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तप से चित्त की बढ़ती निर्मलता : साध्वी डॉ गवेषणाश्री

    ★ सामुहिक तप अभिनंदन समारोह   Sagevaani.com @तिरुपुर : डॉ साध्वी गवेषणाश्रीजी के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन में, श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, तिरुपुर के तत्वावधान में तप अभिनन्दन समारोह शुक्रवार को आयोजित किया गया। श्रीमती खुशबू बोथरा के 31, श्रीमती ज्योति डागा के 9 एवं श्रीमती मीना बोथरा के 8 की तपस्या का तप अभिनंदन सभा द्वारा किया गया। श्रीमती श्वेता मरोठी 26, श्रीमती संजू दुगड़ 18, श्रीमती अनिता बरडिया 11 एवं श्रीमती सुमन सुराणा 11 ने की तपस्या का प्रत्याख्यान साध्वीश्रीजी से किया। तपोभिन्दन में साध्वीश्री ने कहा कि जैन धर्म में तपस्या का बड़ा महत्व है। इससे चित्त की निर्मलता बढ़ती है और आत्मा का शुद्धिकरण होता है। योगों में जैसे आसन का, अग्नि में ईंधन का, खेत में वर्षा का महत्व है, वैसे ही जीवन में तप का बड़ा महत्व है। सभी तपस्वी इस भीषण गर्मी में आतप सहन कर तप...

केश लूंचन से तन, मन और चेतना होती पवित्र : गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी 

  ★ कर्मों के लोच से प्रकट होगा मूल स्वरूप   चेन्नई 09.08.2023 ; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में धर्मपरिषद् को संबोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने साधु जीवन में केश लूंचन के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे भीतर में जो नाड़ियां है, रक्त प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है, घर की नालीयों में पानी के तेज बहाव से कचरा साफ हो जाता है, उसी तरह लोच की विधि में सारे बाल जब एक साथ उखड़ते है तो सारी नाड़ियां एकदम सक्रिय हो जाती है, रक्त प्रवाह तीव्र हो जाता है, सारा कचरा साफ हो जाता है। यह साधु की साधना है। यह तन की भी स्वस्थता देता है, मन की भी स्वस्थता देता है, चेतना की स्वस्थता भी देता है।   गुरु प्रवर ने कहा कि केश लूंचन से शरीर की सारी नाड़ियां, नशों के एक्टिव होने से तन ...

भयविजेता, शरणदाता जिनेश्वर प्रभु का जप अनुष्ठान महामंगलकारी

  Sagevaani.com @ट्रिप्लीकेन, चेन्नई : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या शासनश्री साध्वी शिवमालाजी ठाणा 4 के पावन सान्निध्य में शुक्रवार प्रात: प्रवचन के समय श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ ट्रस्ट के तत्वावधान में, तेरापंथ भवन, ट्रिप्लीकेन, चेन्नई में नमोत्थुणं का भव्य जप अनुष्ठान आयोजित हुआ। भय विजेता, स्वयं सम्बुद्ध, लोकनाथ जिनेश्वर प्रभु के स्तुतिपरक सूत्र के जप अनुष्ठान मे सैकड़ो श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं ने भाग लिया। इस आध्यात्मिक आनंदमय जीवन सम्प्राप्ति सहेतुक मंगलकारी अनुष्ठान से धर्म सभा गुंजायमान हुई। यह समाचार ट्रिप्लीकेन तेरापंथ ट्रस्ट के मंत्री श्री विजयकुमार गेलड़ा ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दिया।

मेघा रवि जैन के 31 उपवास आज पूर्ण हुएl

परम पूज्य श्री प्रियदर्शना श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा 3 की निश्रा मैं चल रहे चातुर्मास के दौरान तप महोत्सव के दौरान आज मेघा रवि जैन के 31 उपवास आज पूर्ण हुएl उसे दौरान तपस्वी का बहू मान कार्यक्रम संपन्न हुआ सर्वप्रथम महाराज साहब जी के प्रवचन के पश्चात बहुमन का कार्यक्रम हुआl उसके बाद तपस्वी बहन का वरघोड़ा बेरछा के नाकोड़ा धाम से प्रारंभ होकर प्रमुख मार्गो से होता हुआ जैन स्थानक पहुंचाl वहां पर राजेंद्र कुमार जी जैन राजू मार साहब परिवार की ओर से शकल श्री संघ एवं बाहर से पधारे अतिथियों का स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया

सात्विक बुद्धि से मनुष्य विनय प्राप्त करता है : देवेंद्रसागरसूरि

  श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने धर्म प्रवचन देते हुए कहा कि पक्षियों की तरह मनुष्य आकाश में उड़ नहीं सकता, मछलियों की तरह जल में तैर नहीं सकता, हाथी के बराबर बोझ नहीं उठा सकता और शेर की तरह शक्तिशाली नहीं हो सकता। बावजूद इसके इस धरा पर वह सबसे सर्वश्रेष्ठ है। इसकी वजह यही है कि सिर्फ मनुष्य के पास बुद्धि बल है और इसकी बदौलत वह असंभव को भी संभव बना सकता है। मनुष्य की बुद्धि का ही कमाल है कि उसने नई-नई खोज करके मानव सभ्यता को श्रेष्ठतम ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। मनुष्य ने ऐसी-ऐसी चीजें विकसित कर दीं, जो कभी असंभव-सी लगती थीं। वैसे बुद्धि के कारण ही मनुष्य- मनुष्य के बीच भी भेद है। यानी जो व्यक्ति अपने बुद्धि बल का जितना ज्यादा इस्तेमाल करता है, वह उतना अधिक प्राप्त करता है। मनुष्य अपनी बुद्धि की तीव्रता और सूक्ष्मता को अपने पुर...

धर्मसभा में आने का भी होता है प्रोटोकॉल, वैर भाव भुलाकर आओ : साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

साध्वी जी ने बताया कि स्वाध्याय सीढ़ी और ध्यान मंजिल है Sagevaani.com @शिवपुरी। पोषद भवन में प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी भगवान महावीर द्वारा बताए गए 12 तपों की सुंदर व्याख्या कर रही हैं। इसी क्रम में गुरूवार को उन्होंने दसवे तप स्वाध्याय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्मसभा से बेहतर स्वाध्याय कहां होगा। धर्मसभा में व्यास गद्दी पर बैठे साधु और साध्वी तथा धर्मप्रेमी श्रोतागण दोनों स्वाध्याय करते हैं। लेकिन ध्यान रहे धर्मसभा में आने का भी प्रोटोकॉल होता है तभी सही मायनों में स्वाध्याय हो पाएगा। उन्होंने कहा कि धर्मसभा में अपने वैर, विरोध, रंजिश तथा दूसरों के प्रति दुर्भाव को भूलकर आना चाहिए। इन कषायों को जहां जूते चप्पल रखे जाते हैं वहां रखकर धर्मसभा में आना चाहिए। साध्वी जयश्री जी ने शास्त्र का वाचन करते हुए बताया कि आत्मा दीपक की ज्योति के समान होती है। उन्होंने कहा कि जब...

जैसी संगत वैसी रंगत: जयतिलक मुनिजी

Sagevaani.com @ नार्थ टाउन में विराजमान गुरुदेव जयतिलक मुनिजी फरमाया कि आत्म बन्धुओं, भगवान ने फरमाया जैसी संगत वैसी रंगत। जिसकी भी संगति करोगे तो उसके गुण अवगुणों का समावेश आप में अवश्य आयेंगे इसलिए ज्ञानीजन कहते है कि दोस्ती भी संस्कार गुण, देखकर, परखकर करनी चाहिए। संगति तो अपने जीवन को ऊँचा उठाने के लिए करनी चाहिए। जैसे पानी यदि शराब से मिल जाये तो शराब, परन्तु दूध के साथ मिलकर दूध कहलाता है। वैसे ही यदि शराबी की संगति की तो व्यक्ति अपने परिवार, समाज, राष्ट्र का नाश कर देगा। क्योंकि शराब करे दिमाग को खराब। इसलिए ज्ञानीजन कहते हैं कि शराबी की संगति पापों का बन्ध करा कर दुर्गति की ओर ले जायेगा। इसलिए संगति सदैव उत्कृष्ट गुणों वाले की करनी चाहिए। सोने, चाँदी, हीरे से भी बहुमूल्य मनुष्य जीवन है। इसका मोल समझ उसे सार्थक करो। वरना एक दिन यह शरीर मिट्टी में मिल जायेगा परन्तु आत्मा तो शास्वत है...

धर्म के क्षेत्र में अपना पुण्य औरों के सहारे बना सकते हैं: आचार्यश्री उदयप्रभ सूरिजी

  Sagevaani.com @किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्यश्री केशरसूरिजी के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरिश्वरजी ने अध्यात्म कल्पद्रुम की विवेचना करते हुए कहा सुख- दुःख जगत की शाश्वत देन है। गुरुवाणी तब समझ में आती है जब संसार का मोह कम होता हो। सामग्री के आधार पर सुख मत पाओ, पुण्य के आधार पर सुख पाओ। जीवन में भाव, दान, तप, शील का पालन आदि के आयोजनों से पुण्य बढ़ता है। हमारी आत्मा पुण्य का खर्च कर रही है, दूसरे नए सुख को पाने के लिए पुण्य का कर्ज भी ले रही है। ज्ञानी कहते हैं पुण्य की कमी को पूरा करो, आपकी इच्छाएं अपने आप पूरी हो जाएगी, लेकिन कर्ज वाला काम मत करो। मुझे पता चल गया, मेरे पुण्य मेरे पास नहीं है तो अपेक्षा नहीं करनी चाहिए, तभी वैराग्य आता है। भौतिक क्षेत्र में अपना पुण्य औरों के सहारे नहीं बना सकते, धर्म के क्षेत्र में अपना प...

शास्त्र के वचन परम मूल्यवान है: मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी

🏰☔ *साक्षात्कार वर्षावास* ☔🏰 *ता :10/8/2023 गुरुवार*   🛕 *स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई* 🪷 *विश्व पूजनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, युगप्रभावक आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय अभिधान राजेंद्र कोष भाग 7*🪔 ~ दर्द, पीड़ा, दुखों से मुक्ति के लिए ज्ञानी भगवंतो ने तपधर्म, ज्ञानधर्म और ध्यानधर्म की सम्यक् रूप से प्ररूपना की है। ~ अज्ञानता दूर होने से कर्म से भी मुक्ति पाना अत्यंत सरल है । ~ हमारी अध्यात्म दशा को पाने के लिए मन की शुद्धि वो साधन है और आत्मा की अनुभूति वो साध्य है। ~ शास्त्र के वचन परम मूल्यवान है क्योंकि उसे हरपल आत्मा स्मरण की पराकाष्ठा तक पहुंच ही सकते हैं। ~ प्रभु महावीर स्वामी के जैन दर्शन में गौतमस्वामी, ह...

प्रति क्षण उपकारी, उपकारीयों का रहे स्मरण : गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी

  ★ इगो से हम स्वजनों के प्रेम से दूर हो जाते है ★ अगली गति को सुधारने के लिए इस गति को धर्ममय बनाने की बताई निर्णायक गति  ★ गच्छाधिपति का हुआ केश लूंचन   Sagevaani.com @चेन्नई; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में धर्मपरिषद् को संबोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने उत्तराध्यन सूत्र के चौथे अध्याय की गाथा का विवेचन करते कहा कि कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो अगली गति में नरक या तिर्यंच में जाना चाहे। फिर भी जाता क्यों है? यह प्रश्न हम दूसरे जीवों के लिए करे उससे पूर्व स्वयं के लिए करे। मुझे कहां जाना है, मैं क्या ग्रहण करु, पुरुषार्थ करुं, कैसे काम करु, जिससे मुझे नरक अथवा तिर्यंच में न जाना पड़े। दुबारा मनुष्य गति भी मिले तो सम्यक्त्व के साथ मिले। परमात्मा की देशना, शासन,...

देश या विदेश, मातृत्व का भाव सब जगह एक : अभिनेता गोविन्दा

‘गोविंदा’ को प्रदान किया गया “संस्कृति कलाश्री अवार्ड” ★ “हीरो नंबर वन” °एक शाम संगीत एवं नृत्य के नाम° म्युजिकल शाम का हुआ आयोजन Sagevaani.com @मैल्लापुर, चेन्नई : संस्कृति कल्चरल फाउंडेशन द्वारा चेन्नई के मैल्लापुर स्थित म्यूजिक अकाडेमी में “हीरो नंबर वन” मशहूर अभिनेता ‘गोविंदा’ के गानो पर आधारित म्युजिकल शाम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित से हुई। स्वागत अभिव्यक्ति देते हुए संस्कृति अध्यक्ष श्री चंद्रमोहन दमानी ने प्रायोजको, कदरदान सदस्यों और अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के चेयरमैन श्री आनंद बिहानी एवं कन्वेनर विनोद कोठारी ने इस कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। कार्यक्रम का संचालन श्री सुधीर कांकरिया, श्रीमती सरिता फोमरा एवं श्रीमती नीलम बैद ने किया। संस्कृति के सभी कलाकारों ने बहुत ही सुंदर प्रस्तुति दी।  इस मौक...

प्रमादी जीव संसार में भटकते रहते है: प्रकाश मुनि जी मा.सा.

सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद   पुज्य प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनि जी मा.सा. यो मुक्ति – पंथ – गमने करुणादार्थ सार्थम दो मार्ग संसार में एक मुक्ति का एक भटकने का, प्रमादी जीव संसार में भटकते रहते है मोह से ग्रस्त है, मोह छूटता नहीं है कर्म बंधते रहते है। साधु के दो गुण स्थान बताये 6 व7 गुणस्थान बताये है प्रमत्त साधु- आयुष्य 1 करोड़ पूर्व, अप्रमत्त साधु-आयुष्य अर्न्तमुर्हत का आगे बढ़ गया तो एक अंतर मुर्हत में मोक्ष हो जाता है। साधु स्वाध्याय में अप्रमत्त रहता है। प्रमार का काल लम्बा है, ज्यादा समय प्रमाद में जाता है। समयं गोयमं न पमाये – गौतम स्वामी अप्रमत्त थे एक अवगुण था भगवान मेरे हे, उनके चेले को केवल ज्ञान हो जाता। मोह रूपी प्रमाद…. भगवान मेरे हे छुटा और केवल ज्ञान हो गया। चिंतन में बदलाव आया केवल ज्ञान हो गया। महोमोद प्रमाये – मोह के स्थ...

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