Sagevaani.com @चैन्नई। समय की साधना जीवन और आत्मा की साधना है। शनिवार साहुकारपेट जैन भवन में महासती धर्मप्रभा ने श्रोताओं को धर्म उपदेश प्रदान करतें हुए कहा कि खोई दौलत फिर से कमाई जा सकती है। पर खोया हुआ व्यक्ति का समय किसी प्रकार नहीं लौट सकता, उसके लिए केवल पश्चाताप ही शेष रह जाता है। जो मनुष्य समय का मूल्य समझता है वही समय का सदुपयोग करता हैं परन्तु अधिकांश लोग आलस्य और प्रमाद में पड़े हुए जीवन के बहुमूल्य क्षणों को यों ही बर्बाद और नष्ट कर देते है।
इंसान के पास बेकार की बातों केलिए तो समय है पर साधना और आराधना के करने के लिए वक्त नहीं है समय के निकल जाने के बाद हांथ मलने के अलावा कुछ नहीं बचने वाला है संसार की सारी दौलत देने के बाद भी मनुष्य एक क्षण नहीं खरीद सकता है। जीवन व्यवस्था के लिए समय रूपी बहुमूल्य उपहार परमात्मा ने हमे यह शरीर दिया। इसका एक-एक क्षण एक-एक मोती के समान कीमती है जो इन्हें बटोरकर रखता है सदुपयोग करता है वह यहां सुख प्राप्त करता है। गंवाने वाले व्यक्ति के लिए वक्त ही मृत्यु है। वक्त के दुरुपयोग से जीवनी शक्ति का दुरुपयोग होता है और मनुष्य जल्दी ही काल के गाल में समा जाने वाला है।
संसार में मानव भव मिलना दुर्लभ है इसे यूही व्यर्थ ना गवाएं। दुबारा से मानव भव मिलना कठिन है।साध्धी स्नेहप्रभा उत्ताराध्यय अध्ययन सूत्र का वांचना करते हुए कहा कि संसार मे जब तक व्यक्ति जिंदा है और उसकी सांसे चल रही है तब तक ही घर और परिवार उसका है मरने के बाद न परिवार साथ जाने वाला है और नाहि धन दौलत साथ वो ले जा सकता है आत्मा संसार मे अकेले ही आई और अकेली है जाने वाली है समय रहते समय का सदउपयोग व्यक्ति कर लेता है तो वह अपनी इस आत्मा को संसार से मुक्ति दिलवा सकता है।
साहुकारपेट श्री संघ के कार्याध्यक्ष महावीर चन्द सिसोदिया ने बताया इसदौरान धर्मसभा मे सिरकाली हैदराबाद कृष्णा नगर श्री संघ के अध्यक्ष शांतिलाल गांधी, प्रकाश सहलोत, मनसुख गुंदेचा, राकेश नाहर आदि अतिथियों का श्री एस.एस.जैन संघ के मंत्री सज्जनराज सुराणा, महावीर चन्द कोठारी, शम्भूसिंह कावड़िया, पृथ्वी राज वाघरेचा, जंवरीलाल कटारिया, गौतम मूथा, उत्तम चन्द्र नाहर आदि सभी ने अतिथियों और तपस्या करने वाला का स्वागत किया।
प्रवक्ता सुनिल चपलोत
श्री एस.एस.जैन भवन साहुकारपेट चैन्नई