हिंदू महाकाव्य रामायण में वर्णित है कि यह वह दिन है जब भगवान राम देवी सीता और भगवान लक्ष्मण 14 साल जंगल में वनवास के बीतने के बाद अयोध्या लौटे थे। उनके आने की खुशी के उपलक्ष में पूरे अयोध्या में दीपक जलाए गए थे। तब से भारतवर्ष में दीपावली मनाई जाती है और इस खुशी को सब लोगों में फैलने के लिए हर गॉव हर शहर में मिठाइयां बांटी जाती है और इस त्यौहार को धूमधाम से मनाया जाता है और इस दिन देवी लक्ष्मी का जन्म हुआ ऐसा माना जाता है समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी जी प्रगट हुई इसलिए दीपावली की पूजा देवी लक्ष्मी और गणेश व सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है । इस साल दीपावली 12 नवंबर को मनाई जाएगी क्योंकि अमावस तिथि इस दिन दोपहर 2:44 से प्रारंभ होगी और 13 नवंबर 2023 को दोपहर 2:56 तक समाप्त हो जाएगी इसलिए रात्रि पक्ष में अमावस ना होने से 12 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी दीपावलीपूजन का समय 13,30 से 15,00 शु...
Sagevaani.com /चैन्नई। दीपावली प्रकाश का उत्सव है। यह पर्व महज हमारे आसपास घरों के अंधेरों को ही दूर करने का नहीं बल्कि हमारे भीतर के अंधकार को प्रकाश में बदलने का पर्व है दिपावली। साहुकारपेट जैन भवन के मरूधर केसरी दरबार में महासती धर्मप्रभा ने दिपोत्सव के पूर्व संध्या पर शनिवार को आयोजित धर्मसभा में श्रध्दांलूओ को सम्बोधित करतें हुए कहा कि जब मनुष्य अपने मन के काम क्रोध, लोभ,मोह का कचरा क्लोषित भावना ईर्ष्या -द्वेष आदि विकारों को दूर करके आत्मा मे ज्ञान का घी डालकर दीप प्रज्वलित करता है तो वह अपने अज्ञान रूपी अंधेरे को दूर करके जीवन मे खुशियों को प्राप्त कर पाएगा और आत्मा को संसार के बंधनों से मुक्त करवा सकता है । साध्वी स्नेहप्रभा ने भगवान महावीर स्वामी की दिव्य धर्म देशना श्रीमद् उत्तराध्ययन सूत्र के बत्तीसवें एवं तेतीसवें अध्याध्य पमायट्ठाणं और कम्मप्पयडी पाठ के अध्ययन प्रमाद और अप्रमा...
जैन साध्वी ने बताया कि जहां लक्ष्मी का सदुपयोग होता है वह वहां करती है निवास Sagevaani.com /शिवपुरी ब्यूरो। धनतेरस पर अपने प्रवचन में प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बताया कि धनतेरस का संदेश है कि वह रस धन्य है जो हमारे तन और मन को स्वस्थ रखे। उन्होंने बताया कि पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया। तन और मन से निरोग होने पर ही जीवन का आनंद लिया जा सकेगा। दूसरों की सेवा की जा सकेगी। अपने प्रवचन में साध्वी जी ने यह भी बताया कि लक्ष्मी वहां निवास करती है जहां उसका सदुपयोग होता है। लक्ष्मी का आप उपयोग, दुरूपयोग और सदुपयोग तीनों कर सकते हो। सदुपयोग तब होता है जब लक्ष्मी को परमार्थ के काम में लगाया जाए। प्रारंभ में साध्वी जयश्री जी और साध्वी वंदना श्री जी ने सुमधुर स्वर में भजनों का गायन कर माहौल को भक्ति रस की गंगा से सराबोर किया। गुरूणी मैया साध्वी रमणीक कुंवर जी ने दीपावली को म...
विरलविभूति प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी महाराज साहब के कृपा पात्र सुशिष्य रत्न श्रुतप्रभावक मुनिराज श्री वैभवरत्न विजय जी महाराज साहब के प्रवचन के अंश ।। विषय : दीपावली की दिव्यता १-प्रभु महावीरस्वामी ने स्वयं की चेतना का पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के बाद जगत् के सभी जीव पूर्णसुख को पाये और अनंत दुखों से मुक्त हो इसलिए 22000 देशना दी थी ।। २-दीपावली पर्व का आगमन होना यानि प्रभु महावीर स्वामी के निर्मल ज्ञान से स्वयं के ज्ञान को पाना।। ३- दीपावली पर्व मनाना यानि कि सभी जीवो के साथ मैत्री, स्नेह ,प्रेम सहायता से उनके हित की भावना का अवतरण करना।। ४-दीपावली पर्व में भारत के सभी लोग दीपक का प्रागट्य करते हैं क्योंकि बाह्य दीपक जैसे अंधेरे का नाश करता है वैसे ही ज्ञान रूपी दीपक भी हमारे मन के दोषों का नाश करता ही है ।। ५-प्रभु म...
Sagevaani.com /चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन मूर्तिपूजक संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने दीपावली पर्व की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि दीपावली भारत का एक ऐसा पवित्र पर्व है, जिसका सम्बन्ध भारतीय संस्कृति की सभी परम्पराओं से है. भारतीय संस्कृति के प्राचीन जैन धर्म में इस पर्व को मनाने के अपने कारण हैं. ईसा से लगभग 527 वर्ष पूर्व कार्त्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के समापन होते ही, अमावस्या के लगभग प्रारम्भ में स्वाति नक्षत्र के दौरान महावीर स्वामी अपने सांसारिक जीवन से मुक्त होकर निर्वाण को प्राप्त हो गए. उस समय इन्द्रादि देवों ने आकर भगवान महावीर के शरीर की पूजा की और पावापुरी नगरी को दीपकों से सजाकर प्रकाशयुक्त कर दियाl उसी समय से आज तक यही परंपरा जैन धर्म में चली आ रही है. जैन धर्म में प्रतिवर्ष दीपमालिका सजाकर भगवान महावीर का निर्वाणोत्सव मनाया जाता है. उन्होंने...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केसरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने प्रवचन में कहा कि परोपकार में सबसे श्रेष्ठ उपकार धर्मोपदेश है। इससे बढ़कर जगत में कोई बड़ा उपकार नहीं है। दानधर्म की महिमा का उपदेश धर्मोपदेश से मिला है। धर्मोपदेश देकर सम्यकज्ञान का दान सबसे बड़ा उपकार है। उपदेश बिना किसी को ऊपर लाना मुश्किल है। उपदेश शब्द जैन धर्म में बहुत प्रचार, प्रसार के साथ आया हुआ है। उन्होंने कहा जो वचन जीवन की प्रगति करे, बुद्धि की परिपक्वता बढ़ाए, व्यक्ति के पुण्य में वृद्धि करें, पवित्रता का बीजारोपण करें, प्रवज्या के भाव उत्पन्न करें, परमपथ की ओर ले जाए, ऐसे वचन प्रवचन यानी धर्मोपदेश होते हैं। महावीर भगवान् ने अंतिम श्वास तक देशना देकर धर्मोपदेश दिया। उन्होंने कहा प्राचीन महापुरुषों का समय शास्त्रों की काव्य रचनाओं में जाता था। ज्ञानदान महान् उपकार...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केसरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने प्रवचन में कहा कि जिस तरह फूल के अंदर कमल का फूल श्रेष्ठ है, ज्योतिष मंडल के अंदर सूर्य ग्रह श्रेष्ठ है, इसी तरह पर्वों की तेजस्विता के अंदर दीपावली त्यौहार श्रेष्ठ है। जैन शासन के अंदर नवकार आराधना के लिए उपधान तप को बताया गया है। जो त्याग के प्रेमी हो, विरति धर्म के चाहक हो, परमात्मा के प्रति अत्यंत श्रद्धांवित हो उन्हें ही उपधान तप का अधिकार दिया गया है। जिन्हें नवकार से आगे कुछ नहीं आता, क्रिया भी नहीं आती, वे भी उपधान तप कर सकते हैं। आराधना में सहनशक्ति आवश्यक है। कभी-कभी हम जीवन में आभास और भ्रांति में जीते हैं। हमें कोई भी वस्तु को कठिन नहीं समझना चाहिए। कठिन तभी लगता है, जब हम उसे कठिन समझते हैं। दिमाग की सोच मन की शक्ति का विकास करती है। पुरूषार्थ ज्यादा हो, पुण...
नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में कहा कि आत्म बंधुओ :- श्री उतराध्ययन भगवान की ‘अन्तिम देशना है जिसमे भगवान ने अपने जीवन का सार, विशेष कथानक के माध्यम से, गद्य-पद्य के माध्यम से सुवाक्यों में फरमाया। ये सुवाक्य मोक्षगामी जीवों के लिये मार्ग प्रशस्त करते है। इस आगम का अध्ययन जितनी बार किया जाये उतनी बार नई बातें सीखने को मिलती है जिसका विवेचन हर कोई नहीं कर सकता, ज्ञान और आचरण दोनों का समायोजन होना आवश्यक है। इनके योग से ही जीव तिरता है इसलिए दर्शक श्री दश्वैकालिक सूत्र में कहा गया- “पढम्ं माणो तओ दया” हर जाति में दया का महत्व है ! ज्ञान के साथ जब दया का आचरण होता है तो वह दया उत्कृष्ट दया बन जाती है संयम लेना बड़ी बात नही हर कोई ले भी सकता है पर संयम आराधना बिना ज्ञान के संभावना नही। इसलिए जब मूल बात को पकड उसे समझेंगे और मूल सुरक्षित होने पर ही संयम की आ...
Sagevaani.com /चेन्नई : अभातेयुप राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेश डागा ने किया एटीडीसी पुलल, चेन्नई का अवलोकन किया। आचार्य श्री तुलसी डायग्नोस्टिक सेन्टर (एटीडीसी) के डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्यों को दीपावली की बधाई देते हुए गतिविधियों की जानकारी ली। एटीडीसी प्रभारी, डॉक्टर, स्टाफ से चर्चा के साथ एटीडीसी को और ऊँचाई देने के लिए हिदायतें दी। ■ तेयुप अध्यक्ष श्री दिलीप गेलड़ा ने किया राष्ट्रीय अध्यक्ष का एटीडीसी में स्वागत किया। ● इस अवसर पर अभातेयुप राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य और तेयुप मंत्री श्री कोमल डागा के साथ उपाध्यक्ष श्री सुधीर संचेती, एटीडीसी संयोजक श्री प्रदीप सुराणा, सहसंयोजक श्री अमित बोहरा, जैन संस्कारक श्री स्वरूप चन्द दाँती, श्री रोशन बोथरा उपस्थित रहे।
◆ अणुव्रत क्रिएटिविटी कॉन्टैक्ट 2023 तमिलनाडु राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं का आयोजन Sagevaani.com /चेन्नई : अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में अणुव्रत समिति, चेन्नई की आयोजना में शासनश्री साध्वी शिवमालाजी ठाणा-4 के सानिध्य में तेरापंथ भवन, ट्रिप्लीकेन में अणुव्रत क्रिएटिविटी कॉन्टैक्ट 2023 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन आयोजित हुआ। प्रातःकाल साध्वीश्रीजी के नमस्कार महामंत्र समुच्चारण से कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। इस प्रतियोगिताओं में स्कूल स्तर से जिला स्तर पर पहुंचे विजेता एवं जिला स्तर से राज्य स्तर पर पहुंचे विजेताओं का राज्य स्तर के प्रतिभागियों के रूप में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। चित्रकला, कविता लेखन, निबंध लेखन, एकल गायन, समूह गायन एवं भाषण प्रतियोगिताएं कक्षा 5 से 8 एवं 9 से 12 इन दो समूहों के विद्यार्थियों के लिए रखी गई। अणुव्रत समिति के सदस्यों द्वारा मंगलाचरण ह...
Sagevaani.com /चेन्नई : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या साध्वी लावण्यश्रीजी ठाणा 3 के पावन सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल के निर्देशानुसार तेरापंथ महिला मंडल चेन्नई के तत्वावधान में दिवाली स्नेह मिलन का पारंपरिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साध्वीश्रीजी के नमस्कार महामंत्र स्मरण द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। अध्यक्ष श्रीमती लता पारख ने सभी बहनों का स्वागत के साथ दीपावली की शुभकामना देते हुए कहा यह रोशनी का पर्व है। अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। दीप से दीप जला त्याग तपस्या की आतिशबाज़ी से जीवन खुशहाल बनाऐं। साध्वी श्री लावण्यश्रीजी ने फरमाया कि हर एक स्थान की गरिमा होती है, उसमें शालीनता, सहजता झलकनी चाहिए। दीपावली के उपलक्ष्य पर साध्वीश्रीजी ने जप करने की प्रेरणा दी। साध्वी श्री दर्शितप्रभाजी ने महापुरुषों की माताओं पर, मनोरंजक एवम रोचक गेम करवाए...
Sagevaani.com /चेन्नई: श्री सिवांची मद्रास जैन संघ, चैन्नई द्वारा श्री सिवांची जैन भवन में जैन संस्कार विधि से दीपावली पूजन कार्यक्रम समायोजित किया गया। नमस्कार महामंत्र के सामुहिक स्मरण के साथ कार्यक्रम शुभारम्भ हुआ। जैन संस्कारक श्री स्वरूप चन्द दाँती ने पूजन विधि प्रारम्भ करते हुए विभिन्न जैन मंगल मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम सम्पादित किया। उपाध्यक्ष श्री ओटमल श्रीश्रीमाल और कोषाध्यक्ष श्री रतनलाल बागरेचा ने सर्व प्रथम बाजोट पर लाल वस्त्र लगा चावल से स्वास्तिक बनाया। मंत्री श्री अशोक कुमार खतंग ने सभी के तिलक, मौली आदि से मंगलमय कार्य को आगे बढ़ाया। मंगल भावना पत्रक की स्थापना, भगवान महावीर स्तुति के साथ बही खातों का शुभारम्भ किया गया। अध्यक्ष श्री जयंतीलाल बागरेचा ने स्वागत स्वर प्रस्तुत करते हुए सभी संघ परिवार सदस्यों को दीपावली की शुभकामनाएं प्रेषित की। वृहद् मंगल पाठ के बाद शुभेच...