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कषायों के साथ कितनी भी आराधना कर लो, फल नहीं मिलेगा: आचार्य उदयप्रभ सूरी

Sagevaani.com @किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्यश्री केशरसूरिश्वरजी के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरिश्वरजी ने प्रवचन में कहा वैराग्य मानव भव में ही संभव है। वैराग्य उत्पन्न होने के लिए लघुकर्मी होना आवश्यक है। परिणाम उत्तम लाना है तो पुण्य से नहीं, खानदान से नहीं, आत्मकल्याण के हेतु से धर्म करना चाहिए। धर्म करने के लिए, धर्म की सामग्री पाने के लिए पुण्य गौण है और पुरुषार्थ मुख्य है, ऐसा नहीं है। उसके लिए हमें सब चाहिए। कई बार पुण्य इतने प्रबल होते हैं कि पुरुषार्थ करने की जरूरत भी नहीं आती। पुण्य अलग काम करता है, पुरुषार्थ अलग काम करता है लेकिन कई बार व्यक्ति का इनट्यूशन भी काम करता है। ज्ञानी कहते हैं पुण्य और पुरुषार्थ का संयोजन सम्यक ज्ञान है। उन्होंने कहा निकाचित पापों को तोड़ने का कार्य तप करता है। शास्त्रों में तपस्या से कर्मों क...

भारत कि आन बान और शान को अक्षुण बनायें : महासती धर्मप्रभा

Sagevaani.com @चैन्नाई। स्वत्रंता को सार्थक करना हमारा कर्तव्य। मंगलवार साहूकार पेठ श्री एस.एस.जैन भवन मे महासती धर्मप्रभा ने सैकड़ो श्रध्दांलूओ को धर्मसभा मे स्वत्रंता दिवस पर बधाई देतें हूए कहा कि मनुष्य दुनिया के किसी भी कोने मे चला जाए लेकिन भारत के जैसा कोई देश नहीं है।अनेकता में एकता भारत में ही देखने को मिलती है किसी ओर देश नहीं मिलने वाली है। देश कि रक्षा करना सभी का कर्तव्य भी है,और धर्म भी है। दुनिया मे भारत ही एक ऐसा देश है जिसने कभी किसी अन्य देश पर आक्रमण नही किया। आज हम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मना रहे हैं। यह दिन हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम के महान पर्वकाल में से एक है, जो हमें हमारे पूर्वजों की संघर्षों और बलिदान की हमे याद दिलाता है हमारा देश ऐसे ही आजाद नहीं हुआ न जाने कितने महान वीरो ने देश को आजादी दिलाने के लिए। आजादी के महायज्ञ मे अपने प्राणों की आहूति और बलिदान ...

अणुव्रत समिति द्वारा चेन्नई प्राथमिक विद्यालय में ध्वजारोहण का कार्यक्रम

Sagevaani.com @चेन्नई ; अणुव्रत समिति एवं लायंस क्लब के सयुंक्त तत्वावधान में चेन्नई उपनगर के एम के बी नगर में चेन्नई माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में 77वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम समायोजित किया गया। विद्यालय प्रधानाचार्या श्रीमती अंबिकादेवी ने ध्वजारोहण किया। अतिथियों, अध्यापिकाएं, विद्यार्थी, अभिभावकों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सलामी देते हुए वंदे मातरम् तथा जय हिंद इत्यादि के नारे लगाए। विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षको ने तमिल ताई वालुतु का संगान किया। प्रथम चरण में प्रधानाचार्य द्वारा स्वागत स्वर में अणुव्रत समिति चेन्नई और उसकी गतिविधियों से अवगत कराते हुए अध्यक्ष का परिचय दिया। अध्यक्ष ललित आंचलिया ने अणुव्रत समिति का परिचय, उनकी गतिविधियों का विवरण देते हुए एक लघु कथा द्वारा संक्षेप में अणुव्रत अभियान की जानकारी दी। अणुव्रत के नियमो को तमिल भाषा में वाचन कर बच्चों को...

तेरापंथ जैन विद्यालय का 77 वाँ स्वतंत्रता दिवस

Sagevaani.com @चेन्नई ; 15 अगस्त 2023 को तेरापंथ जैन विद्यालय, साहुकारपेट के प्रांगण में 77 वाँ स्वतंत्रता दिवस अत्यन्त हर्षोल्ल्स के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय चेयरमेन श्री गौतमचंद बोहरा, मुख्य अतिथि विवेकानंद एजुकेशनल सोसायटी के सचिव एम एन वेन्कटेसन FCA, मेनेजिंग ट्रस्टी श्री मेघराज लुणावत, महासचिव श्री रेख धोका, कोषाध्यक्ष श्री देवराज आछा, महासंवाददाता श्री महावीरचंद जी गेलडा, स्कूल कमेटी संयोजक श्री महेन्द्र कुमार आंचलिया, श्री संजय भंसाली महासंवाददाता पट्टालम व अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे। मुख्य अतिथि महोदय ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती शशीकला ने अपने संबोधन द्वारा सभी का हार्दिक अभिनन्दन किया। इस मौके पर विद्यार्थियों ने क्रमशः तमिल, अंग्रेजी व हिन्दी भाषा में अपने भाषण में गत 76 वर्षों में देश में हुए विकास व देश की वर्तमान स...

असली वैभव वही, जो आंतरिक प्रसन्नता देता है : जिनमणिप्रभसूरिश्वरजी

चार वैभव का वर्णन करते हुए ‘अनुमोदना वैभव’ को स्वीकार करने की प्रेरणा दी Sagevaani.com @चेन्नई पर्युषण पर्व जीवन को उन्नत बनाने का पर्व है। इन आठ दिनों में जो तपस्या, सामायिक क्रिया, आराधना होती है, उसे बाकी के दिनों में पर्यूषण के भावों में जीना है और वहीं हमारा मूल वैभव है। असली वैभव वही है- जो आंतरिक प्रसन्नता देता है, जिसका स्मरण करते ही हमारा रोम रोम खिलता है। उपरोक्त विचार श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में पर्यूषण महापर्व के चौथे मंगल प्रभात में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहें। ◆ अत्यधिक पदार्थ संग्रह में आनंद से ज्यादा देता पीड़ा आचार्य प्रवर ने कहा चार प्रकार के वैभव होते है- पहला है वस्तुगत। व्यक्तियों के पास वस्तुओं, पदार्थों...

आत्म तत्व की अनुभूति करने वाला है हिंदू:  डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.

     स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई  🪷 *विश्व वंदनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, युग प्रभावक,श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा.* के प्रवचन के अंश    🪔 *विषय : भव्य निर्माण भारत का*🪔 ~ जो आत्म सम्मान से जीये जिसके आचार, विचार आत्म लक्षि हो और जो आत्म तत्व की अनुभूति करें वह है हिंदू। ~ हिंदुस्तान की मूलभूत परंपरा, संस्कृति में हिंसा, झूठ, चोरी, अनाचार, परिग्रह से मुक्ति थी। ~ शिवाजी, महाराणा प्रताप, कुमार पाल महाराजा, आमराजा, गांधीजी, विनोबा भावे, रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद सभी के सिर पर सद्गुरु से यानी गुरु शिष्य परंपरा अखंड थी। ~ हिंदुस्तान का प्राण, संस्कृति यदि कुछ है तो वह है आत्मा और करुणा।जो एक भव से दूसरे भव की यात्रा से आत्मा को माने वह है हिंदू। *हिण्ड...

ऐसा तेज जो चुभने वाला नहीं, वह शांति देता है: डॉ ललित प्रभा जी

*सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद* *कीर्ति- प्रताप-यश गौरव-राशि युक्तम्। सद्धर्म भास्वर प्रभाकर – तेजपुञ्जम् ।* *सम्पूर्ण चन्द्ररिव शीतल – शुभ्ररूपम् । सौभाग्य सद्गुरुवरं शिवदं स्मरामि ॥६॥* श्री डॉ ललित प्रभा जी पूज्य गुरुदेव श्री सोभग्यमल जी महारसा के लिये कहते है कि.. गुरुरेव तेज के पूंज्य थे, वे प्रभात भी थे, भास्कर भी थे, भास्कर सूर्य को कहते है प्रभाकर चंद्र को कहते है। ऐसा तेज जो चुभने वाला नहीं,, वह शांति देता है। यह गुण जिसमें होते है उनमें दो विशेषता होती है।  *आणाये चक्कु लोक विपस्सीय* आयात के चक्षु- जिसकी आँखे बड़ी होती है, प्रभावीत करती है, विशाल आँखों वाला, कमल की पंखुडी वाला, बड़ा सुन्दर दिखता है यहाँ मतलब दीर्घ दृष्टि से देखते है, जीव दीर्घ दृष्टि से विचार करे ,,लोक की विचित्रता,, का विचार करे। में क्या कर रहा हूँ ?विचार करे, जीव की 9 तत्व का ज्ञान ह...

स्वतंत्रता दिवस समारोह बड़े हर्षो उल्लास से मनाया,

राजस्थान पत्रिका एवं एक्ष्नोरा इंटरनेशनल द्वारा 76th आजादी का अमृत महोत्सव आज साहूकारपेट स्तिथ पुन्नापा चेट्टी स्ट्रीट में शाह & संधवी कोमपलेक्स मैं छत पर एक्स्नोरा इंटरनेशनल महिला विंग द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह बड़े हर्षो उल्लास से मनाया, महिला विंग की सदस्यों ने मनमोहक रंगोली द्वारा झंडा उकेरा उनकी प्रसंशा की एवं सम्मानित किया। कई देश भक्ति के गीतमाला एवं सांस्कृतिक प्रोग्राम प्रस्तुत किए। बच्चों ने आकर्षक प्रस्तुति दी, महिला विंग की चेयरपर्सन मंजू जैन ने कहा बच्चे देश का भविष्य है उन्हें अपने देश के विकास मैं हाथ बढ़ाना है। इसलिए वे अच्छे पढ़ लिख कर अपना कर्तव्य निर्वाहन करते हुए देश का नाम रोशन करें। इस मौके पर एक्स्नोरा नॉर्थ चेन्नई सचिव फतेहराज जैन ने भी सबको संबोधित किया एवं महिला विंग द्वारा शानदार रंगोली से झंडा उकेरा उनकी प्रशंसा की एवं हर कार्य में महिलाओं का सहयोग सराहन...

कितने लोग शहीद हो गए तब जाकर भारतवर्ष आजाद हुआ: उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया

हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैं। बंधुओं जैसे कि आज का दिन 15 अगस्त का दिन है हमारा देश आजाद हुआ था सो पूरा देश में इसे आज धूमधाम से मनाया जाता है।  हमारे यहां पर भी 100 बच्चों ने पार्टिसिपेट किया कोई गांधी जी कोई नेहरू जी कोई सुभाष चंद्र बोस कोई झांसी की रानी इस तरह से सभी ने बहुत ही अच्छी ढंग से प्रस्तुति दी एवं बच्चों का उत्साह बढ़ते देखा गया एक से एक बच्चों ने प्रतियोगिता के उपलक्ष में नाटक का गाना सब अच्छे ढंग से निभाया बच्चे ही हमारे देश का भविष्य है एवं हमारे गुरुणीजी जी ने फरमाया कि देश के लिए कितने लोग शहीद हो गए तब जाकर भारतवर्ष आजाद हुआ।  हमें यह 15 अगस्त धूमधाम से मना या ध्वजा भी किया गया राष्ट्रगान भी गया सभी को बहुत आनंद...

तुम बोध को प्राप्त करो: श्री प्रकाशचंदजी जैन

पर्युषण पर्व के अंतर्गत कांकरिया गेस्ट हाउस, किलपाक में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के तत्वावधान में स्वाध्यायी बन्धुवर प्राचार्य श्री प्रकाशचंदजी जैन जयपुर ने सम्यग्दर्शन विषय पर विस्तृत उदबोदन देते हुए दर्शन शब्द के विभिन्न अर्थ मान्यता, श्रद्धा, दृष्टि गुरु दर्शन, देखना आदि बताये | सूत्रकृतांग सूत्र के प्रथम अध्ययन की प्रथम गाथा का विवेचन करते हुए कहा कि साधक तुम बोध को प्राप्त करो | वैतालिक छन्द का उल्लेख करते हुए बताया समझो बोध को प्राप्त करो | सम्यकदर्शन आन्तरिक गुण हैं | उतराध्ययन सूत्र के अट्ठाईसवें अध्ययन मोक्ष मार्ग में सम्यकदर्शन पर वर्णित आठ सूत्र निःशंकित, निष्कांक्षित, निर्विचिक्षा, अमूढ़ दृष्टि, उपबृहन,स्थिरीकरण, वात्सल्य और प्रभावना के बारे में विस्तृत विवेचन किया | अंतगढ़ सूत्र के मूल व अर्थ का रोचक वांचन,कर्म प्रकृति,वीर गुण गौरव गाथा का विवेचन युवा स्वाध्यायी...

वाशिंगटन डीसी में अपने सदस्यों के लिए लाई जाने वाली संभावनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा

Sagevaani.com @वाशिंगटन डीसी स्थित जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JITO) ने एक प्रभावशाली 8a वेबिनार कार्यक्रम की मेजबानी की, जिसका प्राथमिक ध्यान संघीय अनुबंध क्षेत्र के भीतर विविध व्यावसायिक अवसरों को प्रदर्शित करने पर था। कार्यक्रम की शुभारंभ जीतो एपेक्स के पूर्व डाइरेक्टर श्री सज्जन राज मेहता और जीतो लेडीज विंग सदस्य श्रीमती कमला मेहता के आशीर्वाद और  मंगलाचरण के साथ हुआ। JITO यूएसए वाशिंगटन डीसी के सचिव श्री राहुल जैन ने मंच का संचालन करते हुए JITO वाशिंगटन डीसी के चेयरमेन श्री भूपेश मेहता का परिचय दिया और उन्हें अपनी प्रारंभिक टिप्पणियाँ साझा करने के लिए आमंत्रित किया। वाशिंगटन चर्च JITO USA वाशिंगटन डीसी के चेयरमेन श्री भूपेश मेहता ने सेमिनार के लिए मंच तैयार करते हुए सभी मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत किया। अपने संबोधन में, उन्होंने वाशिंगटन डीसी क्षेत्र में मौजूद प्रचुर अवसरों प...

आत्मा के कर्म रुपी धूल को मिटाने के लिए पर्युषण पर्व है

नार्थ टाउन बहु मंडल की  से एक नाटिका “स्वतंत्रता कौन सी अच्छी पल भर की या शाश्वत मुक्ति” की प्रस्तुति एसएस जैन संघ नॉर्थ टाउन बहु मंडल की तरफ से एक नाटिका “स्वतंत्रता कौन सी अच्छी पल भर की या शाश्वत मुक्ति” बहुत ही सुंदर प्रस्तुति की गई। परम पूज्य गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि जैन चातुमास काल में ये 8 दिन चातुर्मास के महत्वपूर्ण दिन है और चार्तुमास रूपी शरीर का संवत्सरी पर्व ह्रदय के समान है। आत्मा के कर्म रुपी धूल को मिटाने के लिए पर्युषण पर्व है। इन आठ दिनो में कायर व्यक्ति में भी निडरता आ जाती है उसमें भी पुरुषार्थ जागृत हो जाता है। प्रमाद व आलस्य को छोड़ कर व्यक्ति घाती व अघाती कर्मों को काटने का प्रयास करता है। हर व्यक्ति का इन आठ दिनों में धर्म स्थान में आने का लक्ष्य रहता है। इन आठ दिनों में स्वत: ही भावों में उत्कृष्टता ओ जाती है। इस पर्व का ...

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