लालगंगा पटवा भवन में शुरू हुई वीरत्थुई की आराधना धर्मसभा में प्रवीण ऋषि से मिले महंत रामसुंदर दास Sagevaani.com /रायपुर। उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के बाद लालगंगा पटवा भवन में बुधवार को एक अनोखी यात्रा प्रारंभ हुई। जम्बूस्वामी की जिज्ञासा के उत्तर में सुधर्मा स्वामी द्वारा रचित भगवान महावीर की अनोखी व अद्भुत स्तुति पुच्छिंसुणं (वीर स्तुति) की आराधना। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा कि जंबूस्वामी से लोग सवाल पूछते थे, प्रभु के बारे में पूछते थे। वे पूछते थे कि जिसे तुमने देखा ही नहीं है, उसके पीछे जा रहे हो? कैसे उस पर फ़िदा हो गए? जंबूस्वामी के पास कोई उत्तर नहीं था, वे पहुंचे सुधर्मा स्वामी के पास। उन्होंने जिज्ञासा रखी सुधर्मा स्वामी के समक्ष, और वे उनकी जिज्ञासा शांत करते चले गए। यही है पुच्छिंसुणं (वीर स्तुति) जिसकी आराधना आज से शुरू हुई है। आज की धर्मसभा में गौसेवा आयोग के अध्यक्ष मह...
Sagevaani.com /चैन्नई। भगवान की भक्ति में हो या पारवारिक रिश्तों में समर्पण और प्रेम नहीं, स्वार्थ की भावना छिपी हुई है,तो भक्ति करना और रिश्ते निभाना व्यर्थ है। बुधवार जैन भवन के मरूधर केसरी दरबार में महासती धर्मप्रभा ने भाई बहन के पवित्र त्यौहार भाई दुज पर श्रध्दालूओं को शुभ आर्शीवाद और बधाई देतें हुए कहा कि भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है इस दिन यम देवता की पूजा भी की जाती है। भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर और उपहार देकर उसकी लंबी आयु की कामना करती है और भाई बहन की रक्षा का वचन देता है। परन्तु आज रिश्तों मे स्वार्थ और दिखावट प्रदर्शन के कारण इस त्योहार में एक दूसरें में दूरियां बढ़ती जा रहीं है। पर्व मनाना तभी सार्थक होगा जब बहन और भाई निस्वार्थ भाव से भाई दुज पर्व के महत्व को समझकर इस पर्व को मनाएंगे तो ये पर्व मनाना परिवार और एक दुसरे केलिए सार्थक बन सकता ...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिज ने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गलतियाँ हर इंसान करता है। लेकिन इसे स्वीकार हर कोई नहीं कर पाता। शायद ही कभी आपने इस बात को गंभीरता से लिया हो कि गलती हुई इसे स्वीकार कर लेने से क्या हो जाएगा या नहीं करते हैं तो उससे क्या फर्क पड़ेगा। याद रखिए गलती होने पर उसे स्वीकार कर लेना आपको आगे ले जाने वाले गुणों में से एक है। वे आगे बोले कि मानव स्वभाव है गलतियाँ करने का। गलतियाँ सभी से होती हैं। भले ही सो गलतियाँ करो लेकिन उन्हें दोहराओ मत। क्योंकि गलतियों को दोहराना मूर्खता है। गलती हो उसे स्वीकार करो। कुछ गलतियाँ होती हैं जो अनजाने में हो जाती हैं और कुछ होती हैं जो आपसे जानबूझकर होती हैं। अनजाने में होने वाली गलतियों पर आपका बस नहीं चलता। उसके लिए तो सिवाय माफी माँगने के कोई चा...
जैन साध्वी जी ने धर्मसभा में बताया गौतम प्रतिपदा का महत्व Sagevaani.com /शिवपुरी। पांच दिवसीय प्रकाश पर्व के अंतिम दिन भाई दौज के त्यौहार पर मैं अपने धर्म भाईयों से भेंट मांगना चाहती हूं। क्या आप मुझे भाई दौज की भेंट देंगे। मैं इस अवसर पर आपसे भेंट मांगती हूं कि आप अपने घर के वातावरण में मिठास घोलें। परिवार के सदस्य एक दूसरे के प्रति समर्पित हो जाऐं। जब आप घर जायें तो वहां प्रेम के साथ जाऐं, स्वास्र्थ और व्यापार को दूर रखें। यदि आप तैयार हैं तो मैं भाई दौज का टीका आपको लगा देती हूं उक्त उदगार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कमला भवन में भाई दौज के अवसर पर आयोजित विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्म सभा में उन्होंने गौतम प्रतिपदा का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान महावीर के ज्येष्ठ शिष्य गौतम स्वामी जब प्रभू के प्रति अतिशय मोह की भावना से मुक्त हो गए तो उन्हें केबल्य ज्ञान प्राप्त हुआ।...
भाई दुज पर विशेष प्रवचन Sagevaani.com /Chennai ए यम के यम स्थानक नार्थ टाउन में विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा कि आत्म बंधुओ, आज भाई बहन का प्रसंग। संसार का एक बहुत ही मधुर और उत्तम रिश्ता है। क्योंकि इस रिश्ते में कोई विकार नहीं है। दोनों एक दूसरे के पूरक है। जिस घर में भाई-बहन दोनों है वह एक सम्पूर्ण परिवार है। भाई-बहन दोनों के लिए रिश्ता बहुत महत्वपूर्ण है माता पिता के वियोग के बाद भाई पिता का स्थान और बहन माता का स्थान एक दूसरे के लिए ग्रहण करते है। दोनों एक दूसरे को हिम्मत देते है। बल देते है। पिता का आर्शीवाद जिस बेटे पर हो वह कोई भी चुनौती स्वीकार कर लेता है। रक्षा बंधन के त्यौहार में भाई के दीर्घायु व आरोग्यता की बहन कामना करती है। पर आज वर्तमान में त्यौहार डिमांड का मौका बन गया है। पर वास्तव में त्यौहार शुभकामना और आर्शीवाद की वर्षा करने का पर्व है। डिमांड तो कभी भी किसी भी...
लालगंगा पटवा भवन में उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना के बाद नया प्रसंग प्रारंभ Sagevaani.com /रायपुर। उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मरीचि के भव में प्रभु महावीर ने जहां नहीं करना था वहां अहंकार किया। अहंकार के बिना संसार में सत्ता-संपत्ति चलती नहीं है। लेकिन प्रभु के चरणों में साधना करते समय और उनके वरदानों को ग्रहण करते हुए अहंकार ऐसा चलता है कि मरीचि के भव से लेकर आखरी जन्म तक महावीर को कभी अवसर नहीं मिला कि वे अपने बड़प्पन का अहंकार कर सकें। वापस कभी वो ज्येष्ठ बने नहीं। चाहे विश्वभूति का हो या त्रिपुष्ठ वासुदेव का भव हो, वे पराक्रमी बने लेकिन ज्येष्ठ नहीं बने। और वही आखरी जन्म में तीर्थंकर बने। लेकिन बड़े भाई नहीं बन सके, छोटे भाई बने। एक छोटा सा अहंकार जहां नहीं करना था, वहां किया। इस संसार में कई जगह अहंकार करते है, उस अहंकार को टूटने का भी मौका...
Sagevaani.com /चैन्नई। आंतरिक शांति विश्व शांति की कुंजी है।साहुकारपेट जैन भवन के मरूधर केसरी दरबार में महासती धर्मप्रभा ने नववर्ष गौतम प्रतिप्रदा पर पांचदिवस मौन साधना महामंगल पाठ और आर्शीवाद श्रध्दालूओं को प्रदान करतें हुए कहा कि हिंसा के मार्ग को त्यागकर भगवान महावीर स्वामी के बताएं गये अहिंसा के मार्ग पर सभी देश चलते है तो विश्व मे शांति और मैत्री की स्थापना हो सकती है। आज सम्पूर्ण विश्व में अजारकता भय और अशांति का माहौल बना हुआ है। भाई-भाई का दुश्मन बना हुआ है।विश्व वंदनीय महावीर के अंहिसा सिध्दांत के मार्ग पर चलेंगे तभी विश्व में मेत्री प्रेम सोहर्द कायम हो सकता है। समस्याओ का समाधान बंदूक की गोली से नहीं,प्यार की मीठी बोली और शांति से ही समस्याओं का समाधान हम खोज सकते है। वरना मानव जाति को विनाश से कोई नहींं बचा सकता है। विरोधी को कभी विरोध से नहीं वरन सद्भावना एवं शांति से जीत सकते...
नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा कि भगवान महावीर तीर्थकंर थे लेकिन जन्म के पहले कर्म उदय थे । 82 दिन देवानंदा की कुक्षी में थे। कर्म क्षीण होते ही देवलोक के देवता हरिणगमेषी देव ने गर्भ को बदल दिया त्रिशला माता की कुक्षी ! एक माँ का दुःख एक माता को सुख । कोई भी माता की कुक्षी से जन्मे तो तीर्थकर ही बनेंगे। बाल्य काल में उनकी ज्ञान कला इतनी थी कि गर्भावस्था में भी माँ को तकलीफ न हो, मेरे हलन- चलन से माँ को पीडा न हो इसलिए स्थिर हो गये। पाँचवे आरे में भी शरीर स्थिर होता है। माता पिता को दुख न हो तब तक संयम न लिया। जब तक केवल दर्शन केवल ज्ञान प्राप्त न हो तो मन वचन काया में स्थिर रहा और 12-1 /2 बर्ष तक पालन किया। पहली देशना खाली गयी और दूसरी देशना में 4400 दीक्षा हुई। केवल ज्ञान के बाद 30 साल संयम पाला। अनेक उपसर्ग आये तो भी संयम से पाला। उनके पहले गणधर गौतम स्वामी को संचय उपस्थित ह...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में नव वर्ष के शुभ दिन मांगलिक स्वरूप आशीर्वचन देते हुए पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि नया साल, समय के पर्यटन स्थल का वह नन्हा मार्गदर्शक है जिसकी अंगुली थामकर हम इस पर्यटन स्थल की बारह माह सैर करते हैं। बारहवें माह तक यह बूढ़ा हो चुका होता है तब यह हमारी अंगुली एक नन्हे मार्गदर्शक को थमाकर हमसे विदा हो जाता है। हमारी नियति इन्हीं नन्हीं अंगुलियों के भरोसे अपनी यात्रा करने की है और इतिहास गवाह है कि शिशु कभी नहीं छलते। इसलिए सच्चा भरोसा शिशु का ही होता है। आज जब हम इस शिशु की अंगुली थामकर अपनी यात्रा आगे बढ़ा रहे हैं तो यह विश्वास करना चाहिए कि हमें यह शिशु हर्ष और उल्लास, विकास और प्रगति तथा समृद्धि और सामथ्र्य के उन स्थलों की सैर कराएगा जिनसे साक्षात करने के लिए स्वप्न हम सदैव संजोते हैं। हर नया वर्ष अपने गर्भ में ऐसी...
नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने कहा कि श्री उत्तराध्ययन सूत्र महावीर का अंतिम उपदेश है, ये सभी साधकों के जानने योग्य है जानकर आचरण करके पालन करने से ही लाभ मिलेगा। जो जीवन में धारण करते है तो ये ज्ञान सर्व कल्याणकारी और परिभ्रमण मिटाने वाला बन जाता है। यदि ये उपदेश मात्र सून कर भूल जाये हो कोई लाभ नही मिलेगा। यदि जीव सुनकर किंचित मात्र भी पालन करेगा तो उसका कल्याण हो जायेगा। प्रमाद से जीव ज्ञान दर्शन, चारित्र, तप और पराक्रम से चूक जाता है भगवान कहते हैं संयम लेना ही बड़ी बात नहीं है उसको स्वीकार करने का पुरुषार्थ करना चाहिए। जैसे ज्ञानाचार बढ़ता है वैसे वैसे व्यक्ति के दोष मिट जाते है। जीव को अपने कर्त्तव्यों का भान होता है जिससे जीव में विवेक उत्पन्न होता है। जिससे आत्म शुद्धि में वृद्धि होती है। ज्ञान, दर्शन, चारित्र, तप और वीर्य इन पांच आचार से ही सिद्धि प्र...
★ दीपावली पर्व पर विशेष मंगलपाठ का आयोजन ★ बुधवार को मनाया जाएगा अणुव्रत दिवस Sagevaani.com /चेन्नई: भगवान महावीर निर्माण दिवस, दीपावली के पावन अवसर पर युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी लावण्यश्रीजी ठाणा-3 के श्रीमुख से तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट में श्रावक समाज को मंगल मंत्रोच्चार, पावन पाथेय के साथ आध्यात्मिक शक्ति के सम्प्रोषण का लाभ मिला। प्रातःकाल श्रावक समाज से खचाखच भरे प्रवचन सभागार में साध्वी लावण्यश्री ने विशेष प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि श्रमण भगवान महावीर ने हमें सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चारित्र रुपी त्रिवेणी साधना में सलग्न बने रहने का मार्ग बताया। इस मार्ग पर चल कर ही व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त कर सकता हैं। भगवान महावीर की अंतिम देशना जो उत्तराध्ययन सूत्र में गूंफीत है। उनकी वाणी जन-जन के लिए कल्याणकारी है। हम भी भगवान महावीर द्वारा दी हु...
Sagevaani.com /चेन्नई :- सोमवार दिनांक 13 नवम्बर 2023 को स्वाध्याय भवन, चेन्नई में भगवान महावीर का 2549 वां निर्वाण कल्याणक मनाया गया | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के तत्वावधान में स्वाध्याय भवन,साहूकारपेट, चेन्नई में भगवान महावीर स्वामी के मोक्ष कल्याणक के प्रसंग पर सप्त दिवसीय उत्तराध्ययन सूत्र का वांचन किया गया | वरिष्ठ स्वाध्यायी विनोद जीजैन, वीरपुत्र-वीरभ्राता वीरेन्द्रजी कांकरिया ने दिनांक 7 से 13 नवम्बर 2023 तक उत्तराध्ययन सूत्र के विनयश्रुत, परीषह प्रवीभक्ति चतुरंगीय, असंस्कृत, अकाममरणीय, क्षुल्लक निग्रन्थीय, उरभि्य, कापीलिय, नमि प्रव्रज्ज़ा, द्रुम-पत्रक, बहुश्रुतपूज्य, हरिकेशबल, चित्त -संभूति, इषुकारीय, भिक्षु जीवन, ब्रह्मचर्य समाधि, पाप श्रमण, संजयीय, मृगापुत्रीय, महानिग्रन्थीय, समुन्द्रपालीय, रथनेमीय, केशि-गौतमीय, प्रवचन मातायज्ञीय, सामाचारी, खलुंकीय, मोक्ष मार्...