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साधना का श्रेष्ठ आलंबन परिषह है – आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीजी

किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केसरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने प्रवचन में परिषह अध्ययन का विश्लेषण करते हुए कहा कि जो आत्मा विनय गुण को दृढ़ बनाता है, वह परिषह कर सकता है। परिषह सहन करने के लिए आत्मबल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा विचार ज्यादा उसे ही आता है, जिसे स्वीकारभाव नहीं होते। विनय करने से ध्रुतिबल और संघयनबल मिलते हैं, तब परिषह सहन करने का सामर्थ्य मिलता है। ध्रुतिबल का मतलब है मन का धैर्य, मन की शुद्धि, मन की पूर्णता। परिषह रोज़ का अंश है जबकि उपसर्ग रोज़ का अंश नहीं है।‌ परिषह के लिए उपसर्ग सहन करने का अभ्यास जरूरी है। परिषह 22 प्रकार के होते हैं। जिसको सामने से लेने जाएं, वह उपसर्ग है और जो बैठे-बैठे आए, वह परिषह है। परिषह में दूसरों का भला होता है, उपसर्ग में दूसरों का भला नहीं होता। परिषह दूसरों को लाभ पहुंचाते हैं...

क्षमा करने से संकट को जीतने का सामर्थ्य आता है : प्रवीण ऋषि

लालगंगा पटवा भवन में गूंज रहे प्रभु महावीर के अंतिम वचन Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि संसार के समस्त जीव शक्ति संपन्न हैं। और जहां शक्ति होती है, वहां पराक्रम होता है। शक्ति यदि श्रद्धापूर्ण है तो सम्यक पराक्रम होता है। शक्ति यदि संशय, मिथ्यात्व से संपन्न है तो मिथ्या पराक्रम होता है। सम्यक पराक्रम भगवत्ता की ओर ले जाता है, वहीं मिथ्या पराक्रम शैतानियत की ओर ले जाता है। प्रभु महावीर ने अनुत्तर देशना में सम्यक पराक्रम की 72 साधनाएं दी हैं। ये ऐसी अनूठी साधनाएं हैं कि अगर कोई व्यक्ति इनमे से एक साधना भी कर लेता है तो उसके अंदर की भगवत्ता जागृत हो जाती है। और उन्ही साधनाओं का क्रम बुधवार को जारी रहा। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी। लालगंगा पटवा भवन में जारी उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के 16वें दिवस बुधवार को लाभार्थी परिवार श्रीमती ...

संगति का जीवन में बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है : देवेंद्रसागरसूरि

Sagevaani.com /चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरीश्वरजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि मनुष्य के चरित्र निर्माण में संगति का बहुत प्रभाव पड़ता है। हमारे शास्त्रों में सत्संगति को बहुत महत्व दिया गया है। सत्संगति का अर्थ सच्चरित्र व्यक्तियों के संपर्क में रहना, उनसे संबंध बनाना है। सच्चरित्र व्यक्तियों की संगति से साधारण व्यक्ति भी महत्वपूर्ण बन जाता है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज में ही जन्म लेता है और अंत तक रहता है। अपने परिवार, संबंधियों और आस-पड़ोस वालों और अपने कार्यस्थल में वह कई प्रकार के स्वभाव वाले व्यक्तियों के संपर्क में आता है। निरंतर संपर्क के कारण एक-दूसरे का प्रभाव एक-दूसरे के विचारों और व्यवहार पर पड़ते रहना स्वाभाविक है। बुरे व्यक्तियों के संपर्क में हम पर बुरे संस्कार पड़ते हैं और अच्छे लोगों के संपर्क में आकर ...

अपने लक्ष्य को अर्जित करने के लिए कड़ी मेहनत करो: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि निगाह रहे लक्ष्य पर ही सफलता प्राप्त करने का दूसरा सोपान हैl तुम अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करो और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए सत्य आत्मक योजना तैयार करोl तुम अपने लक्ष्य को हासिल किए बगैर तब तक चैन मत लो जब तक तुमसे अंतिम सांस हैl अपने लक्ष्य को अर्जित करने के लिए तुम्हें कड़ी से कड़ी मेहनत करनी पड़े तो करने से भी नहीं छुपाना चाहिएl आखिर किसी भी विजेता का प्रदर्शन कुछ वीडियो का होता है यह लेकिन तुम उसके इस प्रदर्शन की सफलता में उसका कितना खून पानी बह होगाl ऐसा नहीं की एक सफल खिलाड़ी कभी असफल ना हुआ हो किंतु अगर अर्जुन की आंखों में एक मात्र लक्ष्य बसा ...

जीवन विकास के सभी गुणों में ईमानदारी एक सर्वोत्तम गुण है : देवेंद्रसागरसूरि

जिस प्रकार काँटो के बीच में गुलाब का फूल सबका ध्यान आकर्षित करता है उसी प्रकार एक ईमानदार व्यक्ति समाज में लोगों का ध्यान आकर्षित करता है, समाज मे एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है। ऐसे लोगों का सभी सम्मान करते हैं, उनकी बातें मानते हैं और उनका अनुसरण करते हैं। उपरोक्त बातें आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने नोर्थटाउन के श्री सुमतिवल्लभ जैन संघ में प्रवचन देते हुए कही। वे आगे बोले कि ईमानदार व्यक्ति न केवल मानसिक बल्कि शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रहता है वह सभी प्रकार की चिंताओं परेशानीयों से दूर रहता है। जब हमारा मन शांत और स्वस्थ हो तो हम बीमारियों से मुक्त रहते हैं। ईमानदार व्यक्ति समाज में उचित स्थान प्राप्त करते हैं लोग उन्हें, ऐसे लोगों पर विश्वास करते हैं और उनका आदर करते हैं। ऐसे व्यक्तियों से सभी संबंध बनाकर रखना चाहते हैं। जीवन विकास के सभी गुणों में ईमानदारी एक सर्वोत्तम गुण है। जीव...

जहां एक्सक्यूज़ आ गया, वहां विनाश का रास्ता खुल गया : प्रवीण ऋषि

उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के 15वें दिवस सत्तावीसइमं अज्झयणं खलुकिज्जं का पाठ Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि व्यक्ति जिंदगी में क्यों सफल नहीं होता है? जैसा उसका इरादा, उसकी सोच होती है, वैसा क्यों नहीं होता है? इसका एक बहुत छोटा सा कारण है एक्सक्यूज़ या बहाना। जिस व्यक्ति के पास बहाना होता है वह जीवन में केवल दुःखों को ही जन्म देता है। अनुत्तरदेशन में प्रभु महावीर बहाना बनाने वाले के लिए एक्सट्रीम शब्द का उपयोग करते हैं। प्रभु महावीर कहते हैं कि बहाने देने वाले गली के गधे हैं। दो प्रकार के गधे होते हैं, एक धोबी का, कुम्हार का और एक गली का। वैसे देखा जाए तो गधा गधा ही है, किसी को मालिक की सुरक्षा मिलती है। लेकिन गली का गधा, उसके पास कोई सुरक्षा नहीं होती है। उपाध्याय प्रवर ने कहा कि कुछ बहाने अहंकार से पैदा होते हैं, कुछ क्रोध से, कुछ कपट से, कुछ लोभ से पैदा होत...

विभाव, दुर्भाव सामाजिक असंतुलन का कारण है – मुनि यशस्वीप्रभ विजय

किलपाॅक जैन संघ में विराजित आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य मुनि यशस्वीप्रभ विजयजी म.सा. ने प्रवचन में कहा कि ये पांच चीज विश्व को बहुत तकलीफ देती है, पर्यावरण असंतुलन, सामाजिक असंतुलन, संबंध का असंतुलन, शरीर का असंतुलन और आध्यात्मिक असंतुलन। प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने और जीवहिंसा के कारण पर्यावरण असंतुलन बनता है। विभाव, दुर्भाव सामाजिक असंतुलन का कारण है। तनाव व रोगों में वृद्धि के कारण अवसाद जैसे रोग उत्पन्न होते हैं। खानपान में असंतुलन भी इसका एक कारण है। उन्होंने कहा पुणिया श्रावक के जैसी आध्यात्मिकता आज देखने को नहीं मिलती। पुणिया श्रावक के सामायिक की प्रशंसा महावीर भगवान ने की थी। लेकिन इसके अलावा परिग्रह परिमाण रखना, साधर्मिक भक्ति करना, आजीवन वर्षीतप और ब्रह्मचर्य पालन करना भी पुणिया श्रावक की विशेषताएं थी। मुनि ने कहा कि समाधिमरण के दस उपाय बताए गए हैं अतिचार की आलोच...

पर्यावरण संरक्षण से हर तरफ हरियाली एवं खूशियाली होगी: डॉ फतेहराज जैन

राजस्थान पत्रिका एवं एक्ष्नोरा इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे हरित प्रदेश अभियान द्वारा धुआं मुक्त दिपावली मनाने का संदेश कई स्कूल, कॉलेज, धार्मिक पाठशाला में विस्तार से जानकारी देते हुए डॉ फतेहराज जैन ने कहा कि धुआं एवं पटाखों की आवाज से अस्थमा, उम्र वाले लोगों, पक्षियों को हानि होती हैंl इसलिए धुआं मुक्त दिपावली मनाने का निर्णय लिया एवं पौधे वितरण कर पर्यावरण को बसाने की जानकारी देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण से हर तरफ हरियाली एवं खूशियाली होगीl विद्यार्थियों ने इस साल धुआं मुक्त दिपावली मनाने का निर्णय लिया, एवं इस जानकारी को हर घर पहुंचे ऐसा आश्वासन दियाl आज रामापुरम स्तिथ एमजीआर होम हायर सेकेंडरी स्कूल में दिव्यांग बच्चों के साथ पर्यावरण के प्रति प्रेम दिखाते हुए दिवाली मनाई गईl स्कूल के बच्चों ने पूरे परिसर में दीप प्रज्वलित किएl इस मौके पर स्कूल के 200 से अधिक बच्चों मे...

विनय + आचार = विनयाचार : जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया श्री उत्तराध्ययन सूत्र में ग्यारहवे अध्ययन के‌ अन्तर्गत बहुश्रुत का वर्णन है। ज्ञान पाने के लिए बाह्मय और आभ्यान्तर परिग्रह से मुक्त होना जरुरी है। ये संयोग कर्म बन्ध के कारण है। जो इन संयोग का त्याग कर देते है उन्हें आत्म ज्ञान में लीन होना चाहिए इस लिए भगवान ने सबसे पहले विद्या को महत्व दिया। विद्यावान व्यक्ति ही अहंकार का त्याग कर विवेक पूर्वक आचरण करता है। विनय + आचार = विनयाचार | जो अहंकारी‌ है उसे भगवान ने अश्रृत बताया। विद्या में‌ बाधक है अभिमान और अभिमानी को कोई ज्ञान नही देना चाहता, विद्या भी नहीं आती। जैसे ही ज्ञान का अभिमान होता वैसे ही ज्ञान लुप्त हो जाता। वो अज्ञानी बन जाता है ज्ञान को टिकाने के लिए विनयवान होना आवश्यक है। जैसे -2 व्यक्ति में‌‌ ज्ञान की वृद्धि होती है वैसे वैसे नम्रता बढ़नी चाहिए। स...

प्रभु महावीर की अंतिम देशना श्री उत्तराध्ययन सूत्र वाचन

🚩 *प्रभु महावीर स्वामी निर्वाण कल्याणक महोत्सव* 🚩       🎈 *दीपावली महापर्व* 🎈    🎇 *जैन दिवाकर रत्न तरुण तपस्वी पूज्य श्री विमलमुनिजी म सा के सुशिष्य*    😷 *स्वर्ण संयम आराधक सरस वाणी भूषण सेवा शिरोमणी सेवा चक्रवर्ती परम पूज्य गुरुदेव श्री वीरेन्द्र मुनिजी महाराज*       🙏 *के पावन सानिध्यमे*     🏛 *मामबलम एस एस जैन संघ के तत्वाधान में*    📚 *मुनिश्री के मुखारविंद से प्रभु महावीर की अंतिम देशना श्री उतराध्ययन सूत्र का वाचन प्रारंभ है आप सभी जरूर जरूर पधारे*    ⏲ *दिनांक :- 5 – 11 – 2023 रविवार से 14 – 11 – 2023 मंगलवार तक का कार्यक्रम* ⏲    📚 *दिनांक :- 5 -11 – 2023 . रविवार से 14 मंगलवार तक सुबह 7।30 .बजे से श्री उत्रराध्ययन सूत्र वाचन शुरू होगा*     💰 *11.11.2023 शनिवार धनतेरस*    🔥 *12 .11.2023 रूप चौदस*    🔥 *13.11.2023 दीपावली महापर्व*    📿 *दिनांक :- 13 &...

धर्म की पाल बांधने से जीवन संवरता है और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति .. महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com /Chennai। धर्म की पाल बांधने से जीवन संवरता है और आत्मा को मोक्ष । मंगलवार साहुकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने श्रावक-श्राविकाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि संसार मे जितनें भी महापुरुष हुए उन्होंने धर्म की शरण लेकर अपनी आत्मा को मोक्ष दिलवाया। संसार में भक्ति का मार्ग मनुष्य के लिए मोक्ष की प्राप्ति के द्वार खोलता है परंतु भक्ति पूर्ण लगन से होनी चाहिए। भक्त पूरी तरह से स्वयं भी भगवान की शरण में सौंप दे। सांसारिक बातों से कोई मोह न रखें तो वह धर्म की पाल को बांधकर अपनी आत्मा को मोक्ष दिलवा सकता है।व्यक्ति को भाग्यवादी न बनकर कर्मवादी बनना चाहिए।अच्छा और सात्विक आचरण एवं अच्छे कर्मों के द्वारा ही व्यक्ति इस जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। मनुष्य को यह नहींं सोचना चाहिए कि दुसरें क्या कर रहे है उसे स्वंय की सोच रखकर अपनी आत्मा के उत्थान का लक्ष्य लेकर धर्म के सहारा...

दृढ़ निश्चय और लक्ष्य नहीं है तो मनुष्य जीवन मे सफलता प्राप्त नहीं कर पाएगा: महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com /चैन्नई। दृढ़ निश्चय और लक्ष्य नहीं है तो मनुष्य जीवन मे सफलता प्राप्त नहीं कर सकता है।सोमवार जैन भवन साहुकारपेट के मरूधर केसरी दरबार में महासती धर्मप्रभा ने आयोजित धर्मसभा में श्रोताओं को सम्बोंधित करतें हुए कहा कि जीवन मे सफलता वही इंसान प्राप्त कर सकता है और दुविधा मे रहने वाला जीवन में लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता है। काम कोई भी हो उसमें सफलता तभी मिलती है जब उस काम को करने के लिए दृढ़ निश्चय किया जाए। बिना सोचे-समझे शुरू किया गया काम कभी भी पूरा नहीं किया जा सकता।समय को व्यर्थ करने वाला मनुष्य कभी भी जीवन में ऊंचाई या सफलता नहीं पा सकता। अपने आपको पूरी तरह लक्ष्य के प्रति समर्पित और एक ही नीति पर चलने वाला जीवन में लक्ष्य प्राप्त करता है। मनुष्य की सोच अच्छी है और इरादे बुंलद है,तो वह कभी भी असफल नहींं हो सकता है। जीवन में दुःख और कठिनाइयों के आने बावजूद वह गलत मार्ग पर न...

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