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खुश रहने के लिए किसी अच्छे दिन का इंतजार न करें, इसी क्षण खुश हो जाएं : देवेंद्रसागरसूरि

नोर्थटाउन जैन संघ में रविवारीय शिविर का आयोजन  श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी पूज्य मुनि श्री महापद्मसागरजी की निश्रा में रविवारीय शिविर का आयोजन हुआ, शा मफतलालजी कपूरचंदजी परिवार ने शिविर का लाभ लिया। शिविर के तहत आचार्य श्री ने जो हुआ अच्छा हुआ विषय के ऊपर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि खुश रहने के लिए कुछ पाने की दरकार नहीं होती। अपने जीवन में खुशियां लाने के लिए दूसरों से तुलना छोड़कर हर परिस्थिति में वर्तमान का आनंद लेना होगा। ज़्यादातर लोग ऐसा सोचते है की पैसा रहेगा, तो खुशी अपने आप आ जाएगी, पर सच यह है कि यह पूरी तरह सही नहीं है। धन- संपदा आने के बाद भी खुशी नहीं आ पाती। अगर पैसे से ही खुशी खरीदी जा सकती तो डिप्रेशन को अमीरों की बीमारी नहीं कहा जाता। दुख की वजह दरअसल, ज्यादातर लोग इसलिए दुखी रहते हैं, क्योंकि उनका...

मोक्ष हमारी मुट्ठी में है: प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा.

 श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया एक छोटा सा नियम लेते हैं तो उसका श्रद्धा के साथ पालन करना चाहिए प्राण जाए मगर प्रण नहीं जाए। नियम गुरु मुख से लेना है उसका सम्यक प्रकार से पालन करना है तो मोक्ष हमारी मुट्ठी में है। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने पानी का सदुपयोग कैसा करें उसको दिव्य औषधी कैसे बनाएं, दिव्य अमृत कैसे बनाएं इसके बारे में सभा में बताया। बच्चों की पाठशाला में संस्कार दिए। चंद्रकांत सकलेचा एवं सुधीर सिंघवी उपस्थित रहे। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने संचालन किया।

संसार में हर वस्तु का अपना एक स्वभाव है: रवीन्द्र मुनि नीरज म.सा.

दिवाकर भवन पर चातुर्मास हेतु विराजीत मेवाड़ गौरव, प्रखरवक्त्ता, प्रवचनकार रवीन्द्र मुनि नीरज म.सा. ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए धर्म की विशेषता बताते हुए कहां की वस्तु सहवो धम्मों वस्तु का स्वभाव वही धर्म है संसार में हर वस्तु का अपना एक स्वभाव है। इस संसार में आदमी ही ऐसा व्यक्ति है जिसके अलग-अलग स्वभाव है वह कभी कड़वास से जीता है, कभी मिठास में जीता है, कभी गर्म तो कभी ठंडा हो जाता है लेकिन परमात्मा ने कहा कि आदमी को अपनी सही स्वभाव में जीना चाहिए उन्होंने धर्म की विशेषता बताते हुए कहा कि व्यक्ति बचपन से लेकर बूढ़ा हो जाता है वह हर चीज से जुड़ता है हर कार्य को करता है लेकिन धर्म में जुड़ने में विलंब कर देता है। अपने बच्चों में धर्म के संस्कार डालते हुए उन्हें केवल सुख में ही नहीं दुख में भी जीना सिखाए यदि बच्चों को दुख में जीना आ जाएगा तो वह जीवन के हर क्षेत्र में अपने कर्तव्य का पालन...

सुभाष रांका रजत प्रीमियर लीग फाइनल्स यंगस्टर्स ने जीता 

राजस्थानी एसोसिएशन तमिलनाडु द्वारा सुभाष रांका रजत प्रीमियर लीग का फाइनल 30 जुलाई 2023, रविवार को सुबह 8 बजे से चेटपेट स्थित यूनिवर्सिटी यूनियन ग्राउंड्स में आयोजित किया गया। फाइनल मुकाबला यंगस्टर्स क्रिकेट क्लब तथा मेटा के बीच खेला गया। कड़ी स्पर्धा के बाद यंगस्टर्स ने 14 रनों से मेटा को हराकर जीत हासिल की। साथ‌ ही आज फ्रेन्डसिप डे के उपलक्ष्य में रजत के पदाधिकारीयों के बीच प्रेसिडेंट 11 और चेयरमैन 11 के बीच 6 ओवर का मेच खेला गया। जिसमें चेयरमैन 11 ने जीत हासिल की। पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि पुलिस उपायुक्त, आईपीएस ‌श्री समय सिंह मीना तथा विशेष अतिथि कला एवं संगीत में डॉक्टरेट डॉ छवि कालरा पधारें। राधेश्याम मूँधड़ा तथा कांता बीसानी द्वारा प्रार्थना के पश्चात अध्यक्ष मोहनलाल बजाज ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। ओलंपियाड चेयरमैन अशोक कुमार जे मूंदड़ा ने खेल महोत्सव के बारे में जानका...

निखिलजी कांकरिया ने रविवारीय सामूहिक सामायिक में “सेवा से सिद्धि” विषय पर विशेष उदबोधन दिया 

रविवार 30 जुलाई 2023 को श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ,तमिलनाडु के तत्वावधान में स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में रविवारीय सामूहिक सामायिक में युवा स्वाध्यायी रत्न श्री निखिलजी कांकरिया द्वारा ” सेवा से सिद्धि ” विषय विशेष उदबोधन हुआ। स्वाध्याय भवन साहूकारपेट चेन्नई में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के तत्वावधान में वीर पौत्र युवा स्वाध्यायी रत्न श्री निखिलजी कांकरिया ने रविवारीय सामूहिक सामायिक में “सेवा से सिद्धि” विषय पर विशेष उदबोधन देते हुए कहा कि चरित्र आत्मा हो या श्रावक जब स्वाध्याय या तप करने की इच्छा हो अवसर हो पर उस समय अगर सेवा का कार्य हो तो सेवा को प्रमुखता दी जानी चाहिए | सेवा के तीन श्रेणियों को बताते हुए कहा कि जघन्य सेवा वो हैं कि मन में भाव रखना कि मैं सेवा करूँगा मेरी भी कोई सेवा करेगा | मध्यम सेवा की श्रेणी में कर्तव्य भाव से क...

Sagevaani.com @रायपुर. टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में रविवार को धन वर्षा हुई थी। मौका था सैकड़ों गौतम लब्धि कलश में बीते डेढ़ साल से जमा हो रही दान की रकम को इकट्ठा करने का। इन पैसों से अब समाज के जरूरतमंदों की शिक्षा, इलाज, रोजगार में मदद की जाएगी। दान का ये महानुष्ठान उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने संपन्न कराया। रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने कार्यक्रम में बोलियां लगवाईं। इस दौरान पूर्व मंत्री राजेश मूणत बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। पटवा ने बताया कि डेढ़ साल पहले प्रवीण ऋषि जब रायपुर आए थे, उन्होंने तभी समाज के घरों में गौतम लब्धि कलश की स्थापना कराई थी। अब जब वे चातुर्मास के लिए रायपुर आए हैं तो रविवार को उनकी मौजूदगी में ही कलश खोले गए। इनसे बड़ी धन राशि इकट्ठी हो गई है। इसे अब समाज के लोगों की भलाई में खर्च किया जाएगा। कार्यक्रम में रायपुर के अलावा आसपास के शहरों से भी ब...

भारतीय संस्कृति तप त्याग प्रधान: वनिता श्री श्रीमाल

   वनिता श्री श्रीमाल ने लिए मास खमण के प्रत्याख्यान श्री एस.एस.जैन संघ माम्बलम के तत्वावधान में चातुर्मासार्थ विराजित पूज्य श्री वीरेन्द्रमुनिजी म.सा. ने रविवारीय धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि तप एक दिग्दर्शन है। भारतीय जैन श्रमण संस्कृति तप -त्याग प्रधान रही हैं। प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव से लेकर चरम तीर्थंकर महावीर स्वामी ने स्वयं दीर्घ तपस्चर्या की एवं प्राणी मात्र को तप त्याग करने की प्रेरणा दी। जिस प्रकार सोना तपकर कुन्दन हो जाता हैं ठीक उसी प्रकार अनन्त आत्माओ ने दीर्घ तप धारण कर केवल ज्ञान -केवल दर्शन को प्राप्त किया। मुनिश्री ने श्रावक के 12 व्रतों में सातवें व्रत के अंतर्गत 26 बोलों का विवेचन किया।        संघ अध्यक्ष डॉ एम. उत्तमचन्द गोठी ने बहन वनिता श्री श्रीमाल के मास खमण तप की माम्बलम संघ से अनुमोदना करते हुए बताया कि जैन दर्शन में 12 प्रकार के तप बताए गए हैं। जिसमे छः बाह्य...

धर्म मे पुरुषार्थ करो पुण्यवाणी बढ़ाओ: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में पुज्य गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि जिनवाणी कहती है श्रावक संसारिक लौकिक अपेक्षा से अमीर-गरीब दो प्रकार के होते है। जिसका आधार व्यापार है । व्यापार में सफल अमीरी को व्यापार में सफलता और असफल गरीबी को प्राप्त करता है पुण्यवानी से ही लौकिक कार्य में सफल होते है। संसार के सारे उत्तम पदार्थ पुण्यवाणी से प्राप्त होते हैं। पुण्यवाणी बढ़ाने के लिए जीव को चार बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1) नास्तिक की संगत मत करो, क्योंकि जो श्रद्धा से रहित है भगवान व जिनवाणी को नहीं मानता वह न स्वयं सफल होता है और न वह दूसरो को पाप में रमण करता है। वो दूसरो को भी धर्म से दूर ले जाकर व्यसनी बना पुण्यवाणी का नाश कर देता है। ऐसा नास्तिक बंजर भूमि के समान होता है। नास्तिक मिथ्यात्वी होता है । मिथ्या तत्व सभी पापो का पाप है। ज्ञानीजन कहते है कि पुण्यवाणी यदि बढ़ानी है तो नास्तिक से दूर रहो श...

मेवाड़ महिला मंडल मुंबई के 2023 के अधिवेशन के लिए उपसंघ भाईंदर में बोलियों का ठाठ

गुरु अंबेश सौभाग्य मदन , गुरुणीमैया प्रेम के आशीर्वाद व मेवाड़ उपप्रवर्तक सेवाभावी गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी म.सा.,व मेवाड़ उपप्रवर्तनी, वर्षीतप आराधिका श्री विजयप्रभा जी म.सा. आदि ठाणा की प्रेरणा से श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन मेवाड़ महिला मंडल मुंबई द्बारा उपसंघ भाईंदर में उपप्रवर्तनी संथारा प्रेरिका पू.श्री सत्य साधना जी म.सा आदि ठाणा सात के सानिध्य में अधिवेशन की बोलियां व धर्म पहेली पुंज कार्यक्रम रखा गया। 7 अक्टूबर 2023 को ओस्तवाल बगीची़ भायंदर ईस्ट में मेवाड़ महिला मंडल मुंबई अध्यक्षा कंचन एस. सिंघवी व महामंत्री कंचन एल. सिंघवी के नेतृत्व में भव्य महिला अधिवेशन होने जा रहा है। जिसका बोलियों का आयोजन कल भाईंदर उपसंघ में किया गया। भाइंदर मंडल नकी बहनों ने मंगलाचरण व स्वागत गीत प्रस्तुत किया। जिसमें पूरे मुंबई के 35 उपमंडलों ने भाग लिया। जिसमें लगभग हजार से अधिक बहनों ने शिरकत की। बहनो...

मनुष्य कि भक्ति मे शक्ति होगी तो जीते जी भगवान के दर्शन कर सकता है: साध्वी धर्मप्रभा 

Sagevaani.com @चैन्नाई ।भक्ति हमारी सच्ची है तो जीते जी हो जाएंगे हमें भगवान के दर्शन। श्री एस.एस. जैन संघ साहूकार पेठ के जैन भवन मे रविवार को विषेश धर्मसभा मे भक्ति की शक्ति का महत्व बताते हुए महासाध्वी धर्मप्रभा ने हजारों श्रध्दालूओ से कहा कि नृसिंहजी ने सामान्य मनुष्य का जीवन जीते हुए श्री कृष्ण को प्राप्त कर लिया। उन्होंने अपनी भक्ति से भगवान को प्रसन्न कर प्रभु के दर्शन कर लिए। हम भी भगवान के दर्शन मनुष्य शरीर में रहते हुए कर सकते हैं। नृसिंह जी बचपन से ही गूंगे और बहरे थे। किसी संत ने उन्हें मंत्र दिया। उसका जप करने से उन्हें श्रवण शक्ति के साथ बोलने की शक्ति भी प्राप्त हो गई।तो नृसिंह जी ने अपना जीवन श्री कृष्ण कि भक्ति मे लगा दिया।शक्ति से भक्ति होती हैं।भक्ति में शक्ति होती हैं,यह बात अगर मनुष्य के समझ मे आ जाए और मनुष्य परमात्मा की भक्ति मे लीन हो जाए, तो जीते जी परमात्मा के दर्श...

मन के साथ इंद्रियों के विषय के कारण ही द्वंद्व शुरू हो जाता है: आचार्य उदयप्रभ सूरी

किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने ध्यान क्रिया में प्रवेश करने के लिए पांच गुण बताए। वे हैं वैराग्य, तत्वज्ञान, निर्ग्रंथता, मन को वश में करना और परिषह को जीतना। ध्यान में एकाग्रता के साथ निर्मलता मिल जाए तो केवलज्ञान भी मिल जाता है। हम शब्दों से लोगों के साथ, ज्ञान से ज्ञानी के साथ और ध्यान से आत्मा के साथ बात कर सकते हैं। ध्यान लाने के लिए भावनात्मक विचार लाने ही पड़ेंगे। ध्यान के तीन साधन है अंतःकरण, बाह्यकरण और परमात्म साधन। अंत:करण के साथ बाह्यकरण से बात करना ध्यान है। शब्द इंद्रियों का धर्म है जबकि ध्यान चिंतन व मन का धर्म है। सही या गलत है, यह बोलना आत्मा का धर्म है। उन्होंने कहा मन व बुद्धि में भी फर्क है। मति, बुद्धि, प्रज्ञा, स्मृति समान अर्थ वाले हैं। मन इनसे हटकर है। मन एक है, जो विचारों की आपूर्ति...

सहनशीलता की साक्षात मूर्ति है मां: डॉ.वैभवरत्नविजयजी म.सा.

 श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई में श्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत प.पू. युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ.वैभवरत्नविजयजी म.सा.के भव्य वर्षावास चल रहा है।    ~ संपूर्ण विश्व का हित करने वाले ऐसे तीर्थंकर प्रभु, गणधर भगवान, मुनि भगवान, चक्रवर्ती, महान नेता, शूरवीर, दानवीर, को जन्म देने वाली श्रेष्ठ तत्व है मां। ~ भारत देश में मुगलों एमजेने, अंग्रेजों ने, पुर्तगाल ने, आक्रमण किया और उसके सामने लड़कर जीतने का बल देने वाला कोई है तो मां-बाप और उनके संस्कार। ~ मां और बाप के लिए संतान जैसी भी हो जहां भी हो स्वीकार कर सकते हैं तो बेटे बेटी को भी उनके स्वभाव का पूर्ण स्वीकार करना ही चाहिए। ~ स्वयं को दुख दर्द पीड़ा सहन करने के बाद भी अपने संतानों को सुख शांति समता समाधि ...

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