Featured News

वैराग्य का गुण प्रकट होने पर शांति का साम्राज्य निर्मित होता है: आचार्यश्री उदयप्रभ सूरिजी

    किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्यश्री केशरसूरिजी के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरिश्वरजी म.सा. ने अध्यात्म कल्पद्रुम ग्रंथ के वैराग्य उपदेश अधिकार का विश्लेषण करते हुए कहा कि वैराग्य का मतलब है जो मोह, राग, द्वेष, संक्लेश खड़ा करे, वैसा स्नेह नहीं करना। हृदय में प्रेम की निर्मलता होनी चाहिए। वैराग्य का गुण प्रकट होने पर शांति का साम्राज्य निर्मित होता है। ज्ञानी कहते हैं विषय का त्याग करना, विषय के संपर्क का त्याग करना, विषय के संबंध का त्याग करना, विषय के स्मरण का त्याग करना और विषय के छोड़ने के अहंकार का त्याग करना ही वैराग्य है। जहां मेरा तेरा भुला दिया, वहां वैराग्य आता है। ज्ञानियों ने त्याग के लिए विकल्प दिए हैं। प्रभु की साधना, सम्मान भी स्यादवाद है। प्रभु की करुणा तो सर्वपक्षी है। वे सभी जीवों के लिए एकसमान सोचते हैं। वैराग्य के फायदे ब...

     रुक जा याने शांत हो जा: आगमश्रीजी म.सा.

    श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया रुक जा याने शांत हो जा। हमें शांति आनंद लेना हो तो आकुलता व्याकुलता के भाव से रुक जा, मर जा, इस संसार भाव से मर जा। तर जा, मरेगा तभी तो तरेगा। पानी में कोई डूब गया तो वह जीवित रहता है जब तक अंदर है तब तक। अगर मौत हो गई तो ऊपर तैर जाता है। अलग-अलग तरह से समझाया गया। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने बुद्धि के बारे में बताया। हमारी बुद्धि कैसी हो, अलग अलग तरह की बुद्धियाँ है। अभयकुमारजी की बुद्धि आदि, इसके उदाहरणों से समझाया। आज ऋषभ महावीर बोथरा इनके सात उपवास के प्रत्याख्यान हुए। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने स्वागत किया। मंत्री हस्तीमल बाफना ने संचालन किया।

दुखी है तो उसका मूल कारण माया है: संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

  हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl आज संसार में कोई दुखी है तो उसका मूल कारण माया है माया युक्त जीवन जीने वाला अस्त्र रौद्र ध्यान करता हैl जीवन में दुखी होता है तथा मुक्ति मार्ग से दूर चला जाता हैl अतः आत्मसारथी सार्थक को सरलता से जीवन जीना है आत्मरती सड़क गलती होने पर प्रायश्चित करते हुए आलोचना प्रतिक्रमण करता है और मोक्ष मार्ग में आगे बढ़ता हैl धर्म का मूल विनायक आप मारती श्रावक को विनायक धर्म को स्वीकारना चाहिएl विनायक तब भी यह अहंकार ज्ञान तथा विभाग की उत्पत्ति है l अतः श्रावक को पुण्य के उदय पर अहंकार को छोड़कर सभी आत्माएं समान मानकर आत्मार्थ के मार्ग पर बढ़ना चाहिएl जड़ और जीव का भेद कर जड़ देने का उपयोग जीव के कल्याण के ल...

समस्या का समाधान जहां पर होता है, वहीं समस्या का जन्म भी हो सकता है: प्रवीण ऋषि

टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में चातुर्मासिक प्रवचन Sagevaani.com @रायपुर. एक जगह पर कोई फैमिली है तो दूसरी फैमिली वहां नहीं जाएगी, यह प्रोटोकॉल है। कोप भवन में कोई जाकर बैठा है तो उसका ट्रीटमेंट करना है, यह दूसरा प्रोटोकॉल है। इसी प्रोटोकॉल ने कैसे प्रॉब्लर्म खड़े किए, उस पड़ाव पर हम पहुंच रहे हैं। टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने ये बातें कही। उन्होंने कहा कि जिससे समाधान हो सकता है उससे समस्या का जन्म भी हो सकता है। जिससे समस्या का जन्म हो सकता है, उससे समाधान भी हो सकता है। जिस व्यवस्था से समाधान हो सकता है, उससे समस्या का जन्म भी हो सकता है। व्यवस्था न समाधान को जन्म देती है, न समस्या को। व्यवस्था का उपयोग आप कैसे करते हैं और उसका मिसयूज किसी को कैसे करने देते हैं, इस पर निर्भर करता है। भगवान महावीर जहां नहीं पहुंच...

जीवन को सार्थक बनाने के लिए प्रमाद नहीं करे: जिनमणिप्रभसूरीश्वर म

★ गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी ने सरलतापूर्वक जीवन जीने का दिया मार्गदर्शन ● भारत की सहनशीलता, सम्भलने, समझने, जीने की संस्कृति है श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में धर्मपरिषद् को संबोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने उत्तराध्यन सूत्र के चौथे अध्याय की गाथा का विवेचन करते कहा कि जीवन बहुत छोटा है और हमें यहां से विदा होना है। विदा हो कर हम कहां जायेंगे, वह महत्वपूर्ण है। उसके लिए हमारे भीतर में विचार होना जरूरी है। हमारे अन्दर में धर्म का होना जरूरी है। जीवन में मौत न होती तो धर्म की भी अपेक्षा नहीं रहती। लेकिन जाना है, आगे मेरा क्या होगा? मेरी चेतना का क्या होगा? वो चिन्तन इस जन्म में और छोटे से समय में ही करना है। ◆ हिन्दी भाषा में तलाक शब्द का नहीं समावेश विशेष प्रति...

तेरापंथ महिला मण्डल पल्लावरम् की नवगठित टीम का हुआ शपथग्रहण

सपना दुगड़ बनी अध्यक्ष और राखी कटारिया मंत्री Sagevaani.com साहूकारपेट, चेन्नई: युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी लावण्यश्रीजी ठाणा 3 के पावन सान्निध्य में पल्लावरम् तेरापंथ महिला मण्डल की नवगठित टीम का तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में शपथग्रहण हुआ। साध्वीश्री के नमस्कार महामंत्र के साथ कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। चेन्नई महिला मण्डल अध्यक्षा लता पारख ने स्वागत स्वर के साथ पल्लावरम् टीम को शुभकामना सम्प्रेषित की। पल्लावरम् निर्वतमान अध्यक्षा हेमलता पिरोदिया ने नवमनोनीत अध्यक्षा सपना दुगड़ को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। अध्यक्षा सपना दुगड़ ने अपनी टीम में उपाध्यक्ष- पूनम पितलिया, मंत्री- राखी कटारीया, सहमंत्री- खुशी कटारिया, कोषाध्यक्ष- लता गिरीराज एवं कार्यसमिति सदस्यों को शपथग्रहण करवाई। साध्वी लावण्यश्रीजी ने कहा कि पल्लावरम् क्षेत्र की दृष्टि से छोटा है लेकिन व...

साध्वी रमणीक कुंवर जी के सानिध्य में मनेगा आचार्य आनंद ऋषि जी महाराज का अवतरण दिवस

पांच दिवसीय होंगे आयोजन, 11 से 15 अगस्त तक सामयिक, सामूहिक जाप, वंदना, दान और तप दिवस मनेंगे Sagevaani.com @शिवपुरी। प्रसिद्ध जैन संत और राष्ट्र संत की उपाधि से अलंकृत स्थानकवासी जैन समाज के द्वितीय आचार्य आनंद ऋषि जी म.सा. के 123वे अवतरण दिवस पर शिवपुरी में प्रसिद्ध साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज के सानिध्य में अनेक धार्मिक आयोजन होंगे। 11 अगस्त से 15 अगस्त तक पांच दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों में सामयिक दिवस, सामूहिक जाप दिवस, वंदना दिवस, दान दिवस और तप दिवस मनाया जाएगा। आचार्य आनंद ऋषि जी म.सा. का जन्मदिवस मनाने के लिए जैन समाज में अपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। शिवपुरी में चातुर्मास कर रहीं गुरूणी मैया रमणीक कुंवर जी महाराज, ओजस्वी प्रवचन प्रभाविका नूतन प्रभाश्री जी, तपस्वी रत्ना पूनमश्री जी, मधुर गायिका साध्वी जयश्री जी और साध्वी वंदनाश्री जी ने बताया कि आचार्य आनंद ऋषि जी का जीवन हम ...

गुरू आज्ञा और श्रद्धा के बिना फलीभूत नहीं होगी मंत्र दीक्षा : साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

साध्वी जी ने बताया इसलिए धार्मिक मंत्रों का नहीं हो रहा असर   गायत्री मंत्र, नवकार मंत्र और अन्य धार्मिक मंत्र पहले जितने असरकारक होते थे आज उनका उतना प्रभाव देखने को नहीं मिलता। इसका क्या कारण है? क्या मंत्रों की साम्र्थता और प्रभाव में कोई कमी है? अथवा अन्य कुछ कारण हैं। मेरे मत में इनके प्रभाव में कोई कमी नहीं है। मंत्र दीक्षा गुरू आज्ञा और श्रद्धा के साथ ली जाए तो आज भी इनके चमत्कारिक प्रभाव हमें देखने को मिलेंगे। उक्त वक्तत्व साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने स्थानीय पोषद भवन में आयोजित एक विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने स्वाध्याय की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। साध्वी जयश्री जी ने शास्त्र का वाचन करते हुए संदेश दिया कि संसार में रहकर भी संसार से नहीं जुडऩा चाहिए। जिस तरह से कमल कीचड़ में रहकर भी कीचड़ से दूर रहता है, उसी तरह संसार में हमें निर्लिप्त भाव से रहना चाहिए और सुख दुख...

सरलता के बगैर सत्य की निकटता नहीं मिलती : देवेंद्रसागरसूरि

आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने सुमति वल्लभ नोर्थ टाउन जैन मूर्तिपूजक संघ में प्रवचन देते हुए कहा कि प्रकृति अत्यंत सरल है। इसकी समस्त क्रियाएं बड़ी सरलता के साथ होती हैं। सूर्य का उदय होना, तारों का टिमटिमाना और नदियों का निरंतर बहना आदि कुदरती क्रियाएं होती रहती हैं। वृक्ष फलते-फूलते हैं, रात के बाद दिन आता है, पर्वत-चट्टानें स्थिर हैं। वस्तुत: प्रकृति जटिलताओं का उद्गम-स्नोत नहीं है, उन्हें वह निर्मित भी नहीं करती। प्रकृति की क्रियाएं क्यों हो रही हैं या फिर क्या होना चाहिए, जैसे प्रश्नों से जटिलताएं आती हैं। प्रकृति में सब कुछ स्वयं ही होता है। प्रकृति की तरह जो चीज सरल रहती है, वही सत्य है। ऊपर से यह बात सहज जान पड़ती है, पर यह उतनी सरल नहीं है। यही जीवन के साथ भी है। सरल रहने तक मानव जीवन सम्यक अर्र्थों में वास्तविक जीवन बना रहता है। यही हमारा जीवन जीना होता है। इससे पृथक होते ही जीव...

ज्ञान से की हुई साधना से दुर्गति नहीं ही होगी: डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.

🏰☔ *साक्षात्कार वर्षावास* ☔🏰           *ता :08/8/2023 मंगलवार*      🛕 *स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई*  🪷 *विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, संघ एकता शिल्पी, प.पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश    🪔 *विषय अभिधान राजेंद्र कोष भाग 7*🪔 ~ शरीर से कि हुई साधना से दुर्गति में जाना नहीं होगा यह निश्चित नहीं है किंतु ज्ञान से की हुई साधना से दुर्गति नहीं ही होगी और सद्गति ही होगी। ~ हमारे देह के वियोग के साथ कर्म, अज्ञान, पाप, दोष, गलतियों का वियोग (नाश) होता है या नहीं? ~ हमारा धर्म ऐसा प्रकृष्ट बलवान होना ही चाहिए कि देह की मृत्यु के होने के बाद भी धर्म अखंड ही रहे। ~ जब तक हमारा ध्यान हर पल शरीर का ही होगा तब तक सत्य ध...

नश्वर शरीर की नहीं, तारक आत्मा की चिंता करो: आचार्यश्री उदयप्रभ सूरिजी 

किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्यश्री केशरसूरिजी के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरिश्वरजी म.सा. ने प्रवचन में कहा कि हमें सबसे ज्यादा मोह काया का है। काया को स्वस्थ रखने के लिए तप रूपी दवा का उपयोग करना चाहिए। साता वेदनीय कर्म का बंध करने के लिए पर की पीड़ा करना छोड़ दो और परोपकार करना शुरू कर दो। कर्मसत्ता देता है सुख, लेकिन काम दुःखों के कराता है क्योंकि संसार में कहीं न कहीं दुःख तो पड़ा हुआ ही है। छःकाय जीवों की विराधना से मुक्त होने के लिए आराधना करने का मुख्य स्रोत सामायिक है। प्रणिधान यानी निर्धार, प्रायश्चित और प्रसन्नता के अभाव में अपनी आराधना लम्बी चलने के बावजूद आत्मा का स्वभाव नहीं बदलता है। मन के अंदर क्लेश नहीं होना ही प्रसन्नता है। इसके लिए भविष्य की कल्पना नहीं करने के साथ पूर्व की दुःखी करने वाली घटनाओं को याद नहीं करना। उन्होंने कहा हमने संस...

आनंद ऋषि के 124वें जन्मोत्सव पर आज से होगी आनंद गाथा, कल सामायिक दिवस

10-11 अगस्त को सुमित बिजनेस पार्क में जुटेगा सकल जैन समाज Sagevaani.com @रायपुर. राजधानी में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि जी महाराज साहब 9 से 17 अगस्त तक आनंद गाथा का वाचन करेंगे। बुधवार से 15 अगस्त तक यह कार्यक्रम रोज रात 9 से 10 बजे के बीच टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में संपन्न होगा। वहीं 16 और 17 अगस्त को ये प्रोग्राम रात 8 से 9 बजे के बीच हुकम्स ललित महल में होगा। रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि राष्ट्र संत आचार्य आनंद ऋषि जी महाराज साहब के 124वें मंगल जन्मोत्सव के अवसर पर 8 दिवसीय समारोह का आयोजन किया गया है। इसके तहत 10 अगस्त को सुमित बिजनेस पार्क में सुबह 8 बजे से सामायिक दिवस मनाया जाएगा। 11 अगस्त को सुबह 8 बजे से 36 लाख नवकार जाप होगा। इसके लाभार्थी सुमित ग्रुप, कांकरिया परिवार हैं। टैगोर नगर स्थित श्री लालगंगा पटवा भवन में 12 अगस्त को णमोत्थुणं जाप, 13 अगस्त...

Skip to toolbar