अन्नदानं के साथ त्रि दिवसीय कार्यक्रम: श्रावक के 21 गुण 14 नियम दैनिक चार्ट का विमोचन Sagevaani.com @चेन्नई: श्री एस एस जैन संघ के तत्वावधान एवं स्वर्ण संयम आराधक पूज्य श्री वीरेंद्रमुनीजी म.सा. के तत्वावधान में दिव्य विभूति श्रमण सूर्य गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. की जन्म जयन्ती, लोकमान्य संत श्री रूपचंदजी म.सा. की जन्म व पुण्यतिथी एवं मेवाड़ भूषण श्री प्रतापमलजी म.सा. का स्मरण दिवस रविवार दिनाँक 27 अगस्त को त्रि दिवसीय कार्यक्रम के रूप में तप त्याग सामायिक तेले के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया। इसके पूर्व 25 अगस्त को सामूहिक दया व 26 अगस्त को नमोत्थुनम का जाप रखा गया। 27 अगस्त रविवारीय कार्यक्रम का प्रारंभ श्री वीरेन्द्र मुनीजी म.सा. के मंगलाचरण से हुवा। श्री एस एस जैन महिला मंडल, श्री पारस नाहर,भटेवरा ने स्तवन द्वारा गुरू चरणों मे अपनी अभिव्यक्ति प्रेषित की। श्री वर्द्धमान...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान हैl वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैंl बंधुओं जैसे कि आज रक्षाबंधन पर्व पर विशेष रूप से भाई बहन का जोड़ा से जाप रखा एवं गूरुर्णि मैया के सानिध्य में जाप का आयोजन भी रखा गयाl सभी को गिफ्ट भी दिया गयाl वह आरती डेकोरेशन भी रखा गया राजस्थानी ड्रेस कंपइडएशन भी रखा बहुत सुन्दर प्रस्तुति थी फस्ट सेकंड प्राइज निकालाl गुरू भी मैया ने रक्षाबंधन पर्व पर विशेष रूप से समझाया एवं गीतिका के माध्यम से भी प्रस्तुति दीl भाई बहन का पर्व है इसलिए दिखावा नहीं करें व सुचारू रूप से रक्षाबंधन पर्व को मनाया जाएl जय जिनेंद्र, जय महावीर, कांता सिसोदिया, भायंदर
बिन्नी नोर्थटाउन सोसायटी में अष्टौषधि युक्त महाभिषेक का भव्य आयोजन श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में आचार्य श्री वर्धमानसागरसूरिजी आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी के सान्निध्य में नेमीनाथ भगवान का विधि विधान युक्त संगीतमय अष्टौषधि से महाभिषेक बड़े धाम धूम के साथ संपन्न हुआ. महा अभिषेक का संपूर्ण लाभ ममताजी रितेश मोदी परिवार ने लिया। सर्वप्रथम कलश एवं शांति धारा करने का सौभाग्य मोदी परिवार को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात सैकड़ों लोगों ने अभिषेक के साथ भक्ति में पूजन कर परमात्मा के चरणों में जन्म कल्याणक का श्रीफल समर्पण किया तथा सभी ने पूजन कर अपने आपको धन्य माना। अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा एक से बढ़कर एक भजनों की दी गई मन भावन प्रस्तुतियों पर जिनेन्द्र भक्त भक्तिरस में खूब झूमे। इससे वातावरण भक्तिमय हो गया। महाअर्घ्य समर्पण, शांतिपाठ एवं विसर्जन विधि के साथ पूजन सम्पन्न हुई। इसके उपरांत...
सौभाग्य प्रकाश संयम सवर्णोत्सव चातुर्मास खाचरोद गुरुदेव श्री सोभग्यमल जी महारासा के लिये फरमाते है कि… *प्रखर पुण्य संयुक्तम्, महाव्रती जितेन्द्रियम् । प्रियवक्ता स्वभावेन, श्री सौभाग्य गुरुवे नमः ॥१॥* पुज्य पर्वतक श्री प्रकाश मुनि जी मा.सा. – ने फरमाया कि.. प्रखर पुण्य के धनी थे-वह पुण्य तेज होता है पुण्य – जो 8 *ज्ञानी, ऐश्वर्य, धनवान, जाति, बल, तेजस्वीता, बुद्धि, ख्याति* इनसे जो पूर्ण है बातों से पूर्ण हो वह प्रखर पुण्य – बल- *मुट्ठी से पापड़ तोडु पटके तोड़ू सुत,* *पटीये से नीचे कूद पडु तो जावण जाओ पुत।।* ऐसे हम बलशाली है। बल हे कहाँ, खाने का शोक पुरा करलो ताकत हे कहाँ, जो तुमको करना हो वो कर के रहते हो। परमात्मा कहते- किस बल प्राण का उपयोग नहीं करते तो वह वापस मिलना मुश्किल है, आँखो से सज्जनों को नही देखा, गुणो को नहीं देखा, दुर्गंध से घृणा करते रहे रहे तो नाक मिल...
हमारे भाईन्दर में विराजीत उपप्रवृत्तिनि संथारा प्रेरिका सत्य साधना ज गुरुणी मैया आदि ठाणा 7 साता पूर्वक विराजमान है। वह रोज हमें प्रवचन के माध्यम से नित नयी वाणी सुनाते हैं, वह इस प्रकार हैं। बंधुओं जैसे कि सुखी जीवन के पांच मंत्र आखिर इंसान को अपने हर नए दिन की शुरुआत किसी कार्य से ही करता है क्या हम यह देखने और सोने का कष्ट करें कि वह कार्य और कैसा है। हमारे उसे कार्य की शुरुआत इस पूर्ति हृदय के साथ हो रही है या अभिमान के साथ हम विश्वास और निष्ठा के साथ कार्य के प्रति मुक्त हो रहे हैं। परमात्मा और असफल भावना के साथ वह व्यक्ति अपने किसी भी कार्य को व्यर्थ ना समझे दुनिया का हर कार्य अपने आप में श्रेष्ठ होता हैl महत्व इसी बात का है कि हम उसे कि होश आवाज के साथ शुरू और पूरा करें। सैलाब कई व्यक्ति की एक छोटी सी कल्पना किसी नए अविष्कार का सूत्रधार बन जाया करती है। उसका छोटा सा नजर आने वाला चि...
स्थल: श्री राजेन्द्र भवन चेन्नई विश्व पूजनीय प्रभु श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहब के प्रशिष्यरत्न राष्ट्रसंत, दीक्षा दानेश्वरी श्रीमद् विजय जयंतसेनसुरीश्वरजी म.सा.के कृपापात्र सुशिष्यरत्न श्रुतप्रभावक मुनिप्रवर श्री डॉ. वैभवरत्नविजयजी म.सा. के प्रवचन के अंश 🪔 *विषय अभिधान राजेंद्र कोष भाग7*🪔 ~ जहां देव, गुरु, धर्म के प्रति श्रद्धा विश्वास स्थिर है अचल है वह साधक के जीवन में धर्म के लिए सर्वस्व स्वीकार करना अत्यंत सरल है ही। ~ दिव्या तत्व से जो जुड़ता है वह हर पल स्वयं की दिव्यता का अनुभव कर ही सकता है और दिव्य ऊर्जा के बल से अनंत कर्मों का क्षय करता ही है। ~ जो साधक की श्रद्धा स्थिर, गहरी, मजबूत है वह अन्य दर्शन, देवी देवता के कोई भी कैसे भी चमत्कार देखकर मोहित नहीं ही होता। ~ जब तक गुरु तत्व के प्रति समर्पण और बहूमान भाव नहीं होगा तब तक गुरुदेव की आज्ञा के पालन का भ...
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली अध्यक्ष: विजयराज चुत्तर मंत्री: हस्तीमल बाफना श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में दिव्य विभूति मरुधर केसरी परम पूज्य मिश्रीमलजी म.सा. एवं शेरे राजस्थान वरिष्ठ प्रवर्तक परम पूज्य रूपचंदजी म.सा.दोनों की जन्म जयंती बड़े ही हर्षोल्लास से मनाई गई। 80 एकाशन के प्रत्याख्याण हुए। कर्नाटक तप चंद्रिका प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने दोनों महापुरुषों के जीवन के बारे में बताया। जब वे धरती पर अवतरित होते हैं वे तीन गुणो को लेकर आते हैं। प्रकाश को फैलाते हैं। सारा विश्व हरा-भरा कर देते हैं। भवी जीवो को ठंडक पहुंचा देते। इन दोनों महापुरुषों का श्रमण संघ के लिए संपूर्ण योगदान रहा। प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने निर्जरा भावना के बारे में बताया। हमें तप स्वाध्याय करते हुए कर्मों की निर्जरा करना है। अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने स्वागत किया। संचालन सुधीर सिंघवी...
स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में भावी आचार्य पूज्यश्री महेन्द्रमुनिजी म.सा का 70 वां जन्म दिवस स्वाध्याय दिवस के रुप में मनाया गया | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के तत्वावधान में महान अध्ययवसायी भावी आचार्यश्री महेन्द्रमुनिजी म.सा का 70 वां जन्म दिवस स्वाध्याय दिवस के रुप मे स्वाध्याय भवन में मनाया गया | वरिष्ठ स्वाध्यायी वीरेन्द्रजी कांकरिया ने समकित का संग मुक्ति का रंग का विस्तृत विवेचन किया | स्वाध्यायी गौतमचंदजी मुणोत,दीपकजी श्रीश्रीमाल व योगेशजी श्रीश्रीमाल ने सामूहिक रुप से गुरु महेन्द्र चालीसा के पाठ से स्तुति की | श्रावक संघ, तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने गुरु महेन्द्र सवैया से स्तुति करते हुए भावी आचार्यश्री के जन्म से संयम अंगीकार करने व संयममय जीवन गुरु सन्निधि का चित्रण व अनेक संस्मरणों को धर्मसभा में रखा | उन्होंने,उत्तराध्ययन सूत्र के प...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हरेक इंसान की कोशिश होती है कि उसका अपना घर हो। एक पिता अपने परिवार को बढ़ाता है और अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा के लिए काम करता है। वह जानता है कि उसके परिवार और संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक घर का होना बहुत जरूरी है। वहां सिक्यॉरिटी के साधन लगवाता है। आज के जमाने में सुरक्षा अलार्म भी लगाए जाते हैं ताकि चोरों को घर में घुसने से रोका जा सके। आचार्य श्री ने आगे समझाते हुआ कहा कि जैसे हम चोरों से अपने घर को सुरक्षित रखना चाहते हैं, ठीक उसी प्रकार अपनी आत्मा की भी सुरक्षा करनी चाहिए। अनजाने में हम चोरों को अपने भीतर घुसने देते हैं और वे हमारे भीतर आकर तबाही मचा देते हैं। ये चोर हैं- काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार। ये चोर जब हमारे अंदर अपना अधिकार जमा लेते हैं, ...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन जैन संघ में धर्म प्रवचन देते हुए आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि अतीत का भय और भविष्य की चिंता व्यक्ति को इतना परेशान कर देती है कि वह चैन से जी नहीं पाता है। कभी-कभी तो वह अपना मानसिक संतुलन तक खो बैठता है। यह नहीं भूलना चाहिए कि अपराध और चिंता मनुष्य की प्राकृतिक भावनाएं हैं, लेकिन इनसे ग्रस्त हो जाना अथवा यह सोच लेना कि इनसे छुटकारा मिलना बहुत मुश्किल है, यह ठीक नहीं है। इसी सोच का परिणाम और प्रभाव व्यक्ति के मन-मस्तिष्क को अस्थिर बनाये रखता है। इसके लिए मनुष्य को अपने सोच की सीमा का विस्तार करना चाहिए। ऐसा होने पर ही वह अपना सुस्पष्ट दृष्टिकोण बनाने में समर्थ हो सकता है। अतीत में क्या- क्या उसके साथ घटा था, इस ओर उसका चिंतन कभी नहीं होना चाहिए, क्योंकि मनुष्य अच्छा अथवा बुरा, जो भी घट चुका होता था, उससे सीख लेकर ही अपना वर्तमान जी रहा होता है। ऐसे में...
साध्वी पूनमश्री जी ने आध्यात्मिकता के क्षेत्र में धैर्य और प्रार्थना की उपयोगिता बताई शिवपुरी। सामान्य तौर पर ध्यान शब्द जीवन में समाधि और समता को व्यक्त करता है, लेकिन भगवान महावीर ने चार प्रकार के ध्यान बताए हैं जिनमें दो अशुभ और दो शुभ ध्यान हैं। वास्तव में किन्हीं भी शुभ और अशुभ परिणामों की एकाग्रता का हो जाना ध्यान है। जहां तक अशुभ ध्यान आर्त और रौद्र ध्यान का सवाल है तो इन ध्यानों से हटकर धर्म ध्यान की यात्रा करना जैन दर्शन में तप की श्रेणी में आता है। उक्त प्रेरणास्पद उद्गार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कमला भवन में आयोजित एक विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्मसभा में तपस्वी साध्वी पूनमश्री जी ने आध्यात्मिक क्षेत्र में धैर्य और प्रार्थना के महत्व से उपस्थित श्रोताओं को अवगत कराया। धर्म सभा के प्रारंभ में साध्वी जयश्री जी और साध्वी वंदनाश्री जी ने सुंदर भजन का गायन कर माहौ...
यस यस जैन संघ नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि “आत्मबन्धुओ, जैन व जैनत्व नाम से नही जन्म से नही कर्म से कहलाता है परन्तु वर्तमान में ऐसा माना जाता है कि जैन कुल में जन्म ले लिया तो जैन बन गये। परन्तु भगवान फरमाते है कि जब तक जीवन में जैनत्व नहीं आयेगा तब तक कोई जैन नही कहलायेगा । नामे के आगे जैन लिखने से व्यक्ति मोक्ष में नहीं जा सकता। भगवान कहते है कि आचरण में जैनत्व झलकना आवश्यक है फिर वो किसी भी कुल का हो यदि उसके आचरण में जैनत्व है तो वह मात्र जैन ही नही सिद्ध भी बन सकता। आगमों को ग्रथित करने वाले गणधर जाति के ब्राह्मण थे जो प्रभु का मान मर्दन करने आये थे लेकिन प्रभु के चरणो में नतमस्तक हो भगवान की शरण में आ गये और भगवान की वाणी को सूत्रों में गूंथ कर दिये उन गणधरों का पुरुषार्थ हम पर उपकार बन गया। आज उनकी वजह से जैन धर्म सुरक्षित...