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कर्म जीव को भोगना पड़ते है: प्रकाश मुनि जी मासा

कर्म जीव को भोगना पड़ते है। पुज्य की प्रवर्तक प्रकाश मुनि जी मासा कीर्ति – प्रताप-यश – गौरव-राशि युक्तं।….. चन्द्रमा पुर्णिमा पर खिलता है, निर्मल, धवल, शांत पवित्र रूप होता है *निर्मल*-साफ, *पवित्र*- उत्तम जो पवित्र हो उसको शिरोधार्य करते है। मुनि 8 बातो पर उपदेश करे शांति, विरती, निर्वाण,क्षमा *पवित्रता* पर उपदेश करे, मल-जमा हुआ, जमता है वह सड़ता हे चाहे मल, हो, नाली का कचरा हो वह सड़ता है। परमात्मा तिजोरी के माल को घास कहते है आपने उसको कीमती मान रखा है जो आत्मा *शीतल* होती है वह *पवित्र* होती है। गुरुदेव का स्वभाव निर्मल था, न वाणी, न मन में, न व्यवहार में कहीं मल नहीं था, पवित्र थे। सबको सन्मान दिया। बच्चों के मन…मत तोड़ो, मन को, वचन को, व्यवहार को पवित्र बना ले ,आने वाला पवित्र हो जाये। आपका व्यवहार निर्मल हो कि आने वाला आपके पास बैठने की ईच्छा करे। आने वाले को बिन...

सत्संग से ज्ञान, विज्ञान, प्रत्याख्यान और साधना की होती प्राप्ति: साध्वी शिवमालाजी

★ शासनश्री साध्वी शिवमालाजी ने संकल्प बल से तप के क्षेत्र में गतिशील बनने की दी प्रेरणा ★ अभिनव सेठिया के तपस्या का तपोभिनन्दन आयोजित Sagevaani.com ट्रिप्लीकेन; युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या शासनश्री साध्वी शिवमालाजी ठाणा 4 के सान्निध्य में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ ट्रस्ट- ट्रिप्लीकेन के तत्वावधान में समायोजित चातुर्मास्य में रविवारीय प्रवचन में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए साध्वीश्रीजी ने कहा – आगमवाणी में कहा गया है कि साधक की वाणी मधुर, रसभरी, सात्विक होनी चाहिए। बताया गया है कि जहां कलह नहीं होता है, बड़ों का सम्मान होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है। साधक के लिए आवश्यक है कि वह सदैव वाणी का संयम रखे। तीन तरह के व्यक्ति होते है- परदर्शी, स्वदर्शी और सर्वदर्शी। परदर्शी जो दूसरों को ही देखता है, वह विराधक होता है। स्वदर्शी जो स्वयं को देखता है, वह साधक कहलात...

कपड़े की थैली – मेरी सहेली

महावीर इंटरनेशनल चेन्नई नार्थ टाउन द्वारा दिनांक 11-8-2023, शुक्रवार को साहुकारपेट में “कपड़े की थैली – मेरी सहेली” के अंतर्गत महावीर इंटरनेशनल का लोगो छपा कर थैलियां वितरण कि गई। चेयरमैन दिलखुश धोका ने बताया कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्लास्टिक की थैली का उपयोग नहीं करना चाहिए। सह सचिव महावीर सबदडा ने जागरूकता अभियान में कहा कि “प्लास्टिक थैली हटाओ पर्यावरण बचाओ” सलाहकार ज्ञानचंद कोठारी ने बताया कि प्लास्टिक बैगों का पूरे विश्व भर में भारी मात्रा में उत्पादन किया जाता है, जिससे की भारी मात्रा में कचरे की उत्पत्ति होती है। यह कचरा पृथ्वी पर हजारो वर्षो तक बना रहता रहता और इससे भूमि, जल और वायु प्रदूषण उत्पन्न होता है। इस तरह से यह कई तरह की गंभीर बीमारियों और पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनता है। सलाहकार गौतमचंद मुथा, वाइस चेयरमैन शांतिलाल चौधरी, नरेंद्र चौधरी,...

श्रावक धर्म पांच अणुव्रत तीन गुणव्रत चार शिक्षा व्रत से संकलित है: जयतिलक मुनिजी

नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्म बन्धुओ, श्रावक धर्म पांच अणुव्रत तीन गुणव्रत चार शिक्षा व्रत से संकलित है, आंशिक रूप से व्रत प्रत्याख्यान को धारण कर श्रावक अपने जीवन को उज्जवल बनाता है। पुण्यवाणी के बिना किसी का वचन किसी पर लागु नही होता। ऐसा जरुरी नहीं सतं मुनिराज की वाणी ही सही मार्ग दिखाती है जो श्रावक धर्म को अपने जीवन धारण कर धर्म साधना करते है वे भी अपनी वाणी से दूसरो को प्रभावित कर धर्म मार्ग पर आरूढ़ करते है। तीर्थ का अर्थ है तिराने वाला भगवान ने साधु साध्वी श्रावक श्राविका चारो को तीर्थ कहा ‘साधु- साध्वी पूर्ण रूप से संयम धारण करते है और श्रावक-श्राविक आंशिक रूप से पर दोनों का लक्ष्य तो मोक्ष ही है। सभी को अपने घर- ऑफिस, दुकान में काम करने वाले को मांसाहार का त्याग करने की प्रेरणा देनी चाहिए। गुरु भगवंतो के पास ला कर व्...

अपने अस्तित्व को व्यक्तित्व के माध्यम से प्रबुद्ध में बदले: जिनमणिप्रभसूरीश्वर म.

★ गच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी ने साधना, आराधना के द्वारा निर्वाण पद को प्राप्त करने की दी प्रेरणा  ★ त्याग प्रत्याख्यान के माध्यम से प्रारम्भ हुआ पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व  Sagevaani.com @चेन्नई ; देवी देवताओं के पास वैभव, सम्पदा की बहुलता होती है, शरीर भी स्वत: सुगंधित होता है। मनुष्य का शरीर मल मूत्र से भरा होता है, सांसारिक वैभव सम्पदा भी देवों से कम होती है, फिर भी देवता भी मनुष्य जन्म की चाह रखते है। क्योंकि मनुष्य जन्म में ही साधना, आराधना के साथ त्याग प्रत्याख्यान किया जा सकता है। आत्मा से परमात्म पद को पाया जा सकता है। आज से पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व प्रारम्भ हुए है। यह पर्व हमें बाहर से भीतर की ओर, भोग से त्याग की ओर, परिग्रह से संयम की ओर जाने की प्रेरणा देता है। उपरोक्त विचार श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी म...

अणुव्रत समिति, चेन्नई द्वारा पर्यावरण संरक्षण के तहत् वृक्षारोपण

★ तिरुथंगल नाडर कॉलेज, कोडिनग्यूर, चेन्नई में हुआ भव्य आयोजन Sagevaani.com @सेलवायल, चेन्नई : अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी के तत्वावधान में ‘पर्यावरण संरक्षण’ प्रकल्प के अन्तर्गत अणुव्रत समिति, चेन्नई द्वारा शुक्रवार को चेन्नई महानगर के कोडिनग्यूर में स्थित तिरुथंगल नाडर कॉलेज के विशाल परिसर में अणुव्रत समिति अध्यक्ष श्री ललित आँचलिया की अध्यक्षता एवं पर्यावरण संरक्षण प्रभारी श्री मनोज गादिया के संयोजन में सघन वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ। 🥦 प्रथम चरण में अध्यक्ष श्री ललित आंचलिया ने कॉलेज प्रांगण में  प्रिंसिपल श्रीमती डॉ वी देवी, वाइस प्रिंसिपल श्रीमती डॉ ललिता तथा कॉलेज के विद्यार्थियों को अणुव्रत के सिद्धांतो और नियमों की जानकारी देते हुए समिति की गतिविधियों से अवगत करवाया। अणुव्रत के नियमों को अपने जीवन में पालने की प्रेरणा दी। 🥦 अणुव्रत समिति द्वारा अणुव्रत आचार संहिता ...

विनोदजी जैन स्वाध्यायी के रुप में मार्मिक उदबोदन देंगे

पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व 14 से 21 अगस्त 2023 तक कांकरिया गेस्ट हाउस, आयशा होस्पिटल वाली गली, किलपाक में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के तत्वावधान में मनाये जाएंगे | श्रावक संघ के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र कांकरिया से पाप्त जानकारी अनुसार अंतगढ़ सूत्र के मूल व अर्थ वांचन के संग जैन दर्शन के मूर्धन्य विद्वान महावीर जैन विद्यापीठ, जलगांव के पाचार्य श्री प्रकाशचंदजी जैन व युवा स्वाध्यायी रत्न श्री विनोदजी जैन स्वाध्यायी के रुप में मार्मिक उदबोदन देंगे | राइय प्रतिक्रमण पुछिसुणं,अंतगढ सूत्र मूल व अर्थ वांचन, उदबोदन, तीर्थंकर चालीसा, वीर गुण गौरव गाथा, संयम चालीसा,तत्व चर्चा देव-गुरु- धर्म भक्ति, थोकडे,देवसिय प्रतिक्रमण,ज्ञान चर्चा, प्रतियोगिताएं आदि कार्यक्रम दैनिक रुप से होंगे | अष्ठ दिवसीय साधना आराधना कार्यक्रम में कांकरिया गेस्ट हाउस में श्री नवरतनजी कांकरिया,श्रावक संघ, तमिलना...

मानव निन्यानबे के चक्कर में फंस गया है: आगमश्रीजी म.सा.

श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली अध्यक्ष: विजयराज चुत्तर, मंत्री: हस्तीमल बाफनाl श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया आज मानव निन्यानबे के चक्कर में फंस गया है, ना तो धर्म करने के लिए समय है। वैराग्य शतक में बताया है,अगर मानव सौ साल की जिंदगी जिये तो धर्म ध्यान कितना करेगा तो वहां समय ही नहीं निकाल पाये।चमक-दमक, खाना-पीना एशो आराम में समय बीत गया। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने बताया ऐश्वर्यवान बनो। तीन बातों का सभी तरफ आदर है। शीलवति नारी,अर्थवती वाणी और फलवती लता का हमें बाहय से नहीं अंतर से ऐश्वर्यवान बनना है आज आनंद ऋषिजी म.सा. प्रभाकंवरजी म.सा. अर्चनाश्रीजी म. सा. के जन्मोत्सव के निमित्त से आंखों का कैंप रखा गया जिसमें एक सौ पच्चास लोगों ने चेकअप कराया। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने स्वागत किया। मंत्री हस्तीमल बाफना ने अभ...

दोष दिखाने वाले को अपना शुभचिंतक मानकर उसका आभार मानें : देवेंद्रसागरसूरि

दोष, दुर्गुण, दुष्प्रवृत्तियों, दुर्भावनाओं को त्यागिए संसार में कोई किसी को उतना परेशान नहीं करता, जितना कि मनुष्य के अपने दुर्गुण और दुर्भावनाएं। उपरोक्त बातें आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में प्रवचन देते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि दुर्गुण रूपी शत्रु हर समय मनुष्य के पीछे लगे रहते हैं, वे किसी समय उसे चैन नहीं लेने देते। कहावत है कि अपनी अकल और दूसरों की संपत्ति, चतुर को चौगुनी और मूरख को सौगुनी दिखाई पड़ती रहती है। संसार में व्याप्त इस भ्रम को महामाया का मोहक जाल ही कहना चाहिए कि हर व्यक्ति अपने को पूर्ण निर्दोष और पूर्ण बुद्धिमान मानता है। न तो उसे अपनी त्रुटियां सूझ पड़ती हैं और न अपनी समझ में दोष दिखलाई पड़ता है। इस एक ही दुर्बलता ने मानव जाति की प्रगति में इतनी बाधा पहुंचाई है, जितनी संसार की समस्त अड़चनों ने मिलकर भी न पहुंचाई होगी। सृष्टि क...

अद्भुत ज्ञान पिपासु थे आचार्य आनंद ऋषि, 90 वर्ष की आयु में सीखी फारसी : साध्वी नूतन प्रभाश्री जी

जैनाचार्य आनंद ऋषि जी के 123वे जन्मदिवस पर पांच दिवसीय कार्यक्रमों में आज मना जाप दिवस Sagevaani.com @शिवपुरी। प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी महाराज के सानिध्य में स्थानकवासी जैन सम्प्रदाय के आचार्य आनंद ऋषि जी महाराज का 123वां जन्मदिवस पोषद भवन में पांच दिवसीय धार्मिक आयोजनों के साथ मनाया जा रहा है। कल प्रथम दिवस सामयिक दिवस मनाया गया जिसमें श्रावकों ने 48-48 मिनट की दो सामयिक और श्राविकाओं ने 48-48 मिनट की तीन सामयिक कर समता धारण की। वहीं दूसरे दिन शनिवार को जाप दिवस मनाया गया जिसमें एक घंटे तक सैकड़ों धर्मावलंबियों ने जाप कर आचार्य आनंद ऋषि जी को अपनी विनम्र भावांजलि अर्पित की। जन्मदिवस के अवसर पर साध्वी वंदनाश्री जी ने आचार्य आनंद ऋषि जी के सम्मान में इस सुंदर भजन गुरुवर मेरे जीवन की हर उलझन को सुलझा देना, भव सागर से नाव मेरी तू ही पार लगा देना… का गायन किया। साध्वी नूतन प्रभ...

इंसान में विनय विवेक एवं वचन तीन चीज होनी चाहिए: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे जैसे की हर एक इंसान में विनय विवेक एवं वचन तीन चीज होनी चाहिए विवेक से क्या हुआ काम हरदम अच्छा होता हैl जैसे कि एक बार भगवान महावीर स्वामी की समवसरण में सूर्य और चंद्र भी आए थे और साध्वी जी भी आई हुई थी सूर्य एवं चंद्र के वहां आने से सूर्य का प्रकाश ना होने से उन साध्वी जी को पता ही नहीं चला कि कब घर जाना हैl जब उन्हें ध्यान आया कि मुझे जाना है तब वह वहां से निकले एवं सिधेअपने गुरुजी के पास पहुंचे एवं गुरुजी ने कहा कि कितना लेट हो गया है अपने गुरुणी को शोभा नहीं देता हैl ऐसी तुम कहां चली गई थी गुरू भी मैया ने कहा तब मृगावती ने कहा मुझसे बड़ी भूल हो गई एवं उसका मुझे आलोचना दे दो तब गुरणी मै...

संपन्न आत्मा का बोध केवल जैन धर्म से ही होता है: डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.

🏰☔ *साक्षात्कार वर्षावास* ☔🏰           *ता :12/8/2023 शनिवार*      🛕 *स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई*  🪷 *विश्व पूजनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश    🪔 *विषय अभिधान राजेंद्र कोष भाग 7*🪔 ~ विश्व में अनेक धर्म है किंतु हमारी अध्यात्म स्थिति को सिद्ध करके गुणवान और अनंत शक्ति संपन्न आत्मा का बोध केवल जैन धर्म से ही होता है। ~ आत्मा दर्शन के लिए जिसका प्रबल पुरुषार्थ है वो साधक की आत्मा सिद्धि का अनुभव कर सकता है। ~ जहां-जहां सत्य धर्म की प्राप्ति होती है वहां- वहाँ साधक नई दिशा में नए-नए आयाम के साथ नई यात्रा में जुड़ता है। ~ जहां सत्य का निर्णय हुआ वहां बोध भी हर पल सत्य ही होता है। ~ इस मानव भव में त्या...

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