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तेरापंथ थली परिषद द्वारा ‘दिल वाली दिवाली’ का आयोजन

Sagevaani.com /चेन्नै: तेरापंथ थली परिषद्, चेन्नै के तत्वावधान में गोपालपुराम स्थित गीता भवन में पारंपरिक दीपावली स्नेह मिलन कार्यक्रम ‘दिल वाली दीवाली’ का आयोजन एक रंगारंग सांस्कृतिक समारोह के रूप में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना से हुआ। अध्यक्ष श्री राजेन्द्र हीरावत ने स्वागत स्वर में उपस्थित समाज सदस्यों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए समाज की उत्साहजनक उपस्थिति हेतु प्रशंसा अभिव्यक्त की। गीत व नृत्य आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति के पश्चात मंच का संचालन करते हुए रिंकू संकलेचा  द्वारा उपस्थित जन समुदाय को पूर्व गूगल फॉर्म पंजीकरण के आधार पर चार टीमों में विभक्त कर विभिन्न प्रकार के मनोरंजक खेल खिलाये गए। सभी विजेता प्रतिभागियों को आकर्षक पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम के प्रारंभ से अंत तक विविध चरणों में 7 लकी ड्रा विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये गए। साथ ही का...

604 श्रावक-श्राविकाओं ने किया तप

तेममं, चेन्नई द्वारा एकलठाणा तप का आयोजन  अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश डागा ने भी निभाई तप सहभागिता Sagevaani.com /चेन्नई : परमाराध्य युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के दीक्षा कल्याण महोत्सव के उपलक्ष में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशन में तेरापंथ महिला मंडल, चेन्नई के तत्वावधान में शासनश्री साध्वी शिवमाला ठाणा-4 एवं साध्वी लावण्यश्री ठाणा-3 के सान्निध्य और प्रेरणा से सामुहिक एकलठाणा के प्रत्याख्यान हुए। पुरे भारत वर्ष में श्रंखलाबद्ध आयोजित एकलठाणा तप का सामुहिक आयोजन तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट में सानन्द संपन्न हुआ। इस तप में तेरापंथ सभा,  महिला मंडल, तेयुप, अणुव्रत समिति एवम सकल जैन समाज के 604 श्रावक श्राविकाएं संभागी बने।  अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश डागा ने अपनी टीम सदस्यों के साथ एकलठाणा तप कर सहभागिता निभाई।  अध्यक्षा लता पारख ने स्वागत स्वर प्रस्तुत ...

जड़ से विभक्त होना ही आध्यात्म है, और यही मोक्ष है : प्रवीण ऋषि

महावीर निर्वाण कल्याणक महोत्सव का शिखर दिवस 13 नवंबर को Sagevaani.com /रायपुर (वीएनएस)। 21 दिवसीय महावीर निर्वाण कल्याणक महोत्सव अब अपने चरम पर पहुंच रहा है। लालगंगा पटवा भवन में परमात्मा के समोशरण का निर्माण हो रहा है। आनंद जन्मोत्सव, नवकार तीर्थ कलश अनुष्ठान जैसे शीर्ष आयोजनों के बाद रायपुर की धन्य धरा पर 21 दिवसीय महावीर निर्वाण कल्याणक महोत्सव का अनुष्ठान का समापन होने जा रहा है। रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने कहा कि आज एक अनूठा माहौल हमें रायपुर में देखने को मिल रहा है। प्रभु महावीर की अंतिम देशना, जिसे सुनने के लिए देवताओं के साथ इंद्र उनकी धर्मसभा में पहुंचे थे, वही देशना विगत 24 अक्टूबर से लालगंगा पटवा भवन में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि के मुखारविंद से अनवरत गूँज रही है। आगामी 13 नवंबर को महावीर निर्वाण कल्याणक का शिखर दिवस मनाया जाएगा। 13 नवंबर को सुबह 5.25 बजे से लालगंगा...

जब इंद्रियां जानने के बजाय भोग में लग जाती हैं तो हम गुलाम बन जाते हैं : प्रवीण ऋषि

लालगंगा पटवा भवन में 11 नवंबर से प्रारंभ होगी परमात्मा के समोशरण की आराधना Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि जैसे मछली आटे को देखती है कांटे को नहीं, वैसे ही हम विषय को मछली की तरह आटे के रूप में देखते हैं और उसे ग्रहण कर लेते हैं। और वह कांटा हमें पकड़ कर रखता है। हमारी पांचों इन्द्रियां जान भी सकती हैं और भोग भी सकती हैं। जब ये जानने के लिए उपयोग में आती हैं तो आत्मा का वैभव बढ़ता है। जीवन समृद्ध होता है। जिस समय इन्द्रियां जानने के बजाय भोग में लग जाती हैं तो यह जीवन गुलाम बन जाता है, और वहां से उलझन शुरू होती हैं। इन्द्रियों का एकल स्‍वभाव नहीं है। मन चंचल है, पहले हम किसी विचार को ग्रहण करते हैं, और फिर विचार हमारे ऊपर कब्ज़ा जमा लेता है। ऐसे इन्द्रियों को लेकर एक चक्र शुरू हो जाता है, और इसके चलते न इन्द्रियों का रहता है और न मन का रहता है। दिखने में सामने इन्द्...

गलत तरिके से कमाये धन से जीवन में कभी सुख नहीं मिलने वाला: महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com /चैन्नई। धन,धर्म की आधार शिला है। शुक्रवार साहुकारपेट जैनभवन में धनतेरस के पावन प्रंसग पर महासती धर्मप्रभा ने सभी श्रध्दांलूओ को धर्मसंदेश देतें हुए कहा कि धन, धर्म की आधार शिला है। लक्ष्मी को प्राप्त करने बाद जीवन में शांति नहीं और शरीर मे सुख नही वो धन किसी भी काम नहीं है।धन के सद उपयोग से मनुष्य पुण्य का उपार्जन करके जीवन को सफल बना सकता है,लेकिन करता नहींं वह धन का स्वामी नहीं बनकर धन का दास बन गया है। आज हर व्यक्ति की निगाहें पराऐ धन रहती है।जबकि पराया धन,पत्थर के समान होता है। गलत तरिके से कमाया धन जीवन मे कभी सुख नहीं दे सकता है जो धन अपने स्तर पर कमाता हैं, वही धन पुरुषार्थ करता है। मनुष्य लेना ही जानता हैं, देना कुछ नहीं चाहता। जिनमें देने के भाव आ गये वो मनुष्य धन के द्वारा धर्म कमा सकता है और अपने अशुभ कर्मो की निर्जरा करके अपनी आत्मा का कल्याण करवा सकता है। साध्वी...

कैसे करें धनतेरस की पूजा

इस साल धनतेरस धन्वंतरि जयंती 10 नवंबर 2023 को आ रही है, धनतेरस के दिन आपको सवेरे स्नान कर अच्छे वस्त्र धारण कर । अपने घर के उत्तर पूर्व में महालक्ष्मी गणेश की स्थापना करें, व भगवान विष्णु को धनवंतरी के रूप में पूजा करें धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा इसलिए करनी चाहिए । भगवान धन्वंतरि आरोग्यता के देवता है । इनकी पूजा करने से आपके घर से सारे रोग दोष मिट जाते हैं ,भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के देवता हैंl इस दिन शुभ मुहूर्त में आपको आपकी परिस्थिति के अनुसार चाँदी सोना खरीद सकते हैं ।इस दिन शुक्रवार व हस्त नक्षत्र है यह दोनों चाँदी खरीदने के लिए अति शुभ हैl शुभ मुहूर्त 12:00 से 13:00 16:30 से 18:00 21:00 से 22:30 इन मुहूर्त में आप चाँदी सोना कुछ बर्तन खरीदना चाहते हैं या कुछ लोग ही बही खाता खरीदना चाहते हैं तो खरीद सकते हैं यह शुभ समय आपके और आपके परिवार के लिए धन वृद्धि व सुख शांति का रहेगा...

जीव के जन्म मरण की संख्या असीमित है: जयतिलक मुनिजी

गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने नार्थ टाउन के ए यम के यम स्थानक में कहा कि संसार अनादि काल से है जिसमें जीव का जन्म मरण भी अनादिकाल से हो रहा है। जीव के जन्म मरण की संख्या असीमित है जिसकी गणना में गणित भी फेल है। इसलिए भगवान ने कहा कि जीव का जन्म मरण अनादिकाल से है। मनुष्य गति को प्राप्त होना सरल नहीं है। प्रबल पुष्यवाणी से ये गति प्राप्त होती है। जिस प्रकार मोबाइल में बहुत सारे सिस्टम होते है पर जानकारी होने पर ही व्यक्ति उनका उपयोग कर सकता है। उसी प्रकार आत्मा में अनेक शक्तियाँ है पर कर्मो के आवरण की वजह से व्यक्ति को उन शक्तियों का भान नही रहता। अनन्त भवों को जानने का साम्थर्य भी आत्मा में है। तप से ही जीव मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। घाती कर्म को क्षय करने के बाद भी तीर्थकंर तप करते रहते है क्योंकि भगवान कहते है कि तप से ही कर्म निर्जरा है। जप तप से तेजस शरीर जागृत होता है तब वह लब्धि में परि...

जिसके पास विनय नहीं उसके पास भक्ति नहीं : प्रवीण ऋषि

परमात्मा की भक्ति के साथ शुक्रवार से शुरू होगा महावीर निर्वाण कल्याणक का तेला Sagevaani.com/रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि तप के बिना कोई शुद्ध नहीं होता। परमात्मा कहते हैं कि जिसके करने से पाप समाप्त हो जाए उसे तप कहते हैं। जैसे आग ईंधन को राख कर देती है, वैसे ही अनादिकाल के पाप संस्कारों को जो नष्ट कर दे, वह तप है। लेकिन ऐसा तप जीवन में कैसे संभव हो सकता है? क्या किसी से लेना भी तप हो सकता है? अगर तरीका सही है तो लेना भी तप हो जाता है। इसलिए गोचरी भी तप हो जाती है। तपस्या में देने को नहीं लेने को गिना गया है। तप के क्या सूत्र हैं, क्या साधना है, सुधर्म स्वामी ने उत्तराध्ययन सूत्र के तीसवें अध्याय तवमग्गगई में बताया है। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी है। लालगंगा पटवा भवन में जारी उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के 17वें दिवस गुरुवार को लाभार्थी परि...

जिसकी जितनी क्षमता उतना सहयोग करे: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि भाइयों रिश्ते बनाना उतना ही आसान है जिससे मिट्टी पर मिट्टी से लिखता लेकिन रिश्ते निभाना उतना ही मुश्किल हैl जिसे अपनी पर पानी से लिखना परिवार में तीसरा रिश्ता होता हैl इनके कारण परिवार में लडाई झगड़ा हो जाते हैंl जेठ ने कभी यह घमंड ना करें मैं बड़ी आप बुद्धि देव रानी की सहेली बन जाएl काम पडने पर उसका सहयोग कर दे कम होने पर उसका सहयोग ले लेl उसके कासन में तकलीफ हो बीमारी में उसका ध्यान रखिए उसका सिर पैर दबा दे वह जीवन भर के लिए आपको हो जाएगीl क्या बड़ी क्या छोटी घर में एक बंद कर रहो जेठानी के पैर से साड़ी आए तो वह देवरानी से कह आज तुम पहन लो देवरानी जेठानी से कह मेरे प्यार से मेरे पापा न...

सच्ची ईशोपासना है मानव धर्म निभाना- महासती धर्मप्रभा

कुष्ठ आश्रम में श्रीसंघ साहुकारपेट ने मनाया दिपावली पर्व Sagevaani.com /Chennai। मानव की प्रतिष्ठा में ही धर्म है।कोई भी धर्म श्रेष्ठ और महान हो सकता है, लेकिन मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता। गुरूवार जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने श्रीसंघ साहुकारपेट के सभी पदाधिकारियों को कुष्ठ आश्रम में कुष्ठ रोगियों की सेवा कार्य केलिए साधूवाद देतें हुए कहा कि मानव सेवा ही सच्ची सेवा है गरीब लोगों के बीच भी खुशियों को बांटना सबसे बड़ा पुण्य और नेक कार्य हैऔर इससे बड़ा संसार में धर्म नहींं हो सकता है।परोपकार ही असल मायने में ईश्वर की सेवा करना है। बाकी संसार में कुछ भी नहीं है।सच्ची ईशोपासना यह है कि हम अपने मानव-बंधुओं की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दिया तो मानव जीवन सफल बन जाएगा और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। साध्वी स्नेहप्रभा ने कहा कि मनुष्य इंसानियत और मानव धर्म के संस्कार के साथ इस दुन...

कल्याणकारी भाव जीवन को जीवित रखने की एकमात्र औषधि है : देवेंद्रसागरसूरि

कल्याण, उपकार, अच्छाई, हित, नेकी, ये वे चीजें हैं जिसकी धुरी पर ही ये संपूर्ण संसार का अस्तित्व जीवंत है। इन पर्यायवाची को अगर समेटा जाए तो जिस सहजशब्दया प्रवृत्ति का पता चलता है उसे भलाई या परोपकार के नाम से जाना जाता है। एक ऐसी प्रवृत्ति जो प्राणी जन्मजात स्थायी रूप से प्राप्त करता है। उपरोक्त बातें श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन मूर्तिपूजक जैन संघ प्रवचन देते हुए आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कही, वे आगे बोले कि कल्याणकारी प्रवृत्ति प्रकृति प्रदत्त है। विश्वास करना चाहते हैं तो स्थिर मन से अपने आस-पास की प्रकृति का अवलोकन कीजिये। पेड़ अपने फल खुद नहीं खाते हैं और तालाब भी अपना पानी स्वयं नहीं पीता है। इसी तरह अच्छे और सज्जन पुरुष वे हैं जो दूसरों के हित के काम के लिए संपत्ति जमा करते हैं। प्रकृति प्रदत्त यह प्रवृत्ति बड़ी ही शक्तिशाली होती है। कल्याणकारी भाव मानव जाति की वह पूँजी है जो कभी...

भगवान ने मद का निषेध किया है: जयतिलक मुनिजी

ए यम के यम स्थानक नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा भगवान ने मद का निषेध किया है। आठ प्रकार के मद जैसे जाति, कुल, रूप, ऐश्वर्य आदि नही करने चाहिए। मद का उल्टा दम होता है। अर्हंत पद की प्राप्ति के लिए मद का मर्दन करना आवश्यक है।   जो सरल है, विनयी है उसमें ही गुणों का आगमन होता है। विनय को ही इसलिए धर्म का मूल कहते है । अहंकारी व्यक्ति किसी का भला नही कर सकता । मद का अर्थ पागलों की तरह व्यवहार करने वाला, विनाश करने वाला अहंकारी किसी की बात नही सुनता । भगवान कहते है अहंकारी व्यक्ति के निरन्तर कर्म बन्ध होता रहता है। इसलिए भगवान कहते है अहंकार का त्याग करो जिससे स्वयं में गुणों का समावेश हो सके। जो झुकता है उसे तोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती । जो नही झुकता उसे तोड़कर हटा दिया जाता है। भगवान कहते हैं कि यदि किसी का भला न कर सको तो कोई बात नही पर बुरा करने की प्रवृत्ति के बारे में सो...

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