्सक से परामर्श लेना पड़ता है, ठीक उसी प्रकार जीवन को रोग से बचाने के लिए ईश्वर का...
दिवाकर भवन पर जप तप आराधना के साथ विभिन्न धार्मिक गतिविधीयो के साथ पाँच माह का चातुर्मास गतिमान है। प्रतिदिन नवकार आराधक श्रावक श्राविकाओ के साथ ज्ञान जिज्ञासु महानुभव प्रवचनो की श्रंखला के माध्यम से जिनवाणी का श्रवण कर रहे है। प्रवचनो के माध्यम से प्रखर वक्ता मेवाड़ गोरव पुज्यश्री रविन्द्रमुनि जी म सा “नीरज” ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि सुख दु:ख जीवन के दो पहलू हैं जीवन में सुख आया है तो दु:ख भी आएगा। दु:ख के समय में अपने आप को नियंत्रित करते हुए धर्म से जोड़े। दु:ख से घबराए नहीं दु:ख का स्वागत करें, यदि दुख में हम संयमित रहते हुए जीवन जिएंगे तो दुख की अनुभूति नहीं होगी। दुख ही जीवन का अभिन्न अंग है यह तो कल युग चल रहा है सतयुग होते हुए भी प्रभु श्रीराम को द्वापर युग में श्री कृष्ण भगवान को एवं सभी तीर्थंकर भगवान हो को भी अतिशय सहन करना पड़ा तो फिर आप और हम तो सामा...
महान तपस्वी साध्वी पूनमश्री जी की सिद्धि आराधना 3 अगस्त को होगी पूर्ण होगी। 44 दिन में 36 दिन निराहार रहेंगी साध्वी जी। उनकी अनुमोदना 61 भाई-बहन करेंगे एक दिन से पांच दिन का उपवास। Sagevaani.com @शिवपुरी। शिवपुरी में चातुर्मास कर रहीं प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज की सुशिष्या साध्वी पूनमश्री जी के सिद्धि तप की आराधना 3 अगस्त को पूर्ण होने जा रही है। उनकी कठोर तपस्या की अनुमोदना में श्वेताम्बर जैन श्रीसंघ के 61 भाई-बहन की नवकार महामंत्र तप आराधना 30 जुलाई से शुरू होने जा रही है। साध्वी पूनमश्री जी और श्रावक श्राविकाओं की तप आराधना से शिवपुरी जैन समाज में अपार उत्साह का वातावरण है और उनकी तपस्या की अनुमोदना करने के लिए देश के विभिन्न भागों से धर्मावलंबी 3 अगस्त को शिवपुरी पधार कर साध्वी पूनमश्री जी को गुणानुवाद सभा में शामिल होंगे। श्वेताम्बर जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष राजेश कोचेटा औ...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैं। बंधुओं जैसे कि आज गुरूर्णिमा ने फरमाया कि गौतम स्वामी ने भगवान महावीर जी प्रश्न किया सबसे बड़ा स्टेशन कौन सा है? स्टेशन दो है, एक तो निगोद का एवं दूसरा स्टेशन सिद्ध शिला निगोद का स्टेशन दुख देने वाला है। सिद्ध शिला का स्टेशन मुक्ति की तरफ ले जाने वाला है नि गोद में भी कोई भी जीव जा सकता है।जैसे कि पूर्वधारी भी कषाय की वजह से राग द्वेष की वजह सेनिगोद में जा सकता। सिद्धशिला स्टेशन पर जाने के लिए भी अनेक तकलीफ सहन करनी पड़ती है तो ही मुक्ति का मार्ग मिलता है 24 तीर्थंकर ओने कितने दुख सहन किए तब जाकर मोक्ष मिला। जैसे कि मरू देवि का जी भी निगोद से निकलकर ही मनुष्य भव में आया पहले केले के पत्ते मैं 1000 वर्...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैं। बंधुओं जैसे कि जीवन में खुश रहने का पहला सूत्र अपने दिन की शुरुआत मुस्कान के साथ करें जेब में भले ही न मोबाइल पर चेहरे पर जरूर रखिए स्माइल मुस्कुराने में कैसी कंजूसी। दुकान खोलना बाद में पहले मुस्कुराना शाम को जब लोट कर आते हैं तो भी पहले सीढ़ियां पर खड़े होकर मुस्कुराना चाहिए। खुशी कोई आसमान से टपक कर नहीं आती और ना ही सती सीता की तरह जमीन फाड़कर बाहर आती है। खुशी तो हमारे मन का फैसला है फिर जीवन में चाहे उलज्जन आए। परंतु सदा खुश रहना चाहिए खुश रहना ईश्वर की सबसे बड़ी सेवा है। विपरीत वातावरण बनने पर भी गुस्सा नहीं करना चाहिए हमेशा ही मुस्कुराना चाहिए। क्या या प्रभु भक्ति से कम है पूरे दिन 1 घंटे में ट...
उन्होंने बताया कि होश और विवेक से जीवन जीना धर्म है Sagevaani.com @शिवपुरी। हम सांसारिक प्राणियों का धर्म से नाता सीमाओं में बंधा रहता है। 24 घंटे में एक घंटा धर्म कर लिया, मंदिर चले गए, पूजा पाठ कर लिया, आरती कर ली, सामयिक और प्रतिक्रमण कर लिया तो हम आपने आपको धार्मिक समझकर संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन मानव जीवन की सार्थकता आपके धार्मिक होने में नहीं, बल्कि आपके धर्मात्मा होने में है। 24 घंटे चाहे आप सांस ले रहे हों, चल रहे हों, फिर रहे हों, बैठ रहे हों, सो रहे हों, खा रहे हों हर क्रिया में धर्म की झलक होनी चाहिए। धर्म अर्थात् होश, धर्म अर्थात् विवेक, धर्म अर्थात् यतनापूर्वक हर कार्य करना। यदि ऐसा हुआ तभी आप धर्मात्मा हैं और धर्मात्मा होना ही मानव जीवन की सार्थकता है। उक्त प्रेरणास्पद उद्गार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने स्थानीय पोषद भवन में आयोजित एक विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए...
🏰☔ *साक्षात्कार वर्षावास* ☔🏰 *ता :28/7/2023 शुक्रवार* श्री राजेन्द्र भवन, चेन्नई में विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, उग्र विहारी प. पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के भव्य वर्षावास के प्रवचन का आनंद लीजिए। ~ हमारी साधना करने के बाद यदि विराधना का नाश होता है तो ही हमारी साधना मोक्ष देने वाली होती है। ~ संघ और शासन रक्षा वो परम अमृत है कि उसके पीने से साधक की संयम रक्षा और जीव रक्षा भी बलवान बनती है। ~ हमारा जितना तन, मन, धन, लोगों की, समाज की, शासन की सेवा में समर्पित होता है वह जीवन को देवता भी वंदना करते हैं। ~ जो मानव तन और मन से बलवान, सामर्थ्य वान, ऊर्जावान है वही धर्म की, समाज की, राष्ट्र की सुरक्षा कर सकता...
राजस्थान पत्रिका और एक्ष्नोरा इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वाधान में चलाए जा रहे हरित प्रदेश अभियान के तहत आज शुक्रवार को विष्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर पोधारोपण कार्यक्रम टी नगर स्तिथ श्री आरकेएम शारदा विद्यालय मै आयोजित किया, स्कूल की प्रधान अध्यापिका गीता एवं अध्यापिकाओं ने भाग लिया। मुख्य अतिथि नैना शा ने सभी विद्यार्थियो को पर्यावरण के गुणों की जानकारी दी। इस मौके पर एक्ष्नोरा उतरी चेन्नई के सचिव फतेहराज जैन ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ साथ पर्यावरण के प्रति भी गंभीर रहने की सलाह दी, बच्चो को हरित प्रदेश और स्वस्थ पर्यावरण के गुणों की महानता बताते हुए कहा कि अपनी भावी पीढ़ी को शुद्ध पर्यावरण देने के लिए पौधारोपण बहुत जरूरी है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा पर्यावरण संरक्षण वृक्षारोपण पर ध्यान दें जिससे हमें शीतल छाया, ऑक्सीजन, शुद्ध हवा, शुद्ध पानी कई प्रकार के फल, फूल औषधियों के लिए जड़ी बूटि...
एस एस जैन संघ नार्थ टाउन में पुज्य गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने बताया कि आत्म बन्धुओं, भगवान ने बताया कि जो जीव एक बार मोह निद्रा से जागृत हो जाता है। तो छदमस्थ होते हुए भी बेमान नहीं होता वह अपने संसार को परिमित कर चरम लक्ष्य मोक्ष की अभिलाषा करता है। देव पर्याय व देवलोक का सुख भी शाश्वत नही है। मनुष्य गति मे मनुष्य की आज्ञा का पालन देव भी करते है। इसका मतलब मनुष्य गति देव गति से उत्तम है। आगम में कई उदाहरण मिलते कि देवता भी मनुष्य का संयम, रद्दी, लावण्य देखने को आते हैं। सुख वास्तव में सुख नहीं है सुख में भी सामायिक प्रतिक्रमण छूट जाता है। मोक्ष की अभिलाषा है तो पुरुषार्थ करना पड़ेगा प्रयत्न करना पड़ेगा। भगवान के समोवशरण में आते है। देवताओ को देव गति अच्छी नही लगती क्योंकि वे जानते है देव गति के भोग शाश्वत नही है वे भी आतुर रहते कि कब मनुष्य का जन्म लें और मोक्ष की अग्रसर हो जाऊ। जो मनुष्य जान...
टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में संत प्रवीण ऋषि के प्रवचन रायपुर. जीवन में बदलाव लाना, यही किसी कथा का लक्ष्य होता है। जिनके मन में जैसा बनने की तमन्ना होती है, वो वैसी कथा सुनते हैं। जिन्हें राजनीति करनी है, वे राजकथा सुनते हैं। खेल में रूचि रखने वाले खेल कथाएं सुनते हैं। जिन्हें महाभारत अच्छा लगता है, वे महाभारत सुनते हैं। जिन्हें जीवन में महावीर को उतारना है, वे महावीर की कथा सुनते हैं। टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने ये बातें कही। उन्होंने कहा, मंजिल के आधार पर रास्ते खोजे जाते हैं। मंजिल ही क्लीयर न हो तो इंसान फालतू के रास्तों पर चलने लगता है। जीवन की ये विडंबना ये नहीं है कि हम रास्ते पर नहीं चलते या सही रास्ते पर नहीं चलते। जीवन की सबसे बड़ी विडंबना ये है कि लोग बिना मंजिल चुने रास्ता चुनते हैं। गोशालिक और इंद्...
★ विपरीत परिस्थितियों में भी प्रसन्न चित्त रहने की दी प्रेरणा Sagevaani.com @चेन्नई; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में धर्मपरिषद् को संबोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने उत्तराध्यन सूत्र के तीसरे अध्याय की गाथा का विवेचन करते हुए कहा कि मन जब शरीर के साथ चलता है, तो शरीर मांगें करता है और जब मन शरीर से अलग हो जाता है तो वह मांग करे भी किससे? हमें धन्यवाद देना चाहिए हमारे मन को जिससे हम परमात्मा की उस अमृतमय देशना का रसपान कर रहे है, श्रवण कर रहे है। वर्तमान में इस आर्यावर्त में जो भी साधु संत देशना दे रहे है, वह हमारी नहीं, परमात्मा की वाणी है। परमात्मा की वाणी कानों के माध्यम से हमारे हृदय में बहती है। वही श्रवण क्रिया से कला और फिर योग बन कर हमारे जीवन को रुपान्तरित क...
◆ श्रीमती पिंकी बंब ने किया मासखमण का प्रत्याख्यान Sagevaani.com @ट्रिप्लीकेन, चेन्नई: युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या शासनश्री साध्वी शिवमालाजी ठाणा 4 के पावन सान्निध्य मे पैसठिया यंत्र अनुष्ठान का भव्य आयोजन तेरापंथ भवन ट्रिप्लीकेन, चेन्नई में सानंद सम्पन्न हुआ। साध्वीश्रीजी के मंगलाचरण से अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। साध्वी अमितरेखाजी ने कहा कि अनेक विघ्न बाधाओं का निवारण करने वाला यह पैसठिया यंत्र हैं। लोगस्स का पाठ इसका सिध्द मंत्र हैं। इसमे 24 खाने 24 तीर्थंकरों की स्तुति के एवं 25वॉ सीमंधर स्वामी की स्तुति का हैं। इस यंत्र मे अंकित संख्याओं की ऊपर से नीचे, बाये से दाये एवं तिरछी जोड 65 आती हैं। यह जैन धर्म का प्रभावशाली मंत्र और यंत्र हैं। इस अनुष्ठान मे लगभग 250 श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। जप अनुष्ठान के साथ तप अनुष्ठान में तांबरम प्रवासी श्री जवरीलालज...