नार्थ टाउन में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्मबन्धुओ जिन का उपासक जैन कहलाता है जिन की उपासना करने वाला श्रावक दो प्रकार के हैl एक है साधु साध्वी जो पूर्ण रूप से जिन प्ररुपित धर्म का पालन करते हैं दूसरे श्रावक श्राविका जो साम्थर्य अनुसार जिन धर्म का पालन करता हैl धर्म केवल चर्चा करने के लिए आचरण में लाने लिए है। धर्म के पालन करने में आनाकानी, किन्तु परन्तु करने से धर्म छूटने के साथ पाप-कर्म का बन्ध होता है। धर्म को जीवन में स्वीकार कर लेने पर यही धर्म सरल व सुगम हो जाता हैl धर्म पालन करने में कठिनाई महसूस नही होती है धर्म के जीवन में आने पर पापकारी प्रवृत्तियां अपने आप छूट जाती है। क्योंकि धर्म और पाप साथ- साथ टिक नहीं सकते। निर्णय आपको लेना है कि धर्माचरण कर कर्मो का भार घटानी है या पापाचरण करके आत्मा के कर्म भार को बढ़ाना है जैसे कपास का फूल फट कर बाहर निकलता वह हवा के ...
Sagevaani.com @चेन्नई; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास के शनिवारीय प्रश्नोत्तर में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि प्रतिक्रमण अनादि काल से है। जब से नवकार है, तीर्थंकर परमात्मा है, सिद्ध लोक है, मनुष्य अवस्था है, तब से प्रतिक्रमण है। प्रतिक्रमण द्रव्य और भाव दोनों से महत्वपूर्ण है। प्रतिक्रमण ही हमारे आत्म तत्व को शुद्ध बनाने वाला है, मोक्ष प्रदान करने वाला है। प्रतिक्रमण यानि पिछे आना। जो पाप कर्म किये, नहीं करने योग्य कार्य किये, उसके प्रायश्चित के रूप में प्रतिक्रमण किया जाता है। मजबूरी या जानबूझकर किसी भी पाप के लिए प्रायश्चित करना जरूरी है। ह्रदय को कोमल, सरल बनाकर प्रतिक्रमण किया जाता है। यहीं हमें सिद्धत्व को पहुचाते है। गुरुवर ने कहा कि प...
‘नो हेलमेट- नो राइड’ कार्यक्रम स्पैंसर सिग्नल माउंट रोड पर आयोजित 250 बाईक चालकों को फ्री हेलमेट वितरित Sagevaani.com @चेन्नई; ग्रेटर चेन्नई ट्रैफिक पुलिस और लाडनूं नागरिक परिषद् के सयुक्त तत्वावधान में ‘नो हेलमेट- नो राइड’ कार्यक्रम स्पैंसर सिग्नल माउंट रोड पर आयोजित किया गया। इस प्रोग्राम में मुख्य अतिथि पुलिस कमिश्नर श्री संदीप राय राठौड़ आईपीएस, एडिशनल कमिश्नर श्री आर सुधाकर आईपीएस, ज्वाइंट कमिश्नर एन एम मइलवाहनन आईपीएस, उप कमिश्नर श्री समय सिंह मीणा आईपीएस उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों का लाडनूं नागरिक परिषद के छत्रसिंह पगारिया, उम्मेदसिंह, बसन्त नाहटा, राकेश खटेड़, रणजीतसिंह, विजय बेद, राकेश बैद ने स्वागत किया। लाडनूं नागरिक परिषद ने समाज सेवा और जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत हेलमेट नहीं पहनने वाले बाईक चालकों को फ्री 250 हेलमेट वितरित किए। वाहन चालकों को भविष्य...
कर्म बंधन के प्रकारों को समझाते हुए मन को आरोग्य युक्त बनाने की दी प्रेरणा त्रिदिवसीय तपोभिन्दन समारोह का हुआ प्रारम्भ Sagevaani.com @Chennai; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में उत्तराध्यन सूत्र के पाँचवे अध्ययन के विवेचन में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि जैसे सब्जी के अन्दर पड़ने वाले मसालों से तय होता है कि सब्जी कैसी बनी, ठीक उसी तरह हम धार्मिक, सामाजिक या अन्य क्रियाएं कृति यानि करते रहते है। तीर्थयात्रा या शादी समारोह में जाते है, वहां श्रृति यानि सुनते भी है और स्मृति याद भी करते है। प्रश्न यह है कि हम करते समय, सुनते, याद करते समय उसमें रस कैसा है? रस शब्द का अर्थ होता है- आसक्ति, रुचि, अंतर भाव आहो भाव। कृति, श्रृति, स्मृति में हमारा रस...
विश्व पूजनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, युग प्रभावक श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के प्रवचन के अंश विषय अभिधान राजेंद्र कोष भाग7 ~ आत्मा के शुद्ध स्वरूप का लक्ष्य कराती है सिद्ध पद की साधना। ~ जब तक मानव को मैं कौन हूं, उसका सत्य रूप से बोध नहीं होगा तब तक मानव अपूर्ण हीं रहेगा। ~ विश्व में रहे हुए सभी मानवों को भगवान बनने का जन्म सिद्ध अधिकार है। ~ मानव जब मानवता और धार्मिकता के परम शिखर का अनुभव करता है तब वह अवश्य परमात्मा बनता ही है। ~ यह अमूल्य जीवन और देव, गुरु, धर्म तत्व के योग से अनंत ज्ञान, दर्शन, चरित्र वाली चेतना को पाना ही चाहिए। ~ जगत के सर्वजीवों को परमात्मा का अंश मानना वह परमात्मा बनने का प्रथम कदम है। ~ प्रभु महावीर स्वामी ने जगत में रह...
सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद विद्वद्वर्या डॉ. श्री ललित प्रभाजी म.सा. जी गुरुदेव श्री सोभग्यमल जी महारासा के लिये फरमाते है कि.. *आराध्य देव! सुगुणं तव चिन्तयामि ।* *पादौ त्वदीय मम चित्त समर्पयामि ।* *अध्यात्मवृत्ति सहितं ललितं प्रधानम् ।* *सौभाग्य सद्गुरुवरं शिवदं स्मरामि ॥७॥* पुज्य प्रवर्तक की प्रकाश मुनि जी मासा बताते है कि … दुनिया में सौंदर्य कहाँ है, अन्दर हे, आध्यात्म वृत्ति जिसमें है सबसे बड़ा सौन्दर्य है, आध्यात्म वृत्ति से जीवन होता है उनकी ही सौन्दर्य शाली जीवन होता है। आदमी हंस मुख हो, व्यवहार सुन्दर, बोलता मीठा हो । उपर का रुप आध्यात्म को बिगाड़ नहीं सकता ! अन्दर का विष बाहर की सुन्दरता को खराब करता है जो आध्यात्म वृत्ति जिसमें है वह सौन्दर्य शाली है, *जे अणदेखी से अणण्णा रामे। जे आणणारामे से अणण्णदेसी।* जो परमार्थ का दृष्टा है मोक्ष में रमण करता है। जो ...
हमारे जीवन के हर क्षण ही अंतिम क्षण का निर्माण करता है Sagevaani.com @चेन्नई; श्री मुनिसुव्रत जिनकुशल जैन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री सुधर्मा वाटिका, गौतम किरण परिसर, वेपेरी में शासनोत्कर्ष वर्षावास में उत्तराध्यन सूत्र के पाँचवे अध्ययन के तीसरे श्लोक के विवेचन में धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए गच्छाधिपति आचार्य भगवंत जिनमणिप्रभसूरीश्वर म. ने कहा कि हर व्यक्ति का मरण अवश्य होगा। मरण कैसा हो, यह चिन्तन जरूरी है कि हम समाधि मरण की ओर बढ़ रहे है या संक्लेश मरण की ओर। जीव को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है- ज्ञानी और अज्ञानी। जो जीव स्वयं का बोध पहचान लेता है, आगे कहां जाना है, मूल लक्ष्य मोक्ष की साधना को स्वीकार कर प्रवृत्ति करता है, वह ज्ञानी है। जो संसार के भ्रमण में गुमता ही रहता है- वह अज्ञानी। हम अपने इस अमूल्य मनुष्य जन्म का सही लक्ष्य बनायें, यही लक्ष्य रहे कि हमारे अब कम से कम ...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि जेसेकि सुपात्र दान देने से कर्मों की महान निर्जरा होती है सुपात्र दान देने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक हैl साधु जो अपने जीवन निर्वाह के लिए शुद्ध आहार पानी ग्रहण करते हैं उसे गोचरी कहते हैंl पांच महाव्रत धारी साधु साध्वी वृंद को श्रावक निर्दोष और अपनी बेरावे उसे सुपात्र दान कहते हैंl विवेक करते हुए सामान्य भोजन के समय घर का दरवाजा खुला रखें या ऐसा हो बाहर से खुल सके लाक ना लगे कुछ परंपरा में सुधार हुआ फल और सूखा मेवा भी सचित माना जाता हैl मुख्य भोजन से दूरी रहे पूछ कर वेरा सकते हैं और व्यक्ति दरवाजा ना खोले जो कच्चे पानी हरी सब्जियां सेल वाली घड़ी मोबाइल आदि से संयुक्त हो तो...
किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरीश्वरजी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने प्रवचन में कहा कोई भी दोष का कारण कर्म का उदय तो है ही, यह एक सार्वभौमिक कारण है लेकिन विशेष कारण क्या है, उसकी खोज जरूरी है। वास्तव में हमारे अंदर रही अज्ञानता, सज्जनों की संगति का अभाव और धर्म व्यवहार का अभाव इन दोषों के मुख्य कारण है। उत्सर्ग सामान्य होता है, अपवाद व्यक्तिगत होता है। ज्ञानी कहते हैं दोष का सेवन करना पड़े तो भी विवेक रखना पड़ेगा, इससे अशुभ अनुबंध नहीं होंगे। आत्मसाक्षी होने पर ही अपवाद का सेवन होना चाहिए। खुद से पढे हुए शास्त्र कदाग्रही बनाते हैं, सुनने से शास्त्र विवेकी बनाते हैं। सुनने के बाद उन्हें पढ़ा जा सकता है। आगम कभी पुस्तक देखकर पढ़ने की चीज नहीं है, गुरु से सुनकर पढ़ने की चीज है। गलत आचरण से भी ज्यादा खतरनाक है लोगों मे...
भारत के गौरवान्वित होने पर निकाला गया लकी ड्रा Sagevaani.com @शिवपुरी। शिवपुरी में चातुर्मास कर रहीं प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी की धर्मसभा में चंद्रमा के दक्षिण धु्रव पर भारत के चंद्रयान की सफलता पर खुशियां मनाई गईं। साध्वी रमणीक कुंवर जी और साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने बधाई देते हुए कहा कि भारत के लिए चंद्रयान की सफलता एक ऐतिहासिक अवसर है। दक्षिण धु्रव पर पहुंचने वाला भारत पहला देश बन गया है। इससे पूरा भारत गौरवान्वित है और इसके लिए दिन रात चंद्रयान की सफलता में जुटे वैज्ञानिक और देश का नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री मोदी बधाई के पात्र हैं। साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कहा कि यह भी क्या सुखद संयोग है कि कल ही हमने अपनी गुरुणी मैया चांदकुंवर जी महाराज की पुण्यतिथि मनाई और कल ही भारत के चंद्रयान के कदम चंद्रमा पर पड़ गए। चंद्रयान की सफलता पर समाजसेवी तेजमल सांखला और धर्मेन्द्र गूगलिया ने...
जीवन में मुस्कराने की वजह स्वयं ही ढूंढना पड़ता है। उज्ज्वल भविष्य का सपना निश्चित रूप से जीवन में प्रसन्नता एवं उमंग पैदा करता है। किंतु किसी भी सुनहरे सपने को साकार करने के लिए जीवन में पुरुषार्थ करना पड़ता है। उपरोक्त बातें आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में प्रवचन देते हुए कही। वे आगे बोले कि कोई भी लक्ष्य बिना संघर्ष और मेहनत के प्राप्त नहीं किया जा सकता। लक्ष्य प्राप्ति के लिए उपलब्ध संसाधनों और समय का सही संतुलन बनाना होता है। जीवन का उद्देश्य केवल किसी लक्ष्य को हासिल करना न होकर प्रसन्नता के साथ सफलता प्राप्त करना होना चाहिए। हम सभी को जीवन में ऐसे लक्ष्य का चुनाव करना चाहिए जो वास्तविक हो अर्थात् जिसे प्राप्त करना संभव हो। जैसे अच्छे पायलट बनने का लक्ष्य मेहनत और लगन से प्राप्त किया जा सकता है। परंतु पक्षी बनकर आकाश में उड़ने का सपना पूरा करना कठ...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली अध्यक्ष: विजयराज चुत्तर, मंत्री: हस्तीमल बाफना। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया अपनी आत्मा से पूछो हमारे शक्ति अनुसार धर्म करते हैं क्या ? लोग धर्मी कहे ऐसा हमारा जीवन है क्या ? स्वयं को परखना है। मैं धर्मी हूं या नहीं। अष्टावक्रजी का उदाहरण देकर समझाया। बाहय को मत देखो आत्मा को देखो। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने बताया अंतर के पट को खोलना है, दूसरों को टटोलना नहीं है। दूरदर्शन नहीं अंतर दर्शन करना है। 25 अगस्त को सामुहिक एकाशन महोत्सव रूप में जन्म जयंती मनाई जाएगी। बीजेएस (BJS) कर्नाटक राज्य के अध्यक्ष श्री उत्तमचंदजी बांटिया साथ में हेड ऑफिस पुणे से निलेश शिंदे, सचिन वालुजकर ने वंदन दर्शन किया तथा सकल जैन समाज एक नई “जल क्रांति”करने के लिए सज हो इस अभियान की जानकारी देकर...