Sagevaani.com @चैन्नई। आत्मा की सच्चाई और कर्मो के सिध्दांतो को जानकर जो मनुष्य विवेक पूर्वक जीवन यापन करता है.और पाप कर्मो के बंधन नहीं करेगा तो वह अपने पूर्व मे बंधे अशुम कर्मो को घटा कर पुण्य के संचय द्वारा अपनी आत्मा को पवित्र और मोक्ष दिलवा सकता हैं।शुक्रवार साहूकार पेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने श्रध्दांलूओ और एकासन तप करने वालों को सम्बोधित करतें हुए कहा कि संसार के प्रत्येक प्राणी को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है।यह कर्म किसी को भी नहीं छोड़तें है भोगने पर ही छुटते है।
इन कर्मो ने तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी,भगवान राम वासुदेव श्रीकृष्ण को नहीं बक्षा फिर हमारे जैसे साधारण मनुष्य की क्या औकात है जो अशुम कर्म करने के बाद भी बच जाऐगा। कर्म हमारे परछाई की तरह है जिसे हम चाहकर भी अलग नहीं कर सकते, ठीक उसी प्रकार हमारे द्वारा किए गए कर्म भी हमारा पीछा नहीं छोड़ते। कितने ही छिपकर कर्म किए जाएं, उन्हें भुगतना ही पड़ता है। कर्म ही सृष्टि का आधार है। चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक, उस कर्म का फल तो उसे भोगना ही पड़ता है। साध्वी स्नेहप्रभा ने उत्ताराध्यय सूत्र का वांचन करतें हुए कहा कि एक छोटा सा अशुम कर्म आत्मा की गति को बिगाड़ देता है और दुर्गति करवा देता है। कर्म हमारे अच्छे है तो दुनिया की कौई भी ताकत हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती है और कर्म हमारे खराब है तो भगवान भी हमे नहीं बचा सकता है।
साहूकार पेट श्री एस.एस.जैन संघ के कार्याध्यक्ष महावीर चन्द सिसोदिया ने जानकारी देतें हुए बताया धर्मसभा मे एक सौ अस्सी से अधिक बहनों ने सामूहिक रूप से एकासन व्रत तप के साध्वी वृंद से प्रत्याख्यान लिए और तपस्वी बहनों के एकासन व्रत करने पर श्रीसंघ के महामंत्री सज्जनराज सुराणा, हस्तीमल खटोड़, सुरेश डूगरवाल, शम्भूसिंह कावड़िया, अशोक सिसोदिया, सुभाष काकलिया, ज्ञानचन्द चौरड़िया, शांतिलाल दरड़ा आदि सभी ने अनूमोदना करते हुए सभी बहनों को एक साथ एकासना करवाया। दिनांक 14 और 15 अक्टूबर को साहूकार पेट श्री संघ के तत्वावधान भारतीय जैन संघठन द्वारा के साध्वी धर्मप्रभा के सानिध्य में बालिकाओं को आत्म निर्भर बनाने किए दो दिवसीय स्मार्ट गर्ल प्रोग्राम रखा गया है।
प्रवक्ता सुनिल चपलोत
श्री एस.एस. जैन संघ, साहूकार पेट जैन भवन, चैन्नई