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ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं: प्रकाश मुनि जी मा.सा. 

सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद प्रवर्तक पुज्यू प्रकाश मुनि जी मा.सा. -ज्ञान का कोई पार नही, सम्यक ज्ञान का कोई किनारा नही, ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं? आपको ज्ञान हे! शरीर अलग, आत्मा अलग वह आत्मा का आनन्द ले। ज्ञान अवीकारी होता है, क्योंकि वह विकार में जायगा नहीं। ज्ञान ..ज्ञान रहेगा जीव सम्यकदृष्टि है ज्ञानी है। सुज्ञान सिन्धु गुरुदेव को उपमा दी है ज्ञान के सिन्धु थे। आचारांग सूत्र – *संति मरण समपेहाय*- सम्यक प्रकार से शांति व मरण को देखे, शांति – मुक्ति मरण अर्थात संसार । दोनो को देखे,, देखना हे सम्यक पुर्वक किसी आग्रह, मत से . बंधकर न देखे। दृष्टि बंधी है तो सत्य नहीं दिखाई देता है। संसार क्या हे- बंधन से बंधा प्रकार के कारण से । मोक्ष क्या है – बंधन से मुक्त, अप्रमादी के कारण से *महोमाय उपमाये*- मोह के स्थान है वहाँ अप्रमादी बनना जो बुद्धिमानी है वह अप्...

मन और शरीर को अध्यात्म साधना के लिए बनायें साधक तत्व: जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. 

★ गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी ने इगो, स्वार्थ मुक्त जीवन जीने की दी प्रेरणा Sagevaani.com @चेन्नई; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में धर्मपरिषद् को संबोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने उत्तराध्यन सूत्र के चौथे अध्याय की गाथा का विवेचन करते कहा कि हमारी नजर शरीर पर या उनके भविष्य पर ही नहीं रहनी चाहिए, शरीर का भविष्य तो निश्चित हैं, वह मिटने वाला है। हमारा तो लक्ष्य एक ही रहना चाहिए कि हमारी आत्मा का भविष्य उज्जवल बने। अगले जन्म में कहा जाना है, क्यों जाना है, मेरा अन्तिम लक्ष्य क्या है? चौरासी लाख जीवा योनी में भटकता आ रहा हूँ, कभी नरक में तो कभी देव में, कभी मनुष्य में तो कभी तिर्यंच में। क्या अभी भी मैं कभी सुख कभी दु:ख में, कभी अनुकूलता कभी प्रतिकूलता में ही जीना च...

अध्यात्म दोषों को छोड़ना है: आगमश्रीजी म.सा.

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया कहा अध्यात्म दोषों को छोड़ना है। जब तक ये अंदर में है, तब तक हमारा छन छन भाव मृत्यु चल रही है। जल और जलन, कंटक और कुसुम, विषवेल, अमृतवेल इन सब के फल अलग-अलग है। क्रोध की आग, माया का जाल, मान का नाग, लोभ का छोभ जीवन को नष्ट करने में लगे हैं। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने बताया उतना ही खाओ जितना आप पचा सको। कब खाना, कैसे खाना, कितना खाना इसके बारे में बताया। बड़ी सुंदरता के साथ समझाया गया। सौ. मंजूबाई राजमल कांटेड के आठ उपवास के प्रत्याख्यान हुए। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने स्वागत किया। मंत्री हस्तीमल बाफना ने संचालन किया।

जब भी बोलो अदब से बोलो: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl पहला स्टेप बोलने की कला वाला मंत्र जब भी बोलो अदब से बोलो पत्नी को भी आप कहो हो सकता है आप लोग कब तक तुम कहते रहे थेl  जो कहा सो का अभी ठीक कर ले अपनी कुलि नता की बात लिख ले फिर खुद को ठीक कब करेंगे कोई मुहूर्त निकाल कर ठीक करेंगे या जागे तभी सवेरा होगाl दूसरा स्टेप जब भी बोले पूरे आत्मविश्वास के साथ बगैर किसी डर या झिझक केअपनी बात को कहना आत्मविश्वास हैl आत्मविश्वास जगाने के लिए शोले फिल्म के डायलॉग याद रखना जो डर गया सो मर गयाl डायलॉग सभी के बहुत काम आता है विश्वास जीवन का सबसे बड़ा मूल्य तत्व हैl जब तक जिगर में श्वास तब तक रखो आत्मविश्वास अपने आप पर यकीन रखो कि मैं गलत नहीं होता हूंl मैं गलत नहीं ब...

मन ही है जो भटकता है,और मनुष्य के जीवन को भटकाता है: महासती धर्मप्रभा

 मन को संभाल लो,जीवन सुधर जाएगा। सोमवार साहूकार पेठ के मरूधर केसरी दरबार मे महासती धर्मप्रभा ने सैकड़ों श्रोताओं को धर्म उपदेश प्रदान करेंगे हुए कहा कि इंसान का ये मन ही तो है जो पाप,पुण्य कराता है। जीवन को नेक और अनेक रास्तों पर ले जाता है। मन की पवित्रता से जीवन आगे बढ़ता है।परन्तु जीवन में मन ही है जो भटकता है,और मनुष्य के जीवन को भी भटकाता है। यदि मन वश में हो जाए तो मनुष्य जीवन का उत्थान करवा सकता है। तीर्थंकरो की वाणी हमनें कितनी ही बार सुनी, उसका मन पर फर्क नही पड़ता है। और मन पर असर भी नहीं करती है। भगवती सूत्र मे बताया कि मन अति चंचल है उसे वश में करना अत्यंत कठिन है, परन्तु मनुष्य के लिए असंभव भी नहीं है। जब पत्थर की मूर्ति मंदिर में जाती है तो वह परमात्मा बन जाती है और हम मंदिर जाकर लौटते हुए जिदंगी बीत जाती है,लेकिन पत्थर ही बने रहते है। मनुष्य लगातार प्रयत्न एवं प्रयास करेगा तो...

इन्द्रिया मनुष्य की आत्मा का कल्याण भी करवा सकती है और जीवन का पतन भी करवा सकती है: महासती प्रितीसुधा

इन्द्रियों पर काबू करने वाला व्यक्ति परमात्मा को प्राप्त कर सकता है सोमवार को अहिंसा भवन शास्त्री नगर मे विदुषी साध्वी प्रिती सुधा ने सैकड़ों श्रध्दांलूओ को धर्म उपदेश देतें हुए कहा कि इंद्रियां मनुष्य को अपना दास बनाती हैं,जो व्यक्ति अपने इंद्रियों पर विजय पा लेता है वह संसार को भी जीत सकता है। ये इंद्रिया व्यक्ति को आलसी बनाती हैं उसे अपना आसक्त बना लेती है. व्यक्ति इंद्रियों के बस में आकर उनकी ही पूर्ति करने के लिए गलत मार्ग को अख्तियार करके अपना पतन कर लेता है। वह समझ ही नहीं पाता है कि सही क्या है और गलत क्या है। जब तक मनुष्य के समझ में आता है तब तक उसका समय निकल चुका होता है. तब व्यक्ति के पास हाथ मलने के अलावा कोई उसके पास दूसरा चारा नहीं बचता है। इन इंद्रियों को वश में करना आसान काम नहीं है लेकिन मनुष्य ज्ञान और अध्यात्म का सहारा लेकर इन्द्रियों की शक्ति को पहचान सकता और इन इन्द्रिय...

सन्लेखना यानी साक्षी भाव की श्रेष्ठ दशा: डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.

🏰☔ *साक्षात्कार वर्षावास* ☔🏰           *ता :06/8/2023 शनिवार*      🛕 *स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई*  🪷 *विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, दीक्षा दाणेश्वरी प.पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश    🪔 *विषय अभिधान राजेंद्र कोष भाग 7*🪔 ~ पूर्व के अनेक भवों में देह की मृत्यु अनेक बार हुई थी अब इस भव में हमारे कर्म और अज्ञान की मृत्यु होनी ही चाहिए। ~ सन्लेखना यानी साक्षी भाव की श्रेष्ठ दशा जिसके बल से हमारे मन के अच्छे विचार और बुरे विचारों से भी पूर्ण रूप से मुक्त हो सकते हैं। ~संलेखना यानी:- सत्य जीवन की महिमा, सत्य जीवन का विचार और सत्य जीवन का आचार । ~संलेखना से साधक परम समाधि भाव को प्राप्त करता है और समाधि के बल ...

क्रोध नहीं होना चाहिए, नहीं तो हमारा जीवन बर्बाद होता है: आगमश्रीजी म.सा

 श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया अत्यंत जाज्वल्यमान भयंकर अग्नि शरीर में प्रगट होती है। यह शरीर में रहकर आत्मा के नंदनवन गुणों को जला देती है। सक्रिय क्रोध बाहर से गर्म होता और अंदर से ठंडा रहता है जैसे कपबशी। निष्क्रिय क्रोध बाहर से ठंडा होता है और अंदर से गर्म होता है जैसे केलावड़ा के समान। कभी भी क्रोध नहीं होना चाहिए, नहीं तो हमारा जीवन बर्बाद होता है। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने बताया ईर्ष्या मत करो, क्रोध और मान को जीतो, तो ही हमारा कल्याण होगा। आये हो तो कुछ ना कुछ झोली भर लो, खाली नहीं जाना है। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने स्वागत किया। मंत्री हस्तीमल बाफना ने संचालन किया।

मंगलवार को भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी

नवरत्न अर्पुव मंगल जैन श्वेतांबर आराधना भवन बेरछा मंडी मे चल रहे चातुर्मास के अन्तर्गत परम पुज्य साध्वी भगवन्त प्रियदर्शना श्री जी कल्पदर्शना श्री जी एवं बाल साध्वी लब्धी दर्शना श्री जी महाराज साहेब की नि श्रा मे उपवास एकासना व आयंबिल की तपस्या निरंतर चल रही है। इसी क्रम मे नो उपवास की तपस्या स्वर्गीय मनोहर लाल जी की पुत्र वधु व संतोष कुमार जैन की पत्नी सविता जैन की पूर्ण होने पर दिनांक 8-8-23 मंगलवार को भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी तथा स्वामीवात्सलय भी रखा गया है । इसी क्रम मे मेघा पति रवि मेहता (जैन )पुत्र वधू श्री राजेन्द्र कुमार जैन के द्वारा 31 उपवास की कठिन तपस्या की इस हेतु दिनांक 9-8-23 को रात्रि 8 बजे भक्ति संध्या श्री मनीष जी मेहता मंडल द्वारा रखी गई हैl  दिनांक 10-8-23 को सुबह 8 बजे से श्नीनव अपूर्व अमर आराधना भवन मे साध्वी जी महाराज साहेब के प्रवचन तपस्वी का बहुमान के पश्चात शो...

गौतम लब्धि फाउंडेशन में संचेती राष्ट्रीय अध्यक्ष, कमल को मिली छत्तीसगढ़ प्रमुख की जिम्मेदारी

गौतम निधि विकास फाउंडेशन में नाहर राष्ट्रीय अध्यक्ष, रायपुर के उद्योगपति ललित पटवा बने ट्रस्टी Sagevaani.com @रायपुर. गौतम निधि फाउंडेशन‌ का राष्ट्रीय अधिवेशन बीते दिनों टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में संपन्न हुआ। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि जी महाराज साहब की पावन‌ निश्रा में हुए इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अलावा राजस्थान और महाराष्ट्र से भी तकरीबन 200 से ज्यादा प्रतिनिधि जुटे थे। इस दौरान गौतम लब्धि फाउंडेशन और गौतम विकास फाउंडेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। इनमें ज्यादातर राजस्थान और महाराष्ट्र के सदस्य हैं। रायपुर के लिए गर्व का विषय यह है कि गौतम लब्धि फाउंडेशन में छत्तीसगढ़ श्रमण संघ के अध्यक्ष कमल पटवा को राष्ट्रीय मार्गदर्शक चुना गया है। उन्हें छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। वहीं गौतम विकास फाउंडेशन में ललित पटवा ट्रस्टी चुने गए हैं। बता दें कि गौतम लब्...

विनय का सतत् प्रयोग अहंकार को तोड़ता है : गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी

 ★ मनुष्य जीवन छोटा है, लेकिन साधना से उसे पूर्ण बनाया जा सकता है  Sagevaani.com @चेन्नई ; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में धर्मपरिषद् को संबोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने उत्तराध्यन सूत्र के चौथे अध्याय की गाथा का विवेचन करते हुए कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए कम समय मिला है और पूर्ण समय भी मिला है। समय की गणना द्रव्य के आधार पर है और पूर्णाता उपयोगिता के आधार पर है। कम मिला है लेकिन पूर्ण मिला है। देवताओं की उम्र बहुत होती है, परन्तु अध्यात्म के हिसाब से वह पूर्ण नहीं है। नरक और तिर्यंच के पास भी बहुत है, पर पूर्ण नहीं है। हमारा मनुष्य जन्म छोटा है, परन्तु एक कदम आगे उठाने की जरुरत है और हम साधना के द्वारा उसे पूर्ण कर सकते हैं। ◆ इगो से भाई-भाई, परिवार, समाज म...

कितनी भी प्राप्त हो संतुष्टि नहीं: प्रकाश मुनि जी मा.सा

सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद *प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनि जी मा.सा*-संसार में दुःख के दो कारण बताये है, *आशा और स्वच्छन्दता* दुःखी क्यो हे? आशा के कारण सारे दुनिया के काम “करने की आशा.. कितना भी प्राप्त हो.संतुष्टि नहीं। भोग की कितनी भी सामग्री इकट्ठी कर लो संतुष्टि नहीं होती। *द्रष्टान्त*- सगत चक्रवर्ती नई विशेषता के लिये 7वे खण्ड को जीत को गये। 6 विभाग में भरत खंड- बटा। वासुदेव 3 खण्ड के अधिपति होते है, ऊपर की ओर चुलहिम्मत पर्वत कोई पार नहीं कर सकता- नीचे लवण समुद्र 500 योजन तक का होता है। 25000 देव सेवा करते है T मुलतह नाम की आशा है इसके पीछे मनुष्य नरक में चला जाता है। चक्रवर्ती 3 खण्ड के बाद चौथे खण्ड में पर्वत हस्ताक्षर करते हे, ऋषभकुट पर्वत पर भरतचक्रवती राजा बहुंचते है, कामीणी पत्थर लिखने के लिये उठाया लिखने की जगह नहीं। यह विधान *अभिमान तोड़ने के लिये*,...

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