यदि परिस्थितियों के अनुसार आप खुद को ढालना जान गए तो परेशानी कभी हावी नहीं होती, पर यह बात जितनी सरल लगती है, इंसान उतनी ही सहजता से इस बात को नहीं समझ पाता। समझ भी जाए तो अमल में नहीं ला पाता। उपरोक्त बातें श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में प्रवचन देते हुए आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कही। वे आगे बोले कि दरअसल, लचीलापन मनोवैज्ञानिक भाषा में किसी समस्या के आने पर उससे निकलने का तरीका है। हमें समझना होगा कि हर चीज केवल काली या सफेद नहीं होती। इसके बीच एक स्लेटी रंग भी होता है। सौ प्रतिशत आपको ऐसा ही रहना है या अपना तरीका ही ठीक है, यह मानसिकता समस्या से निपटने में मदद नहीं कर सकती। इसलिए कहा जाता है कि लचीले हों तो बुरा समय आपका ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सकता। कहते हैं न कि तूफान तेज हो तो जो पेड़ सीधा तना हुआ रहता है, उसके उखड़ने का डर रहता है। पेड़ लचीला हो त...
प्रतीक्षा ने प्रशस्त किया संयम का पथ, बनेंगीं साध्वी… 7 अक्टूबर को लालगंगा पटवा भवन में आज्ञा पत्र समारोह Sagevaani.com @रायपुर (वी। संयम के मार्ग पर चलने की कोई उम्र नहीं, कोई सीमा नहीं है। जब भाव जग जाते हैं, तो मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाता है। ऐसा ही रायपुर की प्रतीक्षा भंडारी के साथ हुआ। संतों की सेवा में, उनकी सद्गति में रहते भाव जगे, दीक्षा का मन बना और परिवार वालों ने अपना आशीर्वाद प्रदान कर दिया। 7 अक्टूबर को लालगंगा पटवा भवन में मुमुक्षु प्रतीक्षा भंडारी के परिजन अपने स्नेहीजनों के साथ अनुमति पत्र प्रदान करेंगे। रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताय कि वैशाली भंडारी एवं सुशील कुमार भंडारी की सुपुत्री व अष्टमंगल की ट्रेनर प्रतीक्षा भंडारी ने तीर्थेश ऋषि की गुरुनि मैया साध्वी सुनंदजी मासा के चरणों में सेवा करते हुए दीक्षा लेने का भाव प्रकट किया था। उनके परिजनों ने उन्हे...
नार्थ टाउन के ए यम के यम स्थानक में गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्म बंधुओ, धर्म तीर्थ तारने वाला है। इस तीर्थ में सम्मिलित प्रत्येक जीव निश्चित रूप से भव सागर से तिरेगा। हर हाल में प्राणी की रक्षा का, किसी को किसी प्रकार से कष्ट न देने का निर्देश इस धर्म तीर्थ में दिया गया है। श्रावक, श्राविका, साधु और साध्वी चारों इस तीर्थ का अंग है जो निश्चित रूप से तिरेंगे। ऐसे धर्म में जन्म के लिए प्रबल पुण्यवाणी की आवश्यकता होती है। जन्म होने के बाद ऐसे धर्म का पालन करने के लिए साम्थर्य आवश्यक है। साम्थर्य के अनुसार अपने व्रत का पालन करने का निर्देश तीर्थकंर भगवान ने दिया। जिसमे स्वयं अपनी इच्छानुसार मर्यादा कर धर्म पालन कर सकते है। अणुव्रत धारण करने से ही व्यक्ति श्रावक-श्राविका की गिनती में आ सकता है। जिनशासन का जो सदस्य बन गया उसकी दुर्गति अवश्य टल जाती है व्रत भंग करने वाले की ग...
अगले सप्ताह होगी 61 लोगों की होगी सर्जरी राजस्थान यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) कॉस्मो फाउंडेशन के तत्वावधान में मेडीबैंक परियोजना के अंतर्गत चेन्नई मेट्रो महावीर के सहयोग से बादलचंद सुगनकंवर चोरड़िया नेत्र जांच शिविर कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को शांतिदेवी जवाहरमल चंदन डे केयर एंड डायग्नोसिस सेंटर में निःशुल्क मासिक नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में पम्मल स्थित संकरा आई हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने 94 लोगों की आंखों की जांच की, जिनमें 61 लोगों की आंखों में मोतियाबिंद पाए जाने के कारण उनकी सर्जरी अगले सप्ताह में की जाएगी। पांच लोगों की आंखें कमजोर पाई जाने के कारण उन्हें चश्मे तैयार कर दिए जाएंगे। यह शिविर सुशीलाबाई महावीरचंद मरलेचा परिवार के आर्थिक सौजन्य से आयोजित हुआ। शिविर में चेन्नई मेट्रो महावीर के चेयरमैन मंगल चंद तातेड़, आरवाईए काॅस्मो फाउंडेशन के प्रबंध न्यासी अभय लोढ़ा, काॅस्मो ...
Sagevaani.com @चैन्नई। आत्मा की सच्चाई और कर्मो के सिध्दांतो को जानकर जो मनुष्य विवेक पूर्वक जीवन यापन करता है.और पाप कर्मो के बंधन नहीं करेगा तो वह अपने पूर्व मे बंधे अशुम कर्मो को घटा कर पुण्य के संचय द्वारा अपनी आत्मा को पवित्र और मोक्ष दिलवा सकता हैं।शुक्रवार साहूकार पेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने श्रध्दांलूओ और एकासन तप करने वालों को सम्बोधित करतें हुए कहा कि संसार के प्रत्येक प्राणी को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है।यह कर्म किसी को भी नहीं छोड़तें है भोगने पर ही छुटते है। इन कर्मो ने तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी,भगवान राम वासुदेव श्रीकृष्ण को नहीं बक्षा फिर हमारे जैसे साधारण मनुष्य की क्या औकात है जो अशुम कर्म करने के बाद भी बच जाऐगा। कर्म हमारे परछाई की तरह है जिसे हम चाहकर भी अलग नहीं कर सकते, ठीक उसी प्रकार हमारे द्वारा किए गए कर्म भी हमारा पीछा नहीं छोड़ते। कितने ही छिपक...
Sagevaani.com @चैन्नई। संसार में रहकर भी पुरूषार्थ और यश अर्जित नहीं किया वह व्यक्ति मरे हुए के समान है। गुरूवार को जैन भवन के मरूधर केसरी दरबार मे महासती धर्मप्रभा ने श्रध्दांलूओ को धर्म उपदेश प्रदान करतें हुए कहा कि पुरूषार्थी व्यक्ति ही जीवन मे यश अर्जित करता है। वह स्वयं को ही नहीं अपितु अपने परिवार,समाज अथवा देश को गौरवान्वित करता है। भाग्य के भरोसे बैठे रहने से जीवन मे सफलता प्राप्त नहीं होती है,और नाहि वो अपने भाग्य को बदल सकता है। समय बड़ा अनमोल है एक बार हाथ से निकल गया तो दुबारा से समय को नहीं पकड़ सकते है। अंत समय मे र्सिफ पश्चाताप के अलावा कुछ नहीं बचने वाला है। इन सांसो के थम ने और इस शरीर को छोड़कर जाने पहले व्यक्ति चैत जाता है और पुरूषार्थ पुण्य का संचय कर लेता है तो वह संसार में अपनी यश किर्ती को बढ़ा सकता है और अपनी आत्मा को सदगिती दिला सकता है। इस दौरान साध्वी धर्मप्रभा एवं स...
Sagevaani.com @ चैन्नई। साधनों से नही साधना से आत्मा को मुक्ति मिलती है। बुधवार साहूकार पेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करतें हुए कहा कि मौत से बचना है तो आत्मा को जन्म- मरण से मुक्त करवाने पर ही आत्मा को संसार से मुक्ति मिल सकती है। मौत टलने वाली नहीं है क्योंकि प्रकृति और संसार का नियम है जो जीव संसार मे जन्म लेता है उसकी मृत्यु जन्म पर ही निधारित हो जाती है इस दुनिया ऐसा कौई जीव जन्मा नहीं जिसने जन्म लेने के बाद मृत्यु ना आई है। इंसान लाख जतन करले और कितना भी प्रत्यन करले फिर भी वह मौत पर विजय नहीं प्राप्त कर सकता है क्योंकि शरीर नश्वर है इस सत्य जो व्यक्ति स्वीकार लेता है वह मौत के आने पर भी मौत से डरेगा नही और नाहि भयभीत रहेगा। साधना ही वो मार्ग जिससे मनुष्य अपनी आत्मा को पहचान कर संसार मे आत्मा के जन्म और मृत्यु से मुक्त करवा सकता हैl साध्वी स्नेहप्रभा ...
Sagevaani.com @चेन्नई : अणुवीभा के तत्वावधान में अणुव्रत समिति, चेन्नई द्वारा अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के पाँचवे दिन नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम थिरुथांगल नाडार कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच मनाया गया। मुख्य व्यक्ता श्री सज्जन सिंह जैन ने विद्यार्थियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में सफल बनने के लिए जरूरी है प्रसन्न रहना। प्रसन्न रहने के लिए हमारी जीवन शैली सादगी, स्वच्छ होनी चाहिए। स्वच्छ रहने के लिए जरूरी है हमारा खान-पान, हमारा व्यवहार पवित्र होना चाहिए। नशामुक्त, शाकाहारी भोजन का सेवन करना चाहिए। श्री जैन ने विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों को भी कहा कि नशा मुक्त रहने से हमारा व्यक्तित्व सुन्दर बनता है। नशामुक्त विद्यार्थी की स्मरणशक्ति तेज होती है, उसमें सिखने की, ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती हैं, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है, उसका स्वास्थ्य ठीक रहता है, उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत ...
श्री सुमति वल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में धर्म प्रवचन देते हुए आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि आलस्य हमारे जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है जो हमें अंदर ही अंदर मारता है । हर आलसी मनुष्य चाहता है कि उसको अन्य लोगों के मुकाबले ज्यादा सफलता मिले परन्तु आलसी मनुष्य को सफलता कभी भी नही मिलती है । इसका कारण यह है कि आलसी लोग हमेशा आलस्य भरी जिंदगी जीते हैं जिसके कारण वह दूसरे लोगों से पीछे रहते हैं और किसी महापुरुष ने भी कहा है कि पीछे रहने वाले लोग उतना ही ले पाते हैं जितना उनसे आगे रहने वाले लोग उनके लिए छोड़ जाते हैं । इस पंक्ति में आगे रहने वाले लोगों का मतलब है वो लोग जो आलस्य से कोसौं दूर रहते हैं और जो लोग मेहनत और परिश्रम करके अपनी मंज़िल तक पहुँचने का मार्ग स्वयं बनाते हैं । आलसी होने के कारण मनुष्य को किसी काम में रुचि नही रहती , सवेरे उठा नही जाता , हमेशा सोने का मन...
जैन साध्वियों ने बताया पाप करनेे में अच्छा लगता है लेेकिन उसके फल से भगवान भी आपको नहींं बचा सकते Sagevaani.com @शिवपुरी। कमला भवन में चार्तुमास कर रहीं प्रसिद्ध जैन साध्वी रमणीक कुंवर जी,ओजस्वी प्रवचन प्रभाविका साध्वी नूूतन प्रभा श्रीजी, तपस्वी रत्ना साध्वी पूूनम श्रीजी और मधुर गायिका साध्वी जय श्रीजी और साध्वी बन्दना श्रीजी के प्रवचनों की धूम मची हुई हैे। प्रवचन में साध्वी बन्दना श्रीजी जहांं श्रावकोंं के 21 गुणों पर विस्तार से प्रकाश डाल रहीं है वहीं साध्वी नूतन प्रभा श्रीजी 18 पापों से बचने के उपाय बता रहीं हैं। गुरुणी मैया साध्वी रमणीक कुंवर जी अनसुलझे तथ्यों को बखूबी स्पष्ट कर रहीं है। वहीं अपने मधुर भजनों से साध्वियों के प्रवचनों में रौनक लाने का काम साध्वी जय श्रीजी और साध्वी बन्दना श्रीजी कर रहींं हैं। वहीं साध्वी पूनम श्रीजी की तपस्या की धूम से पूरा समाज प्रभावित है। गुरु वार को ...
किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा. ने प्रवचन में कहा कि पानी बरसने के अनेक कारण हैं जैसे कि वनस्पतिकाय भी बारिश के पानी को आकर्षित करता है। जहां जलयोनि नहीं होती है, वहां बादल बिना बरसे चले जाते हैं। वहां कोई सहयोग करने वाला नहीं है। वायु को जलयोनि कहा गया है। ज्ञानियों ने विज्ञान और धर्म की तुलना करने की कोशिश की है। जीव और पुद्गल मिलकर पानी का रूप बनते हैं। हमारा शरीर आत्मा के साथ जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे चेतन कहते हैं। वैसे ही पानी के जीव पुद्गल और जीव दोनों मिलकर बनते हैं। गुरुदेव ने कहा जहां क्षेत्रपाल प्रसन्न रहते हैं, वहां बारिश अच्छी होती है। जहां पर बारिश के बादल का वायुकाय को स्थिर करने का काम होता हैं, वहां पानी ज्यादा बरसता है। आचार्यश्री ने आगे कहा देवलोक के देव मानवलोक में ...
नार्थ टाउन में ए यम के यम स्थानक में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि संसार में धर्म ही एक ऐसा साधन है जो सबके लिए हितकारी व मंगलकारी है। संसार में रहते हुए भी धर्म में प्रवृत्ति करनी चाहिए। मर्यादा धर्म का पालन करो जिससे सागर जितना पाप तालाब जितना सीमित हो जाता है। श्रावक के 12 व्रत श्रावक को इतना पाप प्रवृत्ति में सीमित कर देते है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। सागर को पानी से रिक्त नही किया जा सकता पर तालाब को पुरुषार्थ से सुखाया जा सकता। उसी प्रकार मर्यादित पाप करने वाला उन पापों को आसानी से धो सकता है कर्म क्षय भी सरल हो जाता है। इसलिए भगवान ने ऐसे धर्म का निरूपण किया जिससे श्रावक-श्राविका भी कर्म क्षय कर भव सागर से तिर सकते हैं। और जीव इह भव तथा परभव दोनो में सुख पाता है। निकाचित कर्मों से बचाने के लिए अनुकम्पा की दृष्टि से जिनेश्वर भगवान ने श्राव...