राजेन्द्र भवन चेन्नई विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत प.पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के भव्य वर्षावास का आनंद लीजिए। ~ दूसरे जीवों की सुरक्षा के लिए दया भाव और स्वयं के जीव की सुरक्षा के लिए जयनाभाव, समता भाव, साक्षी भाव ज्ञानी भगवन्तो प्ररूपित किया है। ~ आत्मा की शक्ति से जुड़ने वाला साधक कभी भी उससे दूर नहीं रह सकता। ~ समझदार व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अत्यंत सरलता और सहजता से समझ के समाधान ला सकता है। ~ आत्म बल ही सभी सफलताओं का मूल है। ~ हम हमारे जीवन के दूसरों को देख कर उसे बदलने के लिए प्रबल पराक्रम करें तो हमारे दोषों का नाश होता ही है। ~प. प. प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी महाराजा को आज भी विश्व क...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा.ने बताया कि शास्त्र गुण के चार अधिकारों वांचना, पृच्छना, परावर्तना और अनुप्रेक्षा के बाद पांचवां धर्मोपदेश होता है। शास्त्र सुन लिया, फिर भी व्यक्ति के जीवन में प्रमाद है तो धर्मोपदेश फलीभूत नहीं होता। प्रमाद के विभिन्न प्रकारों की विवेचना करते हुए उन्होंने बताया कि प्रमाद आठ प्रकार के हैं। उसमें प्रथम दो प्रकार संशय व विपर्यास के है। संशय से जीवन भय से ग्रसित रहता है। संशय और जिज्ञासा अलग-अलग है। जानने की पिपासा, वह जिज्ञासा है। अपने मन में हमेशा शंकाएं बनी रहती हैं, चाहे कितना भी सुन लें, वह संशय है। शंकाशील व्यक्ति कभी स्वस्थ नहीं रहता। ज्ञानियों ने ज्ञान पाने के लिए श्रद्धा व युक्ति का मार्ग बताया है। जहां तर्क काम नहीं करता, वहां श्रद्धा होती है। आगम में जो लिखा है, वह ...
अनेकों जिज्ञासाओं का दिया समुचित समाधान Sagevaani.com @चेन्नई; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में धर्मपरिषद् में आज शनिवारीय प्रवचन में धर्म, जीवन से सम्बंधित प्रश्नों का समुचित समाधान देते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि जिस व्यक्ति के भीतर में कभी भी, कहीं भी, परिस्थितियों से जिज्ञासा पैदा होती है। जिज्ञासा उसी के हृदय में पैदा होती है 1. जो मानता है कि अभी मेरे भीतर सम्पूर्ण ज्ञान पैदा नहीं हुआ (अपनी अज्ञानता की खबर है) और 2. ज्ञानी होने के रास्ते की और कदम बढ़ाने की खबर है। जिज्ञासा से वर्तमान स्थिति का पता चलता है कि मेरे भीतर बहुत अभी शंकाएं है, अज्ञानता है, इसी कारण मेरे भीतर प्रश्न पैदा होते है। वही उज्जवल भविष्य के रूप में जिज्ञासा होना इस संकल्प को बताता है कि मु...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया घर में अगर पांच व्यक्ति है तो सभी के ऊपर एक जैसा स्नेह नहीं होता। अगर वैभव हो तो उस पर द्वेश होता है। एक भी संबंध कायम नहीं रहता है। स्नेहराग, दृष्टिराग, कामराग आदि के बारे में समझाया। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने आ शब्द के बारे में बताया। आओ खेल खेले हम सबका नित्त होवे मेल। खेल खेलने में मेल होना जरूरी है। गेंद के खेल के बारे में बताया गया।अरसिकेरे से महिला मंडल का तथा तपस्वी प्रिया मकाणा का स्वागत अध्यक्ष विजयराज चुत्तर, अभिवादन मंत्री हस्तीमल बाफना ने किया।संचालन सुधीर सिंघवी ने किया।
नार्थ टाउन में आचार्य शुभचन्द्रजी मरासा की जन्म जयंती तप त्याग और दया दिवस के रूप में मनाई गई। श्री एस एस जैन संघ नार्थ टाउन के तत्वावधान में पुज्य गुरुदेव जयतिलक मुनिजी म सा के पावन सानिध्य में आचार्य सम्राट शुभचन्द्रजी मरासा की जन्म जयंती आज दिनांक 29 जुलाई शनिवार को तप त्याग और दीक्षा दिवस के रूप में मनाई गई। सर्वप्रथम अध्यक्ष अशोक कोठारी ने सभी का स्वागत किया। तत्पश्चात महिला मण्डल द्वारा शुभचन्द्रजी मरासा के बारे में गीत प्रस्तुत किया। जयमल श्रावक संघ के अध्यक्ष पारसमल गादिया ने आचार्य प्रवर के जीवन पर प्रकाश डाला। महिला मण्डल सचिव ममता कोठारी ने शुभचन्द्रजी पर भजन गाया। कार्यकारिणी सदस्य ज्ञानचंद कोठारी ने आचार्य शुभचंद्र जी के जीवन पर संबोधित करते हुए कहा कि वे सर्वसंप्रदाय व समुदाय के लोगों के बीच विशेष श्रद्धा एवं अनन्य आस्था के केंद्र थे। आचार्य का जीवन सरलता, सादगी और संयम का ...
Sagevaani.com @चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ के तत्वावधान में आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि सत्य का मार्ग मोक्ष की ओर ले जाता है। सत्य कड़वा अवश्य होता है, सत्य बोलने वालों को कष्ट भोगने पड़ते हैं लेकिन एक दिन वह व्यक्ति अन्य व्यक्तियों को पीछे छोड़कर काफी आगे निकल जाता है। सत्य का मार्ग जीवन जीने का आधार है। उन्होंने कहा कि जब जीवन की एक सांस का भरोसा नहीं है तब भी मनुष्य छल, कपट कर लोगों के दिलों को दुखाकर हवेली बनवा रहे हैं। भौतिक सुख प्राप्त करने के लिए सत्य सुख शान्ति का मर्म भी नहीं समझ रहे, जीवन के अंत का भी अहसास नहीं कर रहे हो, सच्चा सुख तो केवल परमात्मा की शरण है। जिस प्रकार इस नश्वर शरीर में रोग लग जाने के उपरांत चिकित्सक से परामर्श लेना पड़ता है, ठीक उसी प्रकार जीवन को रोग से बचाने के लिए ईश्वर का...
दिवाकर भवन पर जप तप आराधना के साथ विभिन्न धार्मिक गतिविधीयो के साथ पाँच माह का चातुर्मास गतिमान है। प्रतिदिन नवकार आराधक श्रावक श्राविकाओ के साथ ज्ञान जिज्ञासु महानुभव प्रवचनो की श्रंखला के माध्यम से जिनवाणी का श्रवण कर रहे है। प्रवचनो के माध्यम से प्रखर वक्ता मेवाड़ गोरव पुज्यश्री रविन्द्रमुनि जी म सा “नीरज” ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि सुख दु:ख जीवन के दो पहलू हैं जीवन में सुख आया है तो दु:ख भी आएगा। दु:ख के समय में अपने आप को नियंत्रित करते हुए धर्म से जोड़े। दु:ख से घबराए नहीं दु:ख का स्वागत करें, यदि दुख में हम संयमित रहते हुए जीवन जिएंगे तो दुख की अनुभूति नहीं होगी। दुख ही जीवन का अभिन्न अंग है यह तो कल युग चल रहा है सतयुग होते हुए भी प्रभु श्रीराम को द्वापर युग में श्री कृष्ण भगवान को एवं सभी तीर्थंकर भगवान हो को भी अतिशय सहन करना पड़ा तो फिर आप और हम तो सामा...
महान तपस्वी साध्वी पूनमश्री जी की सिद्धि आराधना 3 अगस्त को होगी पूर्ण होगी। 44 दिन में 36 दिन निराहार रहेंगी साध्वी जी। उनकी अनुमोदना 61 भाई-बहन करेंगे एक दिन से पांच दिन का उपवास। Sagevaani.com @शिवपुरी। शिवपुरी में चातुर्मास कर रहीं प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज की सुशिष्या साध्वी पूनमश्री जी के सिद्धि तप की आराधना 3 अगस्त को पूर्ण होने जा रही है। उनकी कठोर तपस्या की अनुमोदना में श्वेताम्बर जैन श्रीसंघ के 61 भाई-बहन की नवकार महामंत्र तप आराधना 30 जुलाई से शुरू होने जा रही है। साध्वी पूनमश्री जी और श्रावक श्राविकाओं की तप आराधना से शिवपुरी जैन समाज में अपार उत्साह का वातावरण है और उनकी तपस्या की अनुमोदना करने के लिए देश के विभिन्न भागों से धर्मावलंबी 3 अगस्त को शिवपुरी पधार कर साध्वी पूनमश्री जी को गुणानुवाद सभा में शामिल होंगे। श्वेताम्बर जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष राजेश कोचेटा औ...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैं। बंधुओं जैसे कि आज गुरूर्णिमा ने फरमाया कि गौतम स्वामी ने भगवान महावीर जी प्रश्न किया सबसे बड़ा स्टेशन कौन सा है? स्टेशन दो है, एक तो निगोद का एवं दूसरा स्टेशन सिद्ध शिला निगोद का स्टेशन दुख देने वाला है। सिद्ध शिला का स्टेशन मुक्ति की तरफ ले जाने वाला है नि गोद में भी कोई भी जीव जा सकता है।जैसे कि पूर्वधारी भी कषाय की वजह से राग द्वेष की वजह सेनिगोद में जा सकता। सिद्धशिला स्टेशन पर जाने के लिए भी अनेक तकलीफ सहन करनी पड़ती है तो ही मुक्ति का मार्ग मिलता है 24 तीर्थंकर ओने कितने दुख सहन किए तब जाकर मोक्ष मिला। जैसे कि मरू देवि का जी भी निगोद से निकलकर ही मनुष्य भव में आया पहले केले के पत्ते मैं 1000 वर्...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैं। बंधुओं जैसे कि जीवन में खुश रहने का पहला सूत्र अपने दिन की शुरुआत मुस्कान के साथ करें जेब में भले ही न मोबाइल पर चेहरे पर जरूर रखिए स्माइल मुस्कुराने में कैसी कंजूसी। दुकान खोलना बाद में पहले मुस्कुराना शाम को जब लोट कर आते हैं तो भी पहले सीढ़ियां पर खड़े होकर मुस्कुराना चाहिए। खुशी कोई आसमान से टपक कर नहीं आती और ना ही सती सीता की तरह जमीन फाड़कर बाहर आती है। खुशी तो हमारे मन का फैसला है फिर जीवन में चाहे उलज्जन आए। परंतु सदा खुश रहना चाहिए खुश रहना ईश्वर की सबसे बड़ी सेवा है। विपरीत वातावरण बनने पर भी गुस्सा नहीं करना चाहिए हमेशा ही मुस्कुराना चाहिए। क्या या प्रभु भक्ति से कम है पूरे दिन 1 घंटे में ट...
उन्होंने बताया कि होश और विवेक से जीवन जीना धर्म है Sagevaani.com @शिवपुरी। हम सांसारिक प्राणियों का धर्म से नाता सीमाओं में बंधा रहता है। 24 घंटे में एक घंटा धर्म कर लिया, मंदिर चले गए, पूजा पाठ कर लिया, आरती कर ली, सामयिक और प्रतिक्रमण कर लिया तो हम आपने आपको धार्मिक समझकर संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन मानव जीवन की सार्थकता आपके धार्मिक होने में नहीं, बल्कि आपके धर्मात्मा होने में है। 24 घंटे चाहे आप सांस ले रहे हों, चल रहे हों, फिर रहे हों, बैठ रहे हों, सो रहे हों, खा रहे हों हर क्रिया में धर्म की झलक होनी चाहिए। धर्म अर्थात् होश, धर्म अर्थात् विवेक, धर्म अर्थात् यतनापूर्वक हर कार्य करना। यदि ऐसा हुआ तभी आप धर्मात्मा हैं और धर्मात्मा होना ही मानव जीवन की सार्थकता है। उक्त प्रेरणास्पद उद्गार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने स्थानीय पोषद भवन में आयोजित एक विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए...
🏰☔ *साक्षात्कार वर्षावास* ☔🏰 *ता :28/7/2023 शुक्रवार* श्री राजेन्द्र भवन, चेन्नई में विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, उग्र विहारी प. पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के भव्य वर्षावास के प्रवचन का आनंद लीजिए। ~ हमारी साधना करने के बाद यदि विराधना का नाश होता है तो ही हमारी साधना मोक्ष देने वाली होती है। ~ संघ और शासन रक्षा वो परम अमृत है कि उसके पीने से साधक की संयम रक्षा और जीव रक्षा भी बलवान बनती है। ~ हमारा जितना तन, मन, धन, लोगों की, समाज की, शासन की सेवा में समर्पित होता है वह जीवन को देवता भी वंदना करते हैं। ~ जो मानव तन और मन से बलवान, सामर्थ्य वान, ऊर्जावान है वही धर्म की, समाज की, राष्ट्र की सुरक्षा कर सकता...