श्री जैन रत्न युवक परिषद् तमिलनाडु के संचालन में स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट में संस्कारीय शिविर परीक्षा का आयोजन जहाँ धर्म की नींव गहरी हो,वहाँ संस्कारों की इमारतें स्वयं खड़ी हो जाती हैं।” इसी उद्देश्य को लेकर, पूज्य आचार्यश्री हीराचंद्रजी म.सा. के चेन्नई वेपेरी चातुर्मास में असीम कृपा एवं मार्गदर्शन से,“धार्मिक पाठशाला – Wings to Fly” विंग्स टू फ्लाई की स्थापना वर्ष 2005 में चेन्नई नगर में स्वाध्याय भवन साहूकारपेट शाखा के साथ हुई थी | चेन्नई में आज रविवार 27 जुलाई 2025 को साहूकारपेट के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट स्वाध्याय भवन व अयनावरम, किलपाक, के एल पी अपार्टमेंट, पेरंबूर, करियानचावडी, नंगनल्लूर, ओसवाल गार्डन कुरुक्पेट में नैतिक व धार्मिक संस्कारीय शिविर की परीक्षा का आयोजन किया गया, बालक बालिकाओं ने परीक्षा में भाग लिया | श्रावक संघ तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरि...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर बैंगलोर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म सा ने रविवार को धर्म सभा में उपस्थित विशाल जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को हमेशा जोड़ने की भावना रखनी चाहिए। अपने स्वार्थवश दूसरों को तोड़ने की नहीं। जब भी देखो केवल अपने को देखो। महावीर बन जाओगे। महावीर बनने का मार्ग है अपने को देखो। जो स्वयं के बजाय दूसरों के अवगुण , बुराईयों को देखते हैं। उनके जीवन का सर्वांगीण विकास रुक जाता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का चारित्र जितना श्रेष्ठ होगा उतना ही संघ, समाज एवं परिवार के साथ राष्ट्र की तस्वीर उतनी ही उम्दा और विकसित उन्नत होगी। ज़िन्दगी जीओ तो ऐसे जीओ कि कोई हमारे कारण से हंसे लेकिन हमारे ऊपर नहीं हंसे। बहु अपने सास की सेवा करें और उनकी आज्ञा का पालन करें और सास भी अपनी बहु को बेटी मानें और अपनापन भरपूर वात्सल्य भाव स...
जालना : निदेलां दहावा रस का मानन्यात आलं नाही. हेच तर खर आमचं दुर्देव आहे. दृष्टा मुनी कोणाला म्हणायचं, हे भगवंतांनी सांगितले, परंतू आम्ही कधीही स्वत: मध्ये कधीही डोकावून पाहत नाही, याला सम्यक दर्शन म्हणणार का. असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, जोपर्यंत आम्ही स्वत:मध्ये डोकावून पाहत नाहीत, तोपर्यंत आमच्यात चांगले गुण येत नाहीत, तोपर्यंत सम्यक दर्शी कसे म्हणणार? हजारो में केवल ग्यानी नही होता. विशेषत: केव्हा येईल हे सांगता येत नाही मात्र केवळ दिक्षा घेतल्याचा प्रभाव होता की, सम्यक दर...
आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य में तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित आगम आधारित प्रवचनमाला में रविवार को मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि भक्तामर स्तोत्र की साधना से भक्त अमर बन जाते हैं। ये मंत्र नहीं, स्तोत्र हैं। इसका मूल नाम आदिनाथ स्तोत्र है तथा इसके रचनाकार आचार्य मानतुंग हैं। इसके मूल श्लोक 44 हैं तथा बाद में 4 श्लोक जोड़े गए हैं। मुनि रमेश कुमार ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ सेवा के कारण महान बना है। आज यह संघ जन-जन के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। संघ में नवदीक्षित मुनि, बीमार साधु-साध्वियों आदि की जो सेवा की जाती है वह दूसरों के लिए अनुकरणीय बन जाता है। मुनिश्रीजी ने तेरापंथ धर्मसंघ की देदीप्यमान एवं सुदीर्घजीवी 107 वर्षीय साध्वी बिदामांजी के देवलोकगमन पर उनकी स्मृति में कई रो...
चेन्नई : अभातेयुप के निर्देशन में आगामी 17 सितंबर को एक ही दिन पुरे विश्व में समायोजित होने वाले मेघा ब्लड डोनेशन ड्राइव- अमृत महोत्सव के अन्तर्गत तेरापंथ युवक परिषद, किलपॉक टीम ने केन्द्रीय संसदीय कार्य और सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री, भारत सरकार श्री डॉ एल.मुरुगन से मुलाकात की। किलपॉक तेयुप अध्यक्ष श्री राकेश डोसी, एमबीबीडी संयोजक द्वय उपाध्यक्ष श्री सुयेश सुराणा, उपाध्यक्ष श्री अरुण परमार एवं मंत्री श्री सुनील सकलेचा ने की अहम् शिष्टाचार भेंट कर केन्द्रीय मंत्री को मेघा ब्लड डोनेशन ड्राइव के बारे में जानकारी प्रदान की। मंत्री ने रक्तदान अमृत महोत्सव के कार्य का समर्थन करते हुए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। समाचार सम्प्रेषक : स्वरूप चन्द दाँती
जैन धर्म हा आत्मशुद्धीचा, अहिंसेचा आणि संयमाचा धर्म आहे. या धर्मात आत्मकल्याणासाठी चार महत्त्वाचे आधारस्तंभ सांगितले आहेत – भाव, जप, तप आणि शील. हे चार घटक केवळ आचरणात आणले की, आत्मा पवित्र होतो, कर्मबंधन कमी होते आणि मोक्षमार्ग स्पष्ट होतो. 1. भाव – शुद्ध भावनांचा स्वीकार भाव म्हणजे अंतःकरणातील शुद्ध भावना. चांगले भाव, शुद्ध भाव आणि करुणामय भाव हे आत्मशुद्धीचे पहिले पाऊल आहे. • जैन तत्त्वज्ञान सांगते की, “जसा भाव, तसा भविष्यातील परिणाम”. • वाईट विचार मनात धरले की राग, लोभ, मत्सर वाढतो. परंतु समता, मैत्रीभाव आणि क्षमाशीलता हे शुद्ध भाव मनाला शांत करतात. • भाव म्हणजे आपल्या अंतःकरणातील दृष्टिकोन बदलणे – “जग बदलण्यापूर्वी स्वतःचा भाव शुद्ध करा.” 2. जप – नामस्मरण आणि मंत्र साधना जप म्हणजे परमात्म्याचे, अरिहंतांचे किंवा पंचपरमेष्ठींचे नामस्मरण. • “णमो अरिहंताणं” हा जप आपल्याला अहंकारापासून...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर बैंगलोर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार परम पूज्य डा . श्री वरुण मुनि जी म सा ने शनिवार को धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन बहुत दुर्लभ है। आप यह चिंतन करें कि आपकी ज़िन्दगी का कितना पल सार्थक कार्यों में बीत गया है और कितना पल वर्तमान में यूं ही व्यर्थ में व्यतीत हो रहा है सच्चा साधक वही है जो समय रहते अपनी बची हुई श्वासो को धर्म साधना और अच्छे कार्यों में सदुपयोग करते हुए अपने मानव जीवन को सफल बना लेता है। मुनि श्री ने आगे कहा कि किसी भी कार्य की सफलता उसके किये गये तौर तरीकों पर और अच्छे रुप में की गई कार्य विधि पर निर्भर करता है। चाहे शारीरिक योग हो या आध्यात्मिक जप तप साधना इन सबका प्रतिफल आपके द्वारा की गई व्यवहार , आचरण से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि बिना विधि के कोई भी साधना सफल संपन्न नहीं हो सकती है। विधि गुरु गमय...
जालना : सम्यक दर्शन आखिर म्हणायचं कशाला! प्रभु भगवान महावीरायचे समस्यक दर्शन कसे होते, याचा तरी विचार करायला हवा. पाचवी गाथा ही म्हत्वाची असून तीच आपल्याला तारु शकते. परंतू सम्यक दर्शन आपल्याा घडले पाहिजे, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, दोन अडीच वर्षापूर्वी सुधर्मा स्वामी येथेच होते. परंतू त्यांच्यात एक गुण होता. आणि तो म्हणजे सर्व दोष रहित होते. म्हणजेच ते निर्दोष होते. आत्म्यातही राहणे ते पंसंत करीत असतं. अखीर आत्मासे जुडे कैसे। ये मन बडा विचित्र है। मोहनिया करम हमे गुलाम बना द...
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद, किलपॉक द्वारा 17 सितंबर 2025 को आयोजित होने वाले रक्तदान अमृत महोत्सव 2.0 के बैनर का अनावरण युगप्रधान शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण के विद्वान सुशिष्य मुनिश्री मोहजीतकुमारजी ठाणा 3, के पावन सान्निध्य में भिक्षु निलयम में किया गया। इस अवसर पर तेयुप किलपॉक अध्यक्ष श्री राकेश डोसी, उपाध्यक्ष द्वितीय श्री अरुण परमार, मंत्री श्री सुनील सकलेचा, अभातेयुप से श्री संदीप मुथा, श्री दिलीप गेलडा, बारह व्रत सलाहकार श्री विकास सेठिया, किलपॉक सभाध्यक्ष श्री अशोक परमार, चेन्नई सभा मंत्री श्री गजेंद्र खांटेड, साहूकारपेट ट्रस्ट बोर्ड प्रबंधन्यासी श्री विमल चिप्पड़, माधावरम ट्रस्ट बोर्ड प्रबंधन्यासी श्री घीसुलाल बोहरा, आचार्य महाश्रमण पब्लिक स्कूल चेयरमैन श्री तनसुखलाल नाहर, अणुव्रत समिति चेन्नई मंत्री श्री कुशल बाँठिया, जैन विश्व भारती पंचम...
जालना : दर्शन, ज्ञान, आणि यांचा संगम झालेला आपल्या दिसतो. परंतु या तीन्ही गोष्टी का एकत्र आल्या. याचा विचार करावा, तेवढा असला तरी सुधर्मा स्वामींपासून काही तरी गुण घ्यायला हवेत, अशी त्यांची वाणी होती, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, हिरो- हिरोराईन सारखी स्टाईल आम्हाला चांगली वाटू लागली. पूर्वी साधू- संत आले तर सर्वजण आनंद होतं.त्यांचा तो आनंद गगणात मानवणारा नव्हता. परंतू आता हे सर्व राहिलेले नाही. त्यांचं चरित्र निर्मळ होतं. म्हणून त्यांचा आत्माही शुध्द होता, चांगला होता. हे मन सा...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर, बैंगलोर में चातुर्मासार्थ विराजित, दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार परम पूज्य डॉ . श्री वरुण मुनि जी म. सा. ने को धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति को अपनी सोच हमेशा सकारात्मक पाज़िटिव रखनी चाहिए। क्योंकि कहा गया है कि जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि।हमेशा यह याद रखें कि हमारे दैनिक जीवन व्यवहार में जो हम अपने या दूसरों के बारे में अच्छा – बुरा सोचते हैं उसका प्रभाव आगे चलकर घटित होने की संभावना बनी रहती है। क्योंकि आप जो सोचते हो भावनाये् उन शुभ अशुभ तरंगों को खींचती है। भावना भव नाशिनी। अर्थात् भावना भव का नाश करती है। किसी के साथ शत्रुता रखना, क्लेश करना, द्वेष रखना ये सब पाशविक प्रवृति है। जानवर आपस में लड़ते हैं। तात्पर्य यह है कि द्वेष,कलह आदि दुर्गुण प्रायः पशुओं में पाये जाते हैं। एक गली का श्वान दूसरी गली के कुत्ते से शत्रु भाव रखता है। कलह करत...
आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य में स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित आगम आधारित प्रवचनमाला को आगे बढ़ाते हुए मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने शुक्रवार को फरमाया कि सामायिक बहुत बड़ी साधना है। समुचितपूर्वक, समतापूर्वक एवं विधिपूर्वक करने से एक सामायिक भी आत्म कल्याण में सहायक हो सकती है। सामायिक का मतलब है समभाव यानी समता भाव में रमण करना। सामायिक इंद्रियों की प्रवृत्ति को शांत करती है और उसे अध्यात्म की ओर ले जाती हैं, जिससे हमारा कल्याण होता है। मुनि रमेश कुमार ने कहा कि हमारी इंद्रियां नियंत्रित नहीं होने से यह शत्रु बन जाती हैं। मन विषय-वासनाओं में डूबा रहेगा तो वह कुशल कैसे रह सकता है। मोह-वासनाओं में फंसकर इंद्रियां विवेकशून्य हो जाती हैं तथा इंद्रियों के विषयासक्त रहने पर जीव प्राण तक...