दिवाकर भवन पर चातुर्मास हेतु विराजित तत्वचिंतिका महासती श्री कल्पदर्शनाजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि समझदारी के अभाव में विवाद होता है जिसे कुछ भी पाना है उसे सिर पर बैठकर प्राप्त नहीं होने वाला पाने के लिए विनय पूर्वक चरणों में बैठकर ही प्राप्ति की जा सकती है। तीर्थंकर भगवानों का ज्ञान केवल ज्ञानियों का ज्ञान के आगे हमारा ज्ञान कुछ भी नहीं है उसके बावजूद थोड़ा सा ज्ञान पाकर ही व्यक्ति अपने आप को ज्ञानी समझने लगता है जब तक मानव के जीवन में विनम्रता नहीं होगी वह महान नहीं बन सकता अभिमानी व्यक्ति का पतन निश्चित है।
जिनशासन चंद्रिका मालव गौरव पूज्य महासती श्री प्रियदर्शना जी ने सुख विपाक सूत्र का विवेचन कर विभिन्न दृष्टांत के माध्यम से समझाया। प्रतिदिन भक्तांबर अनुष्ठान दिवाकर भवन पर लगातार चल रहा है जिसमें सभी श्वेतांबर संप्रदाय के अनुयाई धर्म लाभ ले रहे हैं उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल दुकड़िया एवं कार्यवाहक अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि श्रीमति उषाजी कोचट्टा ने 20 उपवास एवं सुशील मेहता ने चार उपवास के प्रत्याख्यान लिये। बेले एवं आयम्बिल की लडी निरंतर गतिमान है।
गुरु आनंद जन्म जयंती सप्ताह विभिन्न धार्मिक गतिविधियों एवं धार्मिक आयोजनों के साथ संपन्न हुआ जिसमें भाग लेने वाले सभी प्रतियोगिओं को विभिन्न पुरस्कारों एवं प्रोत्साहन पुरस्कारों एवं लकी ड्रा के द्वारा सम्मानित किया गया। प्रतिदिन पूज्य महासती जी के ओजस्वी प्रवचन दिवाकर भवन पर चल रहे हैं सभी नवकार मंत्र आराधको से निवेदन है कि अधिक से अधिक जिनवाणी श्रवण कर पुण्यार्जन करने की अपील श्रीसंघ उपाध्यक्ष पवन संघवी, कनकमल चोरड़िया, विनोद ओस्तवाल, सुशील मेहता, कमलेश कटारिया, महामंत्री महावीर छाजेड़ सहमंत्री चिंतन टुकड़िया एवं कोषाध्यक्ष विजय कोचट्टा, तरुण खारीवाल ने की है। धर्मसभा का सफल संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया।