Sagevaani.com /चैन्नई। धन,धर्म की आधार शिला है। शुक्रवार साहुकारपेट जैनभवन में धनतेरस के पावन प्रंसग पर महासती धर्मप्रभा ने सभी श्रध्दांलूओ को धर्मसंदेश देतें हुए कहा कि धन, धर्म की आधार शिला है। लक्ष्मी को प्राप्त करने बाद जीवन में शांति नहीं और शरीर मे सुख नही वो धन किसी भी काम नहीं है।धन के सद उपयोग से मनुष्य पुण्य का उपार्जन करके जीवन को सफल बना सकता है,लेकिन करता नहींं वह धन का स्वामी नहीं बनकर धन का दास बन गया है।
आज हर व्यक्ति की निगाहें पराऐ धन रहती है।जबकि पराया धन,पत्थर के समान होता है। गलत तरिके से कमाया धन जीवन मे कभी सुख नहीं दे सकता है जो धन अपने स्तर पर कमाता हैं, वही धन पुरुषार्थ करता है। मनुष्य लेना ही जानता हैं, देना कुछ नहीं चाहता। जिनमें देने के भाव आ गये वो मनुष्य धन के द्वारा धर्म कमा सकता है और अपने अशुभ कर्मो की निर्जरा करके अपनी आत्मा का कल्याण करवा सकता है। साध्वी स्नेहप्रभा ने भगवान महावीर स्वामी की अंतिम दिव्य धर्म देशना के 30 वें और 31वें अध्याध्य तवमग्गं एवं चरणविही पाठ का वांचन करतें हुए कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र को सुनकर मनुष्य भीतर मे उतारले और आचरण में प्रयोग करता है तो उत्ताराध्यय सूत्र की वाणी उसके जीवन की दशा और आत्मा को मुक्ति दिलवा देगीं।
श्री संघ साहुकारपेट के कार्याध्यक्ष महावीर चन्द सिसोदिया ने जानकारी देते हुए बताया महासाध्वी धर्मप्रभा जी म.सा.के पांच दिवस मौन साधना का महामंगल पाठ दिनांक 14 अक्टूबर मंगलवार को प्रातः7:00 बजें सभी श्रध्दांलूओ आयोजित विषेश धर्मसभा में प्रदान करेंगे। इसदौरान धर्मसभा में अनेंक जनों ने उपवास आयंबिल और एकासन व्रत के महासतीवृंद से प्रत्याख्यान लिए उन व्यक्तियों और सभा मे पधारें अतिथियों में अरविंद कुमार गुंदेचा का श्रीसंघ के सुरेश चन्द डूगरवाल,शम्भूसिंह कावड़िया मंत्री सज्जनराज सुराणा ने स्वागत किया।
प्रवक्ता सुनिल चपलोत,
श्री एस.एस.जैन संघ, साहुकारपेट, चैन्नई