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तीरथ दो प्रकार के होते हैं: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य  साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य  साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैं। उन्होंने बताया कि जिन शासन में तीरथ की स्थापना अरिहंतो ने की है। जिसमें साधु साध्वी श्रावक श्राविका रूपी चार तीरथ तीरथ दो प्रकार के होते हैं।  पहला जड़ तीर्थ दूसरा चेतन तीर्थ जड़ तीरथ जहां महापुरुषों के जन्मदिन का केवल व निर्माण कल्याणक हुए उन तीनों को पवित्र मानकर क्षेत्र में जाकर भक्ति भाव से उन महापुरुषों का स्तुति करने की भावना करना है। समय आने पर सतगुरु का सत्संग मिलता है महापुरुषों का मिलता है।  तो वह साधक अनादिकाल के मित्थात्वको तोड़कर जड में प्रवेश करता है। वहां से संसार यात्रा मार्ग में प्रवेश करती है उस वितराग यात्रा की प्राप्ति होती है। जैन आगम में वर्णन आता है कि जो साधक जीव व जीव अजीव के ...

मृत्यु कौनसे भावों में आ सकती है, वह हमारे हाथ में है: आचार्य उदयप्रभ सूरी

Sagevaani.com @चेन्नई किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने प्रवचन में मन का दमन करने के लिए इन्द्रियों का दमन और इंद्रियों का दमन करने के लिए विषयों का दमन करने का मार्ग बताया। हमारे हाथ में मन, इंद्रियों, विषय और आत्मा में से क्या है? इन चारों में बाह्य वस्तु केवल एक है, वह विषय है। हर कोई आत्मनियंत्रण करना चाहता है, परमात्म तत्व को पाना चाहता है। संसार का परम सत्य मृत्यु है और परमात्म तत्व पाने का परम सत्य मोक्ष है। महोपाध्यायश्री ने कहा वज्र के घर में भी घुस जा या यमराज के सामने गिड़गिड़ा भी ले, परंतु मृत्यु तो अवश्यंभावी है। यदि संसार छोड़ना है तो मृत्यु के साथ कई प्रश्न खड़े हो जाते हैं जैसे कहां मरना है, कैसे मरना है, कौनसे भावों में मरना है या कब मरना है? हर किसी को ये प्रश्न पूछने पर जवाब मिलेगा मुझे गुरु...

जैन समाज की सेवा व सहायता के लिए देशभर से जुटेंगे प्रतिनिधि

5 और 6 अगस्त को देशभर से जुटेंगे 200 प्रतिनिधि टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में गौतम निधि लब्धि कलश का राष्ट्रीय अधिवेशन Sagevaani.com @रायपुर. जैन समाज की सेवा और शिक्षा में मदद करने उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि देशभर में गौतम निधि लब्धि कलश की स्थापना करवा रहे हैं। डेढ़ साल पहले उन्होंने रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में इसकी स्थापना कराई थी। इसी हफ्ते दान में मिली राशि टैगाेर नगर स्थित श्री लालगंगा पटवा भवन में इकट्ठी की गई थी। इन पैसों से अब समाज के जरूरतमंदों की मदद की जाएगी। इसी कड़ी में 5 और 6 अगस्त को राजधानी में गौतम निधि लब्धि कलश की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है। गौतम निधि लब्धि कलश रायपुर के प्रमुख कमल पटवा ने बताया कि इस बैठक में 200 से ज्यादा प्रतिनिधि जुटेंगे। इस दौरान उन्हें कलश स्थापना की प्रक्रिया के साथ यह भी बताया जाएगा कि दान में मिली राशि का किस तरह इस...

ऋषभ देव भगवान के पुत्र- भरत चक्रवर्ती और बाहुबली थे: वीरेन्द्र मुनिजी

ऋषभ देव भगवान के पुत्र- भरत चक्रवर्ती और बाहुबली थे। भरत चक्रवर्ती को चक्रवती पद पाने के लिये छोटे भाई बाहुबली को हराना जरूरी था। इसके लिये दोनो में युद्ध हुआ। बाहुबली हर युद्ध जीतते गये। आखिर में जब बाहुबली जीतने वाले थे उन्होंने अपना विचार बदल लिया और भरत को जीताकर खुद मुनि बनकर सन्यास ले लिये। मुनिवर ने पन्द्रह कमदान का वर्णन किया। इनसे आवको को दूर रहना चाहिये। जैसे Factory लगाने से अनंत काय जीवो की हिंसा होती हैं। इस प्रकार के व्यापार श्रावको को नहीं करना चाहिये।

सोच समझ कर करे समय का उपयोग: गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी

समय की बहुमूल्यता को पहचान, धर्म जागरणा में बिताने की दी प्रेरणा Sagevaan.com @चेन्नई: श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी, चेन्नई में शासनोत्कर्ष वर्षावास में गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म.सा ने उत्तराध्यन सूत्र के चौथे अध्याय के विवेचन में धर्म परिषद् को सम्बोधित करते हुए कहा कि सभी को मालूम है कि मुझे जाना है लेकिन कब जाना है किसी को मालूम नहीं है। हम कब विदा हो जायेंगे, कोई मालूम नहीं अतः धर्म करते समय यह ध्यान रखें कि जो काम कल करना है, उसे आज करले और आज को अभी कर ले। संसार के कार्यों में आज के कार्यों को कल पर छोड़ देना चाहिए। अत: धर्म पहले, संसार बाद में। आत्म कार्य के लिए, अध्यात्म के लिए कभी भी प्रमाद नहीं करना चाहिए। जैसे किसी को जीवन के मात्र एक ही गाड़ी चाहे वो किमती हो, मिलती है तो उसका वह सावधानी पूर्वक...

वन बंधु परिषद का भव्य आयोजन

वन बंधु परिषद का भव्य आयोजन कृष्णोत्सव आज संपन्न हुआ। दीप प्रज्वलित कर मुख्य अतिथि श्री एन कुमार सन्मार्ग ग्रुप के चेयरमैन, सम्मानित अतिथि इस्कॉन के श्री रामचरण दास जी एवं एकल के अधिकारियों ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।  चेन्नई इकाई के अध्यक्ष प्रवीण टाटिया ने सभी का स्वागत किया , शिवकुमार गोयंका कार्यक्रम के चेयरमैन ने सभी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए स्वागत, धन्यवाद दिया। सचिव गिरी बागडी ने संपूर्ण भारत में एकल के अद्भुत कार्य का परिचय चलचित्र के माध्यम से सभा को और द्वारा प्रकाश ध्वनि दृश्य मंच में प्रस्तुत किया । तमिलनाडु प्रदेश के एकल विद्यालय से संपूर्ण कार्यकर्ता, शिक्षिका, प्रभारी सभी का मंच पर सम्मानित। मुख्य अतिथि एन कुमार ने एवं सम्मानित अतिथि राम चरण दास जी इस अविस्मरणीय कार्य कि अंतर हृदय से सराहना की। स्मृति चिन्ह और माला द्वारा सभी दानदाताओं का अभिवादन किया, जिनके माध्यम...

शरीर को नहीं आत्मा को संवारलो परमात्मा मिल जाएंगे: साध्वी धर्मप्रभा

Sagevaani.com @ चैन्नाई। मनुष्य शरीर को संवारता है, आत्मा को नही । बुधवार साहूकार पेठ के मरूधर केसरी दरबार मे महासाध्वी धर्मप्रभा ने श्रध्दालुओं को धर्म उपदेश देतें हुए कहा कि मानव जीवन बार -बार नही मिलता है। लेकिन मनुष्य खाना-पीना ओर दौलत कमाने को ही जिंदगी का सुख समझकर आत्मा के सुख को भुल गया है। इंसान मेहनत करता है,परन्तु आत्मा के लिये नही करता है। मनुष्य के पास समय कम है। लेकिन मनुष्य कि इच्छाएं ओर लालसाएं कम नही होती है बल्कि बढ़ती ही जाती है, इस संसार मे अब ऐसा कौई प्राणी पैदा नही हुआ जो मरने के बाद भी अपने साथ धन दौलत शोहरत को लेकर गया हो। इंसान दुनिया मे खाली हांथ आया था ओर खाली हांथ ही संसार से जाने वाला है। समय रहते मनुष्य समय को साध लेगा तो आत्मा को संवार सकता है । वरना अंत समय मे उसे पछताना पड़ेगा। क्योंकि मनुष्य भव बार – बार नही मिलने वाला है। आत्मा को सुख तभी मिल सकता है ...

जीवन में मान पाने के लिए नहीं देने के लिए होता है: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं वह इस प्रकार हैंl बंधुओं याद रखिए जीवन में मान पाने के लिए नहीं देने के लिए होता हैl इसे औरों को दे कर खुश हुई है जीवन में सम्मान पाने की कोशिश करेंl जो व्यक्ति सम्मान पाने की ख्वाहिश रखता है वही अपमानित होता हैl जिसके भीतर सम्मान पाने की आकांक्षा नहीं है वह कभी अपमानित नहीं हो सकताl आप कितने भी महान क्यों न हो लेकिन छोटे से छोटे व्यक्ति का अभिमान करना सीखिए अगर आप किससे मीटिंग में बैठ कर बैठे हैं और एक अदना सा व्यक्ति किसी संस्था या संगठन का अध्यक्ष या मंत्री है लेकिन वह तो आपका कर्तव्य है आप खड़े होकर उसका सम्मान करेंl ऐसा करके आप जो भी आपके द्वार पर आए उसे सम्मान देl फिर चाहे वह आपका शत्रु ही क्यों ना हो फ्रांस के सम...

मैंने बुराई छोड़ दी कहने से काम नहीं चलेगा, आत्मनिंदा करना भी जरुरी है: प्रवीण ऋषि

टैगोर नगर के श्रीलालगंगा पटवा भवन में प्रवीण ऋषि के प्रवचन  Sagevaani.com @रायपुर. हम बुराई छोड़ने का संकल्प लेते हैं। दो, चार, छह दिन उस काम को नहीं करते। फिर दुनियाभर में हांकते हैं कि मैंने बुराई का त्याग कर दिया। लेकिन, कुछ दिन बाद दोबारा उसी गड्ढ़े में गिर जाते हैं। पता है ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए क्योंकि आपने उस बुराई से कुछ समय के लिए संबंध तोड़ा है। समय मिलते ही फिर जुड़ जाएंगे। अगर वास्तव में किसी बुराई का त्याग करना है तो निंदामि की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। यानी अपनी बुराइयों की निंदा करनी पड़ेगी। स्वीकार करना होगा कि वह बुराई कितनी गलत है। टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में बुधवार को उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने ये बातें कही। उन्होंने कहा बताया, एक बार इंद्रभूति गौतम ने महावीर स्वामी से पूछा कि सामायिक समय कोई व्यक्ति अपने सारे गहने निकालकर एक तर...

सेवा और भक्ति मे स्वार्थ नही होगा, तभी सुफल प्राप्त होगा: साध्वी प्रितीसुधा 

आयंबिल तप और गुणगान से मनाएंगे आचार्य आनन्द ऋषि की जन्मजयंती अहिंसा भवन के तत्वावधान में  Sahevaani.com @भीलवाड़ा सेवा वही व्यक्ति कर सकता है जिससे स्वार्थ की भावना नहीं छुपी होगी । बुधवार को अहिंसा भवन शास्त्री नगर मे साध्वी प्रितीसुधा ने सैकड़ों श्रध्दालुओं को प्रवचन में धर्मसंदेश देतें हुए कहा कि आज मनुष्य भगवान की भक्ति भी करता है तो ईश्वर से कुछ प्राप्त करने केलिए। चाहे भक्ति हो या सेवा निस्वार्थ भावों से करोगे तभी फल मिलेगा। परमात्मा के प्रति निष्काम प्रेम ही सच्ची सेवा भक्ति है। सेवा मे समर्पण नही होगा तो.वह सेवा नही कहलाती है । समर्पित भाव से की जाने वाली सेवा कभी निष्फल नहीं जाती है। सेवा सभी करो मगर आशा किसी से मत रखना क्योंकि सेवा का फल भगवान ही दे सकता है इंसान नही दे पाएगा। साध्वी संयम सुधा ने कहा कि सेवा कामयाबी का मूल मंत्र है जो मानव को सच्चा मानव बना सकती है अगर सेवा निस्वार...

विनम्र व्यक्ति हर जगह सम्मान प्राप्त करता है : देवेंद्रसागरसूरि

Sagevaani.com @चेन्नई. श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन मूर्तिपूजक जैन संघ में धर्म प्रवचन देते हुए आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि दूसरों के बारे में निस्वार्थ भाव से सोचना एक ऐसा गुण है जिसकी हर कोई सराहना करता है। अच्छे शिष्टाचार वे मानदंड हैं जो उस समाज द्वारा निर्धारित और स्वीकार किए जाते हैं जिसमें हम रहते हैं। यदि हम एक सदाचारी मानव कहलाना चाहते हैं तो ये वे सिद्धांत हैं जिनका हमें धार्मिक रूप से पालन करना होगा। दूसरों से विनम्रता से बात करना बुनियादी सिद्धांतों में से एक है जो अकेले ही दूसरों पर अच्छा प्रभाव डाल सकता है।एक बुद्धिमान व्यक्ति अपनी सत्यनिष्ठा के लिए जाना जाता है और उसका एक सम्मानित व्यक्तित्व होता है। वह प्रसिद्ध हैं क्योंकि उन्हें अपने बड़ों का सम्मान करने और उनका ठीक से अभिवादन करने की आदत है। अन्य लोग भी उसे चर्चाओं में शामिल करते हैं क्योंकि वह लोगों के समूह के ...

साध्वी पूनमश्री जी के सिद्धि तप की पूर्णाहूति आज, गुणानुवाद सभा का होगा आयोजन

तपस्वी रत्ना की उपाधि से सम्मानित होंगी साध्वी पूनमश्री, आयोजन में देश के विभिन्न भागों से पधार रहे हैं धर्मावलंबी, सिद्धि तप की अनुमोदना में 61 लोग कर रहे हैं तप शिवपुरी। प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज की सुशिष्या साध्वी पूनमश्री जी के 44 दिन से चल रहे सिद्धि तप का कल 3 अगस्त को समापन होगा। सिद्धि तप की पूर्णाहूति के अवसर पर 3 जुलाई को सुबह नौ बजे से जयदुर्गा टॉकीज के सामने स्थित आराधना भवन में गुणानुवाद सभा होगी जिसमें साध्वी पूनमश्री जी के 30 वर्ष के साधना काल का गुणगान किया जाएगा। गुणानुवाद सभा में भाग लेने के लिए महाराष्ट्र, दिल्ली, इंदौर, उज्जैन और पुणे से अनेक जैन धर्मावलंबी शिवपुरी पधार रहे हैं। गुणानुवाद सभा के बाद साधार्मिक वात्सल्य के लाभार्थी पदमचंद शैलेष कुमार कोचेटा परिवार है। जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ के अध्यक्ष राजेश कोचेटा और तेजमल सांखला, महामंत्री विजय पारख और भू...

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