जीवन विज्ञान व्यक्ति के सर्वागीण विकास का अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का सातवाँ दिन Sagevaani.com @चेन्नई : अणुविभा के तत्वावधान में अणुव्रत समिति, चेन्नई की आयोजना में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अन्तर्गत सातवाँ दिवस जीवन विज्ञान दिवस के रूप में साध्वी लावण्यश्री के सान्निध्य में तेरापंथ भवन, साहूकारपेट में मनाया गया। ◆ सम्यग् जीवन जीने की कला सिखाता जीवन विज्ञान साध्वीश्रीजी के नमस्कार महामंत्र के स्मरण के साथ कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। साध्वीश्रीजी ने कहा कि अणुव्रत जहां सैद्धांतिक मार्ग बताता है, वहीं जीवन विज्ञान प्रायोगिक रास्ता बताता है। जीवन विज्ञान व्यक्ति के सर्वागीण विकास का सशक्त माध्यम बनता है। साध्वीश्रीजी ने विशेष पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि पिछले एक सप्ताह से विभिन्न विषयों के साथ अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह मनाया। अपने आप को संयमित करने के लिए संकल्पित होना जरूरी है और फिर जीवन आचरण मे...
आज अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत जीवन विज्ञान दिवस शासन श्री साध्वी श्रीशिवमाला जी ठाणा 4 के सान्निध्य में मनाया गया।आज के मुख्य वक्ता श्री राकेश खटेड़ ने अपने वक्तव्य में किसी भी कार्य को संकल्प पूर्वक करने की प्रेरणा दी। संकल्प शक्ति से अवचेतन मन चेतन मन और अचेतन मन की त्रिपदी से कार्य की सफलता सुगम हो जाती है।आपने आचार्य श्री तुलसी एवं आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के इस महत्वपूर्ण अवदान को जीवन निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया। इससे नयी पीढ़ी तो संस्कारी होगी,पर यह आबाल- वृद्ध, हर उम्र के लिए भी उतनी ही उपयोगी है। जीवन विज्ञान कोई भी उम्र से शुरू किया जा सकते है।तत्पश्चात साध्वी श्री अमितरेखा जी ने इस विषय पर अपना सारगर्भित वक्तव्य दिया।अंत में साध्वी श्री शासन श्री साध्वी श्री शिवमालाजी ने प्रेरणा पाथेय फरमाते हुए अणुव्रत एवं जीवन विज्ञान को एक दूसरे का पूरक बताया। साध्वी श्री जी ने संस...
श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में प्रवचन देते हुए पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने कहा कि इंसान की सफलता में भाग्य उसका साथी है, लेकिन भाग्य ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि इंसान के कर्म ही भाग्य की रचना करते हैं, इसलिए हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए, तभी भाग्य का साथ मिलता है। कर्म और भाग्य दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। कर्म किए बगैर भाग्य नहीं फलता और भाग्य के बगैर कर्म की कोई गति नहीं है। यदि मनुष्य के कर्म अच्छे हैं, तो भाग्य उससे विमुख नहीं हो सकता। इसके विपरीत भाग्य बलवान है और कर्म अनुकूल नहीं है, तो भाग्य भी उसका अधिक साथ नहीं देता। आचार्य श्री के अनुसार कुछ लोग कहते हैं कि जब भाग्य ही सब कुछ है, तो मेहनत करना बेकार है। वहीं अगर भाग्य में ये लिखा हो कि कोशिश करने पर ही मिलेगा, तब क्या करोगे? सिर्फ भाग्य के भरोसे बैठे रहने वालों को कुछ नहीं मिलता, बल्कि जो क...
Sagevaani.com @कोयम्बटूर : भारतीय जैन संघटना तमिलनाडु के तत्वावधान में कोयम्बटूर चैप्टर द्वारा दिनांक 01 अक्टूबर 2023 को ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएट (21 से 35 वर्ष के) जैन युवक युवतियों के लिए एक्टिविटी पर आधारित विशेष परिचय सम्मेलन का सफलता पूर्वक सार्थकता के साथ समापन हुआ। इस सम्मेलन में 78 युवकों एवं 27 युवतियों ने पंजीकरण करवाया। बीजेएस के राष्ट्रीय, राज्य, कोयम्बटूर के पदाधिकारियों एवं जैन संघ से उपस्थित महानुभावों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कोयम्बटूर बीजेएस महिला विंग की सदस्यों द्वारा नमस्कार महामंत्र की गीतिका के रूप में मंगलाचारण प्रस्तुत किया गया। स्वागत के स्वर प्रस्तुत करते हुए बीजेएस कोयम्बटूर के अध्यक्ष धर्मेन्द्र श्रीश्रीमाल ने उपस्थित सभी का अपने शुभभावों की अभिव्यक्ति से स्वागत करते हुए कहा कि इस परिचय सम्मेलन के आयोजन में जैन समाज के सभी वर्गों ने...
मुख्य व्यक्ता प्रो. डॉ दिलीप धींग ने अनुशासन के चार स्तम्भों को किया रेखांकित अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का छठा दिन Sagevaani.com @चेन्नई: अणुवीभा के तत्वावधान में अणुव्रत समिति, चेन्नई की आयोजना में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अन्तर्गत छठा दिवस अनुशासन दिवस के रूप में साध्वी लावण्यश्री के सान्निध्य में तेरापंथ भवन, साहूकारपेट में मनाया गया। ◆ अनुशासन का बीज है विनय साध्वीश्रीजी के नमस्कार महामंत्र के स्मरण के साथ कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। मुख्य व्यक्ता प्रो. श्री दिलीप धींग ने कहा कि अनुशासन के चार स्तम्भ है- 1. नशामुक्ति, 2. विनय, 3. संयम और 4. मर्यादा। शराब मांसाहार इत्यादि नशे से व्यक्ति उच्छृंखल बन जाता है, अनुशासनहीन बन जाता है। चार बिन्दुओं- आत्मानुशासन, अनुशासन, प्रशासन, सुशासन पर बताते हुए कहा कि इनमें शासन शब्द सभी में समाहित है। अपने आप पर अनुशासन करने वाला ही दूसरों पर अनुशासन कर सकता...
अणुव्रत समिति और एलिफेंट गेट पुलिस स्टेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम Sagevaani.com @चेन्नई : अणुव्रत समिति, चेन्नई और C-2 एलीफेंट गेट पुलिस स्टेशन के सयुंक्त तत्वावधान में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अन्तर्गत छठा दिवस अनुशासन दिवस के रूप में मनाया गया। अणुव्रत समिति चेन्नई अध्यक्ष ललित आंचलिया, इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस लॉ एंड ऑर्डर श्री पुष्पराज, इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस ट्रैफिक श्री जाहिर हुसैन ने वाहन चालकों को रोककर वाहन चलाने के ट्रैफिक नियमों का पालन करने की प्रेरणा दी और संकल्पित कराया। अणुव्रत समिति द्वारा बिना हैलमेट वाले वाहन चालकों को हैलमेट भेज किये। मंत्री स्वरूप चन्द दाँती ने बताया कि इस कार्यक्रम की रुपरेखा में निर्मला छल्लाणी, वंसतराज छल्लाणी के साथ समिति सदस्यों का सराहनीय सहयोग रहा। यात्रियों को खाना भी खिलाया गया। अच्छी संख्या में पुलिस अधीक्षक, कर्मी, आम जनता उपस्थित रही। स...
धर्म सभा में साध्वी जी ने कहा- धर्म के प्रति अनुराग होना चाहिए राग नहीं Sagevaani.com @शिवपुरी। आज के समय में चारों तरफ धर्म का फैलाव नजर आता है, लेकिन इसके बाद भी लोग धार्मिक नहीं है और उनकी जीवन शैली में कोई बदलाव नजर नहीं आता तो इसका एक ही कारण है कि धर्म के स्थान पर हम सम्प्रदायवाद और गुरुवाद के कुचक्र में फंस गए हैं। धर्म के प्रति हमें अनुराग नहीं, बल्कि राग है और इसी कारण हम भगवान को भूलते जा रहे हैं। उक्त प्रेरणास्पद उद्गार प्रसिद्ध जैन साध्वी नूतन प्रभाश्री जी ने कमला भवन में आयोजित विशाल धर्मसभा में व्यक्त किए। धर्मसभा में साध्वी वंदनाश्री जी ने कहा कि जब इंसान विषय कषाय में फंस जाता है तो धर्म आराधना का उस पर कोई असर नहीं होता। धर्मसभा में बैंगलोर से पधारीं महिला मण्डल की श्राविकाओं ने जिन वाणी का लाभ लेकर गुरुणी मैया रमणीक कुंवर जी से आशीर्वाद ग्रहण किया। धर्मसभा में उज्जैन से ल...
किलपाॅक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी ने प्रवचन में कहा कि मुनि का अर्थ है मानना और समझना। मुनि जागते हुए अच्छे लगते हैं और अमुनि सोते हुए अच्छे लगते हैं। मुनि वह, जो संसार के स्वभाव को जानता और मानता है, जो परमात्मा की आज्ञा मानता और समझता है। मुनि संसार के राग- द्वेष के व्यवहार से रहित होते हैं, क्योंकि वे मानते और समझते हैं। संसार और काया को जो समझते हैं, वे आर्तध्यान, मिथ्यादृष्टि और अविरति की तरफ आकर्षित नहीं होते। शरीर व्याधियों का घर है, मन विचारों का घर है। जो शरीर और मन का स्वभाव समझ सकेंगे, आर्तध्यान, मिथ्यादृष्टि, अविरति आदि दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा स्वभाव को समझने वाला आत्मस्वभाव को शीघ्र पाता है और विभाव को समझने वाला विभाव में ही रहता है। आचार्यश्री ने कहा बालक जैसी सरलता गौतम स्वामी के जैसी और यौवन ...
लालगंगा पटवा भवन में परिजनों ने प्रवीण ऋषि को सौंपा आज्ञा पत्र Sagevaani.com @रायपुर (वीएनएस)। संतों के सानिध्य में कुछ लोगों को समस्या का समाधान मिलता है, लेकिन कुछ लोग भाग्यशाली होते हैं जिनका संयम का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। 25 वर्षीया प्रतीक्षा भंडारी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते करते वैराग जागृत हुआ, भाव बने और संयम के मार्ग पर चलने की भीष्म प्रतिज्ञा ले ली। 7 अक्टूबर को प्रतीक्षा भंडारी के परिजनों ने लालगंगा पटवा भवन में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि को आज्ञा पत्र सौंपकर अपनी पुत्री को साध्वी बनने की स्वीकृति दे दी। रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया शनिवार को लालगंगा पटवा भवन में एक और अनोखा नजारा देखने को मिला। जिनशासन के जयकारों के साथ लालगंगा पटवा भवन से मुमुक्षु प्रतीक्षा भंडारी का वरघोड़ा निकला। वरघोड़ा के साथ रायपुर श्रमण संघ के सदस्यों संग सकल जैन...
नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्मबन्धुओं, जिनेश्वर देव की आज्ञा में ही धर्म है। मात्र उनकी आज्ञा का पालन कर से धर्म सहज ही हो जाता है। धर्म ध्यान करते धर्म की रूप की परिभाषा स्वतः ही समझ आ जाती है धर्म की परिभाषा जानते हुए यदि प्रभु की आज्ञा को पालन नहीं किया तो उसका फल प्राप्त नहीं होता ।भगवान की आज्ञा पर तर्क-वितर्क मत करो। किसी भी देश में रह कर भी यदि प्रभु आज्ञा का पालन किया तो मुक्ति निश्चित है सर्वविरति वाले जीवन पर्यन्त के लिए धर्म ध्यान करते हैं देशविरति वाले अपनी अनुकूलता अनुसार धर्म ध्यान करते है पर दोनों ही मोक्ष मार्ग के अनुयायी है। कर्मों के पास लिहाज नही होता कर्म सभी को भोगने ही पड़ते है। ज्ञानीजन कहते है कि निरपराधी हिसां हो ऐसी झूठी गवाही नही देना। ज्ञानी जन कहते है एक एक बात को समझ कर इस धारण करने योग्य धारण करो और त्या...
Sagevaani.com @चैन्नई। समय की साधना जीवन और आत्मा की साधना है। शनिवार साहुकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने श्रोताओं को धर्म उपदेश प्रदान करतें हुए कहा कि खोई दौलत फिर से कमाई जा सकती है। पर खोया हुआ व्यक्ति का समय किसी प्रकार नहीं लौट सकता, उसके लिए केवल पश्चाताप ही शेष रह जाता है। जो मनुष्य समय का मूल्य समझता है वही समय का सदुपयोग करता हैं परन्तु अधिकांश लोग आलस्य और प्रमाद में पड़े हुए जीवन के बहुमूल्य क्षणों को यों ही बर्बाद और नष्ट कर देते है। इंसान के पास बेकार की बातों केलिए तो समय है पर साधना और आराधना के करने के लिए वक्त नहीं है समय के निकल जाने के बाद हांथ मलने के अलावा कुछ नहीं बचने वाला है संसार की सारी दौलत देने के बाद भी मनुष्य एक क्षण नहीं खरीद सकता है। जीवन व्यवस्था के लिए समय रूपी बहुमूल्य उपहार परमात्मा ने हमे यह शरीर दिया। इसका एक-एक क्षण एक-एक मोती के समान कीमती है...
प्रसिद्ध समाज सुधारक संत कबीर जी की पंक्ति हमारे आज के संत सामाज पर कुछ अपवादों को छोड़कर सही रुप से चरितार्थ होती है। मानव समाज के सार्वभौमिक कल्याण के मूल उद्देश्य से भटके हमारे संत आज स्व कल्याण के बजाय धनार्जन के कारोबार में लगे है। क्या पैसा ही सब कुछ है ? पैसा सब कुछ नहीं परंतु बहुत कुछ है। आज के इस भौतिकवाद के दौर में पैसा ही ईश्वर हैं । एक कहावत प्रचलित हैं। “बिना पैसे श्रावक की कीमत कौडी की एवं पैसे से साधु कि कीमत कौडी की।” क्या यह कहावत समयोचित है ? प्रथम पंक्ति बिन पैसे के श्रावक का मान कौडी का है। कोई बिन पैसे वाले श्रावक को नहीं पूछता है। चाहे वह कितना ही धार्मिक हो, सरल हो, दयालु हो,अनुकंपावान हो। नातेदार, रिश्तेदार दोस्त यहाँ तक की कुछ साधु वृन्द भी उनसे व्यवहार तो अलग बात करने के लिए भी तैयार नहीं हैं। इससे यह सिद्ध होता हैं कि कहावत सही है। दूसरी पंक्ति पैसा र...