🏰☔ *साक्षात्कार वर्षावास* ☔🏰
*ता :06/8/2023 शनिवार*
🛕 *स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई*
🪷 *विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, दीक्षा दाणेश्वरी प.पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश
🪔 *विषय अभिधान राजेंद्र कोष भाग 7*🪔
~ पूर्व के अनेक भवों में देह की मृत्यु अनेक बार हुई थी अब इस भव में हमारे कर्म और अज्ञान की मृत्यु होनी ही चाहिए।
~ सन्लेखना यानी साक्षी भाव की श्रेष्ठ दशा जिसके बल से हमारे मन के अच्छे विचार और बुरे विचारों से भी पूर्ण रूप से मुक्त हो सकते हैं।
~संलेखना यानी:- सत्य जीवन की महिमा, सत्य जीवन का विचार और सत्य जीवन का आचार ।
~संलेखना से साधक परम समाधि भाव को प्राप्त करता है और समाधि के बल से साधक को आज भी मृत्यु आए तो वह परम निर्भय ही रहता है और अंत में कुछ ही भवों में मुक्ति को प्राप्त करता ही है।
~ प्रभु महावीर स्वामी ने 12 1/2 साल निरंतर ध्यान दशा की साधना के बल से अनुपम, अलौकिक, अद्वितीय ऐसे केवल ज्ञान को पाया था ।
~ ज्ञानी भगवंत कहते हैं जब भीतर में रहा हमारा ‘मैं’और मेरे पन का विस्मरण होगा तभी हम परमात्मा का सच्चा स्मरण कर सकते हैं।
~ जीवन में सांस चलती रहे वह जीवन नहीं किंतु जीवन में स्वभाव का मूलभूत परिवर्तन हो और परमात्मा का अवतरण हो वो ही जीवन है।
~ प. पू. प्रभु राजेंद्र सुरीश्ववरजी महाराजा ने दीक्षा के प्रथम दिन से ही भूख, प्यास, बीमारी, वेदेना शरीर के सभी कष्टों को सामने से और सम्यक ज्ञान केबल से सहन किया था। इसीलिए अंतिम पल में मृत्यु के कष्ट में भी परम आनंद में ही थे।
*”जय जिनेंद्र-जय गुरुदेव”*
🏫 *श्री राजेन्द्रसुरीश्वरजी जैन ट्रस्ट, चेन्नई*🇳🇪